Month: January 2020
  • यंत्रों /ताबीजों का आपकी सफलता पर प्रभाव

    यंत्रों /ताबीजों का आपकी सफलता पर प्रभाव

    आपकी सफलता पर यंत्रों -ताबीजों का प्रभाव
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                     आपकी सफलता -असफलता आपकी योग्यता ,व्यवहार और सोच पर निर्भर करती है ,ऐसा सामान्य स्थिति में होता है |यह भाग्य पर भी काफी कुछ निर्भर करता है जिसके अनुसार आपकी क्षमतासोचव्यक्तित्व का निर्धारण हुआ होता है |अर्थात जब भाग्य पूरा साथ दे तो आपकी नैसर्गिक क्षमता -व्यक्तित्व के अनुसार आपको सफलता मिलती है |किन्तु यह तब होता है जब आप किसी भी तरह की नकारात्मक ऊर्जा से ग्रस्त न हों |आप अगर किसी भी तरह की नकारात्मक ऊर्जा से ग्रस्त हों तो आपके सोच -कर्म व्यवहार -क्षमता बदल जाते है अथवा कम हो जाते हैं |यह नकारात्मक ऊर्जा ग्रह की सामयिक दोष हो सकती है ,वास्तु दोष -स्थान दोष हो सकता है ,किसी द्वारा किया गया अभिचार हो सकता है ,आप द्वारा की गई गलती और श्राप का परिणाम हो सकता है ,पित्र दोष के कारण हो सकता है ,कहीं से आई वायव्य बाधा के कारण हो सकता है ,कुलदेवता/देवी दोष के कारण हो सकता है ,परिवार के मुखिया की विपरीत ग्रह स्थितियों के कारण हो सकता है |ऐसे में जब आप इन किसी भी नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव में आते हैं तो जो नैसर्गिक आपके भाग्य से मिलता है उसमे भी रुकावट उत्पन्न हो जाती है और जो जितना मिलना चाहिए नहीं मिल पाता ,अपितु बुरे प्रभाव की मात्रा बढ़ जाती है |कारण यह होता है की नकारात्मक प्रभाव आपकी सोच ,स्वास्थ्य ,पारिवारिक माहौल ,लोगों का सहयोग ,आपका व्यवहार बदल देता है जिससे जितनी क्षमता और योग्यता से सम्बंधित दिशा में कार्य होना चाहिए नहीं हो पाता और सफलता की मात्रा प्रभावित हो जाती है |
                  ताबीज धारण करने पर चमत्कार कहीं और से नहीं होता ,आप द्वारा ही होता है |ताबीज धारण से अगर चमत्कार होता भी है तो उसके लिए लिए चमत्कारी सिद्ध का मिलना आवश्यक होता है |ऐसा तब तक नहीं होगा जब तक की आप नकारात्मकता से मुक्त न हों और आपका भाग्य साथ न दे रहा हो |भाग्य साथ देने पर ही आपको भाग्यवश चमत्कारी सिद्ध मिल जाता है की उसके दिए ताबीज से चमत्कार होने लगता है |सामान्य स्थिति में ऐसा संभव नहीं होता |सामान्य स्थिति में आप द्वारा ही चमत्कार होता है |जब आपको आपकी आवश्यकतानुसार ऐसी ताबीज धारण करा दी जाती है जो आपकी सम्बंधित क्षेत्र में सफलता बढ़ा दे तो होता यह है की वह ताबीज आपके आसपास और शरीर से सम्बंधित क्षेत्र को प्रभावित कर रही नकारात्मक ऊर्जा हटा देती है ,साथ ही आपकी सोच और कार्यक्षमता और व्यवहार उस क्षेत्र के अनुकूल कर देती है |सम्बंधित देवता और उसके ऊर्जा चक्र को प्रभावित कर देती है ,जहाँ से तरंगों का उत्पादन बढ़ जाता है |फलतः आपकी सफलता बढ़ जाती है |आपके भाग्य का पूरा लाभ सम्बंधित क्षेत्र में मिलने लगता है |यह सब उर्जा का प्रक्षेपण है जो आपके शरीर और वातावरण को प्रभावित करके आपमें और आसपास बदलाव ला देता है |
               कार्य प्रणाली अगर ताबीज की देखें तो टोनेटोटकेताबीज में प्राणी के शारीर और प्रकृति की उर्जा संरचना ही कार्य करती है ,इनका मुख्य आधार मानसिक शक्ति का केंद्रीकरण और भावना होता है ,|,,,प्रकृति में उपस्थित वनस्पतियों और जन्तुओ में एक उर्जा परिपथ कार्य करता है |,मृत्यु के बाद भी इनमे तरंगे कार्य करती है और ऊर्जा भिन्न रूप में बनी रहती है | ,,,,इनमे विभिन्न तरंगे ली जाती है और निष्कासित की जाती रहती है जब तक किसी भी रूप में उसका अस्तित्व है | जब किसी वास्तु या पदार्थ पर मानसिक शक्ति और भावना को केंद्रीकृत करके विशिष्ट क्रिया की जाती है तो उस पदार्थ से तरंगों का उत्सर्जन होने लगता है ,,|यह कुछ वैसा ही होता है जैसे सामने बैठे व्यक्ति को आदेश देना अथवा दृष्टि से वस्तुओं को हिलाना |,,जिस भावना से उनका प्रयोग जिसके लिए किया जाता है ,वह इच्छित स्थान पर वैसा कार्य करने लगता है ,| कोई पदार्थ अच्छी भावना से मानसिक शक्ति केंद्रित करके विशिष्ट क्रिया करके दी जाये तो प्राप्तकर्ता की उर्जा परिपथ पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और उसे लाभ होता है |सभी जगह उर्जा ही कार्य करती है |मानसिक शक्तियों द्वारा उन्हें परिवर्तित अवश्य किया जा सकता है
                          . ताबीज बनाने वाला जब अपने ईष्ट में सचमुच डूबता है तो वह अपने ईष्ट के अनुसार भाव को प्राप्त होता है अर्थात उसका ईष्ट की ऊर्जा से सामंजस्य बैठता है | ,,भाव गहन है तो मानसिक शक्ति एकाग्र होती है ,जिससे वह शक्तिशाली होती है ,यह शक्तिशाली हुई तो उसके उर्जा परिपथ का आंतरिक तंत्र शक्तिशाली होता है और शक्तिशाली तरंगे उत्सर्जित करता है |ये शक्तिशाली तरंगे ईष्ट को आकर्षित कर उसकी ऊर्जा से संतृप्त करने लगती हैं साधक को और यह साधक के मानसिक बल के अनुसार काम करने लगती हैं तथा स्थिर होने लगती हैं ऐसा व्यक्ति यदि किसी विशेष समय,ऋतूमॉस में विशेष तरीके से ,विशेष पदार्थो को लेकर अपनी मानसिक शक्ति और मन्त्र से उसे सिद्ध करता है तो वह ताबीज धारक व्यक्ति को अच्छेबुरे भाव की तरंगों से लिप्त कर देता है |
                       यह समस्त क्रिया शारीर के उर्जा चक्र को प्रभावित करती है और तदनुसार व्यक्ति को उनका प्रभाव दिखाई देता है |इसमें प्रयुक्त पदार्थ की ऊर्जा ,मॉसऋतू की ऊर्जा की विशेषता ,तिथि के अनुसार ग्रहों की विशेषता ,साधक की ऊर्जा ,विशिष्ट मन्त्र और यन्त्र की ऊर्जा एक साथ मिलकर साधक के मानसिक बल से संयुक्त हो जाती हैं और अभिमंत्रित करते ही वह वस्तु विशेष में स्थिर हो जाती हैं |इससे तरंगों का उत्सर्जन होता रहता है जो धारण करने वाले के मष्तिष्क ,वातावरण ,शरीर ,ऊर्जा परिपथ को प्रभावित करता है और कुछ सामय में अनुकूल रासायनिक परिवर्तन भी होने लगता है जिससे व्यक्ति की सोच ,क्रिया कलाप ,सब बदल जाते हैं ,औरा बदल जाती है ,वातावरण में जहाँ वह रहता है तदनुरूप परिवर्तन हो सकते हैं |यह सामान्य क्रिया प्रणाली है |उच्च साधक और सिद्ध के लिए मानसिक बल और इच्छा ही पर्याप्त होती है ,,ऋतूमॉसमुहूर्तपदार्थ तक का महत्त्व नहीं रहा जाता ,,,वह जिस भी वस्तु को अभिमंत्रित कर दे वाही ताबीज और सिद्द हो जाती है |सामान्य रूप में किसी साधक को किसी यन्त्र अथवा ताबीज को सिद्ध करने के लिए सम्बंधित शक्ति या देवता का सिद्ध होना आवश्यक है |ऐसा नहीं की कोई भी किसी भी देवता या शक्ति के यन्त्र को सिद्ध कर सकता है और सभी कामों में उपयोगी यंत्रों को बना सकता है |जिसकी जैसी क्षमता वह वाही काम कर सकता है |इसलिए यह देखना आवश्यक हो जाता है की सम्बंधित साधक के पास वह क्षमता है भी की नहीं ,नहीं तो उपयुक्त लाभ प्राप्त नहीं होंगे |……………………………..………हरहर महादेव
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  • तंत्र रक्षा और बिगड़े को सुधारने हेतु कवच

    बिगड़े को सुधारने अथवा तांत्रिक क्रिया से बचाव का चमत्कारी कवच
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          अक्सर सुनने में आता है की संतान अथवा बच्चा बिगड़ गया है या बिगड़ रहा है |बात नहीं मानता ,गलत आदतों का शिकार हो गया है या गलत संगत में पड़ गया है ,गलत या अनुचित कार्य ही उसे पसंद आते हैं |परिवार -खानदान-माँ बाप की प्रतिष्ठा को ठेस पंहुचा रहा है ,अपना भविष्य बिगाड़ रहा है | दुर्जनों के बहकावे में आ जा रहा है ,माँ-बाप या परिवार के विरोधियों के भड़काने में आकर अपने ही लोगों को अपना दुश्मन समझ रहा है ,अपने लोगों की अवहेलना कर रहा है ,अनुचित कार्यों -प्यार-मुहब्बत में रूचि ले रहा है जिसके परिणामों की उसे समझ नहीं रही ,सम्मान की चिंता नहीं है ,भविष्य की चिंता नहीं है ,|यह आज के समय में बहुत अधिक दिख रहा है ,जिसके अनेक कारण है ,नैतिकता का पतन,संस्कार हीनता ,नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव ,कुलदेवता/देवी दोष आदि अनेकानेक कारण हैं इनके और अक्सर रोकथाम के उपाय या समझाना व्यर्थ जाता है |कभी कभी ऐसा भी होता है की हमारे किसी प्रिय यथा पति-पत्नी-संतान आदि पर कोई अन्य व्यक्ति तांत्रिक अभिचार यथा वशीकरण आदि करके अपने अनुकूल कर लेता है और हमारा प्रिय व्यक्ति हमसे विमुख हो उससे जुड़ने और उसकी बात मानने लगता है |


    इन समस्याओं का समाधान तंत्र में है और इन्हें सुधारा जा सकता है |परम पूज्य गुरुदेव द्वारा अपने लम्बे तंत्र अनुभव के आधार पर इस हेतु एक विशिष्ट कवच निर्मित किया जाता है ,जिसकी अपनी विशिष्ट पद्धति है |यह कवच विशिष्ट अनुष्ठान द्वारा निर्मित किया जाता है और विशिष्ट यन्त्र से परिपूर्ण होता है ,जिसके साथ विभिन्न प्रकार के ११ अन्य घटक होते हैं |यह कवच संतान अथवा प्रियजन को आपके अनुकूल या वशीभूत नहीं करता है ,न ही किसी प्रकार से मष्तिष्क पर बोझ डालकर उसे परिवर्तित करता है ,,अपितु इसकी कार्यप्रणाली पूर्णतः प्रकृति की ऊर्जा संरचना के अनुरूप कार्य करती है और धारक के स्वचेतना में परिवर्तन कर देता है ,आतंरिक और शारीरिक ऊर्जा में सकारात्मकता के संचार से व्यक्ति के सोचने-समझने की दृष्टि में परिवर्तन हो जाता है और वह अपना हित -अहित ,अच्छा-बुरा ,भूत-भविष्य-वर्त्तमान के प्रति सजग और सतर्क हो जाता है |अंतरात्मा ,नैतिकता कवच की अलौकिक ऊर्जा से जाग उठती है |नकारात्मक ऊर्जा ,किये-कराये ,तांत्रिक अभिचार आदि का प्रभाव रूक जाता है और व्यक्ति अपने खुद के मष्तिष्क और सोच के अनुरूप अपने हित के लिए कार्य करने लगता है |शरीर और आसपास सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने से संस्कार-परिवार-माता-पिता-पति-पत्नी-धर्म-समाज-इज्जत के प्रति संवेदनशील हो जाता है और उन्नति के साथ भविष्य की और सोचने लगता है |महाविद्या से सम्बंधित कवच होने से एक अलौकिक अदृशीय ऊर्जा उसे प्रेरित करती है फलतः उसके आचार-व्यवहार-सोच-कर्म में परिवर्तन होने लगता है और वह सुधरकर उन्नति की और अग्रसर हो जाता है |…………………………………………………………..हर-हर महादेव 

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  • व्यवसाय /व्यापार वृद्धि कवच

    व्यवसाय /व्यापार वृद्धि कवच

    व्यापार-व्यवसाय वृद्धि कवच 
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               कई बार अच्छा चलता व्यापार अचानक ही मंदा हो जाता है |एक ही व्यवसाय से सम्बंधित कई दुकाने आसपास होने पर भी किसी का व्यवसाय चलता है किसी का नहीं चलता |सामने बहुत बीद होती है पर उसके सामने कोई देखता तक नहीं या कम लोग आते हैं |इसका प्रभाव आर्थिक और मानसिक स्थिति पर भी पड़ता है |क्रमशः आर्थिक मानसिक स्थिति खराब होने लगती है ,स्वास्थय साथ नहीं देता ,स्वभाव में कमियां आने लगती है ,अशांति-कलह-क्रोध-चिडचिडापन आने लगता है |जिस व्यापार में कभी लाभ ही लाभ था आज हानि होने लगती है या अत्यल्प लाभ रह जाता है |यद्यपि इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे ग्रह स्थितियों में बदलाव, किसी द्वारा किया गया अभिचार, पित्र दोष, कुल देवता दोष आदि आदि ,किन्तु मूल कारण नकारात्मक ऊर्जा जो इन सबमे से किसी द्वारा हो सकती है के द्वारा व्यक्ति और व्यापार का घिर जाना होता है |
                 इन समस्याओं से निकलने के कई उपाय तंत्र में हैं ,किन्तु कुछ दुसाध्य है तो कुछ जानकारी और उपलब्धता के अभाव में कार्यरूप में परिणत नहीं हो पाते |इस हेतु सबसे अच्छा तरीका होता है की किसी अच्छे जानकार व्यक्ति की मदद ली जाए और व्यापार-व्यवसाय वृद्धि कवच बनवाकर धारण किया जाए |यह तरीका आसान होता है हालांकि कीमत जरुर अधिक हो सकती है ,जो सम्बंधित जानकार की क्षमता पर निर्भर करती है |यद्यपि आज के प्रचार और मशीनी युग में बाजार अथवा व्यक्तियों द्वारा बहुत प्रकार के यन्त्र -ताबीज दिए जा रहे है ,कितु प्रभाव कितना होता है यह धारक ही जानता है |
             इस समस्या हेतु यदि ताबीज में दीपावली में निर्मित महालक्ष्मी यन्त्र अथवा रविपुष्य योग में छुई-मुई -निर्गुन्डी-गुलमोहर के रस और सेई के कांटे के भस्म से निर्मित व्यापार वृद्धि यन्त्र ,दिव्य मुहूर्त रविपुष्य योग में निष्कासित और पूजित श्वेतार्कमूल ,नागदौनमूल ,हरसिंगारमूल ,सांप के दांत ,हाथी दांत ,गोरोचन आदि विशिष्ट पदार्थ और वनस्पतियों का संयोग करके ताबीज बनाकर धारण किया जाये तो आशानुरूप परिणाम प्राप्त होते हैं |यद्यपि यह बहुत श्रम साध्य और योग्यतापूर्ण कार्य है ,जिसे विषय का अच्छा जानकार और साधक ही कर सकता है |


    ये सभी वस्तुएं -वनस्पतियाँ-यन्त्र मिलकर ऐसा प्रभाव उत्पन्न करते हैं की व्यक्ति पर से और उसके आसपास से नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव हट जाता है |शारीरिक ऊर्जा चक्रों की सक्रियता बढती है |उर्जा-उत्साह-उलास जागता है |विभिन्न नकारात्मक और अभिचार कर्म का प्रभाव रुकता है और जितना भाग्य में लिखा है वह पूरा मिल पाता है |साथ ही ग्रह दोषों, वास्तु दोषों का भी शमन होता है |धीरे धीरे व्यापार-व्यवसाय उन्नति की और अग्रसर होने लगता है |चूंकि इस प्रकार के कवच तांत्रिक और तीब्र प्रभावी होते हैं अतः शुद्धता और सावधानी भी आवश्यक होती है | …………………………………………………………हर-हर महादेव
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  • षोडशी [त्रिपुरसुन्दरी ]यन्त्र

    धारण करें षोडशी यन्त्र और रहें सुखी- संपन्न 
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               षोडशी [त्रिपुरसुन्दरी ]दश महाविद्या में से एक प्रमुख महाविद्या है और श्री कुल की अधिष्ठात्री हैं ,इनकी साधना से धर्म-अर्थ-काम और मोक्ष चारो पुरुषार्थो की प्राप्ति होती है ,ऐसा कुछ भी नहीं जो ये देने में सक्षम नहीं ,ब्रह्मा-विष्णु-रूद्र और यम चारो इनके अधीन हैं ,ये अन्य साधनाओ में भी पूर्णता देने में समर्थ हैं |दुःख-दैन्य-किसी प्रकार की न्यूनता ,अभाव ,पीड़ा ,बाधा सभी को एक ही बार में समाप्त करने में सक्षम हैं ,इनकी साधना से कायाकल्प भी होता है ,यह सौंदर्य ,पुरुषत्व,हिम्मत, साहस ,बल ,ओज ,भी देती हैं |
               षोडशी यन्त्र भगवती त्रिपुरसुंदरी [श्री विद्या ] का यन्त्र है ,जिसमे उनका अपने परिवार देवताओं के साथ वास होता है ,यह यन्त्र विशिष्ट मुहूर्त में और श्री विद्या साधक द्वारा ही निर्मित होता है ,तत्पश्चात प्राण प्रतिष्ठा ,मंत्र जप और हवन से इसे उर्जिकृत किया जाता है ,,यन्त्र धारण से शारीरिक  उर्जा ,धन-संमृद्धि-संपत्ति ,साधन सम्पन्नता ,हिम्मत, साहस, बल, ओज, पौरुष, प्राप्त होता है , ,आय के नए स्रोत बनते है ,अकस्मात् धन प्राप्ति की सम्भावना बनती है, दुःख-दारिद्र्य .रोग-शोक, समाप्त होते हैं ,सुरक्षा प्राप्त होती हैं ,किसी प्रकार की अशुभता का शमन होता है ,सौभाग्य वृद्धि होती है ,ग्रह बाधा का शमन होता है ,रुकावटें दूर होती हैं ,विजय प्राप्त होती है ,यश-मान सम्मान-प्रतिष्ठा ,पुत्र पौत्रादि की उन्नति प्राप्त होती है ,कलह -कटुता का प्रभाव कम होकर खुशहाली प्राप्त होती है ,मानसिक शांति प्राप्त होती है |
    यदि आप पर या घर पर नकारात्मक उर्जाओं का प्रभाव है ,दुःख-दरिद्रता से ग्रस्त हैं ,बनते काम बिगड़ रहे हैं ,रोग-शोक-कलह बढ़ गए हों ,आर्थिक-व्यावसायिक समस्याएं उत्पन्न हों ,अनेकानेक समस्याएं घर-परिवार में उत्पन्न हों तो एक बार अवश्य किसी अच्छे साधक से भोजपत्र पर निर्मित षोडशी यन्त्र चांदी के कवच में धारण करें |आपकी सारी समस्याएं क्रमशः दूर होने लगेंगी |यह अनेक बार हमारे द्वारा अनुभूत और परीक्षित है |हमने अनेकों को विभिन्न समस्याओं में इसे धारण कराया है और अब तक शत-प्रतिशत सफलता मिली है |बिगड़े बच्चों को धारण कराने से उनमे सुधार आया है जो की परिवार के सम्मान को ठेस लगाकर गलत कार्य की और झुके थे ,व्यावसायिक उतार-चढ़ाव से ग्रस्त लोगों को धारण करने पर उनके कार्य-व्यवसाय में स्थिरता प्राप्त हुई है ,पारिवारिक समस्याओं में उत्तम परिणाम प्राप्त हुए हैं |प्रत्येक क्षेत्र में सफलता बढ़ी है |घर के कलह-तनाव को दूर करने में मदद मिली है ,आया के नए स्रोत बनाने अथवा परीक्षा-शिक्षा में सफलता बढ़ी है |अतः यह अनुभूत प्रयोग है |यह अगर श्री विद्या के सिद्ध साधक द्वारा स्वयं बनाया जाता है और षोडशी मंत्र से अभिमंत्रित किया जाता है तो इससे अद्भुत परिणाम मिलते हैं |आश्चर्यजनक रूप से स्थितियां नियंत्रण में आती हैं और लाभ प्राप्त होते हैं जीवन के हर क्षेत्र में |..,………………………………………………हर-हर महादेव 

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  • बगलामुखी यन्त्र /कवच

    महाशक्तिशाली बगलामुखी यन्त्र /कवच
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    सार्वभौम उन्नति ,लाभप्रद ऊर्जा प्रवाह और नकारात्मकता ,भूत -प्रेत के शमन हेतु
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             भगवती बगलामुखी दस महाविद्याओं में से एक प्रमुख महाविद्या और शक्ति हैं ,जिन्हें ब्रह्मास्त्र विद्या या शक्ति भी कहा जाता है |यह परम तेजोमय शक्ति है जिनकी शक्ति का मूल सूत्र -प्राण सूत्र है |प्राण सूत्र ,प्रत्येक प्राणी में सुप्त अवस्था में होता है जो इनकी साधना से चैतन्य होता है ,इसकी चैतन्यता से समस्त षट्कर्म भी सिद्ध हो सकते है ,,बगलामुखी को सिद्ध विद्या भी कहा जाता है ,मूलतः यह स्तम्भन की देवी है पर समस्त षट्कर्म इनके द्वारा सिद्ध होते है और अंततः यह मोक्ष प्रदान करने में सक्षम है 
    ,ताबीज आदि में एक बृहद उर्जा विज्ञानं काम करता है ,जो ब्रह्मांडीय उर्जा संरचना ,क्रिया ,तरंगों ,उनसे निर्मित भौतिक इकाइयों की उर्जा संरचना का विज्ञानं है ,,,इस उर्जा संरचना को ही तंत्र कहा जाता है |इसकी तकनीक प्रकृति की स्वाभाविक तकनीक है ,,,यही तकनीक तंत्र ,योग ,सिद्धि ,साधना में प्रयुक्त की जाती है ,-ताबीज में प्राणी के शारीर और प्रकृति की उर्जा संरचना ही कार्य करती है ,,इनका मुख्या आधार मानसिक शक्ति का केंद्रीकरण और भावना होता है ,,,,प्रकृति में उपस्थित वनस्पतियों और जन्तुओ में एक उर्जा परिपथ कार्य करता है ,मृत्यु के बाद भी इनमे तरंगे कार्य करती है ,,,,इनमे विभिन्न तरंगे स्वीकार की जाती है और निष्कासित की जाती है |जब किसी वास्तु या पदार्थ पर मानसिक शक्ति और भावना को केंद्रीकृत करके विशिष्ट क्रिया की जाती है तो उस पदार्थ से तरंगों का उत्सर्जन होने लगता है ,,,,जिस भावना से उनका प्रयोग जिसके लिए किया जाता है ,वह इच्छित स्थान पर वैसा कार्य करने लगता है,,ताबीज बनाने वाला जब अपने ईष्ट में सचमुच डूबता है तो वह अपने ईष्ट के अनुसार भाव को प्राप्त होता है ,,भाव गहन है तो मानसिक शक्ति एकाग्र होती है ,जिससे वह शक्तिशाली होती है ,यह शक्तिशाली हुई तो उसके उर्जा परिपथ का आंतरिक तंत्र शक्तिशाली होता है और शक्तिशाली तरंगे उत्सर्जित करता है |ऐसा व्यक्ति यदि किसी विशेष समय,ऋतूमॉस में विशेष तरीके से ,विशेष पदार्थो को लेकर अपनी मानसिक शक्ति और मन्त्र से उसे सिद्ध करता है तो वह ताबीज धारक व्यक्ति को उस  भाव की तरंगों से लिप्त कर देता है |यह समस्त क्रिया शारीर के उर्जा चक्र को प्रभावित करती है और तदनुसार व्यक्ति को उनका प्रभाव दिखाई देता है ,साथ ही इनका प्रभाव आस पास के वातावरण पर भी पड़ता है क्योकि तरंगों का उत्सर्जन आसपास भी प्रभावित करता है |
              बगलामुखी यन्त्र माता बगलामुखी का निवास माना जाता है जिसमे वह अपने अंग विद्याओ ,शक्तियों ,देवों के साथ निवास करती है ,अतः यन्त्र के साथ इन सबका जुड़ाव और सानिध्य प्राप्त होता है ,,यन्त्र के अनेक उपयोग है ,यह धातु अथवा भोजपत्र पर बना हो सकता है ,पूजन में धातु के यन्त्र का ही अधिकतर उपयोग होता है ,पर सिद्ध व्यक्ति से प्राप्त भोजपत्र पर निर्मित यन्त्र बेहद प्रभावकारी होता है ,,धारण हेतु भोजपत्र के यन्त्र को धातु के खोल में बंदकर उपयोग करते है ,,जब व्यक्ति स्वयं साधना करने में सक्षम  हो तो यन्त्र धारण मात्र से उसे समस्त लाभ प्राप्त हो सकते है ,|
    यन्त्र /कवच धारण से लाभ
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    . बगलामुखी की कृपा से व्यक्ति की सार्वभौम उन्नति होती है |,
    . शत्रु पराजित होते है ,सर्वत्र विजय मिलती है |
    . ,मुकदमो में विजय मिलती है ,वाद विवाद में सफलता मिलती है |
    . अधिकारी वर्ग की अनुकूलता प्राप्त होती है ,|
    . विरोधी की वाणी ,गति का स्तम्भन होता है |,
    . शत्रु की बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है ,उसका स्वयं विनाश होने लगता है |,,
    . ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है ,|हर कार्य और स्थान पर सफलता बढ़ जाती है |
    . व्यक्ति के आभामंडल में परिवर्तन होने से लोग आकर्षित होते है |,
    . प्रभावशालिता बढ़ जाती है ,वायव्य बाधाओं से सुरक्षा होती है |,
    १०. तांत्रिक क्रियाओं के प्रभाव समाप्त हो जाते है ,सम्मान प्राप्त होता है ,|
    ११. ,परीक्षा ,प्रतियोगिता आदि में सफलता बढ़ जाती है |,
    १२. भूतप्रेतवायव्य बाधा की शक्ति क्षीण होती है क्योकि इसमें से निकलने वाली सकारात्मक तरंगे उनके नकारात्मक ऊर्जा का ह्रास करते हैं और उन्हें कष्ट होता है |,
    १३. मांगलिक और उग्र देवी होने से नकारात्मक शक्तियां इनसे दूर भागती हैं |
    १४. मांगलिक ,पारिवारिक कार्यों में आ रही रुकावट दूर होती है |
    १५. धारक पर से किसी भी तरह के नकारात्मक दोष दूर होते हैं |
    १६. शरीर में सकारात्मक ऊर्जा प्रवाह बढने से आत्मबल और कार्यशीलता में वृद्धि होती है |
    १७. आलस्य ,प्रमाद का ह्रास होता है |व्यक्ति की सोच में परिवतन आता है ,उत्साह में वृद्धि होती है |
    १८. किसी भी व्यक्ति के सामने जाने पर सामने वाला प्रभावित हो बात मानता है और उसका विरोध क्षीण होता है |,
    १९. घर -परिवार में स्थित नकारात्मक ऊर्जा की शक्ति क्षीण होती है |
    २०. नौकरी ,व्यवसाय ,कार्य में स्थायित्व प्राप्त होता है |
    यह समस्त प्रभाव यन्त्र धारण से भी प्राप्त होते है और साधना से भी ,साधना से व्यक्ति में स्वयं यह शक्ति उत्पन्न होती है |,यन्त्र धारण से यन्त्र के कारण यह उत्पन्न होता है |,यन्त्र में उसे बनाने वाले साधक का मानसिक बल ,उसकी शक्ति से अवतरित और प्रतिष्ठित भगवती की पारलौकिक शक्ति होती है जो वह सम्पूर्ण प्रभाव प्रदान करती है जो साधना में प्राप्त होती है |,अतः आज के समय में यह साधना अथवा यन्त्र धारण बेहद उपयोगी है |………..……………………………………………हरहर महादेव  
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  • बगलामुखी यन्त्र और विशेषता

    बगलामुखी यन्त्र
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    भगवती बगलामुखी दस महाविद्याओ में से एक प्रमुख महाविद्या और शक्ति है ,जिन्हें ब्रह्मास्त्र विद्या या शक्ति भी कहा जाता है ,यह परम तेजोमय शक्ति है जिनकी शक्ति का मूलसूत्र ,प्राण सूत्र है ,,प्राण सूत्र प्रत्येक प्राणी में सुप्त अवस्था में होता है जो इनकी साधना से चैतन्य होता है ,इसकी चैतन्यता से समस्त षट्कर्म भी सिद्ध हो सकते है ,,बगलामुखी को सिद्ध विद्या भी कहा जाता है ,मूलतः यह स्तम्भन की देवी है पर समस्त षट्कर्म इनके द्वारा सिद्ध होते है और अंततः यह मोक्ष प्रदान करने में सक्षम है …
    बगलामुखी यन्त्र माता बगलामुखी का निवास माना जाता है जिसमे वह अपने अंग विद्याओ ,शक्तियों ,देवों के साथ निवास करती है ,अतः यन्त्र के साथ इन सबका जुड़ाव और सानिध्य प्राप्त होता है ,,यन्त्र के अनेक उपयोग है ,यह धातु अथवा भोजपत्र पर बना हो सकता है ,पूजन में धातु के यन्त्र का ही अधिकतर उपयोग होता है ,पर सिद्ध व्यक्ति से प्राप्त भोजपत्र पर निर्मित यन्त्र बेहद प्रभावकारी होता है ,,धारण हेतु भोजपत्र के यन्त्र को धातु के खोल में बंदकर उपयोग करते है ,,जब व्यक्ति स्वयं साधना करने में सक्षम न हो तो यन्त्र धारण मात्र से उसे समस्त लाभ प्राप्त हो सकते है ,..


    बगलामुखी की कृपा से व्यक्ति की सार्वभौम उन्नति होती है ,शत्रु पराजित होते है ,सर्वत्र विजय मिलती है ,मुकदमो में विजय मिलती है ,अधिकारी वर्ग की अनुकूलता प्राप्त होती है ,विरोधी की वाणी ,गति का स्तम्भन होता है ,शत्रु की बुद्धि भ्रस्त हो जाती है ,उसका विनाश होने लगता है ,,ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है ,व्यक्ति के आभामंडल में परिवर्तन होने से लोग आकर्षित होते है ,प्रभावशालिता बढ़ जाती है ,वायव्य बाधाओं से सुरक्षा होती है ,तांत्रिक क्रियाओं के प्रभाव समाप्त हो जाते है ,सम्मान प्राप्त होता है ,वाद-विवाद में सफलता मिलती है ,प्रतियोगिता आदि में सफलता बढ़ जाती है ,,यह समस्त प्रभाव यन्त्र धारण से भी प्राप्त होते है और साधना से भी ,साधना से व्यक्ति में स्वयं यह शक्ति उत्पन्न होती है ,यन्त्र धारण से यन्त्र के कारण यह उत्पन्न होता है ,अतः आज के समय में यह साधना अथवा यन्त्र धारण बेहद उपयोगी है … जो लोग शत्रु-विरोधी से परेशान है ,अधिकारी वर्ग से परेशान है ,वायवीय बाधाओं से परेशान हो ,नवग्रह पीड़ा से पीड़ित हो ,,जिनके कार्य क्षेत्र में वार्तालाप -वाद-विवाद आदि अधिक आती हो जैसे अधिवक्ता ,प्रतियोगी परीक्षाओं के इच्छुक लोग ,शास्त्रार्थ ,प्रवचन ,ज्योतिष ,सेल्स ,दलाली आदि से सम्बंधित लोग ,बार-बार रोगादि से परेशान हो ,असाध्य और लंबी बीमारी से पीड़ित हो ,आय के स्रोतों में उतार-चढ़ाव से परेशान हो ,,उन्हें बगलामुखी देवी की साधना -आराधना-पूजा करनी चाहिए अथवा सिद्ध साधक सेबनवाकर बगलामुखी यंत्र [ताबीज] धारण करना चाहिए …………………………हर-हर महादेव 
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  • महालक्ष्मी सर्वतोभद्र यन्त्र

    ::::::::::::::महालक्ष्मी सर्वतोभद्र यन्त्र ::::::::::::::::
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    यन्त्र रचना वर्ष में केवल एक बार दीवाली की रात्री में की जाती है ,इसे भोजपत्र पर अनार की कलम से अष्टगंध की स्याही से लिखा जाता है ,पश्चात पीले आसन पर प्रतिष्ठित कर पूजन-जप के बाद गुगुल का धुप और गुगुल से ही हवंन किया जाता है ,,इस यन्त्र के प्रभाव से यश-सम्मान-संपदा-सफलता सभी कुछ प्राप्त होता है ,दैवी कृपा से व्यक्ति सदैव संमृद्ध और सुखमय जीवन व्यतीत करता है ………………………………………हर-हर महादेव
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  • महावशीकरण श्यामा मातंगी यन्त्र

    महावशीकरण श्यामा मातंगी यन्त्र /कवच और महावशीकरण मन्त्र
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    सभी के लिए उपयोगी
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    मातंगी महाविद्या ,दस महाविद्या में से एक प्रमुख महाविद्या ,,वैदिक सरस्वती का तांत्रिक रूप हैं और श्री कुल के अंतर्गत पूजित हैं |यह सरस्वती ही हैं और वाणी ,संगीत ,ज्ञान ,विज्ञान ,सम्मोहन ,वशीकरण ,मोहन की अधिष्ठात्री हैं |त्रिपुरा ,काली और मातंगी का स्वरुप लगभग एक सा है |यद्यपि अन्य महाविद्याओं से भी वशीकरण ,मोहन ,आकर्षण के कर्म होते हैं और संभव हैं किन्तु इस क्षेत्र का आधिपत्य मातंगी [सरस्वती] को प्राप्त हैं |यह जितनी समग्रता ,पूर्णता ,निश्चितता से इस कार्य को कर सकती हैं कोई अन्य नहीं क्योकि सभी अन्य की अवधारणा अन्य विशिष्ट गुणों के साथ हुई है |उन्हें वशीकरण ,मोहन के कर्म हेतु अपने मूल गुण के साथ अलग कार्य करना होगा जबकि मातंगी वशीकरण ,मोहन की देवी ही हैं अतः यह आसानी से यह कार्य कर देती हैं |मातंगी के तीन विशिष्ट स्वरुप हैं श्यामा मातंगी ,राज मातंगी और वश्य मातंगी |श्यामा मातंगी स्वरुप मातंगी का उग्र स्वरुप है और वशीकरण ,मोहन, आकर्षण को तीब्रता से करता है |इनका मात्र अति विशिष्ट है ,जिसमे माया [देवी] ,सरस्वती [मातंगी ],लक्ष्मी ,त्रिपुरसुन्दरी[श्री विद्या]और काली के बीज मन्त्रों का विशिष्ट संयोग है जिससे मातंगी की मुख्यता के साथ इन सभी शक्तियों की शक्ति भी सम्मिलित होती है जिससे यह विद्या सब कुछ देने के साथ वशीकरण ,आकर्षण में निश्चित सफलता देती है |
    मातंगी ,या श्यामा मातंगी का मंत्र ,मातंगी साधक ही प्रदान कर सकता है ,अन्य किसी महाविद्या का साधक इनके मंत्र को प्रदान करने का अधिकारी नहीं है |स्वयं मंत्र लेकर जपने से महाविद्याओं के मंत्र सिद्ध नहीं होते ,अतः जब भी मंत्र लिया जाए मातंगी साधक से ही लिया जाए ,यद्यापि मातंगी साधक खोजे नहीं मिलते जबकि अन्य महाविद्या के साधक मिल जाते हैं |इनके मंत्र और यंत्र का उपयोग अधिकतर प्रवचनकर्ता ,धर्म गुरु ,tantra गुरु ,बौद्धिक लोग करते हैं जिन्हें समाज-भीड़-लोगों के समूह का नेतृत्व अथवा सामन करना होता है ,ज्ञान विज्ञानं की जानकारी चाहिए होती है |मातंगि के शक्ति से इनमे सम्मोहन -वशीकरण की शक्ति होती है |
    मातंगी का यन्त्र इसमें अतिरिक्त ऊर्जा का कार्य करता है जिसे मातंगी साधक निर्मित करता है भोजपत्र पर |मातंगी का यन्त्र बाजार में धातु का मिल जाता है किन्तु श्यामा मातंगी का मिलना मुश्किल होता है |धातु के यन्त्र की प्रभावित भी संदिग्ध होती है जबकि मातंगी साधक द्वारा निर्मित श्यामा मातंगी के यन्त्र में साधक की शक्ति ,मुहूर्त की शक्ति ,भोजपत्र की पवित्रता ,अष्टगंध की विशिष्टता ,मंत्र की शक्ति ,प्राण प्रतिष्ठा की शक्ति सम्मिलित होती है जिससे यह यन्त्र निश्चित प्रभावकारी हो जाता है |धारण करने पर इससे उत्पन्न विशिष्ट तरंगे व्यक्ति और वातावरण को प्रभावित करती हैं जिससे खुद व्यक्ति में भी परिवर्तन आता है और आसपास के लोग भी प्रभावित होते हैं |इसके वाशिकारक प्रभाव में संपर्क में आने वाले लोग बांध जाते हैं |यद्यपि यन्त्र किसी विशिष्ट व्यक्ति के लिए भी बनाया जा सकता है किन्तु व्यक्ति केन्द्रित न रखा जाए तो यह सब पर प्रभाव डालता है |
    श्यामा मातंगी का मंत्र और यन्त्र प्रकृति की सभी शक्तियों में सर्वाधिक शक्तिशाली वाशिकारक और मोहक प्रभाव रखता है क्योकि यह इसी की शक्ति हैं ही |यद्यपि इनका यन्त्र काफी महंगा पड़ जाता है ,जबकि अन्य वशीकरण के यन्त्र बाजार में बहुत सस्ते मिल जाते हैं ,यह अलग है की अन्य भले असफल हो जाए इनका यन्त्र प्रभाव जरुर देता है |कम से कम अभिमंत्रित यन्त्र भी 7000 से कम में नहीं आएगा यदि वास्तविक प्रभाव लानी है ,क्योकि बहुत कम अभिमन्त्रण अपेक्षित परिणाम नहीं देगा |इस तरह सबके लिए तो नहीं किन्तु जरूरतमंद के लिए यह यन्त्र लाभदायक होता है |
    श्यामा मातंगी यन्त्र का प्रभाव और उपयोग
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    १. यन्त्र धारण करने से वशीकरण की शक्ति बढती है |व्यक्तित्व का प्रभाव बढ़ता है |
    २. अधिकारी वर्ग को अपने कर्मचारियों पर नियंत्रण और उन्हें वशीभूत रखने में आसानी होती है |
    ३.कर्मचारी को अपने अधिकारियों को अनुकूल रखने में मदद मिलती है |
    ४.पति को पत्नी की और पत्नी को पति की अनुकूलता अपने आप प्राप्त होती है और धारण करने वाले का पति या पत्नी वशीभूत होता है |
    ५.सेल्स ,मार्केटिंग ,पब्लिक रिलेसन का कार्य करने वालों को लोगों का अपेक्षित सहयोग मिलता है |
    ६.व्यवसायी को ग्राहकों की अनुकूलता मिलती है और अपरोक्त उन्नति में सहायत मिलती है |
    ७.रुष्ट परिवार वालों को इससे अनुकूल करने में मदद मिलती है |
    ८.वाद-विवाद ,मुकदमे ,बहस ,समूह वार्तालाप ,आपसी बातचीत में सामने वाले की अनुकूलता प्राप्त होती है |
    ९. चूंकि यह महाविद्या यन्त्र है और काली की शक्ति से संयुक्त है अतः नकारात्मक ऊर्जा दूर करता है |
    १०. किसी पर पहले से कोई वशीकरण की क्रिया है तो यन्त्र भरे हुए चांदी कवच को सुबह शाम कुछ दिन एक गिलास जल में डुबोकर वह जल व्यक्ति को पिलाने से वशीकरण का प्रभाव उतरता है |
    ११.किसी भी तरह के इंटरव्यू में परीक्षक पर सकारात्मक प्रभाव देता है |
    १२. व्यक्ति विशेष के लिए बनाया गया यन्त्र धारण और मंत्र जप निश्चित रूप से सम्बंधित व्यक्ति को वशीभूत करता है |
    १३.दाम्पत्य कलह ,पारिवारिक कलह ,मनमुटाव ,विरोध में लोगों को प्रभावित करता है और व्यक्ति के अनुकूल करता है |
    १४.सामाजिक संपर्क रखने वालों को लोगों की अनुकूलता प्राप्त होती है |
    १५.ज्ञान-विज्ञानं-अन्वेषण-परीक्षा-प्रतियोगिता ,प्रवचन ,भाषण से समबन्धित लोगों को सफल होने में मदद करता है |


    इस प्रकार ऐसा कोई क्षेत्र लगभग नहीं जहाँ इस यन्त्र से लाभ न मिलता हो क्योकि लोगों की अनुकूलता की जरुरत सबको होती है और लोग या व्यक्ति प्रभावित हो अनुकूल हों ,वशीभूत हों तो व्यक्ति को लाभ अवश्य होता है |अतः श्यामा मातंगी साधक द्वारा बनाया गया श्यामा मातंगी यन्त्र ,अन्य किसी यन्त्र से अधिक लाभकारी होता है |………………………………………………………………..हर-हर महादेव 
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  • शनि दोष निवारक कवच

    ::::::::::::::::शनि दोष निवारक कवच ::::::::::::::::
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    इस दुनिया में प्रत्येक पांच में से एक व्यक्ति शनि के दुष्प्रभावों अथवा कुप्रभावों से अत्यधिक परेशान है |शनि की पनौती ,ढईया ,अथवा साढ़ेसाती अक्सर सुनाई देते रहते हैं |इनके अतिरिक्त अक्सर महादशा ,अन्तर्दशा अथवा प्रत्यांतार्दशा अलग से परेशान करती रहती है |यही कारण है की शनि को कुंडली में सबसे कष्टकारक गृह माना जाता है ,यद्यपि यह कभी शुभ भी होता है किन्तु अधिकतर कष्ट ही पाते हैं |इसके दुष्प्रभावों का प्रभाव इसके मित्रों राहू- केतु को और भी खतरनाक बना देता है जिन्हें इससे बल मिल जाता है |अर्थात एक शनि अनेक कष्टों का कारण बन जाता है |इसके दुष्प्रभाव के कारण सभी कार्यों में बाधा ,शत्रुओं से परेशानी ,मुकदमो -विवादों में पराजय ,आर्थिक एवं शारीरिक कष्ट ,मानसिक क्लेश ,हड्डियों जोड़ों की समस्या ,पुत्रों- संतानों से कष्ट ,कलह ,आर्थिक तंगी ,कर्ज ,वायव्य बाधा ,बंधू -मित्र -नौकर -कर्मचारी -मजदूर वर्ग से समस्या उत्पन्न होती है |यह व्यक्ति को कंगाल और असहाय बना देता है ,व्यक्ति चाहकर भी कुछ नहीं कर पाता |


    शनि की शान्ति के हजारों उपाय वैदिक और तांत्रिक ग्रंथों में मिलते हैं |कुछ बड़े और अत्यंत कठिन हैं तो कुछ सामान्य के लिए दुरूह |tantra वास्तव में चमत्कारिक लाभ पहुचाता है अगर वास्तव में व्यक्ति जानकार है और उसे इससे सम्बंधित यंत्रों ,वनस्पतियों ,मन्त्रों ,की अच्छी जानकारी हो |विभिन्न वनस्पतियों ,यंत्रों ,मन्त्रों ,और तांत्रिक विधियों के संयोग से ऐसे प्रभावी कवच निर्मित किये जा सकते हैं जो उग्र शनि को शांत और अशुभ को शुभ कर दें | ऐसे में यदि शनि शान्ति के अचूक उपाय के रूप में तंत्रोक्त विधि से निर्मित “शनी दोष निवारक कवच “को अपने गले में धारण किया जाए तो चमत्कारिक लाभ देखने में आता है |शनी की ढईया ,साढ़ेसाती ,पनौती ,दशा-अन्तर्दशा एवं जन्मकुंडली में शनी के दुष्प्रभाव के नाश हेतु और जीवन में सफलताओं ,भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए कवच लाभदायक होता है ,क्योकि शनी को यदि शांत और प्रसन्न रखा जाए तो महाअशुभकारक ग्रह शुभद हो सकता है |इतना तो अवश्य होता है की इसके दुष्प्रभावों में कमी आते ही अन्य ग्रह जो इससे बल पा रहे अशुभता में उनके प्रभाव में परिवर्तन हो जाता है |शुभ ग्रहों के प्रभाव बढ़ जाते हैं और परिवर्तन दिखने लगता है |इस कवच को स्त्री अथवा पुरुष कोई भी धारण कर मनोवांछित लाभ प्राप्त कर सकता है |इस कवच में अनेक शनि से सम्बंधित वनस्पतियों ,उसे प्रभावित करने वाली वनस्पतियों ,मन्त्रों ,यंत्रों ,पदार्थों का विशेष संयोग होता है जो शनी को शांत कर देता है ,उसके प्रभावों की दिशा बदल देता है |उसके अशुभ प्रकार की प्रकृति लाभदायक में बदलती है |फलतः व्यक्ति की स्थिति में परिवर्तन आ जाता है |यह बड़े बड़े अनुष्ठान और बड़े खर्चों से भी बचाता है |……………………………………………………………………..हर-हर महादेव

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  • गणपति कवच

    शीघ्र पासपोर्ट बनवाने हेतु /गृह सौख्य वर्धन हेतु गणपति कवच
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    वर्त्तमान दौर में अथक परिश्रम के उपरांत भी अपने देश में उचित मात्रा में धन प्राप्ति संभव नहीं है |आम आदमी दिन रात मेहनत करके भी पेट भरने लायक ही धन कम सकता है |लेकिन जीवन की अन्यानेक आवश्यकताओं की पूर्ती के लिए प्रचुर मात्रा में धन की आवश्यकता पड़ती है और इतना प्रचुर धन तो सिर्फ विदेश जाकर नौकरी अथवा रोजगार करने पर ही संभव हो सकता है |लेकिन भारत से बाहर किसी भी देश में जाने के लिए उस व्यक्ति के पास पासपोर्ट होना परम आवश्यक है ,किन्तु कानूनी कार्यवाही एवं पेचीदगी के चलते शीघ्रता और आसानी पासपोर्ट नहीं बन सकता है |हमारे विशेषज्ञों ने tantra शास्त्रों के गहन अध्ययन से ऐसे दिव्या अलौकिक कवच ” गणपति कवच “का निर्माण किया है |इस कवच में परम पूज्य गणेश जी की अद्भुत शक्तियां और आशीर्वाद होता है जो की शीघ्र पासपोर्ट बनने में सहायता कर सकता है |
    भगवान गणपति महा मंगल कारी देवता हैं जिनके कवच धारण से मांगलिक अवसरों में आ रही बाधाये समाप्त होती हैं ,गृह सौख्य ,आपसी मधुरता में वृद्धि परिवार में होती है |कलह कम होता है और मतभेद समाप्त होते हैं |एकाग्रता ,शान्ति की वृद्धि होती है और सुरक्षा प्राप्त होती है |उन्नति में आ रही रुकावटें कम होती हैं और भाग्य का पूरा मिलने की संभावना बढ़ जाती है |उपरोक्त सभी कारणों हेतु भी गणपति कवच लाभकारी है |
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