Month: February 2025
  • भोजपत्र यन्त्र विशेष क्यों ?

    भोजपत्र यन्त्र विशेष क्यों ?

    क्यों अधिक प्रभावी होता है भोजपत्र निर्मित यन्त्र धारण करना ?

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             विभिन्न धर्मो ,समुदायों में यन्त्र रचना और धारण प्राचीन काल से चला आ रहा है ,यन्त्र विभिन्न आकृतियों अथवा अंको के एक विशिष्ट संयोजन होते है ,जिनसे एक विशिष्ट उर्जा विकिरित होती है अथवा जिनमे एक विशिष्ट उर्जा संग्रहीत होती है ,जो धारक को विशिष्ट रूप से प्रभावित करती है ,यंत्रो को देवी देवताओ का निवास भी माना जाता है ,यह आंकिक भी होते है अथवा न समझ में आने वाली आकृतियों के भी ,फिर भी इनके विशिष्ट अर्थ होते है ,यंत्रो की पूजा भी की जाती है और धारण भी किया जाता है ,अथवा अन्य रूप से भी उपयोग किया जाता है ,

                 यंत्रो का निर्माण वुभिन्न सामग्रियों ,वस्तुओ पर होता है ,कागज़,भोजपत्र ,धातु ,पत्थर ,कपडे आदि पर भी ,,हिन्दू परम्परा के अनुसार भोजपत्र को परम पवित्र माना जाता है ,अन्य माध्यमो की अपेक्षा भोजपत्र पर निर्मित यन्त्र को प्रमुखता दी जाती है क्योकि इसके साथ कई विशिष्टताये जुड़ जाती है ,जो अन्य माध्यमो में कुछ कम पायी जाती है ,

                 भोजपत्र स्वयं एक सकारात्मक उर्जा आकर्षित करने वाला माध्यम होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर करता है ,इस पर यन्त्र निर्माण में प्रयुक्त होने वाले अष्टगंध अथवा पंचगंध  की अपनी अलग विशेषता होती है  ,इनमे गोरोचन आदि प्रयुक्त होने वाले पदार्थ नकारात्मक शक्तियों को दूर कर सकारात्मकता को आकर्षित करते है ,यन्त्र निर्माण के समय साधक की विशिष्टता ,उसकी एकाग्रता ,आत्मबल ,उसके हाथो से निकलने वाली तरंगे ,उसकी अपनी सिद्धिया /शक्तिया यन्त्र को अलग बल प्रदान करती है ,निर्माणोंपरांत यन्त्र की प्राण प्रतिष्ठा और उस पर सम्बंधित इष्ट का जप इसे बहुत विशेष बना देता है,यन्त्र निर्माण हेतु निर्दिष्ट और चयनित मुहूर्तो का अपना अलग प्रभाव होता है  ,इसे विशिष्ट साधक ही बना और प्राण प्रतिष्ठित कर सकता है ,जिसके पास सम्बंधित विषय की क्षमता हो ,,इस प्रकार बना यन्त्र धारक पर  शीघ्र और सकारात्मक प्रभाव डालता है ,यन्त्र से उत्सर्जित होने वाली तरंगे व्यक्ति और आसपास के वातावरण को प्रभावित करती है जिससे परिवर्तन होते है और व्यक्ति लाभान्वित होता है|उपरोक्त कोई भी लाभ धातु के यंत्रों में जो की फैक्टरियों में बनते हैं ,उनसे नहीं मिलते |यही कारण है की अक्सर साधक ,तंत्र जानकार ,इन विद्याओं की समझ रखने वाले भोजपत्र पर बने यंत्रों को ही प्राथमिकता देते हैं जिनसे बनाने वाले साधक की शक्ति भी सीधे जुडी होती है |धातु के यन्त्र पूजन हेतु और भोजपत्र के यन्त्र धारण हेतु तंत्र जानकार उपयोग करते हैं | ……………………………………………………………………हर-हर महादेव 

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  • ताबीज भाग्य बदल सकता है

    ताबीज भाग्य बदल सकता है

    :::::::::::::एक ताबीज आपकी किस्मत पलट सकता है::::::::::::::

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             यन्त्र -मंत्र ,कवच ,ताबीज ,विभिन्न आकृतियाँ ,धार्मिक चिन्ह ,लाकेट ,प्रतीक विश्व के  हर धर्म में किसी न किसी रूप में मान्य हैं और बहुतायत में इनका प्रयोग होता है |इनकी शक्ति से मनुष्य हमेशा से लाभान्वित होता रहा है |भारतीय परंपरा में इनके विलक्ष्ण प्रयोग और लाभ मिलते रहे हैं |यह व्यक्ति के हर समस्या का समाधान करने में सक्षम हैं और इनपर भारतीय मनीषियों ने बहुत शोध किये हैं |व्यक्ति अधिकतम कैसे सुखी हो सकता है ,कैसे उसके कष्ट कम किये जा सकते हैं जिससे वह अधिक से अधिक सुखी रहते हुए अपना लक्ष्य प्राप्त कर सके |इन्ही आधारों में दैवीय यन्त्र और कवच -ताबीज भी हैं |विभिन्न आकृतियों और निश्चित आकारों में निश्चित ऊर्जा होती है और विभिन्न शब्दों में भिन्न शक्तियाँ |इनके प्रयोग से विशिष्ट ऊर्जा उत्पन्न कर उसका प्रयोग विभिन्न लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए करना ही इनका मूल उद्देश्य होता है |इनसे भौतिक ही नहीं आध्यात्मिक लक्ष्य भी प्राप्त किये जाते हैं |यह व्यक्ति को उसके भाग्य प्राप्ति में आ रही रुकावटों को हटाते हैं और नयी उरा प्रदान करते हैं |उच्च स्तर का साधक यदि इन्हें निर्मित कर दे तो वह भाग्य में भी हस्तक्षेप कर देता है |न साधकों -सिद्धों की शक्तियों की कोई सीमा रही है न इन कवच -ताबीजों की | 

                ताबीज आदि के निर्माण में एक वृहद् ऊर्जा वज्ञान काम करता है ,जिसे प्रकृति का विज्ञानं कहा जाता है |यह मूल ब्रह्मांडीय विज्ञान है जिसे हमारे ऋषि मुनि जानते थे और मानव की भलाई के लिए इसे उपयोगी बनाया |एक विशिष्ट क्रिया ,विशिष्ट पद्धति और विशिष्ट समय में विशिष्ट वस्तुओं के संयोग से विशिष्ट व्यक्ति द्वारा निर्मित ताबीज और यंत्र में एक विशिष्ट शक्ति का समावेश हो जाता है ,जो किसी भी सामान्य व्यक्ति को चमत्कारिक रूप से प्रभावित करती है जिससे उसके कर्म ,स्वभाव ,सोच ,व्यवहार ,ग्रहों के प्रति संवेदनशीलता ,प्रारब्ध ,शारीरिक रासायनिक क्रिया सब कुछ प्रभावित होने लगता है ,जिससे उसके आगामी भविष्य पर प्रभाव पड़ता है |

                   ताबीज  में प्राणी के शरीर और प्रकृति की उर्जा संरचना ही कार्य करती है ,,इनका मुख्य आधार मानसिक शक्ति का केंद्रीकरण और भावना के साथ विशिष्ट वस्तुओं-पदार्थों-समय का तालमेल होता है| ,,,,प्रकृति में उपस्थित वनस्पतियों और जन्तुओ में एक उर्जा परिपथ कार्य करता है ,मृत्यु के बाद भी इनमे तरंगे कार्य करती है और निकलती रहती हैं ,,,,इनमे विभिन्न तरंगे स्वीकार की जाती है और निष्कासित की जाती है |जब किसी वस्तु या पदार्थ पर मानसिक शक्ति और भावना को केंद्रीकृत करके विशिष्ट क्रिया की जाती है तो उस पदार्थ से तरंगों का उत्सर्जन होने लगता है ,,,,जिस भावना से उनका प्रयोग जिसके लिए किया जाता है ,वह इच्छित स्थान पर वैसा कार्य करने लगता है ,|

    उदहारण के लिए ,,,किसी व्यक्ति को व्यापार वृद्धि के लिए कुछ बनाना है ,तो इसके लिए इससे सम्बंधित वस्तुएं अथवा यन्त्र विशिष्ट समय में विशिष्ट तरीके से निकालकार अथवा निर्मित करके जब कोई उच्च स्तर का साधक अपने मानसिक शक्ति के द्वारा उच्च शक्तियों के आह्वान के साथ जब प्राण प्रतिष्ठा और अभिमन्त्रण करता है तो वस्तुगत उर्जा -यंत्रागत उर्जा के साथ साधक की मानसिक और आध्यात्मिक ऊर्जा का ऐसा अद्भुत संयोग बनता है की निर्मित ताबीज से तीब्र तरंगें निकालने लगती हैं ,इन्हें जब सम्बंधित धारक को धारण कराया जाता है तो यह ताबीज उसके व्यापारिक चक्र [लक्ष्मी या संमृद्धि के लिए उत्तरदाई ] को स्पंदित करने लगता है ,दैवीय प्रकृति की शक्ति आकर्षित हो धारक से जुड़ने लगती है और उसकी सहायता करने लगती है ,अनावश्यक विघ्न बाधाएं हटाने लगती है ,साथ ही मन और मष्तिष्क  भी प्रभावित होने लगता है ,जिससे उसके निर्णय लेने की क्षमता ,शारीरिक कार्यप्रणाली ,दैनिक क्रिया कलाप बदल जाते है ,उसके प्रभा मंडल पर एक विशेष प्रभाव पड़ता है ,जिससे उसकी आकर्षण शक्ति बढ़ जाती है ,बात-चीत का ढंग बदल जाता है ,सोचने की दिशा परिवर्तित हो जाती है ,कर्म बदलते हैं ,,प्रकृति और वातावरण में एक सकारात्मक बदलाव आता है और व्यक्ति को लाभ होने लगता है,, |

    यह एक उदाहरण है ,ऐसा ही हर प्रकार के व्यक्ति के लिए हो सकता है उसकी जरुरत और कार्य के अनुसार ,|यहाँ यह अवश्य ध्यान देने योग्य होता है की यह सब तभी संभव होता है जब वास्तव में साधक उच्च स्तर का हो ,उसके द्वारा निर्मित ताबीज खुद उसके हाथ द्वारा निर्मित हो ,सही समय और सही वस्तुओं से समस्त निर्माण हो ,|ऐसा न होने पर अपेक्षित लाभ नहीं हो पाता| ताबीज और यन्त्र तो बाजार में भी मिलते है और आजकल तो इनकी फैक्टरियां सी लगी हैं ,जो प्रचार के बल पर बेचीं जा रही हैं ,कितना लाभ किसको होता है यह तो धारक ही जानता है |

           ताबीज बनाने वाले साधक की शक्ति बहुत मायने इसलिए रखती है की  जब वह अपने ईष्ट में सचमुच डूबता है तो वह अपने ईष्ट के अनुसार भाव को प्राप्त होता है ,,भाव गहन है तो मानसिक शक्ति एकाग्र होती है ,जिससे वह शक्तिशाली होती है ,यह शक्तिशाली हुई तो उसके उर्जा परिपथ का आंतरिक तंत्र शक्तिशाली होता है और शक्तिशाली तरंगे उत्सर्जित करता है |ऐसा व्यक्ति यदि किसी विशेष समय,ऋतू-मॉस में विशेष तरीके से ,विशेष पदार्थो को लेकर अपनी मानसिक शक्ति और मन्त्र से उसे सिद्ध करता है तो वह ताबीज धारक व्यक्ति को अच्छे-बुरे भाव की तरंगों से लिप्त कर देता है |यह समस्त क्रिया शारीर के उर्जा चक्र को प्रभावित करती है और तदनुसार व्यक्ति को उनका प्रभाव दिखाई देता है| यह ताबीजें इतनी शक्तिशाली होती हैं की व्यक्ति का प्रारब्ध तक प्रभावित होने लगता है |अचानक आश्चर्यजनक परिवर्तन होने लगते हैं |

                आपने अनेक कहानियाँ सुनी होंगी की अमुक चीज अमुक साधू ने दिया और ऐसा हो गया |अथवा यह सुना होगा की अमुक तांत्रिक ने अमुक छीजें कुछ बुदबुदाकर फेंकी व्यक्ति को लाभ हो हया |यह बहुत छोटे उदाहरण हैं |जिस तरह साधना से ईश्वरीय ऊर्जा आती है उसी तरह यह मानसिक एकाग्रता से वस्तु और यन्त्र में स्थापित भी होती है |तभी तो मूर्तियाँ और यन्त्र प्रभावी होते हैं |यही यन्त्र ताबीजों में भरे जाते हैं और प्रभाव देते हैं |यह किसी  यन्त्र विशेष का प्रचार नहीं अपितु वैज्ञानिक विश्लेष्ण का प्रयास है और हमने इसे बहुत सत्य पाया है |यही कारण है की हम अपने सभी अनुष्ठानों में भोजपत्र पर यंत्र अवश्य बनाते हैं और साधना समाप्ति पर उन्हें धारण करते भी हैं और कराते भी हैं |यह धारण मात्र से साधना जैसा प्रभाव देते हैं |यह जानकारी हमारे पेज के पाठकों के लिए |

               आजकल एक चलन फैशन सा हो गया है की ज्योतिषियों -साधकों -तांत्रिकों द्वारा लिखे जा रहे लेखों -पोस्टो पर भद्दे और मूर्खतापूर्ण टिपण्णी आते हैं |कभी कहा जाता है की इनमे इतनी शक्ति है तो अपना भाग्य क्यों नहीं बदल लेते ,कभी कहा जाता है की ज्योतिषी अपना भाग्य क्यों नहीं सुधार लेता |क्यों यह लोग फेसबुक ,इंटरनेट पर लिखते फिर रहे हैं |किसी ताबीज ,यन्त्र ,कवच ,डिब्बी ,गुटिका आदि के लेख को प्रचार से जोड़ा आता है ,भले उसमे वैज्ञानिक सूत्र हों |ऐसे लोगों को हम जबाब देना चाहेंगे कि एक सामान्य व्यक्ति ,सामान्य साधक ,सामान्य ज्योतिषी को उसके भाग्य से अधिक नहीं मिल सकता जबकि सामान्य जीवन में इतनी नकारात्मक उर्जाओं और शक्तियों का प्रभाव होता है की किसी को उसके भाग्यानुसार भी नहीं मिलता |लेख लिखने वाले को उसके भाग्यानुसार मिलता है किन्तु यह उसका कर्म है की वह लोगों को बताता है ,समझाता है |यदि वह यह न करे तो लोगों का भला ही न हो |यदि वह मात्र खुद के लिए सोचे तो करोड़ों इन विद्याओं के लाभ से वंचित रह जायेंगे |अक्सर ज्योतिषी के कथन गलत होते हैं और भाग्य अनुसार परिणाम नहीं आते|ज्योतिषी सही होता है किन्तु नकारात्मक उर्जाओं के प्रभाव से भाग्यावारोध होने से लोगों को उनके भाग्य के अनुरूप नहीं मिलता |यह कवच ,ताबीज ,यन्त्र ,डिब्बी ,गुटिका इसी नकारात्मक उर्जाओं ,शक्तियों को हटाते हैं और सकारात्मक उर्जाओं को बढ़ा देते हैं जिससे भाग्य का पूरा मिलने लगता है और बड़ा परिवर्तन महसूस होता है |………………………………………………………हर-हर महादेव

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  • चमत्कारी डिब्बी /गुटिका

    चमत्कारी डिब्बी /गुटिका

    चमत्कारी- दिव्य गुटिका /डिब्बी  

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    स्वयं अपनी समस्या दूर करने का एक अलौकिक अस्त्र

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                 आज के समय में हर घर -परिवार में किसी न किसी रूप में नकारात्मक शक्तियों /उर्जाओं का प्रभाव है जिसके कारण जो समस्याएं होती हैं वह तो होती ही हैं किन्तु जो भाग्य में होता है वह भी नहीं मिलता |भाग्य का प्रभाव भी नकारात्मक उर्जाओं द्वारा रोक दिया जाता है |बुरे प्रभाव बढ़ जाते हैं जबकि अच्छे परिणाम कम मिलते हैं |नकारात्मक ऊर्जा की प्रकृति कुलदेवता दोष की हो सकती है,पित्र दोष की हो सकती है ,किसी द्वारा किया गया टोना -टोटका -तांत्रिक अभिचार हो सकता है ,जमीन में दबी कोई वस्तु या हड्डी या कंकाल या राख आदि हो सकती है ,कहीं बाहर से आई कोई आत्मा या प्रेत हो सकता है |मकान में वास्तु दोष हो सकता है या राहू -केतु -शनी के दुष्प्रभाव हो सकते हैं |इनका निवारण जानने -उपाय करने के लिए लोग यहाँ वहां भटकते रहते हैं और प्रयास करने पर भी अपेक्षित परिणाम नहीं पाते |हम इन समस्याओं के निवारण का प्रयास तंत्र के माध्यम से अपनी जानकारी के अनुसार करने का प्रयत्न कर रहे हैं |हमने कुछ दुर्लभ वस्तुओं को संगृहीत कर इनकी काट निकाली है |इन वस्तुओं में विभिन्न दैवीय शक्तियाँ ,भिन्न भिन्न उर्जायें होती हैं जो तंत्र में हजारों वर्ष से उपयोग की जाती रही हैं |इन्हें इस प्रकार संयोजित किया गया है की यह एक साथ मिलकर ऐसा प्रभाव उत्पन्न करें की किसी की व्यक्तिगत समस्या से लेकर परिवार की सामूहिक समस्या तक का निवारण हो सके |

               उपरोक्त समस्याओं के अतिरिक्त सामान्यरूप से हर किसी की चाह होती है की लोग उनकी और आकर्षित हों ,देखकर खींचे चले आयें ,जो मिले प्रभावित हो ,जहाँ जाए किसी काम से वहां सफलता मिले ,कहीं किसी समस्या-परेशानी का सामना न करना पड़े |हर इंसान के अन्दर यह कामना होती है की उसका व्यक्तित्व ऐसा आकर्षक हो की लोग चुम्बक की तरह खिचे चले आये ,उसका व्यतित्व सम्मोहक हो |हर व्यक्ति पर उसका प्रभाव पड़े ,कार्य-व्यवसाय के क्षेत्र के लोग अनुकूल हों ,सफलता मिले ,उन्नति हो |यह असंभव नहीं है |यह संभव है तंत्र के माध्यम से |इस हेतु थोड़े से नियम और सावधानी के साथ यदि हमारे द्वारा निर्मित दिव्य गुटिका /डिब्बी का प्रयोग किया जाए |यह गुटिका तंत्र की उन दिव्य चमत्कारी वस्तुओं से परिपूर्ण हैं जो किसी के भी जीवन में चमत्कार कर सकती है |इसकी क्षमता की कोई सीमा नहीं है |इससे वह सबकुछ पाया जा सकता है जो एक सामान्य व्यक्ति की इच्छा होती है ,यद्यपि इसके अनेक अलौकिक प्रयोग भी है ,जो असंभव कार्य भी कर सकते हैं पर उनसके लिए इसपर विशिष्ट क्रियाएं करनी होती हैं |कोई क्रिया न भी की जाए और सामान्य पूजा के साथ पवित्रता राखी जाए तो उपरोक्त लाभ मिलते ही हैं |

                  दिव्य गुटिका या चमत्कारी डिब्बी विशिष्ट वस्तुओं -वनस्पतियों -पदार्थों का एक अद्भुत संग्रह है अर्थात एक डिब्बी में २५ अलौकिक शक्तियां रखने वाली वस्तुएं इकठ्ठा की गयी है |हर वस्तु उसके लिए उपयुक्त विशिष्ट मुहूर्त में तांत्रिक पद्धतियों से निकाली -प्राण प्रतिष्ठित और अभिमंत्रित की गयी होती है ,इसके बाद फिर इसे सम्मिलित रूप से विशिष्ट मुहूर्त में अभिमंत्रित किया जाता है जिससे इसकी अलौकिकता और बढ़ जाती है | इस चमत्कारिक दिव्य गुटिका के मुख्य अवयव रवि पुष्य योग में निष्काषित अथवा अभिमंत्रित -प्राण प्रतिष्ठित हत्थाजोड़ी और सियार्सिंगी होते है ,जिनके साथ श्वेतार्क मूल ,नागदौन मूल ,महायोगेश्वरी मूल ,एरंड मूल ,अमरबेल मूल ,हरसिंगार मूल ,सफ़ेद गुंजा ,अपराजिता मूल ,गोरोचन ,रुद्राक्ष ,पिली कौड़ी ,औदुम्बर मूल ,दक्षिणावर्ती शंख ,गोमती चक्र आदि विभिन्न २५ अद्भुत ,विशिष्ट और चमत्कारिक वनस्पतियाँ और वस्तुएं होती हैं ,जो मिलकर ऐसा अद्भुत प्रभाव उत्पन्न करते हैं की यह चमत्कारिक प्रभाव युक्त हो जाती है |[क्षमा के साथ सम्पूर्ण वस्तुओं का नाम नहीं दे सकते क्योकि यह हमारा व्यक्तिगत शोध है ]|

                यह सभी वस्तुएं विशिष्ट उच्च स्तर के साधक द्वारा विशिष्ट मुहूर्त में प्राण-प्रतिष्ठित और अभिमंत्रित होती हैं ,जबकि उपयोग किये गए सामान भी विशिष्ट मुहूर्त में ही विशिष्ट तांत्रिक पद्धति से निष्कासित और प्राप्त किये हुए होते हैं |उपरोक्त वस्तुओं की उपयुक्त और विशिष्ट मुहूर्त में विशिष्ट तांत्रिक साधक द्वारा की गयी तांत्रिक क्रिया के बल पर यह गुटिका अति शक्तिशाली वशिकारक-आकर्षक -सुरक्षाप्रदायक ,धन-संमृद्धि प्रदायक हो जाती है साथ ही इसमें काली [चामुंडा ]की प्रतिष्ठा होने से यह नकारात्मक ऊर्जा और नकारात्मक शक्तियों पर तीव्र प्रतिक्रिया करती है |इससे निकलने वाली तरंगे साथ रखने वाले धारक के साथ साथ ही आसपास के लोगों को भी प्रभावित करती है, जिससे धारक को उपरोक्त लाभ मिलने लगते हैं |इस गुटिका की एक विशेषता है की यह आपके घर की या आपकी नकारात्मक ऊर्जा को सामने ला देती है |यदि आप किसी नकारात्मक प्रभाव से ग्रस्त हैं तो वह कुछ दिक्कतें उत्पन्न कर सकती हैं ,क्योकि उन्हें यह महसूस होता है की उन्हें निकाला या हटाया जा रहा है ,इसलिए शुरू के कुछ समय वह उत्पात मचा सकते हैं जिससे आप यह सोचें की यह सब इस गुटिका के कारण हो रहा है |यदि कुछ समय धैर्य से निकल गया तो सारी परिस्थितियां नियंत्रण में आ जाती हैं |

            इसमें उपयोग की गयी हत्थाजोड़ी में माता चामुंडा का वास माना जाता है |इस जड़ी का सर्वाधिक प्रभाव इसकी सम्मोहंनशीलता है | साधक [व्यक्ति] इसे लेकर कही भी जाये उसका विरोध नहीं होगा |सम्बंधित मनुष्य उसके अनुकूल आचरण और व्यवहार करेगा |इस जड़ी के इसी गुण [सम्मोहनशीलता ]के कारण ही बहुत से लोग इसका प्रयोग प्रेम सम्बन्धी मामलों में भी करते हैं ,,|पति-पत्नी के मामलों में यह अत्यंत उपयोगी भी है और सदुपयोग भी |सम्मोहन और वशीकरण [आकर्षण ]के अतिरिक्त इसका प्रयोग धन वृद्धि ,सुरक्षा ,सौभाग्य वृद्धि ,व्यापार बाधा हटाने आदि में भी किया जाता है और बेहद प्रभावी भी है | इसकी सम्पूर्ण विधि पूर्वक प्राण-प्रतिष्ठा इसे अमूल्य बना देती है |धारक या साधक यात्रा ,विवाद ,प्रतियोगिता ,साक्षात्कार ,द्युतक्रीडा ,और युद्धादी में यह साधक की रक्षा करके उसे विजय प्रदान करती है |भूत-प्रेत आदि वायव्य बाधाओं का उसे कोई भय नहीं रहता ,धन-संपत्ति देने में भी यह बहुत चमत्कारी सिद्ध होती है |इस पर विभिन्न प्रकार के वशीकरण-आकर्षण-सम्मोहन के प्रयोग किये जाते हैं ,विदेश यात्रा की रुकावटें दूर करने की क्रियाएं होती हैं ,घर की सुरक्षा की क्रियाएं होती हैं ,धन-संपत्ति-आकस्मिक लाभ सम्बन्धी क्रियाएं होती हैं ,व्यापार वृद्धि प्रयोग होते हैं ,मुकदमे में विजय ,विरोधियों की पराजय की क्रियाएं होती है ,,इसे जेब में रखा जाये तो सम्मान-सम्मोहंशीलता-प्रभाव बढ़ता है ,सामने के व्यक्ति का वाकस्तम्भन होता है ,आकस्मिक आय के स्रोत बनते हैं

                   दूसरी वस्तु सियार्सिंगी शत्रु पराभव ,सामाजिक सम्मान ,शरीर रक्षा ,श्री समृद्धि ,आकर्षण ,वशीकरण ,सम्मोहन ,धन-सम्पदा ,सुख शान्ति के लिए उपयोग की जा सकती है |किसी शुभ तांत्रिक मुहूर्त में प्राण प्रतिष्ठित और अभिमंत्रित सियारसिंगी वाद-विवाद ,युद्ध ,संकट ,आपदा ,से बचानेवाला भी सिद्ध होता है |यह रक्षा कार्यों में अद्भुत सफलतादायक कहा जाता है |इसे धारण करनेवाला व्यक्ति दुर्घटना ,विवाद ,युद्ध अथवा किसी अन्य संकट में पड़ने पर तुरंत ही आप्दामुक्त हो जाता है |इस पर धन-समृद्धि ,वशीकरण ,सम्मोहन ,सुरक्षा से सम्बंधित विभिन्न क्रियाएं भी होती हैं ,जैसी आवश्यकता हो |केवल मंत्र और पद्धति ही बदलती है सियारसिंगी वही रहता है |इसे रखने वाला व्यक्ति जहाँ भी जाता है वहां का वातावरण उसके अनुकूल हो जाता है | इसी प्रकार इस गुटिका में शामिल २५ वस्तुओं में से हर वस्तु का अपना एक अलग और विशिष्ट बहुआयामी प्रभाव है |इनके बारे में लिखने पर कई पोस्ट कम हो जायेंगे |वैसे भी यह हमारे गोपनीय खोज हैं अतः सभी वस्तुओं और उनके प्रभावों के बारे में बता पाना भी संभव नहीं |

                  प्रतिदिन प्रातः काल स्नानादि के बाद ,अपने ईष्ट पूजा के साथ ही इस गुटिका /डिब्बी को भी भगवती स्वरुप मानकर पूजा कर दिया जाता है |धुप-दीप के साथ ,इसके साथ ही इस पर सिन्दूर और लौंग भी चढ़ाया जाता है |फिर इसे बंद करके इसे जेब में रख के कार्य व्यवसाय पर भी जाया जा सकता है और पूजा स्थान पर भी रहने दिया जा सकता है |यदि कार्य व्यवसाय पर साथ ले जाते हैं तो लाभ तो अधिक होता है पर थोड़ी पवित्रता का ध्यान रखना होता है ,अपवित्र हाथों से इसे न छुआ जाए और अशुद्ध और अपवित्र अथवा सूतक वाले स्थानों पर इसे न ले जाएँ |शाम को घर आने पर इसे वापस पूजा स्थान पर रख दें |इस पर यदि “ॐ नमश्चंडिकाये नमः ” मंत्र का जप रोज १०८ बार किया जाए तो इसका पूर्ण प्रभाव मिलता है |

                 इस गुटिका/डिब्बी के उपयोग से धन वृद्धि ,सम्मोहन, वशीकरण ,वायव्य बाधाओं से सुरक्षा ,शत्रुओं से सुरक्षा ,अभिचार कर्म से सुरक्षा ,संपत्ति संवर्धन ,यात्रा में सुरक्षा ,विवाद-प्रतियोगिता में सफ़लता ,साक्षात्कार में सफ़लता ,द्युतक्रीडा -शेयर -सट्टा -लाटरी -कमोडिटी के कार्यों में सफलता ,शत्रु से अथवा मुकदमे में विजय ,अधिकारी का अनुकूलन -वशीकरण ,गृह दोष-वास्तु दोष का शमन ,गृह कलह का शमन ,ग्रह बाधा-अशुभत की समाप्ति ,प्रियजनों का अनुकूलन-वशीकरण ,व्यावसायिक -व्यापारिक बाधा अथवा बंधन निवारण ,व्यापार वृद्धि ,पित्र दोष -कुलदेवता /देवी दोष की शान्ति ,मकान -जमीन के नीचे के दोषों का शमन ,टोने -टोटके -तांत्रिक अभिचार ,किये -कराये का शमन ,घर में भूत -प्रेत का शमन किया जा सकता है |इसके अतिरिक्त भी यह गुटिका के अनेकानेक और विशिष्ट उपयोग हैं ,जिनके लिए विविध प्रकार की क्रियाएं की जा सकती है ,इसकी क्षमता की कोई सीमा नहीं है ,उद्देश्य के अनुसार भिन्न क्रियाएं विभिन्न मनोकामनाएं पूर्ण कर सकती हैं |यह गुटिका हमारे वर्षों के tantra क्षेत्र में शोध का परिणाम है और इसके परिणाम अनुभूत हैं |यह सामान्य पूजा पर अपना प्रभाव दिखाती ही है किन्तु कोई विशिष्ट उद्देश्य होने पर अलग पूजा विधान भी हमने कई उद्देश्यों के लिए बनाकर अपने ब्लॉग पर प्रकाशित कर रखे हैं ताकि डिब्बी के धारक अपने उद्देश्य अनुसार पूजन और साधना कर अपना लक्ष्य प्राप्त कर सकें |

    विशेष – यह चमत्कारी डिब्बी /गुटिका अनेक समस्याएं समाप्त कर सकती है ,नकारात्मक प्रभाव हटा आपके भाग्य का अधिकतम दिला सकती है किन्तु यह स्वयं आपका भाग्य नहीं बदल सकती |हम कोई झूठा आश्वासन नहीं देना चाहते की यह आपको राजा बना देगी |आपके भाग्य में जो है उसका अधिकतम दिला सकती है किन्तु भाग्य तो केवल आपके प्रयास ही बदल सकते हैं |यह आपकी सहायक हो सकती है किन्तु श्रम और कर्म आपके होंगे |हमने बहुत शोध ,श्रम और संतुलन के साथ इसका निर्माण लोगों की भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ती और उनके मार्ग में आ रही बाधाओं को हटाने के लिए किया है और इसके बहुत अच्छे परिणाम मिलें हैं |………………………………………………………………हर-हर महादेव 

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