Month: February 2018
  • व्यक्तित्व सम्मोहक बनाने का तंत्र प्रयोग

    व्यक्तित्व सम्मोहक बनाने का तंत्र प्रयोग
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    व्यक्तित्व सम्मोहक बनाने में नवग्रह संतुलन की युक्ति सर्वाधिक कारगर होती है क्योंकि ग्रह ही सबसे अधिक प्रभावित करते हैं और इन्ही की रश्मियों के अनुसार व्यक्ति का सम्पूर्ण व्यक्तित्व निर्मित होता है |इन्हें यदि अपने जरूरत के अनुसार संतुलित कर लिया जाय तो यह व्यक्ति को ऊच्च्ता पर पहुंचा सकते हैं |इनके साथ तंत्र को जोड़ देना इनके प्रभाव को कई गुना बढ़ा देता है |इस प्रयोग में इसी को दृष्टिगत रखते हुए नवरत्न की अंगूठी और तांत्रिक मंत्र का प्रयोग किया गया है |नवरत्न की अंगूठी कितनी लाभप्रद होती है यह किसी से छिपा नहीं है |इसका विशेष प्रयोग निम् प्रकार है |
    सामग्री 
    ——— नवरत्न की अंगूठी अथवा महामंगलकारी गुटिका ,स्फटिक माला ,तेल का दीपक ,सवा किलो साबुत उड़द ,मंत्र सिद्ध चैतन्य विद्युत् माला ,पहनने के लिए लाल रंग की धोती ,लाल रंग का आसन ,सामने बिछाने के लिए लाल वस्त्र ,लकड़ी की चौकी ,धुप -दीप ,प्रसाद ,माला फूल आदि |
    समय -दिन और दिशा 
    ————————- बुधवार की रात्री का समय ,पश्चिम दिशा 
    जपा संध्या और दिनों की अवधि –
    ———————————— १००० मंत्र अर्थात १० माला प्रतिदिन ,५१ दिन तक 
    मंत्र 
    —— ॐ नमो ह्राँ ह्रीं ह्रूं फट चक्रे सुरे अदृश्य देवी शोणित भोज पक्षे मम् इच्छानुसार दृश्यम कुरु कुरु स्वाहा |
    विधि 
    ——– किसी भी बुधवार के दिन लाल धोती पहन ,लाल आसन पर विराजमान हो सामने चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर उस पर नवरत्न की अंगूठी और स्फटिक माला रख दें |,संकल्प लें प्रतिदिन पूजन की और १००० जप प्रतिदिन की ५१ दिन तक करने की |इसके बाद अंगूठी और माला इनकी पूर्ण पूजा करें |पूजा के बाद मंत्र जप उपरोक्त मंत्र की शुरू करें और १० माला जप स्फटिक माला से करें |प्रतिदिन आगे से यह क्रिया जारी रखें और ५१ दिन तक करें |५१ दिन बाद इसी मंत्र से १० माला जप संख्या बराबर हवन करें नवग्रह की लकड़ी और हवन सामग्री से |जब जप पूरा हो जाए तो वहां पहले दिन से राखी सवा किलो उड़द को ले जाकर दक्षिण दिशा में उछालकर फेंक देवे और घर आ जाए |हवन बाद उस नवरत्न की अंगूठी को धारण कर लें और उसके साथ रखी स्फटिक माला को गले में धारण करें |इससे धीरे धीरे व्यक्तित्व में सम्मोहकता उत्पन्न होने लगती है |………………………………………………हर -हर महादेव 
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  • दाम्पत्य जीवन और वशीकरण

    दाम्पत्य जीवन और वशीकरण
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    दाम्पत्य जीवन में तंत्र के षटकर्मों में से वशीकरण का प्रयोग ही हमेशा से
    सबसे आधिक होता रहा है |कारण मनुष्य की स्वाभाविक प्रवृत्ति है |मनुष्य की
    प्रवृत्ति और सामाजिक /पारिवारिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ही प्राचीन
    ऋषियों -मुनियों ने षट्कर्म की अवधारणा विकसित की थी |इनमे से दाम्पत्य में वशीकरण
    का प्रयोग अधिक हुआ |स्त्री या पुरुष का मन अक्सर भटकता है और वह कभी भी कहीं भी
    किसी और से जुड़ सकता है |ऐसे में दाम्पत्य जीवन पर संकट उत्पन्न हो जाता है और
    वहां बिखराव की स्थिति उत्पन्न होने लगती है |पारिवारिक सदस्यों की स्थिति भी विषम
    होने लगती है |बहुत कम ऐसे होते हैं जो एक निष्ठ जीवन जीते हैं जबकि अधिकतर को
    मौका मिले तो मन भटक सकता है |सामाजिक वर्जनाएं कम होने और आधुनिकता के विकास के
    साथ आधुनिक समय में यह अधिक होने लगा है की कोई किसी और से जुड़ जा रहा है ,जबकि
    पहले यह सब अधिकतर चोरी छिपे था |इस स्थिति के नियंत्रण के लिए ही सामाजिक वशीकरण
    को विकसित किया गया था ,यद्यपि वशीकरण तो देवी -देवताओं और लोकेत्तर शक्तियों का
    भी होता है |
    हमसे अथवा अन्य तांत्रिको से संपर्क करने वाली अधिकतर महिलाओं की समस्या
    कहीं न कहीं उनके दाम्पत्य जीवन से जुडी होती है किसी न किसी रूप से |किसी का पति
    किसी और के प्रति आकृष्ट होता है अथवा किसी और से जुड़ा होता है तो किसी के पति पर
    किसी अपने ही द्वारा अथवा किसी और द्वारा कोई तांत्रिक क्रिया की गयी होती है |कोई
    अपने किसी सहकर्मी से तो कोई अपने किसी अधीनस्थ कर्मचारी से जुड़ा होता है |कोई
    बिगडैल होता है तो कोई दुर्व्यसनी या नशेडी |कोई किसी की भावना को नहीं समझता तो
    कोई अपने परिवार वालों को कष्ट देता है |कोई ठीक से कमाता धमाता नहीं तो कोई घर का
    पैसा उडाता है |कभी कभी यह स्थितियां कुछ पुरुषों के सामने भी उनकी पत्नियों को
    लेकर उत्पन्न होती हैं |कभी कभी कुछ पुरुष अथवा महिलायें अपने पत्नी या पति के
    होते हुए भी किसी विवाहित या अविवाहित से सुख की लालसा में खुद संपर्क बना लेते
    हैं तो कभी कभी कोई उन्हें अपनी ओर आकृष्ट कर लेता है |इन सभी मामलों में वशीकरण
    की भूमिका है और इन सभी मामलों में वशीकरण कर व्यक्ति को सुधारा जा सकता है |

    जब दाम्पत्य टूटने लगे ,अपना कोई दूर जाने लगे ,किसी और से जुड़ने लगे
    ,पारिवारिक स्थिति बिगड़ने लगे ,लोगों के भविष्य असुरक्षित होने लगें ,कोई रास्ते
    से भटकने लगे ,कोई नैतिक रूप से पतित होने लगे तो वशीकरण एक ऐसा माध्यम है जिससे
    उस व्यक्ति को सुधारा जा सकता है |पुनः अपनी ओर आकृष्ट किया जा सकता है |किसी और
    से संपर्क हटा पुनः खुद से जोड़ा जा सकता है |पारिवारिक और दाम्पत्य जीवन को बचाने
    के लिए यह किया जाना पूरी तरह उचित भी है और उपयुक्त भी |इस माध्यम से बिगड़े को
    सुधारा जा सकता है ,किसी को अपनी ओर आकृष्ट कर उसे वशीभूत कर अपनी बात मनवाई जा
    सकती है जिससे उसका स्वभाव परिवर्तन भी किया जा सकता है और दुर्गुण ,दुर्व्यसन
    छुडाया जा सकता है |उसे उसकी जिम्मेदारियों का अहसास कराया जा सकता है |उसे किसी
    के चंगुल से छुड़ा अपनी ओर मोड़ा जा सकता है |उसे वापस अपनी ओर कर परिवार और दाम्पत्य
    को बचाया जा सकता है |……………………………………….हर हर महादेव 
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  • मोहिनी वटी से मोहन तंत्र क्रिया

    मोहिनी वटी से मोहन क्रिया 
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    तांत्रिक षट्कर्म में एक कर्म मोहन भी है जिसका अर्थ होता है किसी को मोहित कर लेना |यह आकर्षण और वशीकरण से थोडा भिन्न होता है |आकर्षण में व्यक्ति आकर्षित होता है और वशीकरण में सबकुछ जानते -समझते हुए भी व्यक्ति के प्रभाव में आया हुआ होता है |मोहन में व्यक्ति किसी पर केवल आकर्षित या वशीकृत ही नहीं होता वह उस पर मुग्ध अर्थात मोहित हो जाता है जिससे मोहित करने वाले के हर कार्य में उसे विशेषता नजर आती है ,उसका रूप ,गंध ,स्पर्श ,चिंतन सबकुछ उसे मुग्ध किये रहता है |वह उससे दूर नहीं होना चाहता फलतः उसके द्वारा आदेशित न होने पर भी वह मोहन करने वाले के अनुकूल ही सारे कार्य करता है |उसके सुख -दुःख और भावनाओं तक के प्रति वह संवेदनशील होता है |अधिकतर इस विद्या का प्रयोग महिलायें ही पुरुषों पर करती हैं किन्तु कुछ पुरुष भी महिलाओं पर ऐसे प्रयोग करते या करवाते हैं |
    इस पद्धति या तांत्रिक षट्कर्म में विभिन्न प्रकार के प्रयोग किये जाते हैं |इनमे मन्त्रों की भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है |इन मन्त्रों में शाबर मंत्र भी हो सकते हैं और तंत्रोक्त मंत्र भी प्रयोग किये जा सकते हैं |मंत्र के अनुसार ही पद्धति प्रयोग की जाती है |प्रयोगानुसार भिन्न भिन्न वस्तुएं अभिमंत्रित की और खिलाई पिलाई जा सकती है |इन्ही वस्तुओं में से एक मोहिनी वटी भी होती है |मोहिनी वटी का निर्माण विभिन्न वस्तुओं को मिश्रित कर किया जाता है जिनमे आकर्षण -वशीकरण और मोहन के मिश्रित प्रभाव होते हैं |इस वटी का प्रभाव व्यक्ति के शरीर की रासायनिक क्रिया पर होता है जिससे उसकी रूचि ,हारमोन -फेरोमोंन के प्रति सम्वेदनशीलता  बदल जाती है |उसे प्रयोगकर्ता की गंध ,हारमोन -फेरोमोन के गंध इतने प्रिय लगने लगते हैं की वह उसके सानिध्य में अपनी सुध बुध खोने लगता है |इसका प्रभाव यह होता है की उसकी चेतना के साथ ही अवचेतन भी प्रभावित होने लगता है फलतः वह मोहनकर्ता से दूर नहीं रहना चाहता |
    मंत्र और प्रकृति के अनुसार ही पद्धति का चयन किया जाता है मोहिनी वटी को अभिमंत्रित करने में |यद्यपि यह स्वयम भी प्रभावित करने वाला होता है किन्तु इसे उपयुक्त मंत्र और पद्धति से निश्चित संख्या और अवधि तक अभिमंत्रित कर देने पर यह तीव्र प्रभाव देने वाला और अधिक दिनों तक प्रभाव रखने वाला हो जाता है |अभिमन्त्रण के बाद इसके खिलाये -पिलाए जाने पर इसका प्रभाव लगभग स्थायी हो जाता है |प्रभाव तभी समाप्त होता है जब प्रभावित व्यक्ति किसी उच्च शक्ति के सम्पर्क में आये या उस पर इससे अधिक प्रभाव की शक्ति का प्रयोग किया जाए या किसी तांत्रिक द्वारा इसका प्रभाव समाप्त किया जाए अथवा खिलाया पिलाया निकाला जाए |यही सूत्र सभी खिलाये -पिलाए अभिमंत्रित वस्तुओं का होता है |इसका प्रभाव तब अधिक होता है जब खिलाने वाला खुद इसे अभिमंत्रित करे ||खिलाने -पिलाने के कुछ निश्चित नियम और तरीके होते हैं जिसके अंतर्गत की यह खिलाया -पिलाया जाता है ,सीधे इसे नहीं खिलाया -पिलाया जा सकता |  |………………………………………………………..हर हर महादेव 

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  • सर्वसुखदायक ,सर्वकष्ट निवारक डिब्बी

    सर्वसौख्य
    प्रदायक ,सर्वदुष्प्रभाव नाशक डिब्बी

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    महामंगलकारी
    ,सर्वकष्ट निवारक डिब्बी
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    ज्योतिष में
    ,वैदिक पूजन में ,कर्मकांड में और विशेषकर तंत्र में वनस्पतियों और उनकी जड़ों का
    प्रयोग वैदिक काल से होता रहा है ,क्योंकि भिन्न वनस्पति भिन्न ग्रहों की रश्मियों
    /उर्जाओं ,भिन्न अलौकिक शक्तियों ,भिन्न पारलौकिक उर्जाओं को अवशोषित करती है
    ,उनके गुण रखती है ,उन्हें संगृहीत रखती हैं ,उनसे संतृप्त होती है |इसलिए इनका
    प्रयोग ग्रह शान्ति ,देवता प्रसन्नता ,दैवीय शक्ति /ऊर्जा प्राप्त करने ,नकारात्मक
    शक्तियों को हटाने ,अलग अलग शक्तियों को जोड़ने -प्राप्त करने ,शारीरिक ऊर्जा
    -आभामंडल को सुधारने और विकसित करने ,शारीरिक क्षमता प्राप्त करने में हमेशा से
    होता रहा है |इनके महत्त्व ,इनके विशेषताओं के कारण ही यह हमारे रूचि का केंद्र
    रहे हैं |तंत्र और ज्योतिष के वर्षों के शोध और अनुभव के बाद हमने कुछ विशेष जड़ी
    -बूटियों और वनस्पतियों को एकसाथ जोडकर अर्थात इकठ्ठा रखकर ,उनका पूजन -प्राण
    प्रतिष्ठा -अभिमन्त्रण कर प्रभाव का आकलन किया और पाया की यह वनस्पतियाँ और जड़ें
    अद्भुत चमत्कारी सिद्ध हुईं |इन्हें इनके लिए शास्त्रों में निर्दिष्ट मुहूर्त
    -नक्षत्र में आमंत्रित ,निष्काषित ,प्राण प्रतिष्ठित और अभिमंत्रित किया गया जिससे
    इनके मौलिक गुण और ग्रह अथवा शक्ति विशेष के लिए सक्रियता बनी रहे और प्रभावी रहें
    |इनको क्रमशः इनके लिए निर्दिष्ट नियमों के अंतर्गत एकत्र करते हुए पूरे वर्ष भर
    में इकठ्ठा कर ,साथ में रख पुनः महाविद्या के मन्त्रों से अभिमंत्रित किया गया
    |इसके बाद इनके प्रभाव का कलां करने पर पाया गया की यह सभी कष्टों ,बाधाओं
    ,नकारात्मक शक्तियों को हटाने में ,सभी ग्रहों को शांत करने में ,सब प्रकार से
    मंगल करने में ,सर्वसौख्य प्रदान करने में सक्षम है |
    इस डिब्बी के
    निर्माण की प्रक्रिया में रविवार को आकडे की लकड़ी और जड़ ,बेलपत्र का निचला मोटा
    भाग [पत्र मूल ],,,सोमवार को पलाश के फूल ,खिरनी की जड़ ,पलाश की लकड़ी ,,,मंगलवार
    को अनंत मूल की जड़ ,लाल चन्दन का टुकड़ा ,खैर की जड़ ,खैर की लकड़ी ,,,बुधवार को
    अपामार्ग का पत्ता ,जड़ और लकड़ी ,विधारा की जड़ ,सफ़ेद चन्दन की जड़ या लकड़ी ,दूब
    ,,,गुरूवार को पीपल की लकड़ी ,पिला चन्दन की जड़ या लकड़ी ,केले की जड़ ,असगंध की जड़
    ,कुश की लकड़ी ,,,शुक्रवार को -गूलर की जड़ गूलर की लकड़ी ,सरपंखा की जड़ ,सफ़ेद पलाश
    के फूल ,,,शनिवार को शमी की जड़ ,शमी की लकड़ी ,बिछुआ पौधे की जड़ ,को लाकर उसी दिन
    में विधिवत प्राण प्रतिष्ठित किया जाता है और उस ग्रह के मन्त्रों से प्रतिदिन
    अभिमंत्रित करके इकठ्ठा करते हुए एक डिब्बी में रखते जाया जाता है ,इसके बाद इनमे
    मृगशिरा नक्षत्र में निष्कासित महुआ की जड़ ,पुष्य नक्षत्र में निष्कासित नागरबेल
    की जड़ ,अनुराधा नक्षत्र में निष्कासित चमेली की जड़ ,भरणी नक्षत्र में निष्कासित
    शंखाहुली की जड़ ,हस्त नक्षत्र में निष्कासित चम्पा की जड़ ,मूल नक्षत्र में पुनः
    निष्कासित गूलर की जड़ ,माघ नक्षत्र में पुनः निष्कासित पीपल की जड़ ,चित्रा नक्षत्र
    में निष्कासित गुलाब की जड़ और आर्द्रा नक्षत्र में पुनः निष्कासित अर्क की जड़ को
    इकठ्ठा रखा दिया जाता है |
    उपरोक्त
    वनस्पति योग में रवि पुष्य योग में निष्काषित -प्राण प्रतिष्ठित महायोगेश्वरी की
    जड़ ,सफ़ेद आक की जड़ ,धतूरा की जड़ ,दूब की जड़ ,पीपल की जड़ ,आम की जड़ ,बरगद की जड़
    ,निर्गुन्डी की जड़ ,सहदेई की जड़ ,बेल का जड़ ,गूलर के पत्ते और जड़ ,नागदौन की जड़
    ,हरसिंगार की जड़ ,अपराजिता की जड़ ,हत्था जोड़ी [एक जड़ ],लघु नारियल को भी प्राण
    प्रतिष्ठित कर रखा जाता है ,फिर गुरु पुष्य योग आने पर इसमें उस दिन निष्कासित तथा
    प्राण -प्रतिष्ठित -अभिमंत्रित  कुष की जड़
    ,केले की जड़ ,पीला चन्दन का जड़ या लकड़ी को भी प्राण प्रतिष्ठित -अभिमंत्रित कर
    इनके साथ मिला दिया जाता है |इस प्रकार इस योग की निर्माण प्रक्रिया पूर्ण होती है
    |फिर सभी वनस्पतियों और जड़ों से युक्त इस डिब्बी पर बगला ,काली या श्री विद्या के
    मन्त्रों से २१ दिन अभिमन्त्रण कर हवन करके इसे उसमे ढूपित किया जाता है |इस
    प्रकार सभी वानस्पतिक जड़ और पत्रादि युक्त यह योग अद्भुत ,चमत्कारी प्रभाव देने
    वाला हो जाता है |इन्हें एकसाथ संयुक्त इकठ्ठा करके इसमें पीला पारायुक्त सिन्दूर
    डाल दिया जाता है और ऐसी व्यवस्था रखनी होती है की इसमें जल न जाए ताकि यह वनस्पतियाँ
    और जड़ें खराब न हों |
    उपरोक्त
    वनस्पतियों का योग सभी ग्रहों का वैदिक रूप से भी और तंत्रोक्त रूप से भी
    प्रतिनिधित्व करता है |देवताओं -देवियों में गणपति ,विष्णु ,शिव ,हनुमान
    ,दत्तात्रेय ,काली ,चामुंडा ,लक्ष्मी ,दुर्गा ,सरस्वती का भी प्रतिनिधित्व करता है
    |इनके अतिरिक्त अनेक स्थानीय शक्तियों ,यक्षिणीयों का भी प्रतिनिधित्व करता है |इस
    पर सभी प्रकार के पूजा और मंत्र जप किये जा सकते हैं |इसकी सामान्य पूजा भी किसी
    भी अन्य पूजा से अधिक लाभप्रद होती है |यह व्यक्ति के साथ ही सम्पूर्ण परिवार को
    सुखी रखता है |सबके ग्रह पीड़ा ,ग्रह दोष शांत होते हैं |घर की नकारात्मक ऊर्जा का
    क्षय होता है ,नकारात्मक शक्तियां ,भूत -प्रेत घर से पलायन कर जाते हैं |आर्थिक
    समृद्धि के मार्ग प्रशस्त होते हैं और आय के नए स्रोत उत्पन्न होते हैं |देवताओं
    की कृपा प्राप्त होती है |प्रतिदिन पूजन में सभी सामग्रियां बाहर ही अर्पित होती
    हैं मात्र पीला पारायुक्त सिन्दूर ही अन्दर डिब्बी में डाला जाता है |यह सिन्दूर
    चमत्कारी हो जाता है और इसका तिलक विजयदायी और सम्मोहक होता है |इस डिब्बी पर
    चामुंडा ,दुर्गा ,काली ,विष्णु ,हनुमान आदि के मंत्र तीव्र प्रभाव दिखाते हैं |इस
    डिब्बी के प्रभाव से जीवन के सभी पक्षों में उन्नति होती है |
    यह योग हमारे
    वर्षों के खोज का परिणाम है जिसमे पूरे वर्ष सतत दृष्टि वनस्पतियों की खोज और
    नक्षत्रों क योग पर रखनी होती है ||सम्पूर्ण प्रक्रिया पूर्ण होने पर यह डिब्बी
    इतनी प्रभावकारी हो जाती है की जहाँ भी इसे रखा जाता है वहां से सभी प्रकार की
    नकारात्मक ऊर्जा ,नकारात्मक शक्ति ,भूत -प्रेत ,टोने -टोटके -अभिचार का प्रभाव
    समाप्त होने लगता है |यदि किसी बुरी शक्ति या ऊर्जा को वचन बद्ध या मंत्र बद्ध
    करके भेजा गया तो वह ही मजबूरी में वहां टिक पाती है अन्यथा सभी बुरी शक्तियाँ
    वहां से पलायन कर जाती है |इससे वास्तु दोष का शमन होता है ,ग्रह शांत होते हैं
    ,दैवीय प्रसन्नता होती है ,पित्र दोष का प्रभाव कम होने लगता है ,काल सर्प दोष
    ,मांगलिक दोष जैसे बुरे ग्रह योग का प्रभाव कम होने लगता है |व्यक्ति के आभामंडल
    की नकारात्मकता कम होने लगती है |मांगलिक कार्यों में आ रही बाधाएं समाप्त होती
    हैं |पूजा करने वाले में आकर्षण शक्ति का विकास होता है जबकि पूरे घर -परिवार में
    सभी को अपने आप लाभ होता है तथा घर -परिवार में सुख -शांति -समृद्धि का विकास होने
    लगता है ,सबकी उन्नति होने लगती है |

    हमारे यहं
    निर्मित होने वाली चमत्कारी दिव्य गुटिका से यह डिब्बी इस मामले में अलग है की
    ,इसका मूल प्रभाव शान्ति कारक है और यह सभी ग्रहों ,वातावरणीय ,अभिचारात्मक
    प्रभावों को शांत कर उन्हें दूर करती है, जबकि दिव्य गुटिका तीव्र प्रतिक्रया करती
    है तथा व्यक्ति में परिवर्तन लाती है |दिव्य गुटिका में वानस्पतिक जड़ी बूटियों के
    साथ जंतु उत्पाद भी होते हैं जबकि यह डिब्बी शुद्ध वनस्पतियों और जड़ों पर आधारित
    है |इसमें नवग्रहों की बाधा और बुरे योग ,भाग्य अवरोध ,वास्तु दोष ,पित्र दोष को
    ध्यान में रखते हुए जड़ी -बूटियाँ सम्मिलित की गयी हैं जिससे व्यक्ति के साथ समस्त
    घर और परिवार को समस्या से मुक्ति मिले |चमत्कारी दिव्य गुटिका का निर्माण
    नकारात्मक शक्तियों को हटाने और व्यावसायिक अथवा व्यक्तिगत उन्नति को दृष्टिगत
    रखते हुए किया गया है जबकि इस डिब्बी का निर्माण पारिवारिक समृद्धि /सुख ,ग्रह
    बाधा के साह ही समस्त विघ्नों के नाश को दृष्टिगत रखते हुए किया गया है |इससे सभी
    प्रकार से सुख मिले ,इसलिए ही इसका नाम हमने सर्वसौख्य प्रदायक डिब्बी रखा है |सभी
    प्रकार का मंगल हो इसलिए इसका नाम हमने महामंगल दायक डिब्बी रखा है |सभी प्रकार के
    कष्ट और दुष्प्रभावों का नाश हो इसलिए इसे हम सर्व दुष्प्रभाव नाशक ,सर्व कष्ट
    निवारक डिब्बी से भी संबोधित कर रहे |यह हमारा व्यक्तिगत शोध है ,जिसपर अनेक पोस्ट
    हमारे पेजों ,ब्लागों पर आते रहेंगे |किसी अन्य द्वारा इसे अपने नाम से प्रकाशित
    करना उसके द्वारा पाठकों को धोखा देना होगा
    |

    इस डिब्बी और
    योग के पूजन मात्र से घर में चोरी की सम्भावना कम हो जाती है ,किसी द्वारा पैसे
    हडपे जाने की संभावना कम होती है ,रात्रि में बुरे सपने नहीं आते ,दुष्ट व्यक्ति
    से भय कम हो जाता है और शत्रु भी मित्र बनने लगते हैं ,बुरा व्यक्ति भी प्यार करने
    लगता है ,उच्च लोग वशीभूत होते हैं ,स्त्री -पुरुष वश में होते है ,भूत -प्रेत
    बाधा दूर होती है ,दूसरों द्वारा धन प्राप्ति की संभावना बढती है ,विवाद -मुकदमे
    -परीक्षा -प्रतियोगिता में विजय मिलती है ,व्यक्ति की समय के साथ अतीन्द्रिय शक्ति
    का विकास होने लगता है और अचानक निकली बातें सच होने लगती हैं ,शारीरिक कष्ट में
    कमी आती है |सूर्य की अशुभता शांत होती है और पित्र शांत होते हैं ,व्यक्ति का तेज
    बढने लगता है ,बल -पौरुष की वृद्धि होती है |चन्द्रमा के दुष्प्रभाव शांत होते हैं
    और शरीर की कान्ति बढती है |मंगल के दोष -मांगलिक आदि प्रभाव से हो रही परेशानी कम
    होने लगती है ,मांगलिक कार्यों -विवाह आदि में आ रही अडचनें दूर होती हैं |बुध की
    अशुभता का प्रभाव कम होता है और उससे उत्पन्न समस्याओं का क्षरण होता है |वृहस्पति
    शांत होता है ,पित्र और विष्णु प्रसन्न होते हैं |शुक्र के दुस्प्राभावों में कमी
    आती है और शनि जनित समस्या में कमी आने लगती है |कालसर्प दोष के प्रभाव कम होने
    लगते हैं ,गंभीर और लम्बी बीमारियों से राहत की संभावना बढ़ जाती है |आकस्मिक
    दुर्घटनाओं ,अकाल मृत्यु की संभावना कम हो जाती है और इनसे होने वाली परेशानी में
    कमी आ जाती है |व्यक्ति का व्यक्तित्व आकर्षक होता है ,आस -पास सम्पर्क में आने
    वाले लोग प्रभावित और वशीभूत होते हैं |वाणी की ओज बढ़ जाती है |तुतलाहट ,घबराहट
    ,हीन भावना ,चिंता ,शारीरिक -मानसिक अवरोध में कमी आने लगती है |सुख समृद्धि
    क्रमशः बढती जाती है |आय के नए स्रोत बनते हैं ,सही समय सही निर्णय क्षमता का
    विकास होता है | यह हमारा व्यक्तिगत शोध है जिसे हमने अपने blog -tantricsolution.blogspot.com पर सर्वप्रथम प्रकाशित किया है |………………………………………………………हर हर महादेव 

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  • जीवन बदल सकता है इन जड़ों और वनस्पतियों से

    ये जड़ें और वनस्पतियाँ जीवन
    बदल देंगी [सर्वमंगल कारक ,सर्वसौख्य प्रदायक डिब्बी ]

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    मनुष्य का
    जीवन वनस्पतियों पर आश्रित है चाहे भोजन हो ,आवास हो अथवा वस्त्र |इन्ही पर समस्त
    जीव जंतु भी आश्रित हैं |यह इतना ही नहीं करते अपितु अलग अलग वनस्पति अलग अलग
    ग्रहों की रश्मियों को भी अधिक या कम मात्रा में अवशोषित करती है तथा अलग अलग
    ग्रहों के प्रभावों को भी संतुलित या प्रभावित करती है |यह भिन्न भिन्न दैवीय
    शक्तियों के गुणों का भी प्रतिनिधित्व करती हैं |भिन्न भिन्न वनस्पतियों में भिन्न
    भिन्न शक्तियों के तरंगों और उर्जाओं को अवशोषित और संगृहीत करने की क्षमता होती
    है |इनकी इन्ही सब विशेषताओं के कारण इनका ग्रहों की शान्ति के लिए भिन्न वनस्पति
    का भिन्न ग्रह के लिए उपयोग होता है |भिन्न दैवीय शक्ति के प्रतिनिधि रूप में
    भिन्न वृक्ष /वनस्पति की पूजा होती है |भिन्न ऊर्जा के रूप में भिन्न जड़ें धारण की
    जाती हैं |वृक्ष /वनस्पति में क्षमता होती है की यह व्यक्ति की भावना को भी पकडती
    हैं ,शब्दों के तरंग को भी पकडती हैं और व्यक्ति की क्रिया पर भी प्रतिक्रिया करती
    हैं |यह वैज्ञानिक रूप से भी प्रमाणित हो चूका है जिसे भारतीय सनातन ज्ञान हजारों
    वर्षों से कहता आया है |यह मनुष्य की भावना को एम्प्लीफायर की तरह वातावरण में
    विस्तार दे देती हैं और लक्ष्य तक पहुँचने में मदद देती हैं |इनके जलने से इनके
    गुणों के अनुसार विशिष्ट ऊर्जा उत्पन्न होती है जिसे उपयोग किया जाता रहा है वैदिक
    पूजन /आराधना में |
    तंत्र में भी
    और ज्योतिष में भी वनस्पतियों का उपयोग वैदिक काल से हो रहा है और यह सीधे
    प्रभावित करते हैं |तंत्र में इन पर विशेष अनुसंधान हुए हैं और इनका षट्कर्मो में
    भी उपयोग होता है और व्यक्तिगत साधना में भी |हवन में इनकी लकड़ियों का प्रयोग
    विशेष मन्त्रों के साथ विशेष ग्रह को अनुकूल करता है तो पूजन में इनकी जड़ों का
    उपयोग विशिष्ट मन्त्रों से विशिष्ट उर्जा संगृहीत भी करता है और उन्हें प्रक्षेपित
    भी करता है वातावरण में अपने गुण के अनुसार बदलकर ,जिससे विशेष शक्ति या ऊर्जा
    समूह के साथ व्यक्ति का जुड़ाव हो जाता है और उसके जीवन पर तदनुरूप प्रभाव पड़ता है
    |विशेष नक्षत्र में ,विशेष तिथि में ,विशेष मुहूर्त में विशेष वनस्पति के निष्कासन
    और प्राण प्रतिष्ठा /पूजन से विशिष्ट ऊर्जा का उस वनस्पति का जुड़ाव सामान्य दिनों
    की अपेक्षा अधिक होता है जिससे वह अधिक प्रभावकारी हो जाता है ,इसीलिए वनस्पतियों
    का एकत्रीकरण अथवा जड़ों का निष्कासन विशेष मुहूर्त और दिन में करने का निर्देश
    मिलता है |यहाँ तक की इनकी भावना पकड़ने के गुण के कारण एक दिन पूर्व इन्हें
    आमंत्रण भी दिया जाता है और निष्कासन में नुकीली अथवा लोहे की वस्तुओं का उपयोग भी
    नहीं किया जाता |
    तंत्र में
    गंभीर रूचि के कारण वनस्पति तंत्र पर हमारी गहरी दृष्टि रही है और इनका संतुलन
    बनाते हुए हमने अनेक प्रयोग किये हैं |हमारी बनाई चमत्कारी दिव्य गुटिका /डिब्बी
    ऐसे ही दुर्लभ जड़ी -बूटियों ,तंत्र की दुर्लभ सामग्रियों का संयुक्त संयोग रहा है
    जिसके बहुत अच्छे परिणाम मिलते हैं |इसके बाद हमने केवल वनस्पतियों के जड़ों पर
    अपनी खोज को केन्द्रित करते हुए इनके संयोग से ऐसा संयुक्त योग तैयार किया जो
    नवग्रह शांति ,उनके दुष्प्रभाव में कमी लाने के साथ ही भिन्न दैवीय शक्तियों का भी
    प्रतिनिधित्व करता है और व्यक्ति के जीवन की लगभग समस्त समस्याओं में लाभदायक होता
    है |हमने पाया है की –
    यदि ,रविवार
    को आकडे की लकड़ी और जड़ ,बेलपत्र का निचला मोटा भाग [पत्र मूल ],,,सोमवार को पलाश
    के फूल ,खिरनी की जड़ ,पलाश की लकड़ी ,,,मंगलवार को अनंत मूल की जड़ ,लाल चन्दन का
    टुकड़ा ,खैर की जड़ ,खैर की लकड़ी ,,,बुधवार को अपामार्ग का पत्ता ,जड़ और लकड़ी
    ,विधारा की जड़ ,सफ़ेद चन्दन की जड़ या लकड़ी ,दूब ,,,गुरूवार को पीपल की लकड़ी ,पिला
    चन्दन की जड़ या लकड़ी ,केले की जड़ ,असगंध की जड़ ,कुष की लकड़ी ,,,शुक्रवार को -गूलर
    की जड़ गूलर की लकड़ी ,सरपंखा की जड़ ,सफ़ेद पलाश के फूल ,,,शनिवार को शमी की जड़ ,शमी
    की लकड़ी ,बिछुआ पौधे की जड़ ,को लाकर उसी दिनों में विधिवत प्राण प्रतिष्ठित किया
    जाय और उस ग्रह के मन्त्रों से प्रतिदिन अभिमंत्रित करके इकठ्ठा करते हुए एक
    डिब्बी में रखते जाया जाय ,इसके बाद इनमे रवि पुष्य योग में निष्काषित -प्राण
    प्रतिष्ठित महायोगेश्वरी की जड़ ,सफ़ेद आक की जड़ ,धतूरा की जड़ ,दूब की जड़ ,पीपल की
    जड़ ,आम की जड़ ,बरगद की जड़ ,निर्गुन्डी की जड़ ,सहदेई की जड़ ,बेल का जड़ ,गूलर के
    पत्ते और जड़ ,नागदौन की जड़ ,हरसिंगार की जड़ ,अपराजिता की जड़ ,हत्था जोड़ी [एक जड़
    ],लघु नारियल को भी रख दिया जाय ,फिर गुरु पुष्य योग आने पर में कुष की जड़ ,केले
    की जड़ ,पीला चन्दन का जड़ या लकड़ी को भी प्राण प्रतिष्ठित -अभिमंत्रित कर इनके साथ
    मिला दिया जाय तो यह योग अद्भुत ,चमत्कारी प्रभाव देने वाला हो जाता है |इन्हें
    एकसाथ संयुक्त इकठ्ठा करके इसमें पीला पारायुक्त सिन्दूर डाल दिया जाता है और ऐसी
    व्यवस्था रखनी होती है की इसमें जल न जाए ताकि यह वनस्पतियाँ और जड़ें खराब न हों |
    उपरोक्त
    वनस्पतियों का योग सभी ग्रहों का वैदिक रूप से भी और तंत्रोक्त रूप से भी
    प्रतिनिधित्व करता है |देवताओं -देवियों में गणपति ,विष्णु ,शिव ,हनुमान
    ,दत्तात्रेय ,काली ,चामुंडा ,लक्ष्मी ,दुर्गा ,सरस्वती का भी प्रतिनिधित्व करता है
    |इनके अतिरिक्त अनेक स्थानीय शक्तियों ,यक्षिणीयों का भी प्रतिनिधित्व करता है |इस
    पर सभी प्रकार के पूजा और मंत्र जप किये जा सकते हैं |इसकी सामान्य पूजा भी किसी
    भी अन्य पूजा से अधिक लाभप्रद होती है |यह व्यक्ति के साथ ही सम्पूर्ण परिवार को
    सुखी रखता है |सबके ग्रह पीड़ा ,ग्रह दोष शांत होते हैं |घर की नकारात्मक ऊर्जा का
    क्षय होता है ,नकारात्मक शक्तियां ,भूत -प्रेत घर से पलायन कर जाते हैं |आर्थिक
    समृद्धि के मार्ग प्रशस्त होते हैं और आय के नए स्रोत उत्पन्न होते हैं |देवताओं
    की कृपा प्राप्त होती है |प्रतिदिन पूजन में सभी सामग्रियां बाहर ही अर्पित होती
    हैं मात्र पीला पारायुक्त सिन्दूर ही अन्दर डिब्बी में डाला जाता है |यह सिन्दूर
    चमत्कारी हो जाता है और इसका तिलक विजयदायी और सम्मोहक होता है |इस डिब्बी पर
    चामुंडा ,दुर्गा ,काली ,विष्णु ,हनुमान आदि के मंत्र तीव्र प्रभाव दिखाते हैं |इस
    डिब्बी के प्रभाव से जीवन के सभी पक्षों में उन्नति होती है |यद्यपि इस डिब्बी का
    निर्माण और जड़ों ,वनस्पतियों का एकत्रीकरण बेहद श्रमसाध्य ,समय लेने वाला और
    विशेषज्ञता वाला है किन्तु इसे थोड़ी ज्योतिष और तंत्र की समझ और जानकारी रखने वाला
    बना सकता है जिसे तंत्रोक्त प्रतिष्ठा और अभिमन्त्रण का ज्ञान हो |इससे वह खुद के
    साथ अनेकों का भला कर सकता है
    |इस डिब्बी और योग के बारे में अधिक जानकारी हमारे अगले अंकों में प्रकाशित होगी तथा इस डिब्बी का नाम हमने सर्वसौख्य प्रदायक डिब्बी या महा मंगलकारी डिब्बी रखा है |……………………………………………….हर हर महादेव

    READ MORE: जीवन बदल सकता है इन जड़ों और वनस्पतियों से
  • श्यामा मातंगी Shyama Matangi] महावशीकरण कवच /यन्त्र

    श्यामा मातंगी Shyama Matangi] महावशीकरण कवच /यन्त्र

    महावशीकरण
    श्यामा मातंगी यन्त्र /कवच और महावशीकरण मन्त्र

    ================================
    सभी के लिए
    उपयोगी
    —————————
    मातंगी
    महाविद्या ,दस महाविद्या में से एक प्रमुख महाविद्या ,,वैदिक सरस्वती का तांत्रिक
    रूप हैं और श्री कुल के अंतर्गत पूजित हैं |यह सरस्वती ही हैं और वाणी ,संगीत
    ,ज्ञान ,विज्ञान ,सम्मोहन ,वशीकरण ,मोहन की अधिष्ठात्री हैं |त्रिपुरा ,काली और
    मातंगी का स्वरुप लगभग एक सा है |यद्यपि अन्य महाविद्याओं से भी वशीकरण ,मोहन
    ,आकर्षण के कर्म होते हैं और संभव हैं किन्तु इस क्षेत्र का आधिपत्य मातंगी
    [सरस्वती
    ] को प्राप्त हैं |यह जितनी
    समग्रता ,पूर्णता ,निश्चितता से इस कार्य को कर सकती हैं कोई अन्य नहीं क्योकि सभी
    अन्य की अवधारणा अन्य विशिष्ट गुणों के साथ हुई है |उन्हें वशीकरण ,मोहन के कर्म
    हेतु अपने मूल गुण के साथ अलग कार्य करना होगा जबकि मातंगी वशीकरण ,मोहन की देवी
    ही हैं अतः यह आसानी से यह कार्य कर देती हैं |मातंगी के तीन विशिष्ट स्वरुप हैं
    श्यामा मातंगी ,राज मातंगी और वश्य मातंगी |श्यामा मातंगी स्वरुप मातंगी का उग्र
    स्वरुप है और वशीकरण ,मोहन
    , आकर्षण
    को तीब्रता से करता है |इनका मात्र अति विशिष्ट है ,जिसमे माया [देवी
    ] ,सरस्वती [मातंगी ],लक्ष्मी ,त्रिपुरसुन्दरी[श्री विद्या]और काली के बीज मन्त्रों का विशिष्ट संयोग है जिससे मातंगी की मुख्यता के
    साथ इन सभी शक्तियों की शक्ति भी सम्मिलित होती है जिससे यह विद्या सब कुछ देने के
    साथ वशीकरण ,आकर्षण में निश्चित सफलता देती है |
    मातंगी
    ,या श्यामा मातंगी का मंत्र ,मातंगी साधक ही प्रदान कर सकता है ,अन्य किसी
    महाविद्या का साधक इनके मंत्र को प्रदान करने का अधिकारी नहीं है |स्वयं मंत्र
    लेकर जपने से महाविद्याओं के मंत्र सिद्ध नहीं होते ,अतः जब भी मंत्र लिया जाए
    मातंगी साधक से ही लिया जाए ,यद्यापि मातंगी साधक खोजे नहीं मिलते जबकि अन्य
    महाविद्या के साधक मिल जाते हैं |इनके मंत्र और यंत्र का उपयोग अधिकतर प्रवचनकर्ता
    ,धर्म गुरु ,
    tantra गुरु ,बौद्धिक
    लोग करते हैं जिन्हें समाज
    भीड़लोगों के समूह का नेतृत्व अथवा सामन करना होता
    है ,ज्ञान विज्ञानं की जानकारी चाहिए होती है |मातंगि के शक्ति से इनमे सम्मोहन
    -वशीकरण की शक्ति होती है |
    मातंगी का
    यन्त्र इसमें अतिरिक्त ऊर्जा का कार्य करता है जिसे मातंगी साधक निर्मित करता है
    भोजपत्र पर |मातंगी का यन्त्र बाजार में धातु का मिल जाता है किन्तु श्यामा मातंगी
    का मिलना मुश्किल होता है |धातु के यन्त्र की प्रभावित भी संदिग्ध होती है जबकि
    मातंगी साधक द्वारा निर्मित श्यामा मातंगी के यन्त्र में साधक की शक्ति ,मुहूर्त
    की शक्ति ,भोजपत्र की पवित्रता ,अष्टगंध की विशिष्टता ,मंत्र की शक्ति ,प्राण
    प्रतिष्ठा की शक्ति सम्मिलित होती है जिससे यह यन्त्र निश्चित प्रभावकारी हो जाता
    है |धारण करने पर इससे उत्पन्न विशिष्ट तरंगे व्यक्ति और वातावरण को प्रभावित करती
    हैं जिससे खुद व्यक्ति में भी परिवर्तन आता है और आसपास के लोग भी प्रभावित होते
    हैं |इसके वाशिकारक प्रभाव में संपर्क में आने वाले लोग बांध जाते हैं |यद्यपि
    यन्त्र किसी विशिष्ट व्यक्ति के लिए भी बनाया जा सकता है किन्तु व्यक्ति केन्द्रित
    न रखा जाए तो यह सब पर प्रभाव डालता है |
    श्यामा मातंगी
    का मंत्र और यन्त्र प्रकृति की सभी शक्तियों में सर्वाधिक शक्तिशाली वाशिकारक और
    मोहक प्रभाव रखता है क्योकि यह इसी की शक्ति हैं ही |यद्यपि इनका यन्त्र काफी
    महंगा पड़ जाता है ,जबकि अन्य वशीकरण के यन्त्र बाजार में बहुत सस्ते मिल जाते हैं
    ,यह अलग है की अन्य भले असफल हो जाए इनका यन्त्र प्रभाव जरुर देता है |उदाहरण के
    लिए ,श्यामा मातंगी का मंत्र केवल इनका साधक ही जप सकता है और वाही अभिमंत्रित कर
    सकता है यन्त्र को जबकि अगर वह दिन में १० घंटे लगातार जप करे तो भी तीन हजार
    मंत्र से अधिक जप नहीं कर सकता ,कारण मंत्र बड़ा और क्लिष्ट होता है |ऐसे में
    यन्त्र को २१ हजार अभिमंत्रित करने के लिए कम से कम ७ दिन चाहिए ,पूजा प्राण
    प्रतिष्ठा और बाद में हवन के लिए दो दिन अतिरिक्त चाहिए अर्थात ९ दिन लगेंगे एक
    यन्त्र बनाने में, यदि वास्तविक प्रभाव लानी है ,क्योकि बहुत कम अभिमन्त्रण
    अपेक्षित परिणाम नहीं देगा |इस तरह सबके लिए तो नहीं किन्तु जरूरतमंद के लिए यह
    यन्त्र लाभदायक होता है |
    श्यामा मातंगी
    यन्त्र का प्रभाव और उपयोग
    —————————————————
    . यन्त्र धारण करने से वशीकरण की शक्ति बढती है
    |व्यक्तित्व का प्रभाव बढ़ता है |
    . अधिकारी वर्ग को अपने कर्मचारियों पर नियंत्रण
    और उन्हें वशीभूत रखने में आसानी होती है |
    .कर्मचारी को अपने अधिकारियों को अनुकूल रखने में
    मदद मिलती है |
    .पति को पत्नी की और पत्नी को पति की अनुकूलता
    अपने आप प्राप्त होती है और धारण करने वाले का पति या पत्नी वशीभूत होता है |
    .सेल्स ,मार्केटिंग ,पब्लिक रिलेसन का कार्य करने
    वालों को लोगों का अपेक्षित सहयोग मिलता है |
    .व्यवसायी को ग्राहकों की अनुकूलता मिलती है और
    अपरोक्त उन्नति में सहायत मिलती है |
    .रुष्ट परिवार वालों को इससे अनुकूल करने में मदद
    मिलती है |
    .वादविवाद ,मुकदमे ,बहस ,समूह वार्तालाप ,आपसी बातचीत में सामने वाले की
    अनुकूलता प्राप्त होती है |
    . चूंकि यह महाविद्या यन्त्र है और काली की शक्ति
    से संयुक्त है अतः नकारात्मक ऊर्जा दूर करता है |
    १०. किसी पर पहले से कोई वशीकरण की क्रिया है तो
    यन्त्र भरे हुए चांदी कवच को सुबह शाम कुछ दिन एक गिलास जल में डुबोकर वह जल
    व्यक्ति को पिलाने से वशीकरण का प्रभाव उतरता है |
    ११.किसी भी तरह के इंटरव्यू में परीक्षक पर
    सकारात्मक प्रभाव देता है |
    १२. व्यक्ति विशेष के लिए बनाया गया यन्त्र धारण और
    मंत्र जप निश्चित रूप से सम्बंधित व्यक्ति को वशीभूत करता है |
    १३.दाम्पत्य कलह ,पारिवारिक कलह ,मनमुटाव ,विरोध
    में लोगों को प्रभावित करता है और व्यक्ति के अनुकूल करता है |
    १४.सामाजिक संपर्क रखने वालों को लोगों की अनुकूलता
    प्राप्त होती है |
    १५.ज्ञानविज्ञानंअन्वेषणपरीक्षाप्रतियोगिता ,प्रवचन ,भाषण से समबन्धित लोगों को सफल होने में मदद करता है
    |

    इस
    प्रकार ऐसा कोई क्षेत्र लगभग नहीं जहाँ इस यन्त्र से लाभ न मिलता हो क्योकि लोगों
    की अनुकूलता की जरुरत सबको होती है और लोग या व्यक्ति प्रभावित हो अनुकूल हों
    ,वशीभूत हों तो व्यक्ति को लाभ अवश्य होता है |अतः श्यामा मातंगी साधक द्वारा
    बनाया गया श्यामा मातंगी यन्त्र ,अन्य किसी यन्त्र से अधिक लाभकारी होता है
    |………………………………………………………………..हर
    हर महादेव 
    READ MORE: श्यामा मातंगी Shyama Matangi] महावशीकरण कवच /यन्त्र
  • वशीकरण तंत्र [Vashikaran Tantra] :: कैसे काम करता है ?

    :::कैसे कार्य करता है वशीकरण तंत्र
    प्रयोग 
    :::

    =====================
    किसी को अपने प्रति या किसी अन्य के प्रति वशीभूत, अर्थात वश में , अर्थात अधीन कर लेना या कर देना वशीकरण होता है ,चाहे वह देवता हो ,मनुष्य हो या पशुपक्षी |वशीकरण शारीरिक ,मानसिक तरंगों पर आधारित एक प्रक्रिया है जो अपने एक निश्चित विज्ञान के आधार पर कार्य करता है ,,इसमें लक्ष्य किये गए व्यक्ति में मानसिकशारीरिकरासायनिक और तरंगीय परिवर्तन होने से उसकी रुचियो ,स्वभाव ,पसंदनापसंद में परिवर्तन हो जाता है और वह प्रयोगकर्ता के अनुकूल हो उसके वशीभूत हो जाता है ,,हार्मोन्सफेरोमिंस के प्रति आकर्षण परिवर्तित हो जाता है ,अवचेतन मन प्रभावित हो जाता है ,उसे प्रयोगकर्ता के साथ रहना ,उसकी गंध,उसके कार्य,,उसका स्वभाव ,इतना अच्छा लगने लगता है की वह उससे दूर नहीं रहना चाहता और इस प्रकार वह प्रयोगकर्ता की सभी बाते मानने लगता है |
           वशीकरण की कार्यप्रणाली तरंगों पर आधारित है ,इसमें तांत्रिक वस्तुओ की ऊर्जा और तरंगों को मानसिक शक्ति और निश्चित भाव के साथ एक निश्चित लक्ष्य पर प्रक्षेपित किया जाता है |जब व्यक्ति विशेष के लिए प्रबल मानसिक बल से तरंगों और उर्जा का प्रक्षेपण किया जाता है तो यह लक्षित व्यक्ति के ऊर्जा परिपथ ,मष्तिष्क और अवचेतन मन को प्रभावित करता है और वहा परिवर्तन होने लगता है ,इसमें तंत्रिकीय वस्तुए ऊर्जा बढाने वाली ,परिवर्तन करने वाली ,वशीकरण की तीब्रता बढाने वाली और समय में शीघ्रता लाने वाली होती है |जबकि लक्ष्य के कपडे ,बाल ,चित्र या उपयोग की हुई वस्तुए उसके शरीर में तरंगों को पकड़ने और ग्रहण करने का माध्यम बन जाते है |यहाँ मूल शक्ति प्रयोगकर्ता की मानसिक शक्ति होती है |मंत्र और हवनीय द्रव्य ऊर्जा उत्पन्न करने वाले ,लक्ष्य पकड़ने वाले और कार्य से किसी ऊर्जा शक्ति को जोड़ने वाले होते है |वशीकरण केवल मंत्र से ,,मंत्र के साथ व्यक्ति की उपयोग की हुई वस्तुओ के प्रयोग के साथ ,अथवा अभिमंत्रित वास्तु के खिलानेपिलाने से भी हो सकता है ,|सामान्यतया व्यक्ति जो भी खाता है वह पचाकर निकल जाता है ,किन्तु जब किसी वस्तु विशेष को अभिमंत्रित करके खिलाया जाता है तो वह पचता नहीं [यह विज्ञान के नियमों के प्रतिकूल हो सकता है पर होता है ऐसा ]और पेट के किसी कोने में पड़ा रहता है ,साथ ही उसका प्रभाव भी बना रहता है ,जब तक की विशिष्ट तांत्रिक क्रिया से उस वस्तु को निकला जाए |इस प्रकार व्यक्ति किसी अन्य के प्रति वशीभूत रहता है ,,कभीकभी वह अपने स्वभाव ,कुलखानदान,परिवार से अलग भी किसी के वशीभूत हो सकता है ,सबकी अवहेलना कर सकता है ,क्योकि उसकी स्थिति ..दिल लगी दीवार से तो पारी क्या चीज है वाली हुई हो सकती है ,,वह  क्रिया के प्रभाव में हो सकता है |

       वशीकरण ऐसा तांत्रिक षट्कर्म है जिसका सदुपयोग और दुरुपयोग दोनों होता है ,,अपने किसी बिगड़े को सुधारने के लिए इसका उपयोग उचित कहा जा सकता है ,पर किसी को स्वार्थवश वशीभूत करना दुरुपयोग है ,,जानकारों को इसपर विशेष ध्यान और सावधानी रखनी चाहिए ……………………………………………………………………हरहर महादेव
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