Month: February 2020
  • नवरात्र में दुर्गा साधना दिव्य गुटिका [चमत्कारी डिब्बी ] पर 

    =============प्रचंडा चामुंडा साधना =============
    जैसा की हमने अपने दिव्य गुटिका अथवा चमत्कारी डिब्बी धारक पेज के पाठकों को सूचित किया था की जो गुटिका उन्होंने कभी भी हमसे किसी भी अन्य उद्देश्य से ली हो वे उस उद्देश्य के साथ -साथ उस दिव्य गुटिका पर अनेक प्रयोग अपनी आवश्यकता अनुसार कर सकते हैं और हम क्रमशः उनकी विधि प्रस्तुत करते रहेंगे |इस क्रम में हम नवरात्र पर विशेष रूप से प्रयोग किये जाने वाले कुछ प्रयोगों के क्रम में दुर्गा साधना की सरलतम विधि प्रस्तुत कर रहे हैं जो नकारात्मक ऊर्जा ,भूत-प्रेत ,वायव्य बाधाएं ,तांत्रिक अभिचार ,अनावश्यक वशीकरण ,उच्चाटन ,विद्वेषण आदि की क्रियाओं को हटाने के साथ ही उन्नति ,सफलता ,विजय ,समृद्धि प्रदान करने वाली है |जिन धारकों को लगता हो की उनके ऊपर अथवा उनके दूकान ,व्यवसाय ,घर-परिवार पर किसी तरह की नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव है ,किसी ने कुछ किया -कराया किया हुआ है या अभिचार किया है ,या व्यवसाय -दूकान बाँध दिया है ,या उन्नति रोक दी है ,या अपने आप किसी वायव्य आत्मा परेशान कर रही है ,किसी बच्चे -स्त्री को कोई पीड़ा पहुंचा रहा हो ,घर-परिवार में अनावश्यक बीमारी -दुर्घटना -कष्ट का वातावरण बन रहा हो तो वह धारक इस प्रयोग को नवरात्र में शुरू कर निश्चित दिनों तक क्रिया प्रयोग कर लाभान्वित हो सकते हैं |इन बाधाओं से तो राहत मिलेगी ही सफलता -समृद्धि -उन्नति -विजय के द्वार खुलेंगे ,रुके कार्य पूर्ण होंगे ,मांगलिक -व्यावसायिक -आर्थिक अवसरों में आ रही बाधाएं समाप्त होंगी |
    सामग्री
    ———- मंत्र सिद्ध प्राण प्रतिष्ठायुक्त दुर्लभ दिव्य गुटिका [चमत्कारी डिब्बी ],लाल रंग का वस्त्र ,इत्र ,लकड़ी की चौकी या बाजोट ,चांदी की तश्तरी [ न मिले तो पीतल ], असली सिन्दूर ,लौंग ,इलायची ,लाल फूल ,पान बीड़ा ,फल फूल ,प्रसाद चढाने को दूध की लाल मिठाई ,चावल ,सिक्का ,रुई ,देशी घी का दीपक |
    माला
    ——– मंत्र सिद्ध चैतन्य रुद्राक्ष माला
    आसन
    ——– लाल उनी आसन
    वस्त्र
    ——- लाल रंग की धोती
    दिशा
    ——- पूर्व दिशा
    दिन -समय
    ————–  नवरात्र में सुबह का समय
    जप संख्या अवधि
    ———————- प्रतिदिन जप संख्या समान हो और कोशिश हो की नवरात्र भर की अवधि में ५१ हजार जप संख्या पूर्ण हो जाए |इस हेतु कुछ जप सुबह और कुछ रात्री में निश्चित किया जा सकता है |यदि लगता है की ५१ हजार नहीं हो पायेगा तो २१ ,३१ अथवा ४१ हजार अपनी सुविधानुसार निश्चित करके रोज की मालाओं की संख्या निश्चित कर लें |इस अवधि में पूर्ण सात्विकता ,ब्रह्मचर्य पालन आवश्यक |
    मंत्र
    ——- || ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडाये बिचै ||
    विधि
    ——– नवरात्र में सुबह जिस समय घट स्थापना का मुहूर्त हो आपके समय के अनुसार उस समय पूजन प्रारम्भ करें |यदि कलश स्थापना करते हों तो और अच्छा है अथवा नवरात्र का पाठ कराते हों तो उस पूजन के पूर्ण होने के बाद बैठें |कुछ न करते हों और कुछ न जानते हों तो केवल दी जा रही प्रक्रिया का पालन करें ,आपको सफलता उतनी ही मिलेगी जितनी नवरात्र पाठ और जप आदि से मिलती है |
     स्नानादि से निवृत्त हो शुद्ध हो लाल धोती धारण कर लाल उनी आसन पर पूर्व की और मुख कर अपने सामने लकड़ी के बाजोट या चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं |उस पर बीचोबीच रोली से अष्टदल कमल बनाएं फिर उस पर चांदी की तश्तरी स्थापित करें और तश्तरी के बीचोबीच रोली से या अष्टगंध से ह्रीं बनाएं |अब  उस पर दिव्यगुटिका स्थापित करें |दिव्य गुटिका के पीछे दुर्गा जी का चित्र स्थापित करें |अब दुर्गा जी का और दिव्य गुटिका का पूजन यथाशक्ति करें और जल ,अक्षत ,लाल फूल ,धुप -दीप ,प्रसाद चढ़ाएं ,असली पिला पारायुक्त सिन्दूर गुटिका के अन्दर चढ़ाएं |पान बीड़ा ,लौंग ,इलायची और एक सिक्का अर्पित करें |अब मंत्र सिद्ध चैतन्य रुद्राक्ष माला से उपरोक्त मंत्र का जप निश्चित संख्या में करें [जो आपने रोज के लिए निर्धारित की है ]|इस प्रकार रोज करते हुए अपनी निश्चित की हुई जप संख्या पूर्ण करें | जप पूर्ण हो जाने पर कम से कम ११माला मन्त्रों से हवन अवश्य करें अंत में स्वाहा जोड़ते हुए |इस प्रकार यह अनुष्ठान पूर्ण होता है |अब चांदी की तश्तरी समेत दिव्य गुटिका अपने पूजा स्थान में स्थापित करें और रुद्राक्ष माला गले में धारण करें |गुटिका के बाहर चढ़ाए गए लौंग ,इलायची को उठाकर सुरक्षित रख ले यह किसी भी अभिचार ,पीड़ा ,बाधा के निवारण में मदद करेगा ,पीड़ित को खिलाने पर अथवा बाजू में बाँध देने पर |अन्य शेष सामग्री को बहते जल या तालाब ,कुएं में प्रवाहित कर दें |इस गुटिका पर सिन्दूर अर्पित करते रहें और प्रतिदिन इसकी पूजा सामान्य रूप से करते रहें |संभव हो तो एक -दो माला भी रोज करें |इस प्रयोग को संपन्न करने पर भूत-प्रेत ,वायव्य बाधा ,अभिचार ,किया कराया दूर होगा ,सब प्रकार उन्नति होगी ,शत्रु पराजित होंगे |घर के अनेक दोष समाप्त होंगे |जहाँ भी रखा जाएगा गुटिका वहां के बंधन समाप्त हो जायेंगे |आगे होने वाले अभिचार काम नहीं करेंगे |गुटिका पर चढ़ाए सिन्दूर का तिलक करने पर आकर्षण शक्ति बढ़ेगी ,लोग प्रभावित होंगे ,सब प्रकार से सुरक्षा प्राप्त होगी |लोग वशीभूत होंगे |……………………………………………………….हर-हर महादेव

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  • कैसे चमत्कारी है दिव्य गुटिका [डिब्बी]

                                        हमने अपने ३० वर्षों के तंत्र जीवन के अनुभव के आधार पर और विभिन्न प्रकार की समस्याओं से ग्रस्त लोगों के कष्टों को दृष्टिगत रखते हुए एक दिव्य गुटिका का निर्माण किया है ,जो लगभग अधिकतर सामान्य समस्याओं का निवारण करता है |इसका नाम हमने चमत्कारी दिव्य गुटिका रखा है क्योकि यह अनेक समस्याओं ,अनेक कार्यों में काम करता है |इससे अनेक और कठिन उद्देश्य पूर्ण किये जा सकते हैं बस प्रक्रिया और पद्धति बदल कर जबकि गुटिका या डिब्बी वही रहती है |यह गुटिका या डिब्बी लोगों के लगभग सभी वह कार्य पूर्ण करती है जिसके लिए अलग -अलग पूजा -जप -तप करना पड़ता है या -ताबीज -कवच -जड़ी आदि धारण करना पड़ता है |इसमें वैसे तो २१ वस्तुएं हम सम्मिलित करके एक दिव्य प्रभाव उत्पन्न करते हैं किन्तु सभी का नाम नहीं बता सकते ,क्योकि यह हमारा व्यक्तिगत और गोपनीय अनुसंधान है जिसे हम सार्वजनिक नहीं कर सकते ,क्योकि इसका लोग व्यावसायिक उपयोग कर सकते हैं अथवा इसका दुरुपयोग कर सकते हैं ,चुकी यह सभी षट्कर्म मारण ,मोहन ,उच्चाटन ,वशीकरण ,आकर्षण ,शांति कर्म के उद्देश्य पूर्ण करता है |
                                  हमारे द्वारा निर्मित दिव्य गुटिका या डिब्बी कैसे चमत्कार करती है इसको आप इसमें सम्मिलित कुछ वस्तुओं के विशेषता से समझ सकते हैं |जो वस्तुएं पहचानी जा सकती हैं उनकी विशेषता हम बता रहे हैं जो हमारी गोपनीय वस्तुएं हैं उन्हें पहचाना नहीं जा सकता और उनकी विशेषता भी हम नहीं लिख रहे ,क्योकि इनमे कुछ प्रतिबंधित और दुर्लभ वस्तुएं भी हैं |जिन वस्तुओं की विशेषता लिख रहे उन्ही मात्र से अंदाजा हो जाएगा की यह वास्तव में चमत्कारी है ,इनमे अगर हम अन्य वस्तुओं की विशेषता को भी सम्मिलित कर दें जो गोपनीय हैं तो यह महा चमत्कारी हो जाती है |कुछ वस्तुओं की विशेषता निम्न है —
    हत्था -जोड़ी
    —————
    इसमें उपयोग की गयी हत्थाजोड़ी में माता चामुंडा का वास माना जाता है |इस जड़ी का सर्वाधिक प्रभाव इसकी सम्मोहंनशीलता है | साधक [व्यक्ति] इसे लेकर कही भी जाये उसका विरोध नहीं होगा |सम्बंधित मनुष्य उसके अनुकूल आचरण और व्यवहार करेगा |इस जड़ी के इसी गुण [सम्मोहनशीलता ]के कारण ही बहुत से लोग इसका प्रयोग प्रेम सम्बन्धी मामलों में भी करते हैं ,,|पति-पत्नी के मामलों में यह अत्यंत उपयोगी भी है और सदुपयोग भी |सम्मोहन और वशीकरण [आकर्षण ]के अतिरिक्त इसका प्रयोग धन वृद्धि ,सुरक्षा ,सौभाग्य वृद्धि ,व्यापार बाधा हटाने आदि में भी किया जाता है और बेहद प्रभावी भी है | इसकी सम्पूर्ण विधि पूर्वक प्राण-प्रतिष्ठा इसे अमूल्य बना देती है |धारक या साधक यात्रा ,विवाद ,प्रतियोगिता ,साक्षात्कार ,द्युतक्रीडा ,और युद्धादी में यह साधक की रक्षा करके उसे विजय प्रदान करती है |भूत-प्रेत आदि वायव्य बाधाओं का उसे कोई भय नहीं रहता ,धन-संपत्ति देने में भी यह बहुत चमत्कारी सिद्ध होती है |इस पर विभिन्न प्रकार के वशीकरण-आकर्षण-सम्मोहन के प्रयोग किये जाते हैं ,विदेश यात्रा की रुकावटें दूर करने की क्रियाएं होती हैं ,घर की सुरक्षा की क्रियाएं होती हैं ,धन-संपत्ति-आकस्मिक लाभ सम्बन्धी क्रियाएं होती हैं ,व्यापार वृद्धि प्रयोग होते हैं ,मुकदमे में विजय ,विरोधियों की पराजय की क्रियाएं होती है ,,इसे जेब में रखा जाये तो सम्मान-सम्मोहंशीलता-प्रभाव बढ़ता है ,सामने के व्यक्ति का वाकस्तम्भन होता है ,आकस्मिक आय के स्रोत बनते हैं 
    सियारसिंगी
    ————–
    दूसरी वस्तु सियार्सिंगी शत्रु पराभव ,सामाजिक सम्मान ,शरीर रक्षा ,श्री समृद्धि ,आकर्षण ,वशीकरण ,सम्मोहन ,धन-सम्पदा ,सुख शान्ति के लिए उपयोग की जा सकती है |किसी शुभ तांत्रिक मुहूर्त में प्राण प्रतिष्ठित और अभिमंत्रित सियारसिंगी वाद-विवाद ,युद्ध ,संकट ,आपदा ,से बचानेवाला भी सिद्ध होता है |यह रक्षा कार्यों में अद्भुत सफलतादायक कहा जाता है |इसे धारण करनेवाला व्यक्ति दुर्घटना ,विवाद ,युद्ध अथवा किसी अन्य संकट में पड़ने पर तुरंत ही आप्दामुक्त हो जाता है |इस पर धन-समृद्धि ,वशीकरण ,सम्मोहन ,सुरक्षा से सम्बंधित विभिन्न क्रियाएं भी होती हैं ,जैसी आवश्यकता हो |केवल मंत्र और पद्धति ही बदलती है सियारसिंगी वही रहता है |इसे रखने वाला व्यक्ति जहाँ भी जाता है वहां का वातावरण उसके अनुकूल हो जाता है |
    श्वेतार्क मूल
    ————— श्वेतार्क मूल धन -समृद्धि प्रदायक ,भूत -प्रेत -शाकिनी -डाकिनी ,अभिचार -तंत्र क्रिया ,अल-बला ,नजर दूर करने वाला ,वशिकारक ,राजकीय कृपा ,मान-सम्मान प्रदायक ,रोग-शोक -शत्रु नाशक ,उन्नति और सफलता देने वाला ,विरोधियों को परास्त करने वाला ,इच्छा पूर्ती करने वाला ,
    औदुम्बर मूल
    —————– औदुम्बर की मूल धन -समृद्धि कारक ,उत्तम संतान सुख देने वाला ,यश -सम्मान देने वाला ,सुख -शान्ति -पारिवारिक सौहार्द्र देने वाला ,
    पीली कौड़ी
    ————-  पीली कौड़ी को देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है और धन -समृद्धि के लिए अथवा धन वृद्धि के लिए इसे अधिक कारगर माना जाता है |इससे धन -संपत्ति -समृद्धि शान्ति की वृद्धि होती है |आया वृद्धि और धन संचय के अवसर बढ़ते हैं |धन संचय में आ रही रुकावटें दूर होती हैं |
    गोमती चक्र
    ————– आर्थिक बाधा नाश और स्थायी लक्ष्मी प्राप्त होती है ,स्वास्थय सुरक्षा होती है और स्वास्थ्य -आरोग्य प्राप्त होता है ,शत्रु नाश होता है ,,डूबा -फंसा धन मिलने की संभावना बनती है ,नजर दोष -अभिचार से रक्षा होती है ,विवाद -मुकदमे में विजय प्राप्त होती है ,बुद्धि एकाग्रता में मदद करता है ,भूत -प्रेत -टोन -टोटके का दुष्प्रभाव टोकता है ,भाग्योदय करता है ,नौकरी -कार्य -व्यवसाय में सफलता दिलाता है ,गृह क्लेश का नाश करता है ,संतान बाधा समाप्त करता है , व्यापार -व्यवसाय में वृद्धि होती है |
    श्वेत गूंजा
    ———— श्वेत गुंजा धनदायक होता है |इससे आकस्मिक आय के स्रोत खुलते हैं |लक्ष्मी प्राप्ति होती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है |अभिचार से रक्षा होती है |
    दक्षिणावर्ती शंख
    ——————- दक्षिणावर्ती शंख जहाँ भी रहता है दरिद्रता वहां से पलौँ कर जाती है अर्थात निर्धनता -गरीबी निवारण के लिए यह सर्वश्रेष्ठ वस्तु है |इसके पूजा से धनलाभ ,संपत्ति प्राप्ति होती है |इससे अन्न भण्डार बढ़ता है ,समृद्धि बढती है ,शान्ति परिवार में बढती है ,विद्या -बुद्धि का विकास होता है |दुर्भाग्य ,अभिशाप ,अभिचार ,जादू -टोना ,नजर दोष और दुर्ग्रह प्रभाव समाप्त हो जाते हैं |
    महायोगेश्वरी मूल
    ———————- महायोगेश्वरी की जड़ मंगल पीड़ा को शांत करती है ,बुद्धि का विकास करती है ,नजर दोष -अभिचार दोष को रोकती है ,देवी शक्ति युक्त होने से यह शक्तियाँ व्यक्ति की रक्षा करती है ,धारक को सर्वत्र मान -सम्मान प्राप्त होता है |प्रतियोगिता ,युद्ध ,विवाद ,प्रतिस्पर्धा आदि में विजय प्राप्त होती है |भूत -प्रेत की बाधा समाप्त होती है |धनाभाव -दरिद्रता दूर होता है और सुख -समृद्धि में वृद्धि होती है |अकाल मृत्यु भय से सुरक्षा होती है |वशीकरण प्रभाव बढ़ता है |
    निर्गुन्डी मूल
    ————— निर्गुन्डी मूल लगातार आय उपलब्ध कराने में सहयोगी होती है |आकस्मिक धन प्राप्ति में सहायक होती है ,और इसके होने से लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं |यह नकारात्मक ऊर्जा भी दूर करती है और सुख -समृद्धि भी बढाती है |
    अमरबेल मूल
    —————- अमरबेल वाशिकारक प्रभाव रखने वाली वनस्पति है जो वशीकरण की शक्ति उत्पन्न करती है |आर्थिक समस्या से मुक्ति दिलाती है |व्यापारिक समस्या का निदान में सहायक होती है |यह जहाँ होती है वहां टोटकों का प्रभाव नहीं होता |यह गर्भपात रोकने में भी सहायक होती है किन्तु विधि भिन्न होती है |इसमें ऐसी शक्ति होती है की इच्छित लड़के या लड़की से विवाह भी करा सकती है इतनी प्रबल वशीकरण प्रभाव रखती है |लोकहित में इसकी विधि नहीं दी जा सकती |
    हरसिंगार मूल
    —————– हरसिंगार एक बेहद तीव्र प्रभावकारी वनस्पति है जो धन -समृद्धि -शान्ति -सुरक्षा सब देता है |आकस्मिक आय के स्रोत बनाने और बढाने से यह बेहद कारगर है इसलिए शेयर -सट्टा -लाटरी -जुए -कमोडिटी वालों के लिए लाभदायक अधिक होती है |यह सभी के लिए समृद्धिदायक होती है |पति -पत्नी और परिवार के मनमुटाव कम करती है ,भूत -प्रेतों का उपद्रव शांत करती है |शत्रुओं पर विजय दिलाती है |
    रुद्राक्ष
    ——– रुद्राक्ष का प्रभाव जगजाहिर है ,इसपर अलग से बहुत कुछ लिखने की जरुरत नहीं ,पर यह शुभता बढाता है ,धनात्मक और सकारात्मक ऊर्जा की वृद्धि करता है ,शान्ति लाता है ,अशुभ ग्रहादी प्रभाव को समाप्त करता है |शिव जी की कृपा प्राप्त होती है |भूत -प्रेत -पिशाच -डाकिनी -उपरी हवा -टोन -टोटके -तंत्र मन्त्र के प्रभाव को समाप्त करता है |तेज और ओज में वृद्धि होती है |
    मात्र इन १३ वस्तुओं से अंदाजा लगाया जा सकता है की यह गुटिका क्यों और कैसे चमत्कारी है जबकि इसमें अतिरिक्त ८ वस्तुएं और हैं जो बेहद दुर्लाभ और महत्वपूर्ण हैं ,उनकी अपनी विशेषता और गुण है |इसके अतिरिक्त सभी महत्वपूर्ण मूल और वनस्पतियाँ तंत्र के सबसे महत्वपूर्ण और वर्ष के एक दिन ही उपलब्ध योग रविपुष्य योग में ही निकाली ,प्राण प्रतिष्ठित और अभिमंत्रित होती हैं |अन्य वस्तुएं भी रविपुष्य योग में ही विशेष तांत्रिक पद्धति से प्राण प्रतिष्ठित और अभिमंत्रित होती हैं जिससे इनके गुण कई गुना बढ़ जाते हैं |इसलिए यह गुटिका जहाँ भी राखी जाती है इसकी प्रतिक्रिया शुरू हो जाती है वहां की नकारात्मक उर्जाओं पर |केवल सामान्य पूजा मात्र भी इसका उत्तम लाभ दिलाती है जबकि यदि ठीक से पूजा और मंत्र जप किया जाए तो लक्षित उद्देश्य की पूर्ती संभव हो जाती है |
    इस गुटिका/डिब्बी के उपयोग से धन वृद्धि ,सम्मोहन ,वशीकरण ,वायव्य बाधाओं से सुरक्षा ,शत्रुओं से सुरक्षा ,अभिचार कर्म से सुरक्षा ,संपत्ति संवर्धन ,यात्रा में सुरक्षा ,विवाद-प्रतियोगिता में सफ़लता ,साक्षात्कार में सफ़लता ,द्युतक्रीडा -शेयर -सट्टा -लाटरी -कमोडिटी के कार्यों में सफलता ,आकस्मिक आय स्रोतों में वृद्धि ,सेल्स -मार्केटिंग के कार्यों में सफलता ,घर -मकान -दूकान के बंधन /तंत्र क्रिया की रोकथाम ,शत्रु से अथवा मुकदमे में विजय ,अधिकारी का अनुकूलन -वशीकरण ,गृह दोष-वास्तु दोष का शमन ,जमीन के नीचे की नकारात्मक ऊर्जा शमन ,मकान -दूकान -व्यावसायिक प्रतिष्ठान की नकारात्मक ऊर्जा या शक्ति का शमन ,गृह कलह का शमन ,ग्रह बाधा-अशुभत की समाप्ति ,प्रियजनों का अनुकूलन-वशीकरण किया जा सकता है |इसके अतिरिक्त भी यह गुटिका के अनेकानेक और विशिष्ट उपयोग हैं ,जिनके लिए विविध प्रकार की क्रियाएं की जा सकती है ,इसकी क्षमता की कोई सीमा नहीं है ,उद्देश्य के अनुसार भिन्न क्रियाएं विभिन्न मनोकामनाएं पूर्ण कर सकती हैं |यह गुटिका हमारे वर्षों के tantra क्षेत्र में शोध का परिणाम है और इसके परिणाम अनुभूत हैं |………………………………………………………हर-हर महादेव

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  • दिव्य गुटिका /डिब्बी पर आकर्षण प्रयोग

    [किसी को आकर्षित /अनुकूल करने हेतु ]
    ————————————————-
    कभी -कभी कोई अपना रूठ जाता है ,दूर हो जाता है अथवा दूर चला जाता है |अपने व्यवहार ,बात या मनाने का प्रभाव नहीं पड़ता या ऐसी जगह चला जाता है जहाँ उसका पता नहीं चलता या वह नहीं चाहता की वह आपसे संपर्क रखे ,पर आपको उसकी जरुरत है ,आपको उससे लगाव है तो उसे अनुकूल करने अथवा अपनी ओर आकर्षित करने के लिए आकर्षण प्रयोग की आवश्यकता होती है |आकर्षण प्रयोग वहां किया जाता है जहाँ सीधे किसी व्यक्ति से संपर्क न हो |उसे कुछ खिलाया -पिलाया न जा सके |उससे बात चीत संभव न हो |वह मिलना न चाहता हो या उसे कोई सीधा संपर्क न हो |आकर्षण की क्रिया से लक्षित व्यक्ति में बेचैनी होती है ,उसे खिचाव महसूस होता है ,प्रयोग की गंभीरता पर स्वप्न आते हैं |
    सामग्री
    ——— तेल का दीपक ,चीनी या बताशा या सफ़ेद मिठाई ,मंत्र सिद्ध चैतन्य दिव्य गुटिका ,स्फटिक माला ,लाल रंग की धोती ,लाल कपड़ा ,लाल रंग का आसन ,सिन्दूर ,लौंग जोड़ा ,धुप -अगरबत्ती |
    दिन- समय -दिशा और जप संख्या
    —————————————–नवरात्र अथवा शनिवार की रात्री का समय ,पश्चम दिशा ,११ माला प्रतिदिन ११ दिन तक नवरात्र अथवा शनिवार से शुरू करके |
    मंत्र
    ——- ॐ नमो वैतालाय आदि पुरुषाय अमुकं आकर्षणं कुरु कुरु स्वाहा |
    विधि
    ——- किसी भी शनिवार की रात्री में स्नान कर लाल रंग के आसन पर लाल धोती पहन कर पश्चिमाभिमुख बैठें |सामने लकड़ी के चौकी या बाजोट पर लाल वस्त्र बिछाकर रोली या कुमकुम से अष्टदल कमल बनाएं |उस पर मंत्र सिद्ध चैतन्य दिव्य गुटिका रखें |गुटिका के पीछे भगवान शिव का चित्र रखें |अब गुटिका की यथासंभव पूजा करें |जल ,अक्षत ,पुष्प आदि बाहर चढ़ाएं और सिन्दूर अन्दर  |धुप दीप करें |चीनी ,बताशा और जोड़ा लौंग चढ़ाएं |इसके बाद स्फटिक माला से जिस व्यक्ति का आकर्षण करना हो उसका नाम अमुक की जगह मंत्र में जोड़कर मंत्र जप करें |प्रतिदिन ११ माला के अनुसार कम से कम ११ दिन तक क्रिया करें |
    उम्मीद रखें की व्यक्ति की सूचना मिलेगी या वह आकर्षित होगा |यदि वह किसी गंभीर तंत्र क्रिया के असर में नहीं है अथवा मजबूर नहीं है अथवा जीवित है तो वह जरूर आकर्षित हो आएगा या सूचना देगा |जो रूठकर दूर हुआ है उसका क्रोध शांत होगा और जप करता से लगाव उत्पन्न होगा वापस मिलने का प्रयत्न करेगा |यदि संभव हो तो उससे मुलाक़ात करनी चाहिए |मुलाक़ात पर दिव्य गुटिका पर चढ़ाई हुई बताशा ,लौंग ,चीनी आदि उसे खिलाने पर वाशिकारक प्रभाव उत्पन्न होता है |
    प्रयोग समाप्ति के बाद भी दिव्य गुटिका को पूजा स्थान अथवा सुरक्षित स्थान पर रख दें तथा प्रतिदिन धुप दीप करते रहें |लाभ होता रहेगा |यह अनेक समस्याओं में कारगर है |
    प्रयोग शुरू करने से पूर्व ११ दिन तक ११ माला रोज के हिसाब से ऊपर दिए मंत्र का जप कर इसे पहले सिद्ध कर लें और इसमें अमुक ही रहने दे |सिद्ध करने के बाद प्रयोग में फिर ११ दिन क्रिया करें और तब अमुक में व्यक्ति का नाम जोड़ दें |जब प्रयोग करें तो दिव्य गुटिका के साथ व्यक्ति का चित्र भी रखें ताकि मन उसपर एकाग्र हो सके |दिव्य गुटिका में प्रबल आकर्षण और वशीकरण प्रभाव पहले से होता है जो साधक की एकाग्रता और इस साधना से और बढ़कर लक्षित व्यक्ति को प्रभावित करता है |…………………………………………………..हर-हर महादेव्

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  • कहाँ /कैसे /कब प्रयोग कर सकते हैं दिव्य गुटिका /डिब्बी ?

    दिव्य गुटिका /चमत्कारी डिब्बी के विशिष्ट प्रयोग
    —————————————————-
    दिव्य गुटिका एक चमत्कारी शक्ति युक्त डिब्बी है जिसके अनेकानेक प्रयोग है और इसके लगभग दर्जन भर विशिष्ट प्रयोगों को हम अपने पेजों और वेबसाईट पर दे चुके हैं |यहाँ कुछ सामान्य विभिन्न प्रयोग दे रहे जिसके इसकी शक्ति और प्रयोग की विभिन्नता की जानकारी तथा अंदाजा हो जाए हमारे पाठकों को |यह छोटे प्रयोग विभिन्न कामना पूर्ण करते हैं जबकि गुटिका एक ही रहती है |
    || ॐ ग्लौं गणपतये नमः || इस मन्त्र को कुछ दिन लगातार करने के बाद अथवा दुर्गा ,चामुंडा ,काली के किसी भी मन्त्र को कुछ दिन करने के बाद दिव्य गुटिका पर चढ़ाई जाने वाली सिन्दूर ,अक्षत ,लौंग और इलायची में अद्भुत शक्तियाँ आ जाती हैं |यद्यपि दिव्य गुटिका स्वयं सिद्ध -प्राण प्रतिष्ठित और अभिमंत्रित होती है किन्तु इन मन्त्रों को इसलिए जपते हैं की दिव्य गुटिका की ऊर्जा का सम्बन्ध आपसे हो जाए और वस्तुएं आपकी ऊर्जा के अनुसार इच्छा पूर्ण करें |
    १. दिव्य गुटिका पर मन्त्र जप करके चढ़ाए गए सिन्दूर को जो भी स्त्री लगाएगी तो उसका पति सदैव उसके वश में रहेगा ,भटकेगा नहीं |
    २. चढ़ाई हुई लौंग को जो भी विवाहित स्त्री एक -दो की संख्या में अपने पति को खिलाती रहेगी तो उसका पति ,सदैव उसके वश में रहेगा |
    ३. चढ़ाई गई इलायची में से एक -दो इलायची जो भी विवाहित पुरुष अपनी पत्नी को खिलाता रहेगा तो उसकी पत्नी सदैव उसके वश में रहेगी |
    ४. चढ़ाए गए चावल को अलग कर डिब्बी में भरकर पूजा स्थान अथवा भण्डार गृह में रखने से भण्डार भरा रहेगा और घर में सुख -शान्ति रहेगी |
    ५. अभिमंत्रित दिव्य गुटिका को अन्न भण्डार ,कोष ,गल्ला ,तिजोरी ,आदि धन -संपदा रखने के स्थानों पर रखा जाए तो धन -धान्य की वृद्धि होने लगती है |इस्क्का पूजन वहां रोज अवश्य होना चाहिए यह ध्यान रखना चाहिए |
    ६. प्रतिदिन प्रातःकाल स्नान आदि करके इसका दर्शन ,अभिवादन ,पूजन आदि करने से साधक को यश -सम्मान ,विविध प्रकार के सुख आदि प्राप्त होते हैं |
    ७. प्रतिदिन पूजन अर्चन से नवग्रहों के दोष दूर होते हैं |
    ८. इस दिव्य गुटिका पर चढ़ाए हुए सिन्दूर का तिलक करने से वशीकरण और आकर्षण प्रभाव उत्पन्न होता है ,लोग वशीभूत और आकर्षित होते हैं |व्यक्ति का व्यक्तित्व सम्मोहक होता है |भूत-प्रेत पीड़ा ,वायव्य दोष समाप्त होते हैं |नजर दोष समाप्त होता है |दैनिक कार्यों की सफलता बढ़ जाती है |
    ९. दिव्य गुटिका जहाँ भी रहती है दरिद्रता वहां से पलायन कर जाती है |निर्धनता -गरीबी का निवारण होता है ,आकस्मिक आय स्रोत बनते हैं |अन्न ,धन ,वस्त्र ,ज्ञान और शान्ति प्राप्त होती है |
    १०. दिव्य गुटिका के प्रभाव से जादू -टोना ,अभिचार ,तांत्रिक क्रिया ,नजर ,अभिशाप ,दुर्भाग्य ,और दुर्ग्रह प्रभाव समाप्त होते हैं |मानसिक कष्ट ,शोक -संताप का निवारण होता है |शत्रु और विरोधी परास्त होते हैं |
    ११. दिव्य गुटिका के प्रतिदिन पूजन से शासन की कृपा ,राजकीय अधिकारी की अनुकूलता ,सम्मान ,उन्नति ,कार्यों में सफलता ,दूसरों से स्नेह -मान ,प्राप्त होता है |
    १२. शेयर -सट्टा -लाटरी -कमोडिटी में हानि न हो और लाभ हो उसके लिए दिव्य गुटिका गल्ले अथवा आफिस अथवा पूजा स्थान पर स्थापित कर कम से कम एक माला काली मन्त्र का और एक माला लक्ष्मी मन्त्र का प्रतिदिन करें |
    १३.गृह दोष ,वास्तु दोष ,स्थान दोष ,जमीन के अन्दर की समस्या लगती हो तो दिव्य गुटिका पर काली ,भैरव ,दुर्गा ,चामुंडा के मंत्र जप करें |इन समस्याओं से राहत मिलेगी |
    १४. पित्र दोष ,कुलदेवता /देवी का दोष ,ब्रह्म दोष ,प्रेत दोष आदि की संभावना पर प्रतिदिन एक माला काली अथवा दुर्गा का और एक माला शिव के मंत्र का करें |इन सभी समस्याओं से राहत मिलेगी |
    १५. उद्देश्य के अनुसार दिव्य गुटिका पर किये गए शाबर मन्त्रों का जप त्वरित प्रभाव देता है |वशीकरण ,शान्ति ,सुरक्षा ,आकर्षण ,विजय ,सफलता ,सिद्धि आदि के निमित्त किये गए मन्त्रों का अपेक्षित परिणाम प्राप्त होता है |किसी भी मंत्र का इस पर ग्रहण ,होली ,दीपावली ,अमावश्य को किया गया मन्त्र जप बेहद प्रभावकारी होता है |
    १६. प्रति दिन सामान्य पूजा से ही घर में सुख शान्ति रहती है किन्तु यदि घर में अधिक अशांति हो और घर के सभी सदस्यों में सदैव मतभेद बना रहता हो तो इसकी नियमित पूजा के साथ २१ दिनों में १० माला संख्या रोज रखते हुए निम्न मंत्र का २१ हजार जप करें –
    ॐ मदने मदने देवी मामालियमसंगे देह देह श्री स्वाहा |
    इससे घर में सुख -शान्ति आती है और मतभेद दूर हो जाते हैं |
    १७. किसी लड़के या लड़की की आयु बढती जा रही  हो लेकिन उसका विवाह नहीं हो पा रहा हो तो लड़का या लड़की दिव्य गुटिका पर निम्न प्रयोग खुद करे |प्रतिदिन दिव्य गुटिका की धुप -दीप ,फल-प्रसाद के साथ पूजन कर २१ दिनों में निम्न मंत्र की ५१ हजार जप करे –
    ॐ क्लीं मम् …………..कार्य सिद्धि ,करि करि जनरंजिनी स्वाहा |
    जहाँ खाली स्थान है मंत्र में वहां लड़का या लड़की अपना नाम जोड़ ले |इस प्रयोग से उसका उत्तम विवाह संभव होता है |
    १८. यदि किसी को भूत -प्रेत बाधा अथवा वायव्य बाधा अथवा नजर दोष या अभिचार आदि की पीड़ा है तो रविवार या मंगलवार कोधुप दीप -पूजन करके दिव्य गुटिका पर ११ माला दुर्गा या काली मंत्र का जप करें तथा गुटिका में चढ़ाई हुई लोंगों में से दो लौंग निकालकर हाथ में ले पुनः ११ बार मन्त्र पढ़कर फूंक मारें ,फिर किसी लाल कपडे में बांधकर या ताबीज की भाँती सिलकर पीड़ित को बाजू में बाँध दें |उसकी पीड़ा से राहत मिल जायेगी |अन्य पहले के लौंग अलग कर लें जो अभिमंत्रित हो चुके हैं उन्हें केवल हथेली पर ११ मन्त्र से अभिमंत्रित कर किसी को धारण कराया जा सकता है |[[ ज्ञातव्य है की गुटिका पर पूजन में रोज दो लौंग चढ़ाए जाते हैं जो शक्तिकृत हो जाते हैं ,इन्हें अभिमंत्रित कर उपरोक्त प्रकार अलग रखा जा सकता है ]]|
    १९. वैसे तो दिव्य गुटिका स्वयं ही धन दायक है किन्तु अधिक धन की चाह हो अथवा आर्थिक स्थिति विषम हो चुकी हो और तत्काल राहत की आवश्यकता हो तो गुटिका पर सिक्का अर्पित कर निम्न मंत्र की कम से कम ५ माला रोज करें |शीघ्र ही परिवर्तन दृष्टिगोचर होगा —
    मन्त्र — ॐ चामुंडायै धनं देहि |
    २०. शत्रु परेशान कर रहे हो और कोई राहत मिलने की उम्मीद न दिखे तो दिव्य गुटिका पर काली अथवा चामुंडा के मंत्र जप करें और शत्रु से रक्षा और उनके पराजय की कामना करें |शीघ्र राहत मिलेगी |
    २१. यदि किसी को अनुकूल कर अपना कार्य करवाना हो ,अथवा कोई अधिकारी -कर्मचारी परेशान कर रहा हो अथवा कोई बुरा सोचने वाला हो अथवा कोई अपना आपसे दूर जा रहा हो ,गलत कर रहा हो या गलत सांगत में हो पर आपकी बात न समझता हो या आपकी उपेक्षा करता हो तो उसके लिए वशीकरण का प्रयोग करें दिव्य गुटिका पर — प्रतिदिन दिव्य गुटिका की पूजा करके धुप जलाकर निम्न मन्त्र की एक माला करें — ॐ चामुंडा देवी ……………….. में वश्यं कुरु कुरु स्वाहा |
    रिक्त स्थान में उस व्यक्ति का नाम जोड़ दें |जप साधना के दिनों में संयम -शुद्धताऔर ब्रह्मचारी का पालन करें |कुछ दिनों में लक्षित व्यक्ति अनुकूल हो जाएगा |
    २२. यदि कोई विशेष कामना हो और वह पूर्ण होने में विलम्ब हो रहा हो अथवा उसके पूर्ण होने की उम्मीद न हो तो इस प्रयोग को किया जा सकता है |प्रतिदिन दिव्य गुटिका की पूजा कर धुप-दीप जलाकर दुर्गा जी के नवार्ण मंत्र का जप करें कम से कम ५ माला और अपनी कामना पूर्ण करने की उनसे प्रार्थना करें |उम्मीद करें की आपकी कामना शीघ्र पूर्ण होगी |
    २३. धन -समृद्धि शान्ति की कामना हो तो दिव्य गुटिका पर कमला अर्थात लक्ष्मी के मंत्र बेहद प्रभावकारी हैं क्योकि इसके अधिकतर अवयव धन -समृद्धि कारक हैं |इस हेतु निम्न मन्त्र अधिक लाभकारी है और इसकी कम से कम एक माला रोज की जानी चाहिए |
    ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः ||
    २४. यदि किसी को लगता हो की उनके ऊपर अथवा उनके दूकान ,व्यवसाय ,घर-परिवार पर किसी तरह की नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव है ,किसी ने कुछ किया -कराया किया हुआ है या अभिचार किया है ,या व्यवसाय -दूकान बाँध दिया है ,या उन्नति रोक दी है ,या अपने आप किसी वायव्य आत्मा परेशान कर रही है ,किसी बच्चे -स्त्री को कोई पीड़ा पहुंचा रहा हो ,घर-परिवार में अनावश्यक बीमारी -दुर्घटना -कष्ट का वातावरण बन रहा हो तो वह दिव्य गुटिका पर दुर्गा जी के नवार्ण मन्त्र का अथवा काली जी के मंत्र का जप करे उसकी समस्या का निदान हो जाएगा |………………………………………………………………हर-हर महादेव

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  • कुलदेवता /देवी रुष्ट तो नहीं हैं ?

    कुलदेवता /देवी रुष्ट तो नहीं हैं ?

    कहीं आपके कुलदेवता /कुलदेवी नाराज या निर्लिप्त तो नहीं ?
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                  हिन्दू पारिवारिक आराध्य व्यवस्था में कुल देवता/कुलदेवी का स्थान सदैव से रहा है ,,प्रत्येक हिन्दू परिवार किसी न किसी ऋषि के वंशज हैं जिनसे उनके गोत्र का पता चलता है ,बाद में कर्मानुसार इनका विभाजन वर्णों में हो गया विभिन्न कर्म करने के लिए ,जो बाद में उनकी विशिष्टता बन गया और जाती कहा जाने लगा ,,पूर्व के हमारे  कुलों अर्थात पूर्वजों के खानदान के वरिष्ठों ने अपने लिए उपयुक्त कुल देवता अथवा कुलदेवी का चुनाव कर उन्हें पूजित करना शुरू किया था ,ताकि एक आध्यात्मिक और पारलौकिक शक्ति कुलों की रक्षा करती रहे जिससे उनकी नकारात्मक शक्तियों/उर्जाओं और वायव्य बाधाओं से रक्षा होती रहे तथा वे निर्विघ्न अपने कर्म पथ पर अग्रसर रह उन्नति करते रहे |
               समय क्रम में परिवारों के एक दुसरे स्थानों पर स्थानांतरित होने ,धर्म परिवर्तन करने ,आक्रान्ताओं के भय से विस्थापित होने ,जानकार व्यक्ति के असमय मृत होने ,संस्कारों के क्षय होने ,विजातीयता पनपने ,इनके पीछे के कारण को न समझ पाने आदि के कारण बहुत से परिवार अपने कुल देवता /देवी को भूल गए अथवा उन्हें मालूम ही नहीं रहा की उनके कुल देवता /देवी  कौन हैं या किस प्रकार उनकी पूजा की जाती है ,इनमे पीढ़ियों से शहरों में रहने वाले परिवार अधिक हैं ,कुछ स्वयंभू  आधुनिक मानने वाले और हर बात में वैज्ञानिकता खोजने वालों ने भी अपने ज्ञान के गर्व में अथवा अपनी वर्त्तमान अच्छी स्थिति के गर्व में इन्हें छोड़ दिया या इनपर ध्यान नहीं दिया |
              कुल देवता /देवी की पूजा छोड़ने के बाद कुछ वर्षों तक तो कोई ख़ास अंतर नहीं समझ में आता ,किन्तु उसके बाद जब सुरक्षा चक्र हटता है तो परिवार में दुर्घटनाओं ,नकारात्मक ऊर्जा ,वायव्य बाधाओं का बेरोक-टोक प्रवेश शुरू हो जाता है ,उन्नति रुकने लगती है ,पीढ़िया अपेक्षित उन्नति नहीं कर पाती ,संस्कारों का क्षय ,नैतिक पतन ,कलह, उपद्रव ,अशांति शुरू हो जाती हैं ,व्यक्ति कारण खोजने का प्रयास करता है कारण जल्दी नहीं पता चलता क्योकि व्यक्ति की ग्रह स्थितियों से इनका बहुत मतलब नहीं होता है ,अतः ज्योतिष आदि से इन्हें पकड़ना मुश्किल होता है ,भाग्य कुछ कहता है और व्यक्ति के साथ कुछ और घटता है ,
               कुल देवता या देवी हमारे वह सुरक्षा आवरण हैं जो किसी भी बाहरी बाधा ,नकारात्मक ऊर्जा के परिवार में अथवा व्यक्ति पर प्रवेश से पहले सर्वप्रथम उससे संघर्ष करते हैं और उसे रोकते हैं ,यह पारिवारिक संस्कारों और नैतिक आचरण के प्रति भी समय समय पर सचेत करते रहते हैं ,यही किसी भी ईष्ट को दी जाने वाली पूजा को ईष्ट तक पहुचाते हैं ,,यदि इन्हें पूजा नहीं मिल रही होती है तो यह नाराज भी हो सकते हैं और निर्लिप्त भी हो सकते हैं ,,ऐसे में आप किसी भी ईष्ट की आराधना करे वह उस ईष्ट तक नहीं पहुँचता ,क्योकि सेतु कार्य करना बंद कर देता है ,,बाहरी बाधाये ,अभिचार आदि ,नकारात्मक ऊर्जा बिना बाधा व्यक्ति तक पहुचने लगती है ,,कभी कभी व्यक्ति या परिवारों द्वारा दी जा रही ईष्ट की पूजा कोई अन्य बाहरी वायव्य शक्ति लेने लगती है ,अर्थात पूजा न ईष्ट तक जाती है न उसका लाभ मिलता है ,,ऐसा कुलदेवता की निर्लिप्तता अथवा उनके कम शशक्त होने से होता है ,,
         कुलदेवता या देवी सम्बंधित व्यक्ति के पारिवारिक संस्कारों के प्रति संवेदनशील होते हैं और पूजा पद्धति ,उलटफेर ,विधर्मीय क्रियाओं अथवा पूजाओं से रुष्ट हो सकते हैं ,सामान्यतया इनकी पूजा वर्ष में एक बार अथवा दो बार निश्चित समय पर होती है ,यह परिवार के अनुसार भिन्न समय होता है और भिन्न विशिष्ट पद्धति होती है ,,शादी-विवाह-संतानोत्पत्ति आदि होने पर इन्हें विशिष्ट पूजाएँ भी दी जाती हैं ,,,यदि यह सब बंद हो जाए तो या तो यह नाराज होते हैं या कोई मतलब न रख मूकदर्शक हो जाते हैं और परिवार बिना किसी सुरक्षा आवरण के पारलौकिक शक्तियों के लिए खुल जाता है ,परिवार में विभिन्न तरह की परेशानियां शुरू हो जाती हैं ,,अतः प्रत्येक व्यक्ति और परिवार को अपने कुल देवता या देवी को जानना चाहिए तथा यथायोग्य उन्हें पूजा प्रदान करनी चाहिए, जिससे परिवार की सुरक्षा -उन्नति होती रहे |………………….हर-हर महादेव  
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