Author: Tantra Marg
  • अपराजिता /भगपुष्पी [Aparajita ] और तंत्र

    ::::::::::::::::::अपराजिता
    और तंत्र
    ::::::::::::::::::::

    ==============================
         अपराजिता एक लता जातीय बूटी है जो जो की वन
    उपवनो में विभिन्न वृक्षों या तारों के सहारे उर्ध्वगामी होकर सदा हरी भरी रहती है
    |यह समस्त भारत में पाई जाती है ,इसकी विशेष उपयोगिता बंगाल में दुर्गा देवी तथा
    काली देवी की पूजा के अवसर पर स्पष्ट दर्शित होती है |नवरात्रादी के विशिष्ट अवसर
    पर नौ वृक्षों की टहनियों की पूजा में एक अपराजिता भी होती है |
         अपराजिता के ऊपर बहुत ही सौन्दर्यमयी पुष्प
    खिले रहते है ,गर्मी के कुछ दिनों को छोड़कर शेष पुरे वर्ष यह लता पुष्पों का
    श्रृंगार किये रहती है |अपराजिता पुष्प भेद के कारण दो प्रकार की होती है नीले
    पुष्प वाली तथा श्वेत पुष्प वाली |नीले पुष्प वाली को कृष्ण कांता और श्वेत पुष्प
    वाली को विष्णु कांता कहते हैं |अपराजिता का पुष्प सीप की भांति आगे की तरफ
    गोलाकार होते हुए पीछे की तरफ संकुचित होता चला जाता है |पुष्प के मध्य में एक और
    पुष्प होता है जो की स्त्री की योनी की भांति होता है |संभवतः इसी कारण इसे तंत्र
    शास्त्रों में भगपुष्पी या योनीपुष्पा का भी नाम दिया गया है | नीले पुष्प वाली
    भगपुष्पा के भी दो भेद हैं ,इकहरे पुष्प वाली और दोहरे पुष्प वाली |

        अपराजिता की जड़ को विधिवत आमंत्रित कर पूजित
    कर धारण करने से भूत प्रेत की समस्या और ग्रह दोषों का निवारण होता है |अपराजिता
    का उपयोग प्रसव को सुगम बनाने ,वृश्चिक दंश में ,भूत बाधा में ,गर्भ धारण में
    ,चोरों -बाघों से रक्षा में ,प्रबल वशीकरण करने में होता है
    |….[अपराजिता के चमत्कार -अगले अंक में ]…………………………………………………हर
    हर महादेव 
    READ MORE: अपराजिता /भगपुष्पी [Aparajita ] और तंत्र
  • गोमती चक्र [Gomati Chakra] और लक्ष्मी स्थायित्व

    गोमती चक्र लक्ष्मी प्राप्ति में सहायक है 

    ===========================
    गोमती चक्र से भलीभाँति परिचित हैं। गोमती चक्र समुद्र प्रदत्त चामत्कारिक तंत्रोक्त वस्तु है गोमती चक्र के प्रयोग अन्य तंत्रोक्त साधनाओं एंव प्रयोगों की भाँति कठिन अथवा दुष्कर नहीं हैं।गोमतीचक्र के प्रयोग बड़े ही सरल, किन्तु प्रभावकारी प्रयोग होते है। यह लक्ष्मी जी की प्रिय वस्तुओं में से एक है और इसीलिए लक्ष्मी के आकर्षण और स्थायित्व के लिए प्रयोग किया जाता है। कई लोग इसे दुर्लभ और दुर्लभतम बताते हैं जबकि आज ये देभर में सुलभ है अन्य तंत्रोक्त
    वस्तुओं के समान महंगा होकर ये काफी सस्ता है और बेहद असरदार भी।गोमती चक्र के लक्ष्मी सम्बंधित कुछ प्रयोग निम्न प्रकार हैं –
     आर्थिक बाधा नाश और स्थायी लक्ष्मी हेतु
    गोमती चक्र प्रयोग
    ——————————————————————-
    1. यदि आपको अचानक आर्थिक हानि होती हो, तो किसी भी मास के प्रथम सोमवार को २१ अभिमन्त्रित गोमती चक्रों को पीले अथवा लाल रेशमी वस्त्र में बांधकर धन रखने के स्थान पर रखकर हल्दी से तिलक करें फिर मां लक्ष्मी का स्मरण करते हुए उस पोटली को लेकर सारे घर में घूमते हुए घर के बाहर आकर किसी निकट के मन्दिर में रख दें
    2 . यदि आपके परिवार में खर्च अधिक होता है, भले ही वह किसी महत्त्वपूर्ण कार्य के लिए ही क्यों हो, तो शुक्रवार को २१ अभिमन्त्रित गोमती चक्र लेकर पीले या लाल वस्त्र पर स्थान देकर धूपदीप से पूजा करें अगले दिन उनमें से चार गोमती चक्र उठाकर घर के चारों कोनों में एकएक गाड़ दें ११ चक्रों को लाल वस्त्र में बांधकर धन रखने के स्थान पर रख दें और शेष किसी मन्दिर में अपनी समस्या निवेदन के साथ प्रभु को अर्पित कर दें ।लाभ होगा |
    3. यदि आप कितनी भी मेहनत क्यों करें, परन्तु आर्थिक समृद्धि आपसे दूर रहती हो और आप आर्थिक स्थिति से संतुष्ट होते हों, तो शुक्ल पक्ष के प्रथम गुरुवार को २१ अभिमंत्रित गोमती चक्र लेकर घर के पूजा स्थल में मां लक्ष्मी श्री विष्णु की तस्वीर के समक्ष पीले रेशमी वस्त्र पर स्थान दें फिर रोली से तिलक कर प्रभु से अपने निवास में स्थायी वास करने का निवेदन तथा समृद्धि के लिए प्रार्थना करके हल्दी की माला से
    नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र की तीन माला जप करें इस प्रकार सवा महीने जप करने के बाद अन्तिम दिन किसी वृद्ध तथा वर्ष से कम आयु की एक बच्ची को भोजन करवाकर दक्षिणा देकर विदा करें
    धन प्राप्ति , स्थायित्व एवं समृद्धि हेतु गोमती चक्र प्रयोग
    —————————————————————
    1.धन लाभ के लिए 11 गोमती चक्र अपने पूजा स्थान में रखें। उनके सामने श्रीं श्रियै नम: का जप करें। इससे आप जो भी कार्य या व्यवसाय करते हैं उसमें बरकत होगी और आमदनी बढऩे लगेगी।
    2 . आठ गोमतीचक्र, आठ कौड़ी एंव आठ लाल गुंजा साथ लेकर उनका पुजन करें। उन्हें दक्षिणावर्ती शंख में थोड़े से चावल डालकर स्थापित कर दें।रात्रि में ही उन्हें लाल कपडे में बाँधकर धर अथवा व्यवसाय स्थल की तिजौरी में स्थापित कर दें। यह प्रयोग आपकी आय में वृद्धि के लिए है।
    3 . 11 गोमती चक्र, 11 काली हल्दी, एक सुपारी और एक सिक्का पीले वस्त्र में लपेट कर तिजोरी में रखें तो वर्ष भर तिजोरी भरी रहेगी।

    4 . सात गोमती चक्रों को यदि चांदी अथवा किसी अन्य धातु की डिब्बी में सिंदूर तथा चावल डालकर रखें तो ये शीघ्र शुभ फल देते हैं।………………………………………………………हर-हर महादेव 
    READ MORE: गोमती चक्र [Gomati Chakra] और लक्ष्मी स्थायित्व
  • साधना क्या है ? यह कितने प्रकार का होता है ?

    साधनाओं
    के प्रकार और उनकी विशिष्टता
       

    ==========================
                 शास्त्रों में हजारों तरह की साधनाओं का वर्णन मिलता है. साधना से सिद्धियां प्राप्त होती हैं. व्यक्ति सिद्धियां इसलिए प्राप्त करना चाहता है, क्योंकि या तो वह उनसे सांसारिक लाभ प्राप्त करना चाहता है या फिर आध्यात्मिक लाभ. मूलत: साधना के चार प्रकार माने जा सकते हैं तंत्र साधना, मंत्र साधना, यंत्र साधना और योग साधना.| चारो ही तरह की साधना के कई उपभेद हैं. आइये जानते हैं साधना के विविध तरीके उनसे प्राप्य लाभ.
    तांत्रिक साधना :
    ——————  तांत्रिक साधना दो प्रकार की होती हैएक वाम मार्गी तथा दूसरी दक्षिण मार्गी.| वाम मार्गी साधना बेहद कठिन है.| वाम मार्गी तंत्र साधना में छह प्रकार के कर्म बताये गये हैं, जिन्हें षट कर्म कहते हैं.– शांति, वक्ष्य, स्तम्भनानि, विद्वेषणोच्चाटने तथा. गोरणों तनिसति षट कर्माणि मणोषण:
    अर्थात शांति कर्म, वशीकरण, स्तंभन, विद्वेषण, उच्चाटन, मारण. ये छह तांत्रिक षट कर्म बताये गये हैं. इनके अलावा नौ प्रयोगों का वर्णन भी है :
    मारण मोहनं स्तम्भनं विद्वेषोच्चाटनं वशम्. आकर्षण यिक्षणी चारसासनं कर त्रिया तथा॥
     मारण, मोहनं, स्तंभनं, विद्वेषण, उच्चाटन, वशीकरण, आकर्षण, यक्षणी साधना, रसायन क्रिया तंत्र के ये नौ प्रयोग हैं.
    रोग कृत्वा गृहादीनां निराण शिन्तर किता.
    विश्वं जानानां सर्वेषां निधयेत्व मुदीरिताम्॥
    पूधृत्तरोध सर्वेषां स्तम्भं समुदाय हृतम्.
    स्निग्धाना द्वेष जननं मित्र, विद्वेषण मतत॥
    प्राणिनाम प्राणं हरपां मरण समुदाहृमत्.
    जिससे रोग, कुकृत्य और ग्रह आदि की शांति होती है, उसको शांति कर्म कहा जाता है और जिस कर्म से सब प्राणियों को वश में किया जाये, उसको वशीकरण प्रयोग कहते हैं तथा जिससे प्राणियों की प्रवृत्ति रोक दी जाए, उसको स्तंभन कहते हैं तथा दो प्राणियों की परस्पर प्रीति को छुड़ा देने वाला नाम विद्वेषण है और जिस कर्म से किसी प्राणी को देश आदि से पृथक कर दिया जाए, उसको उच्चाटन प्रयोग कहते हैं तथा जिस कर्म से प्राण हरण किया जाए, उसको मारण कर्म कहते हैं.
    * मंत्र साधना :
    —————-  मंत्र साधना भी कई प्रकार की होती है. मंत्र से किसी देवी या देवता को साधा जाता है और मंत्र से किसी भूत या पिशाच को भी साधा जाता है. मंत्र का अर्थ है मन को एक तंत्र में लाना. मन जब मंत्र के अधीन हो जाता है तब वह सिद्ध होने लगता है. मंत्र साधना भौतिक बाधाओं का आध्यात्मिक उपचार है.
    * मुख्यत: तीन प्रकार के मंत्र होते हैं– 1. वैदिक मंत्र 2. तांत्रिक मंत्र और 3. शाबर मंत्र.
    * मंत्र जप के भेद– 1. वाचिक जप, 2. मानस जप और 3. उपाशु जप.
    वाचिक जप में ऊंचे स्वर में स्पष्ट शब्दों में मंत्र का उच्चारण किया जाता है. मानस जप का अर्थ है मन ही मन जप करना. उपांशु जप में जप करने वाले की जीभ या ओष्ठ हिलते हुए दिखाई देते हैं लेकिन आवाज नहीं सुनायी देती. बिल्कुल धीमी गति में जप करना ही उपांशु जप है.
    * मंत्र नियम : मंत्रसाधना में विशेष ध्यान देने वाली बात हैमंत्र का सही उच्चारण. दूसरी बात जिस मंत्र का जप अथवा अनुष्ठान करना है, उसका अर्घ पहले से लेना चाहिए. मंत्र सिद्धि के लिए आवश्यक है कि मंत्र को गुप्त रखा जाये. प्रतिदिन के जप से ही सिद्धि होती है.
    किसी विशिष्ट सिद्धि के लिए सूर्य अथवा चंद्रग्रहण के समय किसी भी नदी में खड़े होकर जप करना चाहिए. इसमें किया गया जप शीघ्र लाभदायक होता है. जप का दशांश हवन करना चाहिए और ब्राह्मणों या गरीबों को भोजन कराना चाहिए.
    * यंत्र साधना :
    —————— यंत्र साधना सबसे सरल है. बस यंत्र लाकर और उसे सिद्ध करके घर में रखने पर अपने आप कार्य सफल होते जायेंगे. यंत्र साधना को कवच साधना भी कहते हैं. यंत्र को दो प्रकार से बनाया जाता है अंक द्वारा और मंत्र द्वारा. यंत्र साधना में अधिकांशत: अंकों से संबंधित यंत्र अधिक प्रचलित हैं. श्रीयंत्र, घंटाकर्ण यंत्र आदि अनेक यंत्र ऐसे भी हैं जिनकी रचना में मंत्रों का भी प्रयोग होता है और ये बनाने में अति क्लिष्ट होते हैं.
    इस साधना के अंतर्गत कागज अथवा भोजपत्र या धातु पत्र पर विशिष्ट स्याही से या किसी अन्यान्य साधनों के द्वारा आकृति, चित्र या संख्याएं बनायी जाती हैं. इस आकृति की पूजा की जाती है अथवा एक निश्चित संख्या तक उसे बारबार बनाया जाता है. इन्हें बनाने के लिए विशिष्ट विधि, मुहूर्त और अतिरिक्त दक्षता की आवश्यकता होती है.
    यंत्र या कवच भी सभी तरह की मनोकामना पूर्ति के लिए बनाये जाते हैं जैसे वशीकरण, सम्मोहन या आकर्षण, धन अर्जन, सफलता, शत्रु निवारण, भूत बाधा निवारण, होनीअनहोनी से बचाव आदि के लिए यंत्र या कवच बनाये जाते हैं.
    * दिशा: प्रत्येक यंत्र की दिशाएं निर्धारित होती हैं. धन प्राप्ति से संबंधित यंत्र या कवच पश्चिम दिशा की ओर मुंह करके रखे जाते हैं तो सुखशांति से संबंधित यंत्र या कवच पूर्व दिशा की ओर मुंह करके रख जाते हैं. वशीकरण, सम्मोहन या आकर्षण के यंत्र या कवच उत्तर दिशा की ओर मुंह करके, तो शत्रु बाधा निवारण या क्रूर कर्म से संबंधित यंत्र या कवच दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके रखे जाते हैं. इन्हें बनाते या लिखते वक्त भी दिशाओं का ध्यान रखा जाता है.
    * योग साधना :
    —————–  सभी साधनाओं में श्रेष्ठ मानी गयी है योग साधना. यह शुद्ध, सात्विक और प्रायोगिक है. इसके परिणाम भी तुरंत और स्थायी महत्व के होते हैं. योग कहता है कि चित्त वृत्तियों का निरोध होने से ही सिद्धि या समाधि प्राप्त की जा सकती है. योगिश्चत्तवृत्तिनिरोध:

    मन, मस्तिष्क और चित्त के प्रति जाग्रत रहकर योग साधना से भाव, इच्छा, कर्म और विचार का अतिक्रमण किया जाता है. इसके लिए यम, नियम, आसन, प्राणायाम और प्रत्याहार ये 5 योग को प्राथमिक रूप से किया जाता है. उक्त 5 में अभ्यस्त होने के बाद धारणा और ध्यान स्वत: ही घटित होने लगते हैं. योग साधना द्वारा अष्ट सिद्धियों की प्राप्ति की जाती है. सिद्धियों के प्राप्त करने के बाद व्यक्ति अपनी सभी तरह की मनोकामना पूर्ण कर सकता है.|…………………………………………………….हरहर महादेव 
    READ MORE: साधना क्या है ? यह कितने प्रकार का होता है ?
  • कमियों /बुराइयों /दोष /दुर्गुण को भी हटाया जा सकता है उच्चाटन क्रिया से

    बिगड़े अथवा असम्मानजनक प्यारमुहब्बत में पड़े को सुधारें उच्चाटन क्रिया से

    ==============================================
     अक्सर सुनने में आता है की संतान अथवा बच्चा बिगड़ रहा है या बिगड़ गया है ,बात नहीं मानता ,गलत आदतों का शिकार हो गया है ,गलत सांगत में पड़ गया है ,गलत या अनुचित कार्य ही उसे पसंद आते हैं |परिवार -खानदानमाँबाप  की प्रतिष्ठा को ठेस पंहुचा रहा है ,अपना भविष्य बिगाड़ रहा है | दुर्जनों के बहकावे में आ जा रहा है ,माँबाप या परिवार के विरोधियों के भड़काने में आकर अपने ही लोगों को अपना दुश्मन समझ रहा है ,अपने लोगों की अवहेलना कर रहा है ,अनुचित कार्यों -प्यारमुहब्बत में रूचि ले रहा है जिसके परिणामों की उसे समझ नहीं रही ,सम्मान की चिंता नहीं है ,भविष्य की चिंता नहीं है ,|यह आज के समय में बहुत अधिक दिख रहा है ,जिसके अनेक कारण है ,नैतिकता का पतन,संस्कार हीनता ,नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव ,कुलदेवता/देवी दोष आदि अनेकानेक  कारण हैं इनके और अक्सर रोकथाम के उपाय या समझाना व्यर्थ जाता है |कभी कभी ऐसा भी होता है की हमारे किसी प्रिय यथा पतिपत्नीसंतान आदि पर कोई अन्य व्यक्ति तांत्रिक अभिचार यथा वशीकरण आदि करके अपने अनुकूल कर लेता है और हमारा प्रिय व्यक्ति हमसे विमुख हो उससे जुड़ने और उसकी बात मानने लगता है |किसी अन्य के प्यार में पड़कर अपनों को छोड़ने पर आमादा हो जाता है |अपनों के कष्ट और भावनाएं उसे नहीं दीखते हैं |इस प्रकार के मामले किसी के भी साथ हो सकते हैं |स्त्रीपुरुषबालकबालिका सभी में किन्ही परिवारों में यह देखा जाता है |यह स्थिति परिवारीजन या सम्बंधित व्यक्ति से जुड़े लोगों के लिए बहुत कष्टकारक होती है |

    इस तरह की समस्याओं के निदान और पारिवारिक शांतिसंतुष्टिसमझ बनाये रखने के अनेक उपाय तंत्र में हैं |इनमे उच्चाटन भी एक क्रिया है जो तांत्रिक षट्कर्म के अंतर्गत आती है |यह क्रिया किसी के मन , स्थिति , समस्या ,स्थान ,व्यक्ति सम्बन्ध आदि को उच्चाटित करने के लिए की जाती है |यह क्रिया किसी भी समस्या पर की जा सकती है जिसमे अलगाव की आवश्यकता हो |समस्या विशेष के साथ मंत्र -विधिप्रक्रिया और वस्तु बदल जाते हैं |इस क्रिया में विभिन्न शक्तियों और वस्तुओं की उर्जा का उपयोग समस्या विशेष के अनुसार किया जाता है |किसी के प्रति किसी पर यह क्रिया कर देने पर उसके प्रति व्यक्ति का मन उचट जाता है |किसी समस्या के प्रति क्रिया कर देने पर उस समस्या या आदत के प्रति मन उचट जाता है |नशे आदि के प्रति मन उचट जाता है यदि इस समस्या के लिए विशिष्ट क्रिया कर दी जाए तो |उच्चाटन की क्रिया से ग्रह बाधा का उच्चाटन ,नकारात्मक ऊर्जा का उच्चाटन आदि भी हो सकता है |इस विधा से किसी के द्वारा किये गए तांत्रिक अभिचार आदि अथवा वशीकरण आदि के प्रभाव का भी उच्चाटन हो सकता है |किसी का किसी पर अनुचित प्रभाव हटाया जा सकता है |प्रभाव के उच्चाटन पर व्यक्ति अपने दिमाग से अच्छा बुरा समझने लगता है और सुधर जाता है |सम्बंधित व्यक्ति या समस्या के प्रति जब मन उच्चाटित ही जाता है तो वह छूट जाता है और व्यक्ति समस्या या प्रभाव से मुक्त हो जाता है |इस क्रिया का दुरुपयोग भी हो सकता है अतः कोई प्रक्रिया सार्वजनिक रूप से नहीं दी जा सकती |यदि किसी के यहाँ ऐसी कोई समस्या हो तो किसी अच्छे तंत्र के जानकार से संपर्क करना चाहिए और उसके बताये अनुसार चलना चाहिए |वह आपको कुछ क्रियाएं बता भी सकता है और कुछ स्वयं कर सकता है ,जो सम्बंधित समस्या के लिए निर्दिष्ट  होते हैं |प्रक्रिया करने पर सम्बंधित समस्या समाप्त हो जाती है |………………………………………………………………हरहर महादेव 

    READ MORE: कमियों /बुराइयों /दोष /दुर्गुण को भी हटाया जा सकता है उच्चाटन क्रिया से
  • क्या हैं तांत्रिक अभिचार ? ,कैसे बचें इनसे ?

    :::::::::::::::तांत्रिक अभिचार और बचाव :::::::::::::::::

    ================================
    सामान्यतया
    हम सभी भूत
    प्रेत ,आत्माओं ,देवीदेवता ,शकुनअपशकुन ,टोन टोटके के बारे में जानते हैं |इनके द्वारा प्रभावित लोगों के
    बारे में सुनते और देखते भी हैं पर इनसे भी बड़ी समस्या हर समय में तांत्रिक अभिचार
    की रही है |यह दिखाई नहीं देता ,समझ में नहीं आता ,विश्वास नहीं होता ,मानते नहीं
    हैं ,घमंड में रहते हैं की हम तो इतना पूजा -पाठ करते हैं ,ये ये देवता -मूर्ती घर
    में है ,हमें ये कुछ नहीं हो सकता ,हमको प्रभावित नहीं कर सकता |पर स्थिति बिलकुल
    उलट होती है |अक्सर लोग इन्ही से प्रभावित होते हैं और सोचते हैं की भाग्य का दोष
    है ,पित्र या देवता का दोष है |अधिकतर मामलों में ऐसा नहीं होता |कारण अभिचार और
    टोन
    टोटके होते हैं ,जो अच्छे भले
    ,खुशहाल परिवार को पतन और कष्ट में डाल देते हैं |हमने आचे
    अच्छे साधकों ,पंडितों ,कर्मकांडियों ,दुर्गा
    पाठियों तक को इनसे पीड़ित देखा है |इनका निराकरण कर पाने में वे सक्षम नहीं रहे
    |क्योकि यह ऊर्जा प्रक्षेपण की विद्या होती है ,और इसे सामान्य तरीकों से नहीं
    हटाया जा सकता |
    अक्सर
    लोगों की शिकायत होती है की उनके भाग्य में जो जो ख़ुशी या उन्नति ज्योतिषी बताते
    हैं वह नहीं मिलता |हाँ जो वह बुरा बताते हैं वह जरुर होता है |इसमें दोष ज्योतिषी
    का नहीं होता |वह सही होते हैं ,किन्तु आपके भाग्य का आपको पूरा नहीं मिलता ,इसका
    कारण है की आप नकारात्मक ऊर्जा ,जैसे अभिचार से प्रभावित होते हैं जिससे आप समय पर
    वह लाभ नहीं ले पाते ,उन्नति नहीं कर पाते जबकि सर्वाधिक उन्नति और सफलता हो सकती
    है |अभिचार और नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव से व्यक्ति की सोच बदल जाती है
    ,तनावग्रस्त होता है ,निर्णय की क्षमता प्रभावित होती है ,सही समय सही निर्णय नहीं
    होते ,कलह और मतभेद ,विवाद अनायास होते रहते हैं ,रोग
    शोक की स्थिति रहती है ,आकस्मिक दुर्घटनाएं होती हैं ,मन विचलित होता है
    ,खुशियों में भी अनजाना तनाव पसरा रहता है |कोई न कोई समस्या लगी रहती है |परिवार
    बच्चोपत्नीपत्नी -सगे
    सम्बन्धियों को कोई न कोई समस्या रहने से उन्नति की और लगने वाला बहुमूल्य समय
    इनके लिए नष्ट करना होता है |फलतः उन्नति और सफलता नहीं मिलती जबकि ग्रह स्थितियों
    से व्यक्ति को उस समय मिलनी चाहिए ,किन्तु परिवार और परिस्थिति नकारात्मक ऊर्जा और
    अभिचार के कारण अनुकूल नहीं होती और व्यक्ति चाहकर भी अवसर को नहीं पकड़ पाता |यह
    अभिचार घर
    परिवार का माहौल ऐसा बना
    देते हैं की व्यक्ति उलझता चला जाता है और क्रमशः पतन की और अग्रसर हो जाता है
    |कोई माने या न माने पर ऐसा अधिकतर मामलों में हमने देखा है |यह हमारी व्यावसायिक
    दृष्टि नहीं अपितु
    tantra क्षेत्र
    का ३० सालों का नुभव है ,जो हमने देखा ,जो हमारे यहं आने वालों की स्थिति पायी वह
    लिख रहे हैं |
    आज के
    समय लोग अपनी ख़ुशी से खुश होने की बजाय पडोसी ,रिश्तेदार की उन्नति से दुखी अधिक
    होते हैं |नजदीक वाले ही सबसे अधिक कष्ट में होते हैं जब आप अपनी मेहनत
    , भाग्य और कर्म के सहारे उन्नति कर रहे होते हैं
    तो |यही सबसे अधिक टांग खीचने की कोशिस करते हैं |कभी कभी दुसरे भी इस तरह की
    क्रिया करते करवाते हैं जहाँ भी हितों का टकराव हो अथवा दुश्मनी हो |पर अधिकतर
    मामलों में विद्वेष और ईर्ष्या ही होती है |यह लोग अक्सर सामने आने से बचना चाहते
    हैं और चाहते हैं की सामने वाले का नुक्सान भी हो जाए ,उसकी उन्नति भी रुक जाए और
    कोई जाने भी नहीं |अक्सर ऐसे कामों के लिए यह लोग तांत्रिकों ,ओझाओं ,गुनियों का
    सहारा लेते हैं जो गाँव -गाँव ,गली -गली होते हैं |इन तांत्रिकों ,ओझाओं ,गुनियों
    में दिव्य दृष्टि तो होती नहीं और उन्हें इससे मतलब भी कम ही होता है |जो व्यक्ति
    जाकर कहता है उस पर विशवास कर लेते हैं |अक्सर लोग उन्हें गलत सूचनाये देते हैं और
    खुद को पीड़ित बताते हैं ,बचाव में सामने वाले की अहित की कामना से क्रिया करने का
    आग्रह करते हैं ,अक्सर पैसों के लालच में कुछ लोग कर भी देते हैं |
    कुछ लोग
    इसके लिए पहले तांत्रिकों का विशवास जीतते हैं और उनसे सम्बन्ध विक्सित करने के
    बाद इस तरह की क्रियाएं करवाते हैं |कुछ लोग उनसे क्रियाएं पूछकर करते हैं |कुछ
    लोग बाजार में मिलने वाले टोन
    टोटके
    की किताबों के सहारे भी टोटके करते रहते हैं | इस मामलों में महिलायें अधिक शामिल
    होती हैं और तांत्रिकों ,ओझाओं की शरण यह अधिक लेती हैं |कभी -कभी किसी -किसी को
    कोई बाधा अनायास प्रभावित कर देती है तो उसके लिए उसे खुद पूरी तरह समाप्त करने की
    बजाय लोग दुसरे पर स्थानांतरित कर देते हैं ,यह भी कई मामलों में देखा जाता है
    |ऐसा अक्सर महिलाओं अथवा नवविवाहिताओं के साथ होता है |बच्चा न होने पर बच्चे वाले
    पर क्रिया कर दी जाती है |किसी की जलन वश कोक्ष बाँध दी जाती है की बच्चा न हो
    |किसी दाम्पत्य जीवन बिगाड़ने का प्रयास जलन में होता है |भूत
    प्रेत ,अला -बला तो दिया जाना आम बात है |अधिकतर
    मामलों में व्यक्ति इन्ही सबसे प्रभावित होता है |
    जब
    व्यक्ति पर अभिचार किया जाता है चाहे कैसे भी किया जाए ,तो यह एक नकारात्मक ऊर्जा
    का प्रक्षेपण होता है ,जिसका लक्ष्य और उद्देश्य निश्चित करके क्रिया की जाती है
    |क्रिया के बाद सम्बंधित ऊर्जा व्यक्ति अथवा परिवार को प्रभावित करने लगती है
    |बहुत अच्छी ग्रह स्थितियों और सकारात्मक ऊर्जा की अधिकता अगर व्यक्ति में हो तो
    वह अप्रभावित रहता है किन्तु घर परिवार प्रभावित होने लगता है जिससे व्यक्ति पर भी
    अपरोक्ष प्रभाव आता है |अगर घर के देवता बहुत शक्ति शाली हैं और व्यक्ति कमजोर है
    तो व्यक्ति प्रभावित हो सकता है |दोनों के शक्तिशाली होने पर अभिचार अप्रभावी भी
    हो सकता है |यहाँ महत्व शक्ति संतुलन का होता है |अगर बहुत तीब्र शक्ति से अभिचार
    किया जाए तो अच्छे अच्छे भी प्रभावित हो जाते हैं |हमने कुछ शतचंडी तक करवाने वाले
    प्रकांड साधकों और कर्मकांडियों को भी अचानक इनसे प्रभावित होते देखा है |कारण की
    इस ऊर्जा प्रक्षेपण की कार्यप्रणाली बिलकुल भिन्न और अलग होती है जो लक्ष्य को
    प्रभावित कर ही देती है अगर भेजने वाले में शक्ति हो |कभी कभी तो लोगों के पूजा
    घरों तक में इनके प्रभाव से खुद आग तक लग जाता पाया है |ऐसी शक्तियों की काट केवल
    tantra से ही संभव हो पाता है ,कहावत है लोहा ही
    लोहे को काटता है यहाँ बिलकुल सही बैठती है |कितु ऐसा बहुत कम और विशेष दुश्मनी
    वाली स्थिति में ही होता है |सामान्य रूप से तो टोटके और छोटे लक्ष्य या एक
    निश्चित लक्ष्य वाले अभिचार ही किये जाते हैं |
    अभिचार
    की सबसे बड़ी दिक्कत इसका जल्दी पकड़ में न आना है |लोग समझ नहीं पाते की हो क्या
    रहा है ,क्यों उन्नति ,सफलता नहीं मिल रही ,क्यों रोग का कारण नहीं मिल रहा ,क्यों
    हर जगह असफलता मिल रही है ,क्यों इतना समस्या उत्पन्न हो रही है ,|डाक्टर कारण
    नहीं पकड़ पा रहा ,ज्योतिषी कुछ बताते हैं और हो कुछ और रहा है |क्यों घर में अभाव
    पसर गया है ,बचत गायब है ,कर्ज की स्थिति आ रही है ,अच्छा कमाने पर भी क्यों पूरा
    नहीं पड़ रहा |क्यों घर की खुशियाँ गायब और मनहूसियत उत्पन्न हो गई है |क्यों इतना
    कलह ,मतभेद ,विवाद हो रहा |क्यों किसी भी काम में अडचन आ रही है |क्यों कोई मांगलिक
    कार्य नहीं हो पा रहा |क्यों बच्चे बिगड़ते जा रहे आदि आदि अनेक चिंताओं से घर वाले
    परेशान होते हैं पर हर प्रयास उनका असफल होता है |ऐसे मामलों में केवल और केवल
    अच्छा तांत्रिक ही सफल होता है और कारण पकड़ पाता है ,और कोई इसे नहीं पकड़ सकता
    |वाही उपयुक्त उपाय बता सकता है |यद्यपि छोटी टोन
    टोटकों का प्रभाव कुछ समय में खुद कम होने लगता है किन्तु बड़े और विशेष
    लक्ष्य के लिए विशेष उद्देश्य से भेजे गए अभिचारों का प्रभाव उस उद्देश्य के रहते
    नहीं भी समाप्त हो सकता |किसी को कुछ खिला दिया गया है तो जब तक उसे निकाला नहीं
    जाएगा तब तक वह प्रभाव देता रहेगा |खिलाने पिलाने वाली वस्तुओं की खासियत होती है
    की यह भिजन के साथ नहीं पचती ,अपितु सालों साल आँतों में जगह बना पड़ी रहती हैं और
    व्यक्ति को प्रभावित करती रहती हैं |
    अभिचार के कई
    प्रकार होते हैं |खुद किताबी या सुनी बातों पर किये जाने वाले टोटके |तांत्रिकों
    द्वारा बताये टोटके |किसी विशेष क्रिया के द्वारा खिला पिला कर किये जाने वाले
    टोटके |तांत्रिकों द्वारा करवाए गए प्रयोग |किसी व्यक्ति विशेष के लिए भेजी गई कोई
    शक्ति |दुश्मनी में करवाई गई प्राणघातक क्रिया आदि आदि |इनमे सामान्य टोटकों का
    प्रभाव तो टोटके तांत्रिक से जानकार समाप्त किया जा सकता है |पर खिला दिया जाने
    वाला वस्तु तांत्रिक ही निकाल पायेगा |अगर कोई शक्ति भेजी गई है तो उसे हटाना सबसे
    दुरूह कार्य होता है |वह वचन बद्ध होती है और खुद नहीं हट सकती ,,या तो उसे भेजने
    वाला तांत्रिक ही बुला सकता है या बहुत अधिक शक्तिशाली तांत्रिक ही वापस कर सकता
    है अथवा समाप्त कर सकता है |सामान्य तांत्रिक के तो यह छक्के छुड़ा देते हैं और कभी
    कभी उनके भी जान के लाले पड़ जाते हैं |

    जब कभी
    लगे की अभिचार हुआ है ,अथवा जब ज्योतिषी ,पंडित ,डाक्टर से समस्या समझ न आये तो
    सबसे बेहतर तरीका है किसी अच्छे तांत्रिक से संपर्क करना |क्योकि वाही किसी भी
    तांत्रिक अभिचार को समाप्त कर सकता है या समाप्त करने का विशेष उपाय बता सकता है
    ,अन्य सभी उपाय प्रभाव कम कर सकते हैं समाप्त नहीं कर सकते |अगर छोटे टोन
    टोटके हुए हैं तो इनके प्रभाव को सामान्य टोटकों
    उपायों द्रारा कम किया जा सकता है |बड़े टोन -टोटकों और शक्तिशाली अभिचारो को
    दुर्गा ,काली ,भैरव ,हनुमान ,बगला आदि उग्र शक्तियों की साधना पूजा से कम प्रभावी
    किया जा सकता है |दुर्गा आदि के विशेष अनुष्ठान इनको निष्प्रभावी कर सकते हैं
    |बगला ,काली ,भैरव ,प्रत्यंगिरा आदि के विशेष अनुष्ठान अथवा साधना इनके प्रभाव को
    समाप्त कर सकते हैं अथवा वापस कर सकते हैं किन्तु इनके लिए विशिष्ट गुरु अथवा साधक
    का मार्गदर्शन आवश्यक होता है |दुर्गा कवच ,काली सहस्त्रनाम ,काली -बगला -सुदर्शन
    -भैरव कवच इनके प्रभाव को रोकता है |यह ध्यान देने योग्य होता है की अभिचार तामसिक
    क्रियाएं हैं इन्हें तामसिक क्रियाओं से ही समाप्त किया जा सकता है |तामसिक
    क्रियाओं को उग्र शक्तिया ही रोक या हटा सकती हैं ,सात्विक शक्तियां सकारात्मक
    ऊर्जा तो बढ़ा सकती हैं किन्तु तामसिक क्रियाओं को हटाना इनसे मुश्किल होता है
    |गंगा जल अथवा गो मूत्र का कवच से अभिमंत्रित कर छिडकाव राहत देता है |हवन करना
    राहत देता है |प्रभावित व्यक्ति अगर उग्र शक्ति यथा काली ,भैरव ,बगला के कवच धारण
    करे तो उसका बचाव हो जाता है |अतः अगर ऐसा कुछ लगे तो अच्छे तांत्रिक से सलाह लेना
    चाहिए और उपाय करना चाहिए |……[व्यक्तिगत विचार
    ]…………………………………………………………….हर
    हर महादेव  
    READ MORE: क्या हैं तांत्रिक अभिचार ? ,कैसे बचें इनसे ?
  • ऊतम सफलता के लिए दैनिक प्रयोग

    व्यावसायिक सफ़लता और बाधा निवारण हेतु प्रयोग

    ===================================

                           यदि आप दैनिक कार्यों में ,रोजाना के व्यावसायिक कार्यों में अधिकतम सफलता पाना चाहते है ,कम से कम विघ्नबाधाओं का सामना करना चाहते है ,तो निम्न प्रयोग करे ,आपके भाग्य तो नहीं बदल जायेगे ,किंतू जो मिलना है वह पूरा मिल पायेगा ऐसा विश्वास रखे ,यदि कुछ बुरा होना है तो कम से कम होगा ,किसी प्रकार की विघ्न -बाधा है तो वह दूर होगी ,किसी प्रकार का बंधन या आभिचारिक क्रिया है तो वह रुकेगी |
                आप बुधवार या गणेश चतुर्थी  को सूर्योदय पूर्व उठे और स्नानकर अपने ईष्ट की पूजा करे ,फिर गणेश जी  की आराधना करे ,,अब एक सिन्दूरी  कागज़ कम से कम १*१ फुट का ले ,उसपर स्केल की सहायता से १०८ खाने बना ले ,अब प्रत्येक खाने में ऊपर से नीचे की और १ से १०८ तक संख्याये लिखे ,,ध्यान दे सांख्ययो का क्रम न टूटे ,अर्थात किसी लाइन में यदि संख्या १२ पर समाप्त हो रही है तो उसी के नीचे १३ अंक की संख्या शुरू होकर उलटे क्रम से पुनः १ के नीचे आएगी ,फिर वहा २४ आएगा ,अब उसके नीचे २५ से आगे लिखा जाएगा ,,यदि १ लाइन में १२ खाने हो तो ९ लाइनों में १०८ खाने हो जायेगे ,,जब खाने बन जाए तो प्रत्येक खाने में लाल स्याही से ” ॐ गं गणपतये नमः ” लिखे ,,,अब इस कागज़ को ईश्वर मानकर विधिवत पूजन कर ले ,,धुप आरती कर के कागज़ की तह करके रख ले ,इसे आपको सदैव अपनी जेब में रखनी है ,,जिस दिन इसका निर्माण करे उस दिन सुबह तब तक अन्न ग्रहण न करें जब तक यह बना और पूजा न कर लें   ,,अब दैनिक रूप से घर से बाहर जाते समय सुबह इस कागज़ को खोलकर सामने रख लिया करे,,इसके पहले खाने पर तर्जनी उंगली रखे फिर उसे सभी खानों पर घुमाते हुए १०८ वे खाने पर ले आये ,यहाँ आप अपनी आखे बंद कर अपने ईष्ट और गणेश  जी को याद करे ,और कहे हे प्रभु मेरा आज का दिन शुभ हो ,सफल हो ,में सभी अनावश्यक विवादो आदि से बचा रहू ,,इस प्रकार अपनी कामनाये व्यक्त करे,फिर अपनी तर्जनी को माथे लगा ले ,,फिर उस कागज़ को तह कर जेब में रख ले और भगवान का नाम लेकर प्रस्थान करे ,,विशवास रखे आपका दिन पहले की अपेक्षा शुभ होगा ,,,कागज पर एक बार बनाया हुआ [लिखा हुआ ]यह आपको महीनो तक काम देगा ,,किसी प्रकार कागज़ फट या खराब हो जाने पर बहते जल में विसर्जित कर ,पुनः बुधवार या गणेश चतुर्थी को इसे पहले की तरह बना सकते हैं |
                 यदि आप व्यवसायी हैं अथवा उच्च पदस्थ हैं और आपके नीचे बहुत से कर्मचारी हैं ,अथवा सेल्स -मार्केटिंग आदि से जुड़े हैं तो इस प्रयोग के साथ भोजपत्र पर निर्मित व्यापार वृद्धि यंत्र अथवा महालक्ष्मी सर्वतो भद्र यंत्र अथवा श्री यंत्र अपने रतिश्थान में लगाएं तथा प्रतिदिन धुप दीप से उसकी पूजा करते रहें |खुद बगलामुखी यंत्र धारण करें जिससे आप जो कहें उसका प्रभाव ग्राहक या सम्बंधित व्यक्ति पर पड़े ,आपका प्रभाव बढे ,सुरक्षा के साथ बुरी नज़रों आदि से बचाव हो और आपका कार्य निर्विघ्न रहे |यदि आपको लगता है की किसी प्रकार का अभिचार या बंधन दूकान /प्रतिष्ठान या घर पर किया गया है या किया जा रहा है तो वहां भी बगलामुखी यन्त्र लगाएं और बगला या काली या दुर्गा सहस्त्रनाम /कवच का पाठ करके जल अभिमंत्रित कर प्रतिष्ठान में छिडकें ,बाधाएं समाप्त होंगी |………………………………………………………..हरहर महादेव
     
    विशेष :- किसी प्रकार के पारिवारिक ,सामाजिक ,व्यावसायिक ,रोजगार सम्बन्धी अथवा नकारात्मक ऊर्जा ,बाधा -दोष -भूत -प्रेत की समस्या पर परामर्श अथवा समाधान हेतु संपर्क करें -mob. 8299886532 ,, समय सायंकाल 5 से 7 बजे के बीच ,भारतीय समयानुसार . 
    READ MORE: ऊतम सफलता के लिए दैनिक प्रयोग
  • दैनिक उत्तम सफलता हेतु ईश कृपा

    दैनिक उत्तम सफलता हेतु ईश कृपा

    दैनिक व्यावसायिक और कार्य क्षेत्र में उत्तम सफलता हेतु सरल तांत्रिक प्रयोग

    ===========================================

                    यदि आप दैनिक कार्यों में ,रोजाना के व्यावसायिक कार्यों में अधिकतम सफलता पाना चाहते हैं ,कम से कम विघ्न बाधाओं का सामना करना चाहते हैं ,तो निम्न प्रयोग करें |आपके भाग्य तो नहीं बदल जायेंगे ,किन्तु जो आपको मिलना है आपके भाग्य से उसका अधिकतम मिल पायेगा ,ऐसा विश्वास रखें |यदि कुछ बुरा होना है तो कम से कम होगा |
              आप सोमवार को सूर्योदय पूर्व उठे और स्नानकर अपने ईष्ट की पूजा करे ,फिर शिव जी की आराधना करे ,,अब एक नीला कागज़ कम से कम * फुट का ले ,उसपर स्केल की सहायता से १०८ खाने बना ले ,अब प्रत्येक खाने में ऊपर से नीचे की और से १०८ तक संख्याये लिखे ,,ध्यान दे सांख्ययो का क्रम टूटे ,अर्थात किसी लाइन में यदि संख्या १२ पर समाप्त हो रही है तो उसी के नीचे १३ अंक की संख्या शुरू होकर उलटे क्रम से पुनः के नीचे आएगी ,फिर वहा २४ आएगा ,अब उसके नीचे २५ से आगे लिखा जाएगा ,,यदि लाइन में १२ खाने हो तो लाइनों में १०८ खाने हो जायेगे ,,जब खाने बन जाए तो प्रत्येक खाने में लाल स्याही सेओउम नमः शिवाय लिखे ,,,अब इस कागज़ को ईश्वर मानकर विधिवत पूजन कर ले ,,धुप आरती कर के कागज़ की तह करके रख ले ,इसे आपको सदैव अपनी जेब में रखनी है ,,सोमवार को उपवास करे ,,अब दैनिक रूप से घर से बाहर जाते समय सुबह इस कागज़ को खोलकर सामने रख लिया करे,,इसके पहले खाने पर तर्जनी उंगली रखे फिर उसे सभी खानों पर घुमाते हुए १०८ वे खाने पर ले आये ,यहाँ आप अपनी आखे बंद कर अपने ईष्ट और शिव जी को याद करे ,और कहे हे प्रभु मेरा आज का दिन शुभ हो ,सफल हो ,में सभी अनावश्यक विवादो आदि से बचा रहू ,,इस प्रकार अपनी कामनाये व्यक्त करे,फिर अपनी तर्जनी को माथे लगा ले ,,फिर उस कागज़ को तह कर जेब में रख ले और भगवान का नाम लेकर प्रस्थान करे ,,विशवास रखे आपका दिन पहले की अपेक्षा शुभ होगा ,,,कागज पर एक बार बनाया हुआ [लिखा हुआ ]यह आपको महीनो तक काम देगा ,,किसी प्रकार कागज़ फट या खराब हो जाने पर बहते जल में विसर्जित कर ,पुनः सोमवार को इसे पहले की तरह बना सकते है ,,,…………………………………………………………………हरहर महादेव


    विशेष :- किसी प्रकार के पारिवारिक ,सामाजिक ,व्यावसायिक ,रोजगार सम्बन्धी अथवा नकारात्मक ऊर्जा ,बाधा -दोष -भूत -प्रेत की समस्या पर परामर्श अथवा समाधान हेतु संपर्क करें -mob. 8299886532 ,, समय सायंकाल 5 से 7 बजे के बीच ,भारतीय समयानुसार . 
    READ MORE: दैनिक उत्तम सफलता हेतु ईश कृपा