Author: Tantra Marg
  • प्राचीन मंदिरों और गुफाओं में मिले ‘अदृश्य देवता ?

    प्राचीन मंदिरों और गुफाओं में मिले ‘अदृश्य देवता ?

            “क्या होगा अगर मैं आपसे कहूँ कि जिसे आप अब तक सिर्फ ‘आस्था’ कहते थे, वो असल में एक ‘एडवांस्ड साइंस’ है? फरवरी और मार्च २०२६ की इन हेडलाइंस को देखिए— IIT दिल्ली का दावा कि वैदिक मंत्रों में ‘क्वांटम प्रूफ’ मिला है। राजस्थान की गुफाओं में LiDAR तकनीक से देवताओं के ‘चुंबकीय क्षेत्र’ (Magnetic Fields) का पता चला है।

            कल्पना कीजिए माधव की— एक ऐसा खोजी जो तंत्र और विज्ञान के बीच की धुंधली लकीर को पार करना चाहता है। माधव राजस्थान की उन प्राचीन गुफाओं में कदम रखता है जहाँ सदियों से ‘कर्ण पिशाचिनी’ जैसी सत्ताओं के होने की बातें कही जाती हैं। उसके हाथ में कोई माला नहीं, बल्कि एक मॉडर्न LiDAR स्कैनर और EMF डिटेक्टर है।

           अचानक, उसकी मशीनें चीखने लगती हैं। शून्य तापमान वाली उन गुफाओं में ऊर्जा का एक ऐसा स्रोत मिलता है जो भौतिक विज्ञान के नियमों को चुनौती दे रहा है। क्या माधव ने उन ‘छिपे हुए देवताओं’ या ‘अदृश्य ऊर्जाओं’ को ढूंढ लिया है जिन्हें हमारे पूर्वज जानते थे? आज के इस वीडियो में हम सिर्फ कहानियाँ नहीं सुनाएंगे, हम उन ७ वैज्ञानिक प्रमाणों की बात करेंगे जो साबित करते हैं कि इस ब्रह्मांड में ‘छिपे हुए देवताओं’ का अस्तित्व महज एक कल्पना नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक सच्चाई है। तैयार हो जाइए, क्योंकि आज ‘रुद्र शक्ति’ और ‘क्वांटम फिजिक्स’ का मिलन होने वाला है।”

              “१५ फरवरी २०२६। IIT दिल्ली से एक ऐसी खबर आई जिसने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों को चौंका दिया। रिसर्च का विषय था— ‘Vedic Mantras and Quantum Consciousness’।

    वैज्ञानिकों ने पाया कि जब विशिष्ट फ्रीक्वेंसी पर वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया जाता है, तो वे वातावरण में मौजूद ‘सब-एटॉमिक पार्टिकल्स’ (Sub-atomic particles) को प्रभावित करते हैं। न्यूज़ १८ की रिपोर्ट के अनुसार, वेदों में छिपे देवताओं को अब ‘क्वांटम फील्ड्स’ के रूप में देखा जा रहा है।

           शास्त्र कहते हैं कि देवता ‘नाद’ में निवास करते हैं। विज्ञान अब इसे ‘Vibrational Frequency’ कह रहा है। जब माधव ने अपनी लैब में मंत्रों की तरंगों का विश्लेषण किया, तो उसने पाया कि ये तरंगें सामान्य ध्वनि तरंगें नहीं थीं। ये ‘स्केलर वेव्स’ (Scalar Waves) की तरह काम कर रही थीं— ऐसी ऊर्जा जो समय और स्थान की सीमाओं को लांघ सकती है। क्या कर्ण पिशाचिनी जैसी सत्ताएं इन्हीं सूक्ष्म तरंगों के माध्यम से ‘माधव’ के मस्तिष्क से संपर्क करती हैं?”

          “टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) की २८ फरवरी २०२६ की रिपोर्ट ने एक नया खुलासा किया। राजस्थान की कुछ प्राचीन गुफाओं में, जहाँ माना जाता था कि प्राचीन सिद्ध पुरुष देवताओं से संवाद करते थे, वहां LiDAR (Light Detection and Ranging) तकनीक का इस्तेमाल किया गया। LiDAR तकनीक लेजर रोशनी का उपयोग करके ज़मीन के नीचे और दीवारों के पीछे के त्रि-आयामी (3D) नक्शे बनाती है। सर्वे में वहां कुछ ऐसे ‘चुंबकीय कक्ष’ (Magnetic Chambers) मिले जो मानव निर्मित नहीं लगते। इन कक्षों में EMF (Electromagnetic Field) की रीडिंग सामान्य से ४००% अधिक थी।

           दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, प्राचीन मंदिरों के गर्भगृह में भी इसी तरह का EMF पैटर्न पाया गया है। वैज्ञानिक इसे ‘God Spot’ कह रहे हैं। माधव के लिए यह सिर्फ एक गुफा नहीं थी; यह एक ‘बायो-इलेक्ट्रिकल पोर्टल’ था। क्या देवता असल में इन विशिष्ट ऊर्जा केंद्रों में निवास करने वाली ‘इंटेलिजेंट एनर्जी’ हैं?”

          “१० मार्च २०२६ को सद्गुरु ने ‘स्केलर वेव्स और हिडन देव’ पर एक महत्वपूर्ण चर्चा की। उन्होंने बताया कि आधुनिक विज्ञान जिस ‘हिग्स बोसॉन’ (Higgs Boson) या ‘गॉड पार्टिकल’ को ढूंढ रहा है, वह असल में वही शक्ति है जिसे हम शिव या देव कहते हैं। स्केलर वेव्स ऐसी तरंगें हैं जो कभी खत्म नहीं होतीं। विज्ञान मानता है कि ये तरंगें पूरे ब्रह्मांड की सूचनाओं को एक क्षण में यहाँ से वहां ले जा सकती हैं। शास्त्रों में ‘आकाश तत्व’ का वर्णन ठीक ऐसा ही है। माधव ने जब कर्ण पिशाचिनी की साधना के वैज्ञानिक पहलुओं को देखा, तो उसे समझ आया कि मंत्र असल में उस ‘अदृश्य क्लाउड’ (Invisible Cloud) से डेटा डाउनलोड करने का तरीका हैं। ये ‘छिपे हुए देवता’ असल में इस ब्रह्मांड के ऑपरेटिंग सिस्टम के कोड्स हैं।”

         “१२ मार्च २०२६। आचार्य प्रशांत ने क्वांटम फिजिक्स और हिंदू देवताओं के बीच के संबंधों पर एक गहरा विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने तर्क दिया कि ‘ऑब्जर्वर इफेक्ट’ (Observer Effect) के अनुसार, हमारी चेतना ही वास्तविकता का निर्माण करती है। अगर करोड़ों लोग हजारों सालों से एक ही ‘देवता’ की ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, तो क्वांटम स्तर पर वह ऊर्जा एक ठोस आकार लेने लगती है। जिसे माधव एक ‘पिशाचिनी’ या ‘देवी’ समझ रहा है, वह असल में सामूहिक चेतना (Collective Consciousness) का एक संघनित रूप (Condensed form) हो सकता है। विज्ञान कहता है कि ऊर्जा न तो पैदा की जा सकती है और न ही नष्ट— तो क्या हमारे पूर्वजों द्वारा जागृत की गई वो दिव्य ऊर्जाएं आज भी हमारे आस-पास मौजूद हैं?”ध्यान दीजिये और खुद देखिये हमने अपने इसी चैनल पर कई साल से ऐसे कई video प्रकाशित कर रखे हैं जिनमे हमने बार बार कहा है की आप खुद देवता बन सकते हैं ,आप खुद देवता बना सकते हैं ,आखिर देवताओं का आपको दर्शन कैसे होता है |यह सब लगातार प्रमाणित हो रहा है |

          “१८ मार्च २०२६ की एक कमर्शियल रिपोर्ट बताती है कि ‘रुद्र शक्ति डिवाइसेस’ की बिक्री में ३४०% का उछाल आया है। ये वो उपकरण हैं जो घरों में ‘नेगेटिव आयन’ और ‘विशिष्ट ईएमएफ फ्रीक्वेंसी’ पैदा करने का दावा करते हैं, जो प्राचीन मंदिरों के वातावरण की नकल करते हैं।

      यह इस बात का प्रमाण है कि अब लोग केवल श्रद्धा पर नहीं, बल्कि ‘अनुभव’ और ‘प्रमाण’ पर विश्वास कर रहे हैं। माधव ने भी अपनी रिसर्च में पाया कि जब वातावरण में एक निश्चित ऊर्जा संतुलन (Energy Balance) होता है, तभी ‘अदृश्य सत्ताओं’ से संपर्क संभव हो पाता है। यह अंधविश्वास नहीं, बल्कि ‘एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग’ (Environmental Engineering) है।”

         “तो क्या है छिपे हुए देवताओं का अंतिम सच?

    माधव की राजस्थान की गुफाओं से शुरू हुई यात्रा उसे एक ही नतीजे पर ले गई— कि विज्ञान और शास्त्र अलग-अलग नहीं हैं। IIT की स्टडी, LiDAR के नतीजे और EMF की रीडिंग एक ही ओर इशारा कर रहे हैं: हम एक ऐसी ऊर्जा के समंदर में डूबे हुए हैं जिसे हम देख नहीं सकते, पर महसूस कर सकते हैं। ‘छिपे हुए देवता’ कोई आसमान में बैठे व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि वे इसी ब्रह्मांड के सूक्ष्म आयामों (Dimensions) में रहने वाली उच्च चेतनाएं हैं। कर्ण पिशाचिनी हो या महादेव— ये सब उस ‘परम विज्ञान’ के हिस्से हैं जिसे हम अब समझना शुरू कर रहे हैं।

           अगली बार जब आप किसी प्राचीन मंदिर में जाएं या कोई मंत्र सुनें, तो याद रखिएगा— आप सिर्फ प्रार्थना नहीं कर रहे, आप ब्रह्मांड के सबसे उन्नत ‘क्वांटम नेटवर्क’ से जुड़ रहे हैं।

       आपको क्या लगता है? क्या विज्ञान जल्द ही इन देवताओं को हमारे सामने साक्षात खड़ा कर देगा? अपनी राय कमेंट्स में जरूर लिखें और अगर आप माधव की इस रहस्यमयी खोज के अगले भाग को देखना चाहते हैं, तो चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलें। सत्यम शिवम सुंदरम।”….हर हर महादेव

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  • प्रत्यंगिरा कवच/ताबीज

    प्रत्यंगिरा कवच/ताबीज

               भगवती महाकाली का एक स्वरुप प्रत्यंगिरा का है |यह नाम इनका इसलिए पड़ा क्योंकि इनके इस स्वरुप की आराधना ऋषि अंगिरस और प्रत्यांगिरस नामक दो ऋषियों ने की थी और इनके नाम पर ही इनका नाम प्रत्यंगिरा पड़ा |इनके बारे में कहा जाता है की कोई महाविद्या या महाशक्ति की साधना किये बिना प्रत्यंगिरा देवी की साधना नहीं करनी चाहिए |भगवती आद्यशक्ति पार्वती के अंग के कौशिकी के निकलने पर भगवती पार्वती का स्वरुप काला पड़ गया और तब वह काली कहलाई |भगवती के शरीर से जो देवी कौशिकी निकली थी उनकी उपासना अंगिरस और प्रत्यांगिरस ऋषियों ने की और तब वह प्रत्यंगिरा कहलाई |इन्हें ही भद्रकाली भी कहा जाता है |प्रत्यंगिरा विद्या की सबसे बड़ी विशेषता यह है की यदि इसके साधक पर किसी भी शत्रु द्वारा भयंकरतम अभिचार प्रयोग किया गया हो तो यह विद्या उसे नष्ट कर डालती है |विपरीत प्रत्यंगिरा के रूप में यह विद्या शत्रु द्वारा संपादित अभिचार कर्म को दोगुने वेग से प्रयोगकर्ता पर ही वापिस लौटा देती है और वह यदि न सम्भाल पाया तो खुद नष्ट हो जाता है |भगवती प्रत्यंगिरा अपने साधक को समस्त सौभाग्य प्रदान करती है |तुष्टि और पुष्टि प्रदान करती है |भयंकर तूफानों में ,राजद्वार में ,अरिष्ट ग्रहों के अशांत होने पर ,महाविपत्तियों के उपस्थित होने पर ,किसी भी प्रकार के महाभय के उपस्थित होने पर ,दुर्भिक्ष में ,घने जंगलों में ,शत्रु से घिरे होने पर वह अपने साधक की सभी प्रकार से रक्षा करते हुए उसे अभय प्रदान करती है |सबसे बड़ी विशेषता यह की इनके साधक के शत्रु स्वयमेव नष्ट हो जाते हैं |

               प्रत्यंगिरा यन्त्र माता प्रत्यंगिरा का निवास माना जाता है जिसमे वह अपने अंग विद्याओ ,शक्तियों ,देवों के साथ निवास करती है ,अतः यन्त्र के साथ इन सबका जुड़ाव और सानिध्य प्राप्त होता है ,|प्रत्यंगिरा यन्त्र के अनेक उपयोग है ,यह धातु अथवा भोजपत्र पर बना हो सकता है ,पूजन में धातु के यन्त्र का ही अधिकतर उपयोग होता है ,पर सिद्ध व्यक्ति से प्राप्त भोजपत्र पर निर्मित यन्त्र बेहद प्रभावकारी होता है ,,धारण हेतु भोजपत्र के यन्त्र को धातु के खोल में बंदकर उपयोग करते है ,,जब व्यक्ति स्वयं साधना करने में सक्षम न हो तो यन्त्र धारण मात्र से उसे समस्त लाभ प्राप्त हो सकते है ,..

              भगवती प्रत्यंगिरा की यदि कृपा हो जाय तो व्यक्ति की सार्वभौम उन्नति होती है ,शत्रु पराजित होते है ,सर्वत्र विजय मिलती है ,मुकदमो में विजय मिलती है ,अधिकारी वर्ग की अनुकूलता प्राप्त होती है ,शत्रु का विनाश होने लगता है ,व्यक्ति के आभामंडल में परिवर्तन होने से लोग आकर्षित होते है ,प्रभावशालिता बढ़ जाती है ,वायव्य बाधाओं से सुरक्षा होती है ,तांत्रिक क्रियाओं के प्रभाव समाप्त हो जाते है ,वाद-विवाद में सफलता मिलती है ,प्रतियोगिता आदि में सफलता बढ़ जाती है |किसी भी अभिचार का प्रभाव कम हो जाता है |टोने -टोटके -नजर दोष प्रभावित नहीं कर पाती |वायव्य आत्माओं और बाधाओं का शरीर पर प्रभाव कम हो जाता है अथवा समाप्त हो जाता है ,,यह समस्त प्रभाव यन्त्र धारण से भी प्राप्त होते है |जो लोग शत्रु-विरोधी से परेशान है ,अधिकारी वर्ग से परेशान है ,वायवीय बाधाओं से परेशान हो ,नवग्रह पीड़ा से पीड़ित हो ,,जिनके कार्य क्षेत्र में खतरे की संभावना हो ,दुर्घटना की संभावना अधिक हो |स्थायित्व का अभाव हो ,बार बार स्थानान्तरण से परेशान हों ,जिन्हें बहुत लोगों को नियंत्रित करना हो उनके लिए यह बहुत उपयोगी है |जो लोग बार-बार रोगादि से परेशान हो ,असाध्य और लंबी बीमारी से पीड़ित हो अथवा बीमारी हो किन्तु स्पष्ट कारण न पता हो ,पूर्णिमा -अमावस्या को डिप्रेसन अथवा मन का विचलन होता हो उन्हें प्रत्यंगिरा यन्त्र धारण करना चाहिए |

               जिन्हें हमेशा बुरा होने की आशंका बनी रहती हो ,खुद अथवा परिवार के अनिष्ट की सम्भावना लगती हो ,अकेले में भय लगता हो अथवा बुरे स्वप्न आते हों ,कभी महसूस हो की कमरे में अथवा साथ में उनके अलावा भी कोई और है किन्तु कोई नजर न आये |कभी लगे कोई छू रहा है अथवा पीड़ित कर रहा है ,कभी कोई आभासी व्यक्ति दिखे अथवा आत्मा परेशान करे |कभी अर्ध स्वप्न में कोई छाती पर बैठ जाए ,लगे कोई गला दबा रहा है |किसी के साथ कोई शारीरिक सम्बन्ध बनाये किन्तु वह दिखाई न दे अथवा स्वप्न या निद्रा में ऐसा हो |बार -बार स्वप्न में कोई स्त्री -पुरुष दिखे जिससे दिक्कत महसूस हो |आय के स्रोतों में उतार-चढ़ाव से परेशान हो ,ऐसा लगता हो की किसी ने कोई अभिचार किया हो सकता है या लगे की कोई अपना या बाहरी अनिष्ट चाहता है तो ऐसे व्यक्तियों को भगवती प्रत्यंगिरा की साधना -आराधना-पूजा करनी चाहिए साथ ही सिद्ध साधक से बनवाकर काली यंत्र चांदी के ताबीज में धारण करना चाहिए |यदि साधना उपासना न कर सकें तो भी कवच अवश्य पहनना चाहिए |

                यन्त्र निर्माण प्रत्यंगिरा साधक द्वारा ही हो सकता है और इसकी शक्ति साधक की शक्ति पर निर्भर करती है |यन्त्र निर्माण के बाद इसकी तंत्रोक्त प्राण प्रतिष्ठा आवश्यक होती है क्योंकि प्रत्यंगिरा तंत्र की शक्ति हैं |इसके बाद इसका अभिमन्त्रण प्रत्यंगिरा के मूल मंत्र से होता है |अभिमन्त्रण बाद हवन आवश्यक होता है |हवन के बाद इसी हवन के धुएं में चांदी के कवच में यन्त्र को भरकर धूपित भी किया जाता है| यहाँ साधक विशेष की जानकारी के अनुसार कवच में भगवती काली की ऊर्जा से सम्बन्धित वस्तुएं भी भरी जाती हैं चूंकि यह काली की ही स्वरुप हैं -जैसे हम विशिष्ट जड़ी -बूटियाँ जो हमारे काली अनुष्ठान के समय अभिमंत्रित होती हैं इनमे यन्त्र के साथ रखते हैं ,हवन भष्म इसमें रखते हैं आदि |यह यन्त्र यदि पूर्ण अभिमंत्रित है तो बेहद शक्तिशाली हो जाता है |इसका परीक्षण उच्च स्तर का साधक कर सकता है अथवा जिन्हें भूत -प्रेत जैसी कोई समस्या हो उसके हाथ में रखते ही इसका प्रभाव मालूम होने लगता है | यन्त्र /कवच का निर्माण मात्र प्रत्यंगिरा का सिद्ध साधक ही कर सकता है यन्त्र निर्माण में तंत्रोक्त पद्धति का ही प्रयोग होता है ,सामान्य कर्मकांडी अथवा साधक इसे नहीं बना सकता ,न ही किसी अन्य महाविद्या अथवा देवी -देवता का साधक इसे निर्मित कर सकता है |

    इनका मन्त्र इस प्रकार है –

    यन्त्र /कवच धारण से लाभ

    ———————————.

    १. भगवती प्रत्यंगिरा की कृपा से व्यक्ति की सार्वभौम उन्नति होती है |शत्रु पराजित होते है ,शत्रु की बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है ,उसका स्वयं विनाश होने लगता है |शत्रु क्रमशः नष्ट होते जाते हैं |

    ३. ,मुकदमो में विजय मिलती है ,वाद विवाद में सफलता मिलती है |सर्वत्र विजय का मार्ग प्रशस्त होता है |

    ४.कार्य क्षेत्र में कर्मचारी वर्ग की अनुकूलता प्राप्त होती है ,व्यक्तित्व का प्रभाव बढ़ता है |सम्मान प्राप्त होता है ,| आभामंडल की नकारात्मकता समाप्त होती हैं |शरीर का तेज बढ़ता है |

    ५. मानसिक चिंता ,विचलन ,डिप्रेसन से बचाव होता है और राहत मिलती है |,पूर्णिमा -अमावस्या के मानसिक विचलन में कमी आती है |

    ६.किसी अभिचार /तंत्र क्रिया द्वारा अथवा किसी आत्मा आदि द्वारा शरीर को कष्ट मिलने से बचाव होता है |यदि साथ में मंत्र जप भी इनका करें तो किया कराया ,टोना टोटका ,तांत्रिक अभिचार ,मारण ,मोहन ,उच्चाटन ,वशीकरण ,कृत्या ,मूठ आदि कोई भी क्रिया उसी व्यक्ति को दुगने वेग से वापस होकर मारती है जिसने इन्हें किया होता है |

    ७. पारिवारिक सुख ,दाम्पत्य सुख बढ़ जाता है | नौकरी ,व्यवसाय ,कार्य में स्थायित्व प्राप्त होता है | व्यक्ति के आभामंडल में परिवर्तन होने से लोग आकर्षित होते है ,प्रभावशालिता बढ़ जाती है |

    ८. कोई भी तांत्रिक क्रिया ,अभिचार ,टोना -टोटका ,कृत्या ,मूठ अथवा कितना भी भयंकर किया कराया हो सब नष्ट हो जाता है धीरे धीरे यदि पहले से हुआ है ,और यदि भविष्य में होता है तो उससे सुरक्षा कवच प्रदान करता है |

    ९.,वायव्य बाधाओं से सुरक्षा होती है ,पहले से कोई प्रभाव हो तो क्रमशः धीरे धीरे समाप्त हो जाती है |,तांत्रिक क्रियाओं के प्रभाव समाप्त हो जाते है ,भविष्य की किसी संभावित क्रिया से सुरक्षा मिलती है |किये -कराये -टोने -टोटके की शक्ति क्रमशः क्षीण होते हुए समाप्त होती है |

    १०. कोई भी संकट हो ,विपत्ति हो ,आपदा हो ,भय हो हर क्षेत्र में सुरक्षा प्राप्त होती है ,विजय का मार्ग प्रशस्त होता है |शत्रु कितना भी प्रबल हो विजय साधक और धारक की ही होती है |

    ११. ,परीक्षा ,प्रतियोगिता आदि में सफलता बढ़ जाती है |हीन भावना में कमी आती है ,खुद पर विश्वास बढ़ता है |एकाग्रता बढती है तथा उत्साह ,ऊर्जा में वृद्धि होती है |

    १२. भूत-प्रेत-वायव्य बाधा की शक्ति क्षीण होती है ,क्योकि इसमें से निकलने वाली सकारात्मक तरंगे उनके नकारात्मक ऊर्जा का ह्रास करते हैं और उन्हें कष्ट होता है |,उग्र देवी होने से नकारात्मक शक्तियां इनसे दूर भागती हैं और धारक के पास आने से कतराती हैं |किसी वायव्य बाधा का प्रभाव शरीर पर कम हो जाता है |

    १४. मांगलिक ,पारिवारिक कार्यों में आ रही रुकावट दूर होती है |ग्रह बाधाओं का प्रभाव कम होता है |शनि -राहू -केतु के दुष्प्रभाव की शक्ति क्षीण होती है |

    १५. यदि बंधन आदि के कारण संतानहीनता है तो बंधन समाप्त होता है |

    १८. किसी भी व्यक्ति के सामने जाने पर सामने वाला प्रभावित हो बात मानता है और उसका विरोध क्षीण होता है |,पारिवारिक कलह ,विवाद कम हो जाता है तथा लोगों पर आकर्षक शक्तियुक्त प्रभाव पड़ता है |

    १९. घर -परिवार में स्थित नकारात्मक ऊर्जा की शक्ति क्षीण होती है जिससे उसका प्रभाव कम होने लगता है |पारिवारिक सौमनस्य में वृद्धि होती है |

    २१. स्थान दोष ,मकान दोष ,पित्र दोष ,वास्तु दोष का प्रभाव व्यक्ति पर से कम हो जाता है क्योकि अतिरिक्त ऊर्जा का संचार होने लगता है उसमे |

                    यह समस्त प्रभाव यन्त्र धारण से प्राप्त होते है |,यन्त्र में उसे बनाने वाले साधक का मानसिक बल ,उसकी शक्ति से अवतरित और प्रतिष्ठित भगवती की पारलौकिक शक्ति होती है जो वह सम्पूर्ण प्रभाव प्रदान करती है , धारणीय यन्त्र का यदि उपयुक्त लाभ प्राप्त करना हो तो ,कम से कम २१ हजार मूल मन्त्रों से अभिमन्त्रण और उपयुक्त मुहूर्त में विधिवत तांत्रिक विधि से प्राण प्रतिष्ठा होना आवश्यक है, अन्यथा मात्र रेखाएं खींचने से कुछ नहीं होने वाला ,जबतक की उन रेखाओं में भगवती को प्रतिष्ठित न किया जाए और उपयुक्त शक्ति न प्रदान की जाए |………..हर-हर महादेव

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  • भूत -प्रेत से बचाव के उपाय

    भूत -प्रेत से बचाव के उपाय

    भूत -प्रेत ,वायव्य बाधाओं और तांत्रिक अभिचार से बचाव के उपाय

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                  भूत-प्रेत ,वायव्य बाधाएं अथवा तांत्रिक अभिचार व्यक्ति की शारीरिक क्षमता के साथ ही आर्थिक क्षमता पर भी प्रभाव डालते हैं ,इनके कारण पारिवारिक ,दाम्पत्य सम्बन्धी और संतान सम्बन्धी समस्याएं भी हो सकती हैं ,कभी कभी ये गंभीर रोग भी उत्पन्न करते है और मृत्यु का कारण बन जाते है अथवा दुर्घटनाएं करा कर व्यक्ति की मृत्यु के कारण बनते हैं ,कभी कभी इनके कारण शरीर की स्थिति में परिवर्तन हो जाता है और व्यक्ति विकलांग हो सकता है ,मूक-बधिर जैसा हो सकता है ,दौरे आ सकते हैं ,गूम-सुम हो सकता है ,सोचने -समझने अथवा चलने-फिरने में अक्षम हो सकता है ,कुछ शक्तियां व्यक्ति को गलत कार्यों के लिए प्रेरित करती हैं ,अथवा सीधे व्यक्ति के साथ गलत कार्य करती हैं ,कभी-कभी कोई आत्मा किसी महिला के साथ जुड़कर उसका शारीरिक शोषण कर सकती है ,यह व्यक्ति में  मांस-मदिरा की और रूचि उत्पन्न कर सकते हैं ,गलत कार्य करवा सकते हैं ,जबकि व्यक्ति ऐसा नहीं चाहता पर उसके शरीर पर उसका नियंत्रण नहीं रहता .इनके प्रभाव से व्यक्ति गलत निर्णय ले सकता है ,लड़ाई-झगडे कर सकता है ,आदि आदि

                यदि लगे की व्यक्ति पर किसी आत्मा आदि का प्रभाव है अथवा किसी अभिचार की आशंका हो ,घर में घुसने पर सर भारी हो जाए ,तनाव लगे ,मानसिक विक्षुब्धता हो ,कलह अनावश्यक हो ,हर काम बिगड़ने लगे ,उन्नति रुक जाए ,व्यक्ति विशेष के पसीने से दुर्गन्धयुक्त पसीना आये ,सर चकराए,सर गर्म रहे ,बडबडाये ,आँखे तिरछी हों ,आवेश आये ,उछले-कूड़े-गिरे,आकास की और मुह करके बातें करे ,अचानक इतना बल आ जाए की कई लोगो से मुकाबला कर सके ,शरीर पीला होता जाए ,दिन प्रतिदिन दुर्बल होता जाए ,स्त्री जातक कपडे फाड़ने लगे ,बहुत सात्विक हो जाए या तामसिक हो उग्र रहने लगे अचानक से ,किसी प्रकार का आवेश आने लगे ,बाल बिखेरे झूमे ,व्यक्ति को बुरे सपने आये ,अचानक भय लगे ,छ्या आदि दिखे ,लगे कोई साथ है ,बुरे शकुन दिखे ,बीमारी हो पर कारण पता न लगे ,दुर्घटनाये हो ,बार बार गलतियाँ होने लगें ,तामसिक व्यवहार हो जाए ,उग्रता बढ़ जाए ,कहीं मन न लगे ,एकांत पसंद होने लगे ,अधिक सफाई या गन्दगी अचानक पसंद आने लगे ,कार्य-व्यवहार अस्त-व्यस्त हो जाए ,अचानक व्यवसाय में हानि हो या व्यवसाय रुक जाए ,परिवार में बीमारियाँ बढ़ जाएँ तो यह समस्या हो सकती है ,बच्चे का बहुत रोना ,नोचना ,दांत किटकिटाना,,घर पर पत्थर या हड्डी आदि बरसना ,अचानक आग लग्न जबकि कारण पता न चले तो भी ऐसा हो सकता है ,,यद्यपि इनमे से कुछ ग्रह स्थितियों के कारण भी हो सकता है ,पर लगे की ऐसा है तो किसी योग्य व्यक्ति से संपर्क करना बेहतर होता है |

                भूत-प्रेत-चुड़ैल जैसी समस्याओं से व्यक्ति अथवा परिवार के सहयोग से मुक्ति पायी जा सकती है ,किन्तु उच्च स्तर की शक्तियां सक्षम व्यक्ति ही हटा सकता है ,कुछ शक्तियां ऐसी होती हैं की अच्छे अच्छे साधक के छक्के छुडा देती हैं और उनके तक के लिए जान के खतरे बन जाती है ,ऐसे में केवल श्मशान साधक अथवा बेहद उच्च स्तर का साधक ही उन्हें हटा या मना सकता है ,किन्तु यहाँ समस्या यह आती है की इस स्तर का साधक सब जगह मिलता नहीं ,उसे सांसारिक लोगों से मतलब नहीं होता या सांसारिक कार्यों में रूचि नहीं होती ,पैसे आदि का उसके लिए महत्व नहीं होता या यदि वह सात्विक है तो इन आत्माओं के चक्कर में पना नहीं चाहता ,क्योकि इसमें उसकी उस शक्ति का खर्च होता है जो वह अपनी मुक्ति के लिए अर्जन कर रहा होता है .

             भूत-प्रेत चुड़ैल जैसी समस्याओं को कौवा तंत्र के प्रयोग से हटाया जा सकता है किन्तु यह जानकार साधक ही कर सकता है ,प्रेत अथवा पिशाच-पिशाचिनी साधक भी इन्हें हटा सकता है ,अच्छा तांत्रिक भी इन्हें हटा सकता है ,देवी साधक,हनुमान-भैरव साधक इन्हें हटा सकता है ,किन्तु उच्च शक्तिया केवल उच्च साधक ही हटा सकता है,इन्हें देवी[दुर्गा-काली-बगला आदि महाविद्या ]साधक ,भैरव-हनुमान साधक ,श्मशान साधक ,अघोर साधक ,रूद्र साधक हटा सकता है , .

              बजरंग बाण का पाठ ,सुदर्शन कवच ,दुर्गा कवच,काली सहस्त्रनाम ,बगला सहस्त्रनाम ,काली कवच, बगला कवच, आदि के पाठ से इनके प्रभाव पर अंकुश लगता है ,उग्र शक्तियों की आराधना इनके प्रभाव को रोकती है ,,

              भूत-प्रेत बाधा,किये कराये  को निष्प्रभावी करने के लिए अथवा रोकने के लिए वनस्पति और पशु-पक्षी  तंत्र में नीली अपराजिता जी जड़ ,नागदौन की जड़ ,हत्थाजोड़ी,तगर ,मेहंदी ,काली हल्दी ,समुद्रफल ,सियार सिंगी ,श्वेतार्क गणपति ,श्वेतार्क की जड़ ,कौवा ,गोरोचन,लौंग,भालू का नाख़ून ,शेर का नाख़ून ,भालू के बाल ,गैंडे की खाल ,उल्लू के नाख़ून ,सूअर के दांत ,रुद्राक्ष ,गंध्मासी की जड़,जटामांसी की जड़ ,तेलिया कंद ,काली कनेर की जड़ ,वच ,शंखपुष्पी ,संग इ मिक्नातीस ,लाल पलाश की जड़, चिरचिटा की जड़ आदि का भी प्रयोग किया जाता है |

             भूत-प्रेत से कुछ सुरक्षात्मक उपाय पर ध्यान देने से बचाव रहता है ,,कभी भी भरी दोपहर में ,काली रात में अथवा रात में सुनसान स्थान पर ,श्मशान-कब्र-चौरी-नदी किनारे ,बड़े वृक्ष ,बांस की कोठी आदि के आसपास अकेले जाने से बचना चाहिए ,गले में कोई ताबीज आदि पहनना चाहिए विशेषकर बच्चों ,गर्भवती महिलाओं और कुँवारी कन्याओं को ,घर में गंगाजल और अभिमंत्रित जल का छिडकाव कभी कभी कर देना चाहिए ,गूगल-लोबान की धूनी देनी चाहिए ,तांत्रिक अभिचार का भय हो तो घर में योग्य व्यक्ति से कील लगवा देनी चाहिए ,,स्थान हो तो घर के दरवाजे पर श्वेतार्क का पौधा लगाना चाहिए ,शमी का पौधा लगाना चाहिए ,पूजा स्थान में शंख रखना चाहिए और संभव हो तो घर में शंख ध्वनि करनी चाहिए ,

            अकसर भूत-प्रेत ,वायव्य बाधा या अभिचार आदि का भय उन परिवारों पर अधिक होता है जहां पित्र दोष हो  अथवा जहां कुल देवता की पूजा न होती हो अथवा कुलदेवता नाराज हो अथवा ईष्ट मजबूत न हों ,,कुल देवता परिवार की रक्षा इस प्रकार की समस्याओं से करते हैं ,यदि यह नाराज हों तो सुरक्षा नहीं करते अथवा यह कमजोर हों तो सुरक्षा कर नहीं पाते ,परिणामतः कोई भी समस्या बिना रुकावट घर में प्रवेश कर जाती है ,,इसीतरह अगर पित्र दोष है तो वे जो समस्या उत्पन्न करते हैं वह तो होगा ही साथ में जैसे आपमें मित्रता होती है ,इन आत्माओं में भी मित्रता हो सकती है ,अतः पितरों के साथ उनके मित्र भी आपके परिवार के आसपास आ जाते हैं जबकि ये आपके परिवार से सम्बंधित नहीं होते और इनका कोई लगाव परिवार से नहीं होता ,अतः ये अपनी अतृप्त इच्छाओं की पूर्ति परिवार से करने का प्रयास कर सकते हैं ,अर्थात यह परिवार के लिए अधिक कष्टकारक हो जाते हैं ,अतः यथा संभव पित्र दोष से मुक्ति पाने का उपाय करना चाहिए और कुलदेवता आदि की पूजा नियमानुसार जरुर करनी चाहिए ,,इसी प्रकार यदि आपके ईष्ट कमजोर हैं या ईष्ट नहीं हैं या आप नास्तिक हैं तो भी कोई समस्या प्रभावी शीघ्र हो जाती है ,…………………………………………………………………………हर-हर महादेव

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  • अपनी शक्ति को पहचानो

    अपनी शक्ति को पहचानो

    अपनी आवाज सुनें

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               यदि आप उलझन में हैं ,अनिर्णय का शिकार हैं ,किसी चिंता से परेशान हैं और हल नहीं मिल रहा ,विचारों के झंझावात चल रहे ,खुद को फंसा और पस्त महसूस कर रहे ,उत्साहहीन हो गए हैं ,आलस्य हावी हो गया है ,कोई काम ढंग से नहीं कर पा रहे ,सब कुछ बिगड़ा बिगड़ा सा महसूस हो रहा ,सलाह पर सलाह देने वाले मिल रहे पर निर्णय नहीं कर पा रहे ,खुद को ठीक से न व्यक्त कर पा रहे न साबित कर पा रहे तो आप चुपचाप मौन हो जाइए ,बिलकुल भी न बोलिए ,केवल बहुत जरूरत पर काम भर का बोलिए ,भीड़ और लोगों से हट जाइए ,किसी को कोई प्रतिक्रया मत दीजिये ,न बोलिए न बताइए ,अधिकतम समय अकेले एकांत में रहने की कोशिस कीजिये |कुछ मत कीजिये खुद में विचारों को चलने दीजिये |कुछ ही समय में आपकी उलझन सुलझ जायेगी ,रास्ता मिल जाएगा ,आपकी समस्या हल हो जायेगी |

              आप कहेंगे की ऐसा कैसे हो सकता है की बिना कुछ किये समस्या का हल मिल जाएगा ,बिना किसी सझाव के ,तो सुझाव आपको मिलेगा और रास्ता भी मिलेगा ,किन्तु यह कोई बाहरी नहीं आप खुद को देंगे |शायद आपको जानकारी न हो किन्तु आपके भीतर ही आपके अवचेतन में सारी समस्याओं का हल है ,सदियों -जन्मों की सूचनाएं हैं ,पर आप उसे लेते ही नहीं |यह आपकी थाती है और यह जो सुझाव देगी वह सबसे बेहतर होगी |यह सुझाव के साथ समस्या हल करने की दिशा में काम भी करेगी बशर्ते आप इसकी सुने तो |आपको पता है या नहीं हम नहीं जानते किन्तु आपको हम बताना चाहेंगे की हर जन्म की यादें आपकी आत्मा के साथ अवचेतन रूप में चलती रहती हैं ,चेतन से अवचेतन तक पहुंची हर सूचना जन्मान्तर के हार्ड डिस्क में सुरक्षित होती है |जन्म के समय गर्भ में पिछली यादें मिट जाती हैं और कुछ जन्म के बाद धीरे धीरे समाप्त हो जाती हैं मनुष्य की रासायनिक संरचना के कारण किन्तु इन्हें जब जाग्रत किया जाता है तो इनसे अद्भुत ज्ञान मिलता है |पिछला जन्म देखने वाले यही तो करते हैं आपकी ही यादों को जगाकर आपको पिछला जन्म दिखाते हैं सम्म्फान प्रक्रिया से |

                  जब आप समस्याग्रस्त होते हैं तब सबसे अधिक आपका चेतन मन क्रियाशील होता है और आपके आज के ज्ञान के अनुसार आपको लगातार सुझाव देता रहता है ,आप उसमे उलझे होते हैं पर अक्सर आपको हल नहीं मिलता |इस स्थिति में भी आपका अवचेतन आपको सलाह देने का प्रयास करता है किन्तु आप उसकी सुनते नहीं क्योंकि चेतन से वह दबा होता है |जब आप शांत होकर बैठ जाते हैं तो धीरे धीरे अवचेतन सक्रिय होकर आपको सुझाव और रास्ते देता है क्योंकि उसके पास सदियों का ज्ञान है |इसे ही अंतरात्मा की आवाज भी कहते हैं जो हमेशा सही होता है |याद कीजिये कभी कभी आपके साथ ऐसा होता होगा की किसी कार्य से पहले आपके अंदर से आवाज आती होगी की यह कार्य जरुर होगा या यह कार्य नहीं होगा ,और वह सच होता है |यही है अंतरात्मा की आवाज या अवचेतन की आवाज |यही आपको सुझाव देगा क्या करें क्या न करें और जब आप इसकी सुनने लगेंगे तो आपको खुद में हमेशा सही सलाह मिलेगी |जगाइए खुद की शक्ति और बिना बाधा ,संकट परेशानी सफल होइए |…………………………………………………हर-हर महादेव

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  • शनि कष्ट रक्षा कवच

    शनि कष्ट रक्षा कवच

    ::::शनि दोष निवारक कवच ::::

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               इस दुनिया में प्रत्येक पांच में से एक व्यक्ति शनि के दुष्प्रभावों अथवा कुप्रभावों से अत्यधिक परेशान है |शनि की पनौती ,ढईया ,अथवा साढ़ेसाती अक्सर सुनाई देते रहते हैं |इनके अतिरिक्त अक्सर महादशा ,अन्तर्दशा अथवा प्रत्यन्तरदशा अलग से परेशान करती रहती है |यही कारण है की शनि को कुंडली में सबसे कष्टकारक ग्रह माना जाता है ,यद्यपि यह कभी शुभ भी होता है किन्तु अधिकतर कष्ट ही पाते हैं |इसके दुष्प्रभावों का प्रभाव इसके मित्रों राहू- केतु को और भी खतरनाक बना देता है जिन्हें इससे बल मिल जाता है |अर्थात एक शनि अनेक कष्टों का कारण बन जाता है |इसके दुष्प्रभाव के कारण सभी कार्यों में बाधा ,शत्रुओं से परेशानी ,मुकदमो -विवादों में पराजय ,आर्थिक एवं शारीरिक कष्ट ,मानसिक क्लेश ,हड्डियों जोड़ों की समस्या ,पुत्रों- संतानों से कष्ट ,कलह ,आर्थिक तंगी ,कर्ज ,वायव्य बाधा ,बंधू -मित्र -नौकर -कर्मचारी -मजदूर वर्ग से समस्या उत्पन्न होती है |यह व्यक्ति को कंगाल और असहाय बना देता है ,व्यक्ति चाहकर भी कुछ नहीं कर पाता |

             शनि की शान्ति के हजारों उपाय वैदिक और तांत्रिक ग्रंथों में मिलते हैं |कुछ बड़े और अत्यंत कठिन हैं तो कुछ सामान्य के लिए दुरूह |शनि का तांत्रिक उपाय वास्तव में चमत्कारिक लाभ पहुचाता है अगर वास्तव में व्यक्ति जानकार है और उसे इससे सम्बंधित यंत्रों ,वनस्पतियों ,मन्त्रों ,की अच्छी जानकारी हो |विभिन्न वनस्पतियों ,यंत्रों ,मन्त्रों ,और तांत्रिक विधियों के संयोग से ऐसे प्रभावी कवच निर्मित किये जा सकते हैं जो उग्र शनि को शांत और अशुभ को शुभ कर दें | ऐसे में यदि शनि शान्ति के अचूक उपाय के रूप में तंत्रोक्त विधि से निर्मित “शनी दोष निवारक कवच “को अपने गले में धारण किया जाए तो चमत्कारिक लाभ देखने में आता है |शनी की ढईया ,साढ़ेसाती ,पनौती ,दशा-अन्तर्दशा एवं जन्मकुंडली में शनी के दुष्प्रभाव के नाश हेतु और जीवन में सफलताओं ,भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए कवच लाभदायक होता है ,क्योकि शनी को यदि शांत और प्रसन्न रखा जाए तो महा अशुभकारक ग्रह भी शुभद हो सकता है |

    इतना तो अवश्य होता है की इसके दुष्प्रभावों में कमी आते ही अन्य ग्रह जो अशुभता में इससे बल पा रहे उनके प्रभाव में परिवर्तन हो जाता है |शुभ ग्रहों के प्रभाव बढ़ जाते हैं और परिवर्तन दिखने लगता है |इस कवच को स्त्री अथवा पुरुष कोई भी धारण कर मनोवांछित लाभ प्राप्त कर सकता है |इस कवच में अनेक शनि की उर्जा से सम्बंधित वनस्पतियों ,शनि को प्रभावित करने वाली वनस्पतियों ,तांत्रिक जड़ी बूटियों ,पदार्थों के साथ विशेष योग में निर्मित,शनि के तंत्रोक्त मंत्र से अभिमंत्रित शनि यन्त्र का विशेष संयोग होता है जो शनी को शांत कर देता है ,उसके प्रभावों की दिशा बदल देता है |उसके अशुभ प्रकार की प्रकृति लाभदायक में बदलती है |फलतः व्यक्ति की स्थिति में परिवर्तन आ जाता है |यह बड़े बड़े अनुष्ठान और बड़े खर्चों से भी बचाता है |जो लोग शनि की महादशा ,अन्तर्दशा ,गोचर ,साढ़ेसाती ,ढईया से परेशान हैं या जिनकी जन्म कुंडली में शनि नीच का है ,खराब प्रभाव देने वाला है ,अशुभ भावों का स्वामी है ,जो शनि का मंत्र जप नहीं कर सकते ,जो बड़े पूजा पाठ का खर्च नहीं उठा सकते तो उन्हें यह शनि कवच अत्यंत लाभ देता है और उनके पास आजीवन शनि के दुष्प्रभाव को कम करने का एक अस्त्र उपलब्ध होता है |……………………………………………………………………..हर-हर महादेव

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  • विवाह बाधा का तीव्र उपाय

    ::::::: ;विवाह बाधा निवारक तंत्र और ज्योतिषीय उपाय :::::::

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    .ज्योतिषीय उपाय

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     [१] पीला पुखराज ४ रत्ती और ओपल ४ रत्ती एक ही त्रिधातु मुद्रिका में बनवाकर ,प्राण प्रतिष्ठा ,अभिषेक करवाकर कन्या को धारण करवाए ,,,,,,,

    ,[२]विवाह योग्य कन्या को गुरूवार का व्रत करना शीघ्र वर प्राप्ति में सहायक होता है ,,,,,,,

    ,[३]वृहस्पतिवार के दिन कन्या पीले रेशमी कपडे में केले की जड़े ,एक ही हल्दी की टुकड़े के तीन हिस्से करके उन्हें कपडे में ताबीज की तरह बनाकर धुप दीप देकर बाई भुजा पर धारण करे और गुरूवार का व्रत रखकर केले के वृक्ष की पूजा करे ,इस दिन अन्न और नमक का त्याग करे ,,,,,

    ,[४]प्रतिदिन वृहस्पति के तांत्रिक या वैदिक मंत्र की कम से कम एक माला करे .

    ..तांत्रिक उपाय ,,,,,,

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    [१] शुद्ध दो मुखी रुद्राक्ष विधि विधान सहित कन्या की बाई भुजा पर बाधे ,,,,,,,,,

    [२]किसी सिद्ध व्यक्ति से ताम्बे या चांदी का [सामर्थ्य अनुसार ]प्राण प्रतिष्ठित कात्यायनी यन्त्र प्राप्त करे और नित्य प्रति कात्यायनी यन्त्र की पूजा करे और यन्त्र कए साथ लिखे या बताए गए मंत्र का प्रतिदिन १०८ बार जप करे ,,,,,,,,,,

    ,[३] कन्या अपने कमाए पैसो से ,या माता -पिता-भाई द्वारा कन्या कए व्यक्तिगत खर्च कए लिए मिले पैसो से पाच कार्यसिद्धि रुद्राक्ष प्राप्त करे ,,फिर पाच सूखे नारियल [साबुत गिरी गोला ]खरीदकर ले आये ,,मंगलवार को प्रातः उठकर एक नारियल लेकर उसमे किसी नुकीली चीज से एक सुराख कर दे ,,एक कटोरी में १०० ग्राम गेहू या चावल का आटा ,एक चम्मच शुद्ध घी ,दो चम्मच चीनी मिलाकर नारियल में सुराख से भर दे ,,अब गोला स्वयं ले जाकर जहा जमीन के अंदर से चीटिया आदि निकलती है वहां एक छोटा सा गड्ढा खोदकर पहले एक कार्यसिद्धि रुद्राक्ष का दाना रखे और फिर उसपर वह गिरी गोला रखकर दबा दे ,अगल-बगल मिटटी लगा दे किन्तु सुराख नारियल का बंद न हो ,,वापस लौट आये ,,इस प्रकार निरंतर पाच मंगलवार करे ,,,इस प्रयोग में कोई प्रतिबन्ध नहीं है ,यहातक की रजस्वला होने पर भी प्रयोग पूर्ण करना चाहिए ,,केवल दो सावधानिया रखनी है ,,पहला की रात की नीद से उठने से लेकर गिरी गोला रखकर आने तक बोलना नहीं है अर्थात पूर्ण मौन रहना है ,,,दूसरी सावधानी रखनी है की प्रयोग कए लिए आते जाते समय पीछे मुड़कर देखना मना है ,कोई बात करे या आवाज दे तब भी जबाब न दे क्रिया की अवधी में यह ध्यान में रहे की हे प्रभु में यह समस्त प्रयोग उत्तम सुयोग्य वर प्राप्ति के लिए कर रही हू ,मेरी मनोकामना पूर्ण हो |

            …उपरोक्त ज्योतिषीय और तांत्रिक प्रयोग यदि कन्या द्वारा किये और करवाए जाए तो उसका विवाह तीन माह में होने की पूर्ण उम्मीद होती है ,चाहे बाधाए कैसी भी हो इनमे प्रत्येक बाधाओं कए शमन की क्षमता है और विवाहयोग [समय ]उत्पन्न करने की क्षमता है …………………………………………………….हर-हर महादेव

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  • विवाह में बाधक ग्रह योग

    विवाह-बाधा और ज्योतिष योग        

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    ……विवाह वह समय है ,जब दो अपरिचित युगल दाम्पत्य सूत्र में बंधकर एक नए जीवन का प्रारंभ करते है ,,ज्योतिष में योग ,दशा और गोचरीय ग्रह स्थिति के आधार पर विवाह समय का निर्धारण होता है ,परन्तु कभी-कभी विवाह के योग ,दशा और अनुकूल गोचरीय परिभ्रमण के द्वारा विवाह काल का निश्चय करने पर भी विवाह नहीं होता क्योकि जातक की कुंडली में विवाह में बाधक या विलम्ब कारक योग होते है |विवाह के लिए पंचम ,सप्तम ,द्वितीय और द्वादश भावों का विचार किया जाता है ,द्वितीय भाव सप्तम से अष्टम होने के कारण विवाह के आरम्भ व् अंत का ज्ञान कराता है ,साथ ही कुटुंब कभी भाव होता है ,द्वादश भाव शैया सुख के लिए विचारणीय होता है |स्त्रियों के संदर्भ में सौभाग्य ज्ञान अष्टम से देखा जाता है अतः यह भी विचारणीय है |शुक्र को पुरुष के लिए और स्त्री के लिए गुरु को विवाह का कारक माना जाता है |प्रश्न मार्ग में स्त्रियों के विवाह का कारक ग्रह शनि होता है |सप्तमेश की स्थिति भी महत्वपूर्ण होती है ,,,विवाह के लिए निम्न योग और ग्रह बाधक होते है

    .[१] सूर्य लग्नस्थ हो और शनि स्वगृही सप्तमस्थ हो तो विवाह में बाधा आती है .

    .[२] सूर्य और शनि की युति लग्न में हो तो विवाह में विलम्ब होता है

    .[३] चन्द्रमा सप्तम भाव में और शनि लग्न में हो अथवा शनि और चन्द्रमा की युति सप्तम भाव में हो तो विवाह में विलम्ब होता है

    .[४]६ भाव में शनि ही ८ भाव में सूर्य हो और अष्टमेश निर्बल -पापाक्रांत हो तो विवाह में विलम्ब होता है

    [५]यदि सूर्य सप्तम भाव में हो और शनि की उस पर दृष्टी हो तो विवाह में विलम्ब संभव है

    .[६]यदि सूर्य ,शनि के साथ सप्तमेश शुक्र हो तो विवाह में देरी होती है

    .[७]शुक्र-चन्द्रमा की सप्तम में स्थिति भी चिंतनीय होती है ,,यदि मंगल-शनि उनसे सप्तम में हो तो निश्चित रूप से विवाह में विलम्ब होता है

    .[८]यदि शुक्र शत्रु राशिगत होकर सप्तमस्थ हो तो विवाह में अनेक अवरोध आते है और विलम्ब होता है

    .[९]सूर्य और चन्द्रमा बलि होकर सप्तमेश शुक्र के साथ हो और इनपर गुरु की दृष्टि न हो तो विवाह नहीं होता है ,गुरु की दृष्टि होने पर एक बार विवाह हो जाता है परन्तु कटुता जीवन भर रहती है

    [१०] यदि लग्नेश और चन्द्रमा किसी पाप ग्रह के साथ सप्तम भाव में हो तथा सप्तमेश द्वादश भाव में हो विवाह में विलम्ब होता है |यदि शुक्र और चन्द्रमा से मंगल और शनि सप्तमस्थ हो तो विवाह में विलम्ब की सम्भावना होती है |

    .[११] सप्तम भाव यदि शनि और मंगल के पापकर्तरी योग में हो तो विवाह में विलम्ब हो सकता है

    .[१२] शनि और गुरु की युति लग्न या सप्तम भाव में हो विवाह में विलम्ब हो सकता है |………………………………..हर-हर महादेव

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  • भाग्य अलग कैसे हो जाता है दो एक ही समय जन्मे लोगों का ?

    क्यों एक समान जन्म समय पर भी भाग्य अलग होते हैं?

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    ———————–तंत्रिकीय विश्लेषण ———————–

             अक्सर एक प्रश्न ज्योतिष जगत में उठाया जाता है की एक ही समय एक ही स्थान पर एक ही घर में यहाँ तक की एक ही गर्भ अर्थात एक ही माता पिता की जुडवा संतानों के भाग्य अलग क्यों और कैसे हो जाते हैं |ज्योतिष को नीचा दीखाने के लिए भी कुछ लोग इस प्रश्न का उपयोग करते हैं |ज्योतिष जगत इसका उत्तर देश -काल -परिस्थिति के रूप में देता है ,अर्थात देश -काल और परिस्थिति अलग होने से भाग्य अलग हो जाता है ,किन्तु यह तर्क वहां बेमानी हो जाता है जब एक ही गर्भ से एक ही समय दो बच्चे पैदा हों और उनके भाग्य अलग हों |फिर यहाँ तर्क दिया जाता है की सेकण्ड के अंतर से मिनट के अंतर से भाग्य बदल जाता है |कुछ लोग षट्यांश अर्थात सातवें अंश की तो कुछ लोग नक्षत्र ,चरण आदि की बात करते हैं |ज्योतिष की थोड़ी ही सही पर जानकारी हमें भी है और उसके आधार पर हम पूर्ण संतुष्ट नहीं हो पाए ,जो इसे परिभाषित करते हैं वह खुद कितने संतुष्ट होते हैं पता नहीं हालांकि अपने ज्ञान के अनुसार व्यक्ति खुद तो संतुष्ट हो सकता है पर जब तक लोग संतुष्ट न हों तर्क बेमानी होता है |सोचने की बात है अगर लग्न और राशि ,नवांश ,महादशा ,नक्षत्र ,चरण ,अन्तर्दशा ,ग्रह स्थितियां तक समान हों तो भी एकदम से भाग्य विपरीत दो लोगों का कैसे हो सकता है |क्या केवल किन्ही एक दो वर्गों में थोडा अंतर आ जाने से पूरा भाग्य बदल जाएगा |तर्क पूरी तरह गले नहीं उतरता |चूंकि हम व्यावसायिक ज्योतिषी नहीं हैं ,[यद्यपि ज्योतिष की मूल भूत जानकारी है ]यह प्रश्न हममे उत्कंठा जगाता है तो हम इसका उत्तर जानने का प्रयास अपने तंत्र ज्ञान ,मनोवैज्ञानिक ज्ञान और अपने साधना अनुभवों के आधार पर करते रहे हैं ,जो हमने महसूस किया उसे प्रस्तुत कर रहे अपने इस अलौकिक शक्तियां चैनल और ब्लॉग पर अब पढने वाले पाठक निर्णय करेंगे की हम कितना सही हैं |जरुरी नहीं की हम पूरी तरह सही ही हों |

              इस प्रश्न का एक उत्तर ज्योतिष में ही मौजूद है जो कुछ हद तक सही है |ज्योतिष कहता है व्यक्ति के संचित कर्म उसका भाग्य बनाते हैं ,यह संचित कर्म हर व्यक्ति के अलग होते हैं अतः व्यक्ति का भाग्य अलग होता है |यहाँ इसे काटने वाला तर्क उत्पन्न होता है की संचित कर्मों के ही आधार पर तो ग्रह स्थितियां जन्म की बनती हैं और उन स्थितियों में जन्म लेने वाले वाले का भाग्य निर्धारित होता है ,फिर संचित कर्म अलग से कैसे प्रभावित करते हैं |इसका उत्तर ज्योतिष के पास कठिन होता है |अलग अलग तर्क प्रस्तुत किये जाने लगते हैं |किन्तु इसका उत्तर तंत्र के पास है |संचित कर्म अगले जन्म के भाग्य में भारी परिवर्तन लाते हैं भले ग्रह स्थितियां समान हों ,जन्म समय समान हों कई लोगों के ,परिस्थितियां और परिवार समान हों |

                  जन्म लेने वाले हर व्यक्ति के पिछले जन्मों की अनुभूतियाँ अलग होती हैं ,उसकी यादें अलग होती हैं ,संघर्ष अलग होते हैं ,लग्न अलग होते हैं [भले इस जन्म में समान हों ],जिनके आधार पर उनकी अवधारणा और व्यक्तित्व अलग होता है पिछले जन्मों में |उन व्यक्तित्वों के अनुसार उनके अवचेतन की संगृहीत यादें अलग होती हैं |अवचेतन की कार्यप्रणाली अलग होती हैं |जैसा की हिन्दू मतावलंबी जानते हैं आत्मा अमर है कभी नहीं मरती ,शरीर बदलती है यह आत्मा |तो इस आत्मा के शरीर से अलग हो जाने पर आत्मा की यादें पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाती |अवचेतन की यादें आत्मा के साथ बनी रहती हैं |अगर आत्मा की यादें समाप्त हो जाती तो फिर पित्र नहीं होते ,न उन्हें अपने कुल की याद होती |भूत-प्रेत की यादें भी न होती और वह प्रतिक्रया अलग अलग नहीं कर रहे होते |गुरु और साधू महात्मा अपने अनुयाइयों और शिष्यों का मार्गदर्शन न कर रहे होते शरीर छूटने पर भी |कोई बच्चा अपने पूर्व जन्म की बातें न बता देता |इस तरह यह यादें व्यक्ति की आत्मा के साथ जुडी रहती हैं और जन्म के बाद अवचेतन में सुरक्षित रहती हैं |कभी कभी कोई स्वप्न दिखाती हैं किसी स्थान अथवा दृश्य की और कुछ दिन बाद व्यक्ति को आभास होता है की अरे यहाँ तो में सपने में पहले आ चूका हूँ |या अचानक लगता है अरे यहाँ तो पहले आया हूँ कभी ,भले स्वप्न नहीं आया था |यह पूर्व जन्म की यादें होती हैं जो अवचेतन में सुरक्षित होती हैं |

                 जब व्यक्ति जन्म लेता है तो भले उसकी लग्न और ग्रह स्थितियां समान हों किन्तु अवचेतन की यादें और सोच अलग होती हैं |इसके कारण उसके निर्णय ,सोचने की दिशा ,उसका व्यक्तित्व ,उसकी अनुभूतियाँ दुसरे समान लग्न और समय में जन्मे बच्चे से अलग होती हैं |उसके सोचे प्रश्नों के उत्तर मन में अलग मिलते हैं अथवा उसकी प्रतिक्रिया दुसरे से अलग हो जाती है |इनके आधार पर उसके निर्णय ,क्षमता प्रभावित होते हैं फलतः उसका विकास अलग हो जाता है जिससे उसका भाग्य अलग होने लगता है |समान अवसर पर भी कोई अधिक विकास कर जाता है कोई कम क्योकि उसके अवचेतन में भिन्न ज्ञान हैं |सबके गुण ,रुचियाँ भी धीरे धीरे बदल जाती हैं ,कार्यशैली बदल जाती है |अपनी अनुभूतियों के अनुसार कोई साहसी होता है और रिस्क लेने में नहीं हिचकता क्योकि उसे उसका परिणाम और हल पता है अनजाने में ही सही वह साहस भरे निर्णय लेता है जबकि दूसरा असमंजस में होता है अथवा भययुक्त होता है ,क्योकि पिछले जन्मो में उसकी यादों में ऐसा कुछ नहीं ,उसका अवचेतन रिस्क लेने की गवाही नहीं देता उसे परिणाम नहीं पता |यहाँ भी समान ग्रह स्थितियां प्रभावित करती हैं और ग्रह रश्मियों से प्रतिक्रिया शरीर पर समान होने पर भी मन की दिशा अलग हो जाती है |

                यह विश्लेषण सामान्य ज्योतिषी ,यहाँ तक की सामान्य तांत्रिक और वैदिक ज्ञाता की भी समझ में नहीं आएगा किन्तु एक मनोवैज्ञानिक और जानकार तांत्रिक इसे समझ जाएगा |ऐसा ही होता है |यहाँ संचित कर्म कार्य करता है ,भले वह दिखाई नहीं देता |यद्यपि आलोचक इसके प्रमाण मांग सकते हैं किन्तु फिर भी ज्योतिषी इस तर्क को समझ कर उपरोक्त प्रश्न का उत्तर दे सकता है |यह विश्लेषण तो समान गर्भ से समान समय में जन्मे व्यक्तियों के लिए था |अब देखते हैं समान समय अलग परिवारों में जन्मे व्यक्तियों के भाग्य कैसे होंगे |

            एक ही समान जन्म समय पर समान परिस्थिति में किन्तु अलग परिवारों में जन्मे व्यक्तियों का भाग्य निश्चित रूप से अलग होगा |क्योकि यहाँ कई फैक्टर कार्य करते हैं जो भाग्य निश्चित रूप से बदल देते हैं |ऐसे लोगों में उपरोक्त अवचेतन की अनुभूतियाँ और यादें तो अलग होती ही हैं ,घर परिवार ,माता-पिता पर कार्य कर रही शक्तियां और उर्जायें भी अलग होती हैं जो जन्म लेने वाले बच्चे के आनुवंशिक गुणों के साथ ही जन्म के बाद उसके विकास को भी प्रभावित करती हैं |माता-पिता ,दादा-दादी ,परिवारीजनों के कर्मानुसार सकारात्मक अथवा नकारात्मक उर्जायें अथवा शक्तियाँ उनसे जुडी होती हैं |घर पर अलग उर्जाओं का प्रभाव हो सकता है ,कुलदेवता-देवी की अलग प्रकृति हो सकती है ,पितरों की अलग स्थिति और प्रभाव हो सकता है ,अलग ईष्टों के अनुसार अलग प्रभाव हो सकता है |यह सब मिलकर हर उस बच्चे पर अलग प्रभाव डालते हैं जो उसके विकास ,सोच ,अनुभव को प्रभावित कर देते हैं फलतः भिन्न वातावरण में विकास होता है और प्रतिक्रिया भिन्न हो जाती है जिससे उन्नति और भाग्य बदल जाते हैं |यहाँ तो लाखों वर्षों के संचित आनुवंशिक गुण अथवा उत्परिर्वन भी प्रभावी होते हैं फलतः बच्चा दुसरे समान समय के बच्चे से पूरी तरह अलग होता है और उसका भाग्य भी अलग होता है |

                जब एक गर्भ के समान समय के बच्चों और अलग परिवारों के समान परिस्थिति और समय के बच्चों में इतना अंतर आ जाता है तो अलग परिस्थिति और पारिवारिक स्तर के बच्चों में कितना अंतर आएगा यह आप समझ सकते हैं |इसीलिए कोई बच्चा गरीब परिवार में जन्म लेकर राजा बन जाता है जबकि समान समय में जन्मा राजा के घर का बच्चा राज्य गवां देता है |कोई कोई मुंह में चांदी का चम्मच लेकर पैदा होता है तो कोई भुखमरी में इसका विश्लेषण हम कभी दुसरे पोस्ट में करेंगे |हमारा विचार है भाग्य का अंतर क्यों होता है यह सामान्य जन को समझ आ गया होगा |इसे इस तरह से समझा जा सकता है |विज्ञान के अनुसार किसी बच्चे का 90% मानसिक विकास ५ वर्ष की उम्र तक हो जाता है |यदि उसे बेहद अनुकूल वातावरण ,सकारात्मक ऊर्जा ,ऊत्तम सोच का मार्गदर्शन मिले तो उसका 90% बेहतरीन विकास समय से हो जाता है ,पर यदि नकारात्मक उर्जाओं का प्रभाव घर-परिवार में हो ,बेहतर वातावरण न हो ,सही मार्गदर्शन न मिले जिसके बहुत से कारण हो सकते हैं तो उसी समान समय में जन्मे बच्चे का समय से विकास नहीं हो पायेगा ,फलतः जीवन भर यह समय उसे प्रभावित करेगा |

               जिस तरह किसी पौधे में छोटी अवस्था में ही कोई रोग लग जाए अथवा उचित भूमि अथवा पोषक तत्व न मिले तो वह अविकसित रह जाता है ,भले बाद में उसे कितने ही अच्छे वातावरण मिले ,उसी तरह बचपन के ऊर्जा प्रभाव जीवन भर बच्चे को प्रभावित करते हैं |इसे धन- संपत्ति ,समृद्धि से न जोड़ें अपितु इनके अर्थ सकारात्मक ऊर्जा से हैं |इसी प्रकार जीन विविधता और उनके विशेष गुण भी समान लग्न ,समय होने पर भी दो बच्चे के कर्म -सोच -क्रिया-प्रतिक्रिया अलग कर देतें हैं जिससे एक ही विषय पर उनकी प्रतिक्रिया और नजरिया भिन्न होता है जिससे उनका भाग्य अलग हो जाता है |किसी के कुलदेवता ,घर पर प्रभावी ईष्ट की प्रकृति ,किसी वायव्य बाधा का प्रभाव ,घर पर प्रभावी उर्जाओं की प्रकृति ,पितरों की स्थिति भी पारिवारिक स्थिति और माहौल के साथ विकास की संभावनाओं को प्रभावित करते हैं जिसका सीधा प्रभाव बच्चे के आगे के भविष्य पर जरुर पड़ता है और भाग्य अलग हो जाता है |……………………….हर-हर महादेव

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  • भाग्य जानने की हानियाँ

    भाग्य जानने की हानियाँ

    भविष्य जानना खतरनाक भी हो सकता है ?

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    बिना सोचे उपाय करने से होने वाली स्थायी हानि को कोई नहीं सुधार सकता 

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                  हर व्यक्ति अपने भविष्य के प्रति उत्सुक होता है और जिसे देखो यहाँ वहां हाथ फैला देता है ,अपनी कुंडली डाल देता है भविष्य जानने के लिए ,पर भविष्य जानने के अपने खतरे हैं |,भविष्य जानना भी बुरा हो सकता है ,कभी यह बहुत खतरनाक भी हो सकता है ,कभी किसी ने सोचा नहीं होगा अपितु हर व्यक्ति तो अपना भविष्य ही जानने के पीछे भागता रहता है |किसी ज्योतिषी को देखा नहीं ,किसी को जाना नहीं की बस अपना भविष्य जानने को उत्सुक |जिसे परेशानी है उसकी तो जिज्ञासा समझ आती है की वह अपनी समस्या /परेशानी का कारण जानना चाहता है ,[[वैसे कारण कम ही लोग जानना चाहते हैं लोग बस उपाय जानना चाहते हैं जो अच्छा नहीं होता ]] जिससे वह उससे निकल सके पर जिन्हें कोई परेशानी नहीं वह भी अपना भविष्य जानना चाहता है |कोई कोई व्यक्त भले ऐसा न करे पर ९९.९९ प्रतिशत में भविष्य को लेकर जिज्ञासा होती ही होती है |आइये हम आपको बताते हैं की भविष्य जानना कभी आपको परेशानी में भी डाल सकता है और उस परेशानी से फिर आपको कोई भविष्यवक्ता नहीं निकाल सकता |हालांकि बहुत से भविष्यवक्ताओं ,ज्ञानिओं ,जानकारों ,बुद्धिजीवियों और भविष्य जानने का दावा करने वाले ज्योतिषियों को मेरी बात बुरी भी लग सकती है अथवा उनके समझ में नहीं आ सकती ,क्योकि उन्होंने कभी सोचा ही नहीं इस बारे में |सामान्य लोगों ने भी नहीं सोचा ,जानेंगे कैसे |

                  जब आप भविष्य देख सकते हैं तो उसमे परिवर्तन भी किया जा सकता है |यही तो ज्योतिष का आधार है |भविष्य जानने का उद्देश्य भी होता है और यही भविष्यवाणी का अंतिम उद्देश्य होता है की भविष्य में होने वाली घटना को सुधारा जा सके |अगर सुधारा न जा सकता तो ज्योतिष और भविष्यवाणी का कोई अर्थ नहीं था |इसे इतनी न लोकप्रियता मिलती न इसकी कोई उपयोगिता थी |यद्यपि कुछ तथाकथित ज्योतिषी जो खुद को  आधुनिक और अधिक ज्ञानी मानते हैं ,उपाय और सुधार की संभावना को नकारते हैं ,की ऐसा नहीं हो सकता और वह यह नहीं जानते की वैदिक काल से ही ज्योतिष आदि में उपायों की अवधारणा इसी लिए रही है की भविष्य जानकर उसे सुधारा जा सके |इन्हें छोड़ दें तो लगभग सभी प्रकार की भविष्यवाणी और ज्योतिष आदि जैसी भविष्य आधारित विद्याओं के मूल में भविष्य जानकर उसे सुधारना ही है |ज्योतिष का उद्देश्य ही रहा है की ग्रहों द्वारा उत्पन्न भाग्य के प्रभाव को ग्रहों के उपाय द्वारा कैसे अधिकतम मनुष्य के लिए हितकर बनाया जाय|

                   जब आप भविष्य देख पाते हैं तो उसे सुधारने का भी प्रयत्न करते हैं अपने अनुकूल |प्रयास तो सभी का यही होता है |ज्योतिषी -तांत्रिक आदि भी उपाय तो इसीलिए बताते हैं की जो हो रहा ,जो होने वाला है उसमे कैसे परिवर्तन किया जा सकता है |अर्थात भविष्य जानने पर उसे सुधारा जा सकता है या बदला जा सकता है |जब कोई भी उपाय किया जाता है तो उससे ऊर्जा उत्पन्न होती है और उस ऊर्जा का प्रभाव ग्रह के प्रभाव पर होता है |भविष्य में सुधार अथवा थोड़े से भी परिवर्तन के लिए किया गया प्रयास कुछ तो परिवर्तन ला ही देता है और कुछ तो भविष्य बदल ही जाता है ,भले १ प्रतिशत ही सही |अर्थात जब आपने उपाय किया तो उसकी शक्ति से थोडा परिवर्तन हुआ |यानी भविष्य बदला ,और इसे बदला जा सकता है |अब अगर भविष्य बदला जा सकता है तो इस परिवर्तन से एक नया भविष्य उत्पन्न होगा |यानी जो उपाय आपने किये उससे जो परिवर्तन हुए उनसे एक नए भविष्य का निर्माण हुआ ,भले यह निर्माण मात्र १ प्रतिशत ही हुआ पर इसका उल्लेख अब आपकी नैसर्गिक कुंडली में तो नहीं होगा |क्योकि जो भविष्य आज किसी कुंडली ,अथवा अन्य माध्यम से देखा गया है उसका तो आधार है ग्रह स्थितियां आदि पर जो भविष्य आज बदला जा रहा उसका कोई आधार नहीं होगा ,कोई कुंडली नहीं होगी ,कोई ग्रह स्थितियां नहीं होंगी |क्योकि आपके प्रयास कब ,किस घडी फलीभूत हुए और भविष्य में बदलाव किस घडी आया कोई नहीं जानता |इस प्रकार जो नया भविष्य बना उसको जानने का तरीका सामान्यतया नहीं होता ,केवल बहुत सिद्ध व्यक्ति ही उसे देख सकता है ,ज्योतिष से तो यह कत्तई संभव नहीं |

                   अब सबसे बड़ा खतरा तब उत्पन्न होता है की जो नया भविष्य आपने पिछले भविष्य को सुधारने के प्रयास में उपाय आदि करके बनाए हैं उसमे कब कौन सा खतरा है किसी को नहीं पता |यानी आज जो नया भविष्य बना उसमे आगे जाकर नुक्सान है या लाभ है अथवा कोई परिवर्तन तो नहीं होने वाले कोई नहीं जानता |आपके उपाय सही तरीके से हुए हैं की नहीं |सही उपाय बताये गए थे की नहीं |नीम हकिम की तरह ऐसे उपाय तो नहीं करवा दिए गए जो एक नई समस्या खड़ी करने वाले हैं नए भविष्य में |अगर उपाय गलत थे तो भी एक नया भविष्य बनेगा और उपाय सही थे तो भी एक नया भविष्य बनेगा |अगर सही ही उपाय बताये गए तो उनके साइड इफेक्ट क्या हो सकते हैं जो नए भविष्य में आयेंगे यह भी सोचने लायक होगा |आज की समस्या तो आपने उपाय करके हल कर दी किन्तु यह परिवर्तन कल के भविष्य के लिए घातक तो नहीं |ऐसा तो नहीं की आज की समस्या कम करने में भविष्य में बड़ी समस्या उत्पन्न कर दी गयी |क्योकि अब नए भविष्य को तो पुरानी कुंडली से देखा नहीं जा सकता |वह कुंडली तो जन्म के समय की स्थितियों पर आधारित है |उसमे परिवर्तन के बाद क्या स्थितियां होंगी वह तो वह बता नहीं पाएगी |वह कुंडली तो सामान्य भविष्य बताती है जबकि उसमे कोई परिवर्तन का प्रयास न किया गया हो |

                ज्योतिषी -तांत्रिक के कहने पर ,बताने पर आपने गंभीर उपाय /प्रयास किये और आपकी स्थितियां परिवर्तित भी हो गयी |आपका माहौल बदल गया |स्थितियों में परिवर्तन से स्वभाव बदल गया ,वातावरण बदल गया ,घर-परिवार में परिवर्तन हो गया |अब आगे जो होना है या जो परिवर्तन आ गया उसके अनुकूल क्या आपका यह स्वभाव ,वातावरण ,माहौल आदि सहायक होंगे या आपमें या आपके आसपास जो परिवर्तन हुए हैं वह आपके नए भविष्य से सामना करने में सहायक होंगे या नहीं कोई नहीं जानता |इस नए भविष्य से सबकुछ अनजान हो जाएगा |जब एक बार आपने अपने लिए गंभीर उपाय कर लिए तो ज्योतिषी की भविष्यवाणी आप पर फिर कभी शतप्रतिशत सही नहीं होगी |कुछ घटनाएं सही बैठेंगी तो कुछ गलत हो जायेंगी |क्योकि आपके भविष्य में तो परिवरतन हो गया है |कुछ उपाय सही काम करेंगे तो कुछ के परिणाम विपरीत होंगे |जैसे जैसे आप परिवर्तन का प्रयास करते जायेंगे ,नए पर नए भविष्य उत्पन्न होंगे और स्थिति जटिल से जटिलतम होती जायेगी |गोचरीय परिवर्तन पर आधारित फलादेश कुछ हद तक सही होंगी तो नैसर्गिक स्थितियों पर आधारित फलादेश में परिवर्तन मिलेगा |ऐसा नहीं की ग्रहों का प्रभाव आपके लिए बदल जाएगा |वह नहीं बदलेगा क्योकि जन्मकालिक स्थिति के अनुसार उनका प्रभाव तो पड़ेगा ही ,पर आपके शरीर की उनके रश्मियों की स्वीकार्यता अथवा अस्वीकार्यता में परिवरतन हो गया रहेगा |क्योकि आपने विभिन्न उपाय से एक नया ऊर्जा संरचना उत्पन्न किया था ,इस रश्मियों के ही प्रभाव को बदलने के लिए |

                यह लेख हमारी सोच की उपज है ,सभी सहमत हों जरुरी नहीं और हमें अपेक्षा भी नही ऐसी |कुछ विपरीत कमेन्ट भी कर सकते हैं पर हमारी यह सोच अचानक नहीं बनी या उत्पन्न हुई |बहुत सारी घटनाओं को देखने ,समझने के बाद बनी ,जबकि अति विद्वान् ज्योतिषियों के भी भविष्यवाणी कुछ स्थानों पर गलत हो जाते हैं |गलती या कमी ज्योतिषी में नहीं होती ,अपितु दिक्कत उन गंभीर उपायों आदि की है जो जातक ने पहले करके नया भविष्य उत्पन्न कर दिया है |चाहे उसने जिज्ञासा में किया हो अथवा किसी ज्योतिषी /भविष्यवक्ता के कहने पर किया हो ,पर हो तो कुछ गया ही है ,जो आज समस्या की तरह खड़ा हो गया |ऐसी स्थिति में जातक के पास केवल एक ही बेहतर विकल्प बचता है किसी सिद्ध व्यक्ति के पास पहुचना जो इस परिवर्तित भविष्य को भी देख सके और सुधार करा सके |पर जो व्यक्ति इतना सिद्ध हो की वह बिना किसी आधार के किसी का भविष्य देख सके ,वह पहले तो किसी का भविष्य बताता नहीं ,दुसरे वह समाज से ही दूर रहता है ,क्योकि यह क्षमता बहुत गंभीर साधनाओं के बाद ही आ पाती है |भूत और वर्त्तमान देखना तो मुश्किल नहीं पर भविष्य देखना सर्वाधिक मुश्किल काम है |कोई कर्ण पिशाचिनी ,वामकी ,कर्ण मातंगी  आदि का साधक भविष्य नहीं बता सकता ,हाँ यह भूत और वर्त्तमान बता देते हैं और चुकी भूत सही बता देते हैं अतः भविष्य के तुक्के भी लोग सही ही मान लेते हैं ,जबकि ये भविष्य देख ही नहीं सकते |पंचंगुली का साधक परिवर्तित भाग्य नहीं बता सकता ,हाँ सामान्य भाग्य बता सकता है ,अतः यह भी बदले हुए भाग्य में कारगर नहीं होता |केवल बहुत पहुंचा हुआ सिद्ध व्यक्ति ही यह सब बता सकता है ,जिसे खोजना भूसे के ढेर से सुई ढूँढने जैसा ही है हालांकि दावा करने वाले तो लाखों मिलते हैं ,पर तुक्के लगाने से अधिक किसी की औकात नहीं होती भविष्य देखना तो दूर की बात है |

              इस पूरे लेख को लिखने का मकसद केवल अपने मन में उठे विचार व्यक्त करना ही मात्र है पर पढने वाले लोग कहेंगे कोई निष्कर्ष नहीं बताया की फिर आखिर करें तो क्या करें |इसलिए कुछ निष्कर्ष तो निकालना ही पड़ेगा और कुछ बचाव तो बताने ही पड़ेंगे |आप खुद के विवेक से जो भी बचाव कर सकते हैं करें ,हम केवल यह कहाँ चाहेंगे की जब भी आप भविष्य को लेकर उत्सुक हों अथवा किसी कठिनाई में पड़े हों और भविष्य आदि जानकर निराकरण की अपेक्षा हो तो किसी अच्छे ,विद्वान् ,ज्ञानी ज्योतिषी ,भविष्यवक्ता को ही अपने मार्गदर्शन के लिए चुनें |यहाँ वहां ,नीम -हकीम से सलाह लेना ,दो महीने ज्योतिष पढ़कर ज्योतिषी बन जाने वाले ,टोटके जानकर तांत्रिक बन जाने वाले ,कल तक यहाँ वहां घूमने वाले और आज तांत्रिक या ज्योतिषी खुद को कहने वाले ,कम उम्र युवा अथवा अनुभव हीन व्यक्ति ,भले जो खुद को चाहे जितना बड़ा बताये ,ऐसे ज्योतिषी -तांत्रिक -भविष्यवक्ता से बचें |इससे अधिक जरुरी यह की कोई भी उपाय तब तक न करें जब तक किसी विद्वान् की सलाह के साथ उसके अच्छे बुरे परिणाम की जानकारी न हो जाए या वह काम कैसे करेगा ,कहाँ करेगा ,उसका प्रभाव कहाँ होगा ,कैसा होगा ,वह परिवर्तन या सुधार कहाँ और कैसे करेगा यह सब न समझ लें |आप जो भी उपाय करेंगे उससे एक परिवर्तन जरुर होगा और नया भविष्य बनेगा ,जिसे कोई ज्योतिषी नहीं पढ़ पायेगा और इसलिए जब वहां समस्या आएगी तो कोई सुधार भी नहीं पायेगा |जो करें सोच कर करें ,ऐसा न हो की कुछ बनाने में कुछ ऐसा बिगड़ जाए जो सुधारना मुश्किल हो जाए |इसके बाद के बचाव आपकी इच्छा पर |…………[[व्यक्तिगत चिंतन ]]…………………………………………..हर-हर महादेव

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  • खुद की तबाही का रास्ता बना रहे ?

    खुद की तबाही का रास्ता बना रहे ?

    क्या अपनी बर्बादी खुद लिख रहे ?

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    कभी सोचा है

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           आप जिस देवता को पूजते हैं आपका अंतिम पड़ाव उस देवता तक ही अधिकतम हो सकता है ,अर्थात आप अधिक से अधिक उसके लोक तक ही जा सकते हैं ,अगर वह प्रसन्न हो गया अथवा सिद्ध हो गया तो |आप अगर भूत -प्रेत ,पिशाचिनी ,यक्षिणी ,अप्सरा ,पीर ,मजार ,शहीद ,बीर ,सती ,ब्रह्म पूजते हैं तो आपका अंतिम पड़ाव यही होंगे आपको देवी-देवताओं का लोक नहीं मिलने वाला इन्हें पूजने से |इतना तो सभी जानते हैं की किस देवता को पूजने से क्या मिलता है ,उसी तरह जिसे आप पूजते हो वह आपको मिलता है और आपको उसका लोक मिलता है |अगर कोई मनुष्य मरा है और ब्रह्म ,पीर ,बीर ,सती ,शहीद ,प्रेत ,भूत बना है तो उसकी तो क्षमता ही उसके लोक तक है ,जब वह खुद आत्मा रूप में घूम रहा तो आपको क्या देवताओं तक ले जाएगा |

                इसी तरह पिशाचिनी ,यक्षिणी ,अप्सरा भी अपने लोक और क्षमता से ऊपर तो आपको नहीं ही पहुचा सकते |क्या आप गारंटी से कह सकते हैं की अमुक शहीद ,ब्रह्म ,बीर का मोक्ष हो गया या वह देव लोक तक चले गए |जब खुद नहीं गए तो आपको क्या ले जायेंगे |अगर चले गए तो उनके पूजने पर यहाँ आपका काम कैसे होता है |यहाँ आपका काम होता है इसका मतलब वह इसी भौतिक दुनिया में भटक रहे और आपके पूजा को लेकर अपनी शक्ति बढ़ा रहे और अपना शक्ति बरकरार रख रहे |वैसे आपकी मनोकामना पूर्ण होने की थ्योरी और विज्ञान कुछ अलग होता है जिसके बारे में ९९ प्रतिशत लोग नहीं जानते |आप किसी भी काल्पनिक देवता की पूजा करने लगें और आपकी श्रद्धा अट्टू हो तो आपमें मानसिक बल ,क्षमता ,आस्था -विश्वास की ताकत उत्पन्न होगी जो आपके अवचेतन के साथ ही आपके व्यक्तित्व को भी प्रभावित करेगी और आपकी स्थिति सुधरती जायेगी |

                इसे आप प्रेत शक्ति की पूजा से मत जोड़ लीजियेगा की उनकी पूजा पर भी आपको यही लाभ मिलेंगे |प्रेत शक्ति की पूजा पर वह आपकी पूजा लेते हैं ,कभी कभी तो खुद को देवी देवता बताकर भी लेते हैं ,आपके काम बनते हैं उनकी सहायता से किन्तु आपके आस पास ऐसा घेरा भी बन जाता है की आप फिर उनसे निकल नहीं सकते और आपकी मुक्ति बाधित हो जाती है ,मोक्ष की तो बात ही भूल जाइए |आपकी अगली पीढ़ी से भी यह पूजा चाहते हैं और अगली पीढ़ी ने इन्हें पूजा नहीं दी तो उनकी बर्बादी शुरू |इनकी पूजा से आपके पित्र तो नाराज रहते ही हैं आपसे आपके कुलदेवता भी स्थान छोड़ जा चुके होते हैं ,फिर आपके पास वापसी का कोई रास्ता नहीं होता और आप इन्हें ही पूज सकते हैं |

              आपकी पूजा किसी भी देवी देवता तक नहीं पहुँचती |आप कहेंगे की क्या यह देवी -देवताओं से भी शक्तिशाली हो गए जो उन तक आपकी पूजा नहीं पहुंचेगी तो हम आपको बताना चाहेंगे की हां आपकी पूजा देवताओं तक नहीं पहुंचेगी भले देवी देवता बहुत शक्तिशाली होते हैं क्योंकि गलती आपने खुद की है |कुलदेवता नाराज हो गए हों या कुलदेवता की पूजा न हो रही हो तो किसी भी देवी देवता को पूजा नहीं मिलती यह एक चक्र और सीढ़ी होती है भारतीय पूजा नियमों में |क्रम बनाए गए हैं ,संरचना बनी है ऊर्जा की जिसमे ऊर्जा विनिमय होता है |पित्र नाराज तो कुलदेवता रुष्ट ,कुलदेवता रुष्ट तो कोई देवता पूजा नहीं पायेगा |अंततः आप न मुक्त होंगे ना पाजिटिव ऊर्जा पायेंगे |ग्रहों तक के उपाय काम नहीं करेंगे |ले देकर आप उसी शक्ति पर निर्भर हो जायेंगे जो प्रेत शक्ति आप पूज रहे थे |अक्सर आपने देखा भी होगा की इन्हें पूजने वाले कुछ समय बहुत तेजी से वृद्धि करते हैं पर अंततः अंतिम समय बुरा होता है और बाद में परिवार तबाह होने लगता है ,क्योंकि कोई भी ऐसी शक्ति बिना स्वार्थ किसी की सहायता नहीं करती चूंकि आखिर हैं तो वह आत्मा ही तथा उसमे इच्छाएं भी बाकी होती हैं |

             इनमे एक दोष और होता है यह पूजे जाने पर आपके कुलदेवता की पूजा ले लेते हैं और कुलदेवता साथ छोड़ देते हैं ,आज तो नहीं समझ आएगा पर अगली पीढियां परिणाम गंभीर भुगतेंगी जब कुलदेवता का सुरक्षा चक्र समाप्त हो जाएगा |दूसरी समस्या की कुलदेवता को पूजा न मिलने से ईष्ट तक आपकी पूजा नहीं पहुचेगी |आप तीन घंटे पूजा करो पर लाभ कुछ भी नहीं होगा |ईष्ट तक पूजा पहुच ही नहीं रही |थक कर आप कहोगे की पूजा पाठ ,तंत्र मन्त्र सब बेकार है |

            एक और समस्या यह होगी आपके इन शक्तियों को पूजने से की जब तक आप इन्हें पूजोगे ये आपको सुखी रखेंगी क्योकि इनका स्वार्थ है आपकी पूजा से इन्हें शक्ति मिलेगी |आने वाली पीढ़ियों में जब कोई भूलेगा या पूजा नहीं देगा या आप ही कभी पूजा बंद कर दिए तो यह उनका या आपका विनाश कर देंगी |कुलदेवता और ईष्ट पहले ही गायब हैं आपका या पीढ़ियों का भला कोई नहीं कर पायेगा |इन सब कारणों को आपने सोचा नहीं पूजने लगे आत्मा की प्रतीक शक्तियों को ,जब परिणाम बंद हुआ तो पूजा पाठ सब बेकार बना दिया |पहले नहीं सोचा तो भैया अब सोचो ,अभी आपके पास समय हो सकता है |वर्ना अपना तो बेडा गर्क करोगे ही आने वाली पीढियां भी गाली देंगी की कहाँ फंसा कर चले गए उन्हें आप |दुसरे की देखा -देखि शहीद -पीर ,मजार ,ब्रह्म बाबा .बीर बाबा .के भ्रम से बाहर निकलो नहीं तो पछताने पर भी रास्ता नहीं मिलेगा |ध्यान दीजिये हम संतों और गुरुओं की समाधि की बात नहीं कर रहे ,इन पर हम किसी दुसरे लेख में विस्तार से चर्चा करेंगे |इनका प्रभाव और परिणाम अलग होता है |अभी हम केवल शहीद ,ब्रह्म ,बीर ,सती ,पीर ,चौकी ,मजार आदि उन शक्तियों की चर्चा कर रहे जो प्रेत योनी में गए |आप पीर और संत समाधि को भी आपस में मत जोड़ समान मत मान लीजियेगा क्योंकि दोनों के प्रभाव आपके लिए समान नहीं होते हैं |इस पर हम विस्तार से आपको अगले अंक में समझायेंगे |

                    आप हिन्दू हो तो बड़े सहिष्णु और दयालु भी हो ,सबको बराबर मानकर कहीं भी सर झुका देते हो ,किसी की पूजा करने लगते हो पर कहीं यह आपके गले की फांस तो नहीं बन रहा इस पर भी तो सोचो |आप आज के थोड़े से स्वार्थ और लाभ के लालच में कहीं अपनी मुक्ति तो नहीं बिगाड़ रहे ,कहीं अपनी आने वाली पीढ़ियों को कांटे और बर्बादी तो नहीं देकर जा रहे |.हम यह बिलकुल भी नहीं कह रहे की आप इनकी पूजा मत कीजिये ,आप इनको पूजा दीजिये ,जरुर दीजिये आपको अति आवश्यक लगता हो तो किन्तु अपने घर में स्थापित करके नहीं ,आप जब भी इन्हें पूजा दें तो इनके लिए बनाए गए स्थान पर जाकर ही |इन्हें लाकर घर में स्थापित नहीं कीजिये ,क्योंकि आपकी सभी समस्याएं तभी शुरू होंगी जब आप इन्हें घर में स्थापित कर देंगे |ऐसी कोई मान्यता मत मान दीजिये की आपका यह काम होगा तो आप इन्हें घर में स्थान देकर पूजा करेंगे |आपने घर में स्थान दिया तो फिर वह होगा जो हमने उपर बताया है |…[इस विडिओ और पोस्ट का उद्देश्य किसी की भावना  को  ठेस  पहुचना नहीं है ,अपितु पूजा -पाठ  के आतंरिक रहस्य को समझने का प्रयत्न मात्र है ,जो हम अपने website-alaukikshaktiyan.com,alaukikshaktiyan.in,facebook पेज ,youtube चैनल और ब्लॉग के पाठकों -श्रोताओं से साझा कर रहे ,वैचारिक स्वतंत्रता के अधिकार के आलोक में ]………………………………………………………….हर-हर महादेव

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