में कोई बुराई नहीं |
व्यक्ति एकाग्र हुआ तो |ईश्वरीय उर्जा या शक्ति प्राप्त करने ,उसे महसूस करने के लिए सबसे पहले तो खुद को उससे जोड़ना होना ,उसमे डूबना होगा ,उसका चिंतन करना होगा ,उस पर एकाग्र होना होगा ,खुद को उसका और उसको अपना समझना होगा ,इतना जुड़ाव महसूस करना होगा की वह अवचेतन तक जुड़ जाए |यहाँ महत्त्व वस्तुओं ,पदार्थों ,पूजन सामग्रियों ,आडम्बरों ,मंत्र संख्याओं का नहीं होता अपितु महत्त्व भावना ,एकाग्रता और चाहत का होता है |ईश्वरीय ऊर्जा महसूस करने के लिए गुरु की भी कोई बहुत आवश्यकता नहीं ,यद्यपि साक्षात्कार और सिद्धि बिन गुरु के मुश्किल होती है |हमने जो भी पद्धतियाँ सोची हैं अथवा विकसित की हैं इस हेतु उन्हें बिन गुरु के किया जा सकता है ,हाँ सुरक्षा कवच की जरूरत पड़ती है जो सिद्ध साधक से बनवाकर धारण किया जा सकता है |कुछ पद्धतियाँ ईश्वरीय
ऊर्जा महसूस करने के लिए निम्न हो सकती हैं |
के अनुसार यह पद्धति भूत –भविष्य –वर्तमान देखने तक की शक्ति प्रदान कर सकती है |इससे गणपति की कृपा प्राप्त होती है और विघ्न बाधाएं समाप्त हो खुशहाली प्राप्त होती है |इस साधना हेतु मात्र १० से १५ मिनट का समय पर्याप्त होता है और इसे बिन गुरु के भी किया जा सकता है ,मात्र सुरक्षा कवच धारण करके |
का एक इलाज ” है |इस पद्धति में मात्र काली जी के एक हजार नामों को एक विशेष समय –पद्धति से पढने या पाठ करने के बारे में बताया गया है |इससे भगवती की कृपा मिलती है और उनकी ऊर्जा महसूस भी होती है |यह साधना भी बिन गुरु के मात्र सुरक्षा कवच के साथ की जा सकती है |
आपको सबसे अधिक प्रिय हों |इस चित्र को पूजा स्थान या अपने कमरे में अपने बैठने के स्थान के स्थान पर इस प्रकार लगाएं की चित्र आपके आँखों के सामने पड़े |जो आपको समझ आता तो उतनी पूजा प्रतिदिन करें ,स्नान जरुर करें रोज और भोजन पूर्व ईष्ट को मन की भावना से अथवा उपलब्ध संसाधनों से भोजन जरुर कराएं |स्नान बाद सामान्य पूजन ,नैवेद्य चढ़ाकर आप अपने ईष्ट से अपनी मनोकामना कहें |आप अपने ईष्ट में गुरु ,माता –पिता ,भाई –बहन ,मित्र की भावना करें |यह जरुर याद रखें की रोज आपकी मनोकामना बदलनी नहीं चाहिए ,कम से कम एक महीने तक एक प्रकार की मनोकामना स्थिर रहनी चाहिए |आप जिस रूप में अपने ईष्ट को एक बार मान लें फिर उसे कभी नहीं बदलें और हमेशा उसी रूप में उसे याद करें |अब आप अपने ईष्ट के चित्र पर एकटक एकाग्र हो जाएँ और कल्पना रखें की वह आपकी ओर देख रहे हैं ,आपको आशीर्वाद दे रहे हैं ,मुस्करा रहे हैं ,बात कर रहे या बात करेंगे |कुछ समय बाद ही चित्र बदलता लगेगा ,ईष्ट की भाव भंगिमा ,स्वरुप बदलेगा ,और कुछ समय बाद आपको लगेगा की चित्र साकार होकर ईष्ट में बदल गया |एकाग्रता अच्छी होने पर यह एक सप्ताह से १५ दिन में संभव है |जिस दिन ईष्ट साकार रूप ले लिया ,या आपकी एकाग्रता इतनी हुई की आप खुद का अस्तित्व मात्र एक मिनट भूल जाएँ और ईष्ट के स्वरुप में खो जाएँ तो ईष्ट की कृपा आपको मिल जायेगी और उसकी ऊर्जा आपसे जुडकर आपकी सोच ,भावना के अनुरूप काम करने लगेगी ,आपकी शारीरिक ,मानसिक और चक्रों की स्थिति में परिवर्तन के साथ साथ आसपास का वातावरण तक उसकी ऊर्जा से संतृप्त होने लगेगा और आपको उसकी शक्ति ,ऊर्जा महसूस होने लगेगी |यहाँ हम यह
चेतावनी देना चाहेंगे की ईष्ट का चुनाव हमेशा सौम्य शक्ति में से ही करें यदि आपके पास सक्षम गुरु नहीं हैं या आपने सुरक्षा कवच नहीं पहना |इस प्रकार के ईष्ट में हनुमान ,भैरव ,काली ,बगला ,दुर्गा ,रूद्र ,दक्षिणावर्ती सूंड के गणेश आदि का चयन न करें ,यदि आप इनमे से या ऐसी उग्र शक्ति का चयन करते
हैं तो सुरक्षा कवच जरुर पहने या सक्षम गुरु की अनुमति के बाद ही यह करें | यदि नकारात्मक ऊर्जा से पीड़ित नहीं हैं तो सौम्य शक्ति से आपकी मनोकामना पूर्ण हो जायेगी |
की चंचलता के बीच यह मुश्किल होता है |जब तक ईष्ट का जुड़ाव अवचेतन स्तर पर नहीं होता उसका साक्षात्कार ,वार्तालाप संभव नहीं होता |एक बार ऐसा होने पर फिर वह चेतन स्तर और स्वरुप पर भी सक्रीय हो जाता है |यद्यपि सभी पद्धतियों में अवचेतन की भूमिका होती ही है किन्तु हमारी इस पद्धति में अवचेतन अत्यंत महत्त्वपूर्ण हो जाता है |आप अपने ईष्ट का एक सौम्य सुंदर का चित्र अपने पूजन स्थान में स्थापित करें |एक क्रिस्टल बाल टेनिस की गेंद के आकार का लें और उसे चित्र के सामने स्थापित करें ,बाल के पीछे ईष्ट के रंग के अनुकूल रंग का एक जीरो वाट का बल्ब इस प्रकार जलाएं की पूरे बाल का रंग उसी रंग से छा जाए |ईष्ट का चित्र और क्रिस्टल बाल इस प्रकार रखें की यह आँखों की सीध में २ फुट की दूरी पर रहें |ईष्ट की सामान्य पूजा प्रतिदिन होनी चाहिए |पूजन बाद अपने ईष्ट को कुछ पल एकटक देखें फिर क्रिस्टल बाल पर ध्यान एकाग्र करें और उसमे ईष्ट के चित्र को उभारने का प्रयत्न करें |शुरू में क्रिस्टल बाल बिलकुल सादा नजर आएगा ,फिर एकाग्रता बढने के साथ भिन्न भिन्न चित्र ,लोगों के आकार ,दृश्य दिखेंगे |यह सब अवचेतन की तस्वीरें होंगी |समय के साथ ईष्ट भी दिखेगा ,फिर स्थिर होगा ,फिर आशीर्वाद दे सकता है ,वार्तालाप हो सकता है ,साक्षात्कार हो सकता है |यह क्रिया प्रतिदिन १० से १५ मिनट करें |यदि आपकी एकाग्रता ,याददास्त ,विश्वास ,श्रद्धा अच्छी है तो इस क्रिया में साक्षात्कार भी मुश्किल नहीं |इस साधना की सफलता ,शक्ति की कोई सीमा नहीं |भूत –भविष्य –वर्त्तमान के दर्शन संभव हैं |इस साधना में किसी अवचेतन के जानकार से कुछ लाइनें लिखवाकर प्रतिदिन उनका तीन –चार बार १० मिनट दोहराव करने से ईष्ट आपके अवचेतन से जुड़ जाता है और उस पर श्रद्धा –विश्वास बढ़ता है |ईष्ट के अवचेतन से जुड़ने पर एक अदृश्य ऊर्जा ईष्ट की आपसे जुड़ जाती है |उसके गुण ,आकृति स्थायी होने लगते हैं |इस साधना में सुरक्षा कवच अति आवश्यक होता है जिससे शरीर की सुरक्षा रहे |कभी कभी खुद को भूलने ,ईष्ट में डूबने पर भयात्मक या रोमांचक अनुभूतियाँ होती हैं ,ऐसे में सुरक्षा कवच जरुरी होता है |इस साधना हेतु तब तक उग्र देवी –देवता का चयन न करें ,जब तक सक्षम गुरु न हों अन्यथा सौम्य शक्ति का ही चयन करें |
रात्री का समय साधना के लिए चयनित कीजिये |साधना समय अपने आसन के चारो ओर सिन्दूर –कपूर –लौंग –घी की सहायता से पेस्ट बना घेरा बनाएं |अब अपनी पद्धति अनुसार या कुछ नहीं पता तो सामाय
पूजन कर धुप दीप जलाकर बिलकुल धीमे स्वरों में ,धीरे धीरे लंबा खींचते हुए पूर्ण नाद के साथ ईष्ट के मंत्र की दो माला जप करें |मन्त्र जप में जल्दबाजी न हो ,रटते हुए जप न हो ,समय न देखें इस समय ,घड़ी –मोबाइल साथ न हो ,स्थान पर प्रकाश धीमा हो ,जप समय ध्यान मूर्ती पर हो |जप के बाद इष्ट के अनुकूल हवन सामग्री से कुण्ड में हवन करें और अपना जप हवन अपने ईष्ट को समर्पित करें |यह क्रम लगातार कम से कम ५१ दिन चले |इस सामान्य सी लगने वाली साधना से आपके ईष्ट की कृपा आपको प्राप्त हो जायेगी और उसकी ऊर्जा ,शक्ति आपको अपने आसपास और स्वयं में महसूस होने लगेगी |यहाँ तक की आप द्वारा अभिमंत्रित जप ,वस्तु लोगों का भला करने लगेगी |खुद के कल्याण के साथ
दूसरों का कल्याण भी कुछ हद तक आप करने में सक्षम होंगे |यहाँ भी उग्र शक्ति का चयन आप बिना सक्षम गुरु के न करें |यहाँ विस्तृत पद्धति इसलिए नहीं दी जा रही की इस प्रकार की साधना साधक ही कर सकते हैं जिन्हें अपने गुरु से जानकारी लेनी चाहिए या जो पहले से काफी कुछ जानते हैं ,साथ
ही हामारा लेख सामान्य लोगों को ईश्वरीय ऊर्जा महसूस कराने से सम्बंधित है |
–एकाग्रता –निष्ठां –आत्मबल की |इन्हें करके खुद की समस्या हल करने के साथ दूसरों की भी समस्याएं हल की जा सकती हैं और हमेशा के लिए पंडित ,मौलवी ,ज्योतिषी ,तांत्रिक के चक्कर से मुक्ति पायी जा सकती है |आज की समस्या तो हल होगी ही भविष्य में कोई समस्या उत्पन्न ही नहीं होगी ,जो भाग्य में है उसका अधिकतम मिलेगा |साक्षात्कार की स्थिति आते ही भाग्य तक बदल जाएगा |……………………………………………हर–हर महादेव

Leave a Reply