Category: Business and Work Problems
  • यंत्रों /ताबीजों का आपकी सफलता पर प्रभाव

    यंत्रों /ताबीजों का आपकी सफलता पर प्रभाव

    आपकी सफलता पर यंत्रों -ताबीजों का प्रभाव
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                     आपकी सफलता -असफलता आपकी योग्यता ,व्यवहार और सोच पर निर्भर करती है ,ऐसा सामान्य स्थिति में होता है |यह भाग्य पर भी काफी कुछ निर्भर करता है जिसके अनुसार आपकी क्षमतासोचव्यक्तित्व का निर्धारण हुआ होता है |अर्थात जब भाग्य पूरा साथ दे तो आपकी नैसर्गिक क्षमता -व्यक्तित्व के अनुसार आपको सफलता मिलती है |किन्तु यह तब होता है जब आप किसी भी तरह की नकारात्मक ऊर्जा से ग्रस्त न हों |आप अगर किसी भी तरह की नकारात्मक ऊर्जा से ग्रस्त हों तो आपके सोच -कर्म व्यवहार -क्षमता बदल जाते है अथवा कम हो जाते हैं |यह नकारात्मक ऊर्जा ग्रह की सामयिक दोष हो सकती है ,वास्तु दोष -स्थान दोष हो सकता है ,किसी द्वारा किया गया अभिचार हो सकता है ,आप द्वारा की गई गलती और श्राप का परिणाम हो सकता है ,पित्र दोष के कारण हो सकता है ,कहीं से आई वायव्य बाधा के कारण हो सकता है ,कुलदेवता/देवी दोष के कारण हो सकता है ,परिवार के मुखिया की विपरीत ग्रह स्थितियों के कारण हो सकता है |ऐसे में जब आप इन किसी भी नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव में आते हैं तो जो नैसर्गिक आपके भाग्य से मिलता है उसमे भी रुकावट उत्पन्न हो जाती है और जो जितना मिलना चाहिए नहीं मिल पाता ,अपितु बुरे प्रभाव की मात्रा बढ़ जाती है |कारण यह होता है की नकारात्मक प्रभाव आपकी सोच ,स्वास्थ्य ,पारिवारिक माहौल ,लोगों का सहयोग ,आपका व्यवहार बदल देता है जिससे जितनी क्षमता और योग्यता से सम्बंधित दिशा में कार्य होना चाहिए नहीं हो पाता और सफलता की मात्रा प्रभावित हो जाती है |
                  ताबीज धारण करने पर चमत्कार कहीं और से नहीं होता ,आप द्वारा ही होता है |ताबीज धारण से अगर चमत्कार होता भी है तो उसके लिए लिए चमत्कारी सिद्ध का मिलना आवश्यक होता है |ऐसा तब तक नहीं होगा जब तक की आप नकारात्मकता से मुक्त न हों और आपका भाग्य साथ न दे रहा हो |भाग्य साथ देने पर ही आपको भाग्यवश चमत्कारी सिद्ध मिल जाता है की उसके दिए ताबीज से चमत्कार होने लगता है |सामान्य स्थिति में ऐसा संभव नहीं होता |सामान्य स्थिति में आप द्वारा ही चमत्कार होता है |जब आपको आपकी आवश्यकतानुसार ऐसी ताबीज धारण करा दी जाती है जो आपकी सम्बंधित क्षेत्र में सफलता बढ़ा दे तो होता यह है की वह ताबीज आपके आसपास और शरीर से सम्बंधित क्षेत्र को प्रभावित कर रही नकारात्मक ऊर्जा हटा देती है ,साथ ही आपकी सोच और कार्यक्षमता और व्यवहार उस क्षेत्र के अनुकूल कर देती है |सम्बंधित देवता और उसके ऊर्जा चक्र को प्रभावित कर देती है ,जहाँ से तरंगों का उत्पादन बढ़ जाता है |फलतः आपकी सफलता बढ़ जाती है |आपके भाग्य का पूरा लाभ सम्बंधित क्षेत्र में मिलने लगता है |यह सब उर्जा का प्रक्षेपण है जो आपके शरीर और वातावरण को प्रभावित करके आपमें और आसपास बदलाव ला देता है |
               कार्य प्रणाली अगर ताबीज की देखें तो टोनेटोटकेताबीज में प्राणी के शारीर और प्रकृति की उर्जा संरचना ही कार्य करती है ,इनका मुख्य आधार मानसिक शक्ति का केंद्रीकरण और भावना होता है ,|,,,प्रकृति में उपस्थित वनस्पतियों और जन्तुओ में एक उर्जा परिपथ कार्य करता है |,मृत्यु के बाद भी इनमे तरंगे कार्य करती है और ऊर्जा भिन्न रूप में बनी रहती है | ,,,,इनमे विभिन्न तरंगे ली जाती है और निष्कासित की जाती रहती है जब तक किसी भी रूप में उसका अस्तित्व है | जब किसी वास्तु या पदार्थ पर मानसिक शक्ति और भावना को केंद्रीकृत करके विशिष्ट क्रिया की जाती है तो उस पदार्थ से तरंगों का उत्सर्जन होने लगता है ,,|यह कुछ वैसा ही होता है जैसे सामने बैठे व्यक्ति को आदेश देना अथवा दृष्टि से वस्तुओं को हिलाना |,,जिस भावना से उनका प्रयोग जिसके लिए किया जाता है ,वह इच्छित स्थान पर वैसा कार्य करने लगता है ,| कोई पदार्थ अच्छी भावना से मानसिक शक्ति केंद्रित करके विशिष्ट क्रिया करके दी जाये तो प्राप्तकर्ता की उर्जा परिपथ पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और उसे लाभ होता है |सभी जगह उर्जा ही कार्य करती है |मानसिक शक्तियों द्वारा उन्हें परिवर्तित अवश्य किया जा सकता है
                          . ताबीज बनाने वाला जब अपने ईष्ट में सचमुच डूबता है तो वह अपने ईष्ट के अनुसार भाव को प्राप्त होता है अर्थात उसका ईष्ट की ऊर्जा से सामंजस्य बैठता है | ,,भाव गहन है तो मानसिक शक्ति एकाग्र होती है ,जिससे वह शक्तिशाली होती है ,यह शक्तिशाली हुई तो उसके उर्जा परिपथ का आंतरिक तंत्र शक्तिशाली होता है और शक्तिशाली तरंगे उत्सर्जित करता है |ये शक्तिशाली तरंगे ईष्ट को आकर्षित कर उसकी ऊर्जा से संतृप्त करने लगती हैं साधक को और यह साधक के मानसिक बल के अनुसार काम करने लगती हैं तथा स्थिर होने लगती हैं ऐसा व्यक्ति यदि किसी विशेष समय,ऋतूमॉस में विशेष तरीके से ,विशेष पदार्थो को लेकर अपनी मानसिक शक्ति और मन्त्र से उसे सिद्ध करता है तो वह ताबीज धारक व्यक्ति को अच्छेबुरे भाव की तरंगों से लिप्त कर देता है |
                       यह समस्त क्रिया शारीर के उर्जा चक्र को प्रभावित करती है और तदनुसार व्यक्ति को उनका प्रभाव दिखाई देता है |इसमें प्रयुक्त पदार्थ की ऊर्जा ,मॉसऋतू की ऊर्जा की विशेषता ,तिथि के अनुसार ग्रहों की विशेषता ,साधक की ऊर्जा ,विशिष्ट मन्त्र और यन्त्र की ऊर्जा एक साथ मिलकर साधक के मानसिक बल से संयुक्त हो जाती हैं और अभिमंत्रित करते ही वह वस्तु विशेष में स्थिर हो जाती हैं |इससे तरंगों का उत्सर्जन होता रहता है जो धारण करने वाले के मष्तिष्क ,वातावरण ,शरीर ,ऊर्जा परिपथ को प्रभावित करता है और कुछ सामय में अनुकूल रासायनिक परिवर्तन भी होने लगता है जिससे व्यक्ति की सोच ,क्रिया कलाप ,सब बदल जाते हैं ,औरा बदल जाती है ,वातावरण में जहाँ वह रहता है तदनुरूप परिवर्तन हो सकते हैं |यह सामान्य क्रिया प्रणाली है |उच्च साधक और सिद्ध के लिए मानसिक बल और इच्छा ही पर्याप्त होती है ,,ऋतूमॉसमुहूर्तपदार्थ तक का महत्त्व नहीं रहा जाता ,,,वह जिस भी वस्तु को अभिमंत्रित कर दे वाही ताबीज और सिद्द हो जाती है |सामान्य रूप में किसी साधक को किसी यन्त्र अथवा ताबीज को सिद्ध करने के लिए सम्बंधित शक्ति या देवता का सिद्ध होना आवश्यक है |ऐसा नहीं की कोई भी किसी भी देवता या शक्ति के यन्त्र को सिद्ध कर सकता है और सभी कामों में उपयोगी यंत्रों को बना सकता है |जिसकी जैसी क्षमता वह वाही काम कर सकता है |इसलिए यह देखना आवश्यक हो जाता है की सम्बंधित साधक के पास वह क्षमता है भी की नहीं ,नहीं तो उपयुक्त लाभ प्राप्त नहीं होंगे |……………………………..………हरहर महादेव
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  • व्यवसाय /व्यापार वृद्धि कवच

    व्यवसाय /व्यापार वृद्धि कवच

    व्यापार-व्यवसाय वृद्धि कवच 
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               कई बार अच्छा चलता व्यापार अचानक ही मंदा हो जाता है |एक ही व्यवसाय से सम्बंधित कई दुकाने आसपास होने पर भी किसी का व्यवसाय चलता है किसी का नहीं चलता |सामने बहुत बीद होती है पर उसके सामने कोई देखता तक नहीं या कम लोग आते हैं |इसका प्रभाव आर्थिक और मानसिक स्थिति पर भी पड़ता है |क्रमशः आर्थिक मानसिक स्थिति खराब होने लगती है ,स्वास्थय साथ नहीं देता ,स्वभाव में कमियां आने लगती है ,अशांति-कलह-क्रोध-चिडचिडापन आने लगता है |जिस व्यापार में कभी लाभ ही लाभ था आज हानि होने लगती है या अत्यल्प लाभ रह जाता है |यद्यपि इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे ग्रह स्थितियों में बदलाव, किसी द्वारा किया गया अभिचार, पित्र दोष, कुल देवता दोष आदि आदि ,किन्तु मूल कारण नकारात्मक ऊर्जा जो इन सबमे से किसी द्वारा हो सकती है के द्वारा व्यक्ति और व्यापार का घिर जाना होता है |
                 इन समस्याओं से निकलने के कई उपाय तंत्र में हैं ,किन्तु कुछ दुसाध्य है तो कुछ जानकारी और उपलब्धता के अभाव में कार्यरूप में परिणत नहीं हो पाते |इस हेतु सबसे अच्छा तरीका होता है की किसी अच्छे जानकार व्यक्ति की मदद ली जाए और व्यापार-व्यवसाय वृद्धि कवच बनवाकर धारण किया जाए |यह तरीका आसान होता है हालांकि कीमत जरुर अधिक हो सकती है ,जो सम्बंधित जानकार की क्षमता पर निर्भर करती है |यद्यपि आज के प्रचार और मशीनी युग में बाजार अथवा व्यक्तियों द्वारा बहुत प्रकार के यन्त्र -ताबीज दिए जा रहे है ,कितु प्रभाव कितना होता है यह धारक ही जानता है |
             इस समस्या हेतु यदि ताबीज में दीपावली में निर्मित महालक्ष्मी यन्त्र अथवा रविपुष्य योग में छुई-मुई -निर्गुन्डी-गुलमोहर के रस और सेई के कांटे के भस्म से निर्मित व्यापार वृद्धि यन्त्र ,दिव्य मुहूर्त रविपुष्य योग में निष्कासित और पूजित श्वेतार्कमूल ,नागदौनमूल ,हरसिंगारमूल ,सांप के दांत ,हाथी दांत ,गोरोचन आदि विशिष्ट पदार्थ और वनस्पतियों का संयोग करके ताबीज बनाकर धारण किया जाये तो आशानुरूप परिणाम प्राप्त होते हैं |यद्यपि यह बहुत श्रम साध्य और योग्यतापूर्ण कार्य है ,जिसे विषय का अच्छा जानकार और साधक ही कर सकता है |


    ये सभी वस्तुएं -वनस्पतियाँ-यन्त्र मिलकर ऐसा प्रभाव उत्पन्न करते हैं की व्यक्ति पर से और उसके आसपास से नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव हट जाता है |शारीरिक ऊर्जा चक्रों की सक्रियता बढती है |उर्जा-उत्साह-उलास जागता है |विभिन्न नकारात्मक और अभिचार कर्म का प्रभाव रुकता है और जितना भाग्य में लिखा है वह पूरा मिल पाता है |साथ ही ग्रह दोषों, वास्तु दोषों का भी शमन होता है |धीरे धीरे व्यापार-व्यवसाय उन्नति की और अग्रसर होने लगता है |चूंकि इस प्रकार के कवच तांत्रिक और तीब्र प्रभावी होते हैं अतः शुद्धता और सावधानी भी आवश्यक होती है | …………………………………………………………हर-हर महादेव
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  • महावशीकरण श्यामा मातंगी यन्त्र

    महावशीकरण श्यामा मातंगी यन्त्र /कवच और महावशीकरण मन्त्र
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    सभी के लिए उपयोगी
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    मातंगी महाविद्या ,दस महाविद्या में से एक प्रमुख महाविद्या ,,वैदिक सरस्वती का तांत्रिक रूप हैं और श्री कुल के अंतर्गत पूजित हैं |यह सरस्वती ही हैं और वाणी ,संगीत ,ज्ञान ,विज्ञान ,सम्मोहन ,वशीकरण ,मोहन की अधिष्ठात्री हैं |त्रिपुरा ,काली और मातंगी का स्वरुप लगभग एक सा है |यद्यपि अन्य महाविद्याओं से भी वशीकरण ,मोहन ,आकर्षण के कर्म होते हैं और संभव हैं किन्तु इस क्षेत्र का आधिपत्य मातंगी [सरस्वती] को प्राप्त हैं |यह जितनी समग्रता ,पूर्णता ,निश्चितता से इस कार्य को कर सकती हैं कोई अन्य नहीं क्योकि सभी अन्य की अवधारणा अन्य विशिष्ट गुणों के साथ हुई है |उन्हें वशीकरण ,मोहन के कर्म हेतु अपने मूल गुण के साथ अलग कार्य करना होगा जबकि मातंगी वशीकरण ,मोहन की देवी ही हैं अतः यह आसानी से यह कार्य कर देती हैं |मातंगी के तीन विशिष्ट स्वरुप हैं श्यामा मातंगी ,राज मातंगी और वश्य मातंगी |श्यामा मातंगी स्वरुप मातंगी का उग्र स्वरुप है और वशीकरण ,मोहन, आकर्षण को तीब्रता से करता है |इनका मात्र अति विशिष्ट है ,जिसमे माया [देवी] ,सरस्वती [मातंगी ],लक्ष्मी ,त्रिपुरसुन्दरी[श्री विद्या]और काली के बीज मन्त्रों का विशिष्ट संयोग है जिससे मातंगी की मुख्यता के साथ इन सभी शक्तियों की शक्ति भी सम्मिलित होती है जिससे यह विद्या सब कुछ देने के साथ वशीकरण ,आकर्षण में निश्चित सफलता देती है |
    मातंगी ,या श्यामा मातंगी का मंत्र ,मातंगी साधक ही प्रदान कर सकता है ,अन्य किसी महाविद्या का साधक इनके मंत्र को प्रदान करने का अधिकारी नहीं है |स्वयं मंत्र लेकर जपने से महाविद्याओं के मंत्र सिद्ध नहीं होते ,अतः जब भी मंत्र लिया जाए मातंगी साधक से ही लिया जाए ,यद्यापि मातंगी साधक खोजे नहीं मिलते जबकि अन्य महाविद्या के साधक मिल जाते हैं |इनके मंत्र और यंत्र का उपयोग अधिकतर प्रवचनकर्ता ,धर्म गुरु ,tantra गुरु ,बौद्धिक लोग करते हैं जिन्हें समाज-भीड़-लोगों के समूह का नेतृत्व अथवा सामन करना होता है ,ज्ञान विज्ञानं की जानकारी चाहिए होती है |मातंगि के शक्ति से इनमे सम्मोहन -वशीकरण की शक्ति होती है |
    मातंगी का यन्त्र इसमें अतिरिक्त ऊर्जा का कार्य करता है जिसे मातंगी साधक निर्मित करता है भोजपत्र पर |मातंगी का यन्त्र बाजार में धातु का मिल जाता है किन्तु श्यामा मातंगी का मिलना मुश्किल होता है |धातु के यन्त्र की प्रभावित भी संदिग्ध होती है जबकि मातंगी साधक द्वारा निर्मित श्यामा मातंगी के यन्त्र में साधक की शक्ति ,मुहूर्त की शक्ति ,भोजपत्र की पवित्रता ,अष्टगंध की विशिष्टता ,मंत्र की शक्ति ,प्राण प्रतिष्ठा की शक्ति सम्मिलित होती है जिससे यह यन्त्र निश्चित प्रभावकारी हो जाता है |धारण करने पर इससे उत्पन्न विशिष्ट तरंगे व्यक्ति और वातावरण को प्रभावित करती हैं जिससे खुद व्यक्ति में भी परिवर्तन आता है और आसपास के लोग भी प्रभावित होते हैं |इसके वाशिकारक प्रभाव में संपर्क में आने वाले लोग बांध जाते हैं |यद्यपि यन्त्र किसी विशिष्ट व्यक्ति के लिए भी बनाया जा सकता है किन्तु व्यक्ति केन्द्रित न रखा जाए तो यह सब पर प्रभाव डालता है |
    श्यामा मातंगी का मंत्र और यन्त्र प्रकृति की सभी शक्तियों में सर्वाधिक शक्तिशाली वाशिकारक और मोहक प्रभाव रखता है क्योकि यह इसी की शक्ति हैं ही |यद्यपि इनका यन्त्र काफी महंगा पड़ जाता है ,जबकि अन्य वशीकरण के यन्त्र बाजार में बहुत सस्ते मिल जाते हैं ,यह अलग है की अन्य भले असफल हो जाए इनका यन्त्र प्रभाव जरुर देता है |कम से कम अभिमंत्रित यन्त्र भी 7000 से कम में नहीं आएगा यदि वास्तविक प्रभाव लानी है ,क्योकि बहुत कम अभिमन्त्रण अपेक्षित परिणाम नहीं देगा |इस तरह सबके लिए तो नहीं किन्तु जरूरतमंद के लिए यह यन्त्र लाभदायक होता है |
    श्यामा मातंगी यन्त्र का प्रभाव और उपयोग
    —————————————————
    १. यन्त्र धारण करने से वशीकरण की शक्ति बढती है |व्यक्तित्व का प्रभाव बढ़ता है |
    २. अधिकारी वर्ग को अपने कर्मचारियों पर नियंत्रण और उन्हें वशीभूत रखने में आसानी होती है |
    ३.कर्मचारी को अपने अधिकारियों को अनुकूल रखने में मदद मिलती है |
    ४.पति को पत्नी की और पत्नी को पति की अनुकूलता अपने आप प्राप्त होती है और धारण करने वाले का पति या पत्नी वशीभूत होता है |
    ५.सेल्स ,मार्केटिंग ,पब्लिक रिलेसन का कार्य करने वालों को लोगों का अपेक्षित सहयोग मिलता है |
    ६.व्यवसायी को ग्राहकों की अनुकूलता मिलती है और अपरोक्त उन्नति में सहायत मिलती है |
    ७.रुष्ट परिवार वालों को इससे अनुकूल करने में मदद मिलती है |
    ८.वाद-विवाद ,मुकदमे ,बहस ,समूह वार्तालाप ,आपसी बातचीत में सामने वाले की अनुकूलता प्राप्त होती है |
    ९. चूंकि यह महाविद्या यन्त्र है और काली की शक्ति से संयुक्त है अतः नकारात्मक ऊर्जा दूर करता है |
    १०. किसी पर पहले से कोई वशीकरण की क्रिया है तो यन्त्र भरे हुए चांदी कवच को सुबह शाम कुछ दिन एक गिलास जल में डुबोकर वह जल व्यक्ति को पिलाने से वशीकरण का प्रभाव उतरता है |
    ११.किसी भी तरह के इंटरव्यू में परीक्षक पर सकारात्मक प्रभाव देता है |
    १२. व्यक्ति विशेष के लिए बनाया गया यन्त्र धारण और मंत्र जप निश्चित रूप से सम्बंधित व्यक्ति को वशीभूत करता है |
    १३.दाम्पत्य कलह ,पारिवारिक कलह ,मनमुटाव ,विरोध में लोगों को प्रभावित करता है और व्यक्ति के अनुकूल करता है |
    १४.सामाजिक संपर्क रखने वालों को लोगों की अनुकूलता प्राप्त होती है |
    १५.ज्ञान-विज्ञानं-अन्वेषण-परीक्षा-प्रतियोगिता ,प्रवचन ,भाषण से समबन्धित लोगों को सफल होने में मदद करता है |


    इस प्रकार ऐसा कोई क्षेत्र लगभग नहीं जहाँ इस यन्त्र से लाभ न मिलता हो क्योकि लोगों की अनुकूलता की जरुरत सबको होती है और लोग या व्यक्ति प्रभावित हो अनुकूल हों ,वशीभूत हों तो व्यक्ति को लाभ अवश्य होता है |अतः श्यामा मातंगी साधक द्वारा बनाया गया श्यामा मातंगी यन्त्र ,अन्य किसी यन्त्र से अधिक लाभकारी होता है |………………………………………………………………..हर-हर महादेव 
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  • श्यामा मातंगी Shyama Matangi] महावशीकरण कवच /यन्त्र

    श्यामा मातंगी Shyama Matangi] महावशीकरण कवच /यन्त्र

    महावशीकरण
    श्यामा मातंगी यन्त्र /कवच और महावशीकरण मन्त्र

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    सभी के लिए
    उपयोगी
    —————————
    मातंगी
    महाविद्या ,दस महाविद्या में से एक प्रमुख महाविद्या ,,वैदिक सरस्वती का तांत्रिक
    रूप हैं और श्री कुल के अंतर्गत पूजित हैं |यह सरस्वती ही हैं और वाणी ,संगीत
    ,ज्ञान ,विज्ञान ,सम्मोहन ,वशीकरण ,मोहन की अधिष्ठात्री हैं |त्रिपुरा ,काली और
    मातंगी का स्वरुप लगभग एक सा है |यद्यपि अन्य महाविद्याओं से भी वशीकरण ,मोहन
    ,आकर्षण के कर्म होते हैं और संभव हैं किन्तु इस क्षेत्र का आधिपत्य मातंगी
    [सरस्वती
    ] को प्राप्त हैं |यह जितनी
    समग्रता ,पूर्णता ,निश्चितता से इस कार्य को कर सकती हैं कोई अन्य नहीं क्योकि सभी
    अन्य की अवधारणा अन्य विशिष्ट गुणों के साथ हुई है |उन्हें वशीकरण ,मोहन के कर्म
    हेतु अपने मूल गुण के साथ अलग कार्य करना होगा जबकि मातंगी वशीकरण ,मोहन की देवी
    ही हैं अतः यह आसानी से यह कार्य कर देती हैं |मातंगी के तीन विशिष्ट स्वरुप हैं
    श्यामा मातंगी ,राज मातंगी और वश्य मातंगी |श्यामा मातंगी स्वरुप मातंगी का उग्र
    स्वरुप है और वशीकरण ,मोहन
    , आकर्षण
    को तीब्रता से करता है |इनका मात्र अति विशिष्ट है ,जिसमे माया [देवी
    ] ,सरस्वती [मातंगी ],लक्ष्मी ,त्रिपुरसुन्दरी[श्री विद्या]और काली के बीज मन्त्रों का विशिष्ट संयोग है जिससे मातंगी की मुख्यता के
    साथ इन सभी शक्तियों की शक्ति भी सम्मिलित होती है जिससे यह विद्या सब कुछ देने के
    साथ वशीकरण ,आकर्षण में निश्चित सफलता देती है |
    मातंगी
    ,या श्यामा मातंगी का मंत्र ,मातंगी साधक ही प्रदान कर सकता है ,अन्य किसी
    महाविद्या का साधक इनके मंत्र को प्रदान करने का अधिकारी नहीं है |स्वयं मंत्र
    लेकर जपने से महाविद्याओं के मंत्र सिद्ध नहीं होते ,अतः जब भी मंत्र लिया जाए
    मातंगी साधक से ही लिया जाए ,यद्यापि मातंगी साधक खोजे नहीं मिलते जबकि अन्य
    महाविद्या के साधक मिल जाते हैं |इनके मंत्र और यंत्र का उपयोग अधिकतर प्रवचनकर्ता
    ,धर्म गुरु ,
    tantra गुरु ,बौद्धिक
    लोग करते हैं जिन्हें समाज
    भीड़लोगों के समूह का नेतृत्व अथवा सामन करना होता
    है ,ज्ञान विज्ञानं की जानकारी चाहिए होती है |मातंगि के शक्ति से इनमे सम्मोहन
    -वशीकरण की शक्ति होती है |
    मातंगी का
    यन्त्र इसमें अतिरिक्त ऊर्जा का कार्य करता है जिसे मातंगी साधक निर्मित करता है
    भोजपत्र पर |मातंगी का यन्त्र बाजार में धातु का मिल जाता है किन्तु श्यामा मातंगी
    का मिलना मुश्किल होता है |धातु के यन्त्र की प्रभावित भी संदिग्ध होती है जबकि
    मातंगी साधक द्वारा निर्मित श्यामा मातंगी के यन्त्र में साधक की शक्ति ,मुहूर्त
    की शक्ति ,भोजपत्र की पवित्रता ,अष्टगंध की विशिष्टता ,मंत्र की शक्ति ,प्राण
    प्रतिष्ठा की शक्ति सम्मिलित होती है जिससे यह यन्त्र निश्चित प्रभावकारी हो जाता
    है |धारण करने पर इससे उत्पन्न विशिष्ट तरंगे व्यक्ति और वातावरण को प्रभावित करती
    हैं जिससे खुद व्यक्ति में भी परिवर्तन आता है और आसपास के लोग भी प्रभावित होते
    हैं |इसके वाशिकारक प्रभाव में संपर्क में आने वाले लोग बांध जाते हैं |यद्यपि
    यन्त्र किसी विशिष्ट व्यक्ति के लिए भी बनाया जा सकता है किन्तु व्यक्ति केन्द्रित
    न रखा जाए तो यह सब पर प्रभाव डालता है |
    श्यामा मातंगी
    का मंत्र और यन्त्र प्रकृति की सभी शक्तियों में सर्वाधिक शक्तिशाली वाशिकारक और
    मोहक प्रभाव रखता है क्योकि यह इसी की शक्ति हैं ही |यद्यपि इनका यन्त्र काफी
    महंगा पड़ जाता है ,जबकि अन्य वशीकरण के यन्त्र बाजार में बहुत सस्ते मिल जाते हैं
    ,यह अलग है की अन्य भले असफल हो जाए इनका यन्त्र प्रभाव जरुर देता है |उदाहरण के
    लिए ,श्यामा मातंगी का मंत्र केवल इनका साधक ही जप सकता है और वाही अभिमंत्रित कर
    सकता है यन्त्र को जबकि अगर वह दिन में १० घंटे लगातार जप करे तो भी तीन हजार
    मंत्र से अधिक जप नहीं कर सकता ,कारण मंत्र बड़ा और क्लिष्ट होता है |ऐसे में
    यन्त्र को २१ हजार अभिमंत्रित करने के लिए कम से कम ७ दिन चाहिए ,पूजा प्राण
    प्रतिष्ठा और बाद में हवन के लिए दो दिन अतिरिक्त चाहिए अर्थात ९ दिन लगेंगे एक
    यन्त्र बनाने में, यदि वास्तविक प्रभाव लानी है ,क्योकि बहुत कम अभिमन्त्रण
    अपेक्षित परिणाम नहीं देगा |इस तरह सबके लिए तो नहीं किन्तु जरूरतमंद के लिए यह
    यन्त्र लाभदायक होता है |
    श्यामा मातंगी
    यन्त्र का प्रभाव और उपयोग
    —————————————————
    . यन्त्र धारण करने से वशीकरण की शक्ति बढती है
    |व्यक्तित्व का प्रभाव बढ़ता है |
    . अधिकारी वर्ग को अपने कर्मचारियों पर नियंत्रण
    और उन्हें वशीभूत रखने में आसानी होती है |
    .कर्मचारी को अपने अधिकारियों को अनुकूल रखने में
    मदद मिलती है |
    .पति को पत्नी की और पत्नी को पति की अनुकूलता
    अपने आप प्राप्त होती है और धारण करने वाले का पति या पत्नी वशीभूत होता है |
    .सेल्स ,मार्केटिंग ,पब्लिक रिलेसन का कार्य करने
    वालों को लोगों का अपेक्षित सहयोग मिलता है |
    .व्यवसायी को ग्राहकों की अनुकूलता मिलती है और
    अपरोक्त उन्नति में सहायत मिलती है |
    .रुष्ट परिवार वालों को इससे अनुकूल करने में मदद
    मिलती है |
    .वादविवाद ,मुकदमे ,बहस ,समूह वार्तालाप ,आपसी बातचीत में सामने वाले की
    अनुकूलता प्राप्त होती है |
    . चूंकि यह महाविद्या यन्त्र है और काली की शक्ति
    से संयुक्त है अतः नकारात्मक ऊर्जा दूर करता है |
    १०. किसी पर पहले से कोई वशीकरण की क्रिया है तो
    यन्त्र भरे हुए चांदी कवच को सुबह शाम कुछ दिन एक गिलास जल में डुबोकर वह जल
    व्यक्ति को पिलाने से वशीकरण का प्रभाव उतरता है |
    ११.किसी भी तरह के इंटरव्यू में परीक्षक पर
    सकारात्मक प्रभाव देता है |
    १२. व्यक्ति विशेष के लिए बनाया गया यन्त्र धारण और
    मंत्र जप निश्चित रूप से सम्बंधित व्यक्ति को वशीभूत करता है |
    १३.दाम्पत्य कलह ,पारिवारिक कलह ,मनमुटाव ,विरोध
    में लोगों को प्रभावित करता है और व्यक्ति के अनुकूल करता है |
    १४.सामाजिक संपर्क रखने वालों को लोगों की अनुकूलता
    प्राप्त होती है |
    १५.ज्ञानविज्ञानंअन्वेषणपरीक्षाप्रतियोगिता ,प्रवचन ,भाषण से समबन्धित लोगों को सफल होने में मदद करता है
    |

    इस
    प्रकार ऐसा कोई क्षेत्र लगभग नहीं जहाँ इस यन्त्र से लाभ न मिलता हो क्योकि लोगों
    की अनुकूलता की जरुरत सबको होती है और लोग या व्यक्ति प्रभावित हो अनुकूल हों
    ,वशीभूत हों तो व्यक्ति को लाभ अवश्य होता है |अतः श्यामा मातंगी साधक द्वारा
    बनाया गया श्यामा मातंगी यन्त्र ,अन्य किसी यन्त्र से अधिक लाभकारी होता है
    |………………………………………………………………..हर
    हर महादेव 
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  • क्या हैं तांत्रिक अभिचार ? ,कैसे बचें इनसे ?

    :::::::::::::::तांत्रिक अभिचार और बचाव :::::::::::::::::

    ================================
    सामान्यतया
    हम सभी भूत
    प्रेत ,आत्माओं ,देवीदेवता ,शकुनअपशकुन ,टोन टोटके के बारे में जानते हैं |इनके द्वारा प्रभावित लोगों के
    बारे में सुनते और देखते भी हैं पर इनसे भी बड़ी समस्या हर समय में तांत्रिक अभिचार
    की रही है |यह दिखाई नहीं देता ,समझ में नहीं आता ,विश्वास नहीं होता ,मानते नहीं
    हैं ,घमंड में रहते हैं की हम तो इतना पूजा -पाठ करते हैं ,ये ये देवता -मूर्ती घर
    में है ,हमें ये कुछ नहीं हो सकता ,हमको प्रभावित नहीं कर सकता |पर स्थिति बिलकुल
    उलट होती है |अक्सर लोग इन्ही से प्रभावित होते हैं और सोचते हैं की भाग्य का दोष
    है ,पित्र या देवता का दोष है |अधिकतर मामलों में ऐसा नहीं होता |कारण अभिचार और
    टोन
    टोटके होते हैं ,जो अच्छे भले
    ,खुशहाल परिवार को पतन और कष्ट में डाल देते हैं |हमने आचे
    अच्छे साधकों ,पंडितों ,कर्मकांडियों ,दुर्गा
    पाठियों तक को इनसे पीड़ित देखा है |इनका निराकरण कर पाने में वे सक्षम नहीं रहे
    |क्योकि यह ऊर्जा प्रक्षेपण की विद्या होती है ,और इसे सामान्य तरीकों से नहीं
    हटाया जा सकता |
    अक्सर
    लोगों की शिकायत होती है की उनके भाग्य में जो जो ख़ुशी या उन्नति ज्योतिषी बताते
    हैं वह नहीं मिलता |हाँ जो वह बुरा बताते हैं वह जरुर होता है |इसमें दोष ज्योतिषी
    का नहीं होता |वह सही होते हैं ,किन्तु आपके भाग्य का आपको पूरा नहीं मिलता ,इसका
    कारण है की आप नकारात्मक ऊर्जा ,जैसे अभिचार से प्रभावित होते हैं जिससे आप समय पर
    वह लाभ नहीं ले पाते ,उन्नति नहीं कर पाते जबकि सर्वाधिक उन्नति और सफलता हो सकती
    है |अभिचार और नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव से व्यक्ति की सोच बदल जाती है
    ,तनावग्रस्त होता है ,निर्णय की क्षमता प्रभावित होती है ,सही समय सही निर्णय नहीं
    होते ,कलह और मतभेद ,विवाद अनायास होते रहते हैं ,रोग
    शोक की स्थिति रहती है ,आकस्मिक दुर्घटनाएं होती हैं ,मन विचलित होता है
    ,खुशियों में भी अनजाना तनाव पसरा रहता है |कोई न कोई समस्या लगी रहती है |परिवार
    बच्चोपत्नीपत्नी -सगे
    सम्बन्धियों को कोई न कोई समस्या रहने से उन्नति की और लगने वाला बहुमूल्य समय
    इनके लिए नष्ट करना होता है |फलतः उन्नति और सफलता नहीं मिलती जबकि ग्रह स्थितियों
    से व्यक्ति को उस समय मिलनी चाहिए ,किन्तु परिवार और परिस्थिति नकारात्मक ऊर्जा और
    अभिचार के कारण अनुकूल नहीं होती और व्यक्ति चाहकर भी अवसर को नहीं पकड़ पाता |यह
    अभिचार घर
    परिवार का माहौल ऐसा बना
    देते हैं की व्यक्ति उलझता चला जाता है और क्रमशः पतन की और अग्रसर हो जाता है
    |कोई माने या न माने पर ऐसा अधिकतर मामलों में हमने देखा है |यह हमारी व्यावसायिक
    दृष्टि नहीं अपितु
    tantra क्षेत्र
    का ३० सालों का नुभव है ,जो हमने देखा ,जो हमारे यहं आने वालों की स्थिति पायी वह
    लिख रहे हैं |
    आज के
    समय लोग अपनी ख़ुशी से खुश होने की बजाय पडोसी ,रिश्तेदार की उन्नति से दुखी अधिक
    होते हैं |नजदीक वाले ही सबसे अधिक कष्ट में होते हैं जब आप अपनी मेहनत
    , भाग्य और कर्म के सहारे उन्नति कर रहे होते हैं
    तो |यही सबसे अधिक टांग खीचने की कोशिस करते हैं |कभी कभी दुसरे भी इस तरह की
    क्रिया करते करवाते हैं जहाँ भी हितों का टकराव हो अथवा दुश्मनी हो |पर अधिकतर
    मामलों में विद्वेष और ईर्ष्या ही होती है |यह लोग अक्सर सामने आने से बचना चाहते
    हैं और चाहते हैं की सामने वाले का नुक्सान भी हो जाए ,उसकी उन्नति भी रुक जाए और
    कोई जाने भी नहीं |अक्सर ऐसे कामों के लिए यह लोग तांत्रिकों ,ओझाओं ,गुनियों का
    सहारा लेते हैं जो गाँव -गाँव ,गली -गली होते हैं |इन तांत्रिकों ,ओझाओं ,गुनियों
    में दिव्य दृष्टि तो होती नहीं और उन्हें इससे मतलब भी कम ही होता है |जो व्यक्ति
    जाकर कहता है उस पर विशवास कर लेते हैं |अक्सर लोग उन्हें गलत सूचनाये देते हैं और
    खुद को पीड़ित बताते हैं ,बचाव में सामने वाले की अहित की कामना से क्रिया करने का
    आग्रह करते हैं ,अक्सर पैसों के लालच में कुछ लोग कर भी देते हैं |
    कुछ लोग
    इसके लिए पहले तांत्रिकों का विशवास जीतते हैं और उनसे सम्बन्ध विक्सित करने के
    बाद इस तरह की क्रियाएं करवाते हैं |कुछ लोग उनसे क्रियाएं पूछकर करते हैं |कुछ
    लोग बाजार में मिलने वाले टोन
    टोटके
    की किताबों के सहारे भी टोटके करते रहते हैं | इस मामलों में महिलायें अधिक शामिल
    होती हैं और तांत्रिकों ,ओझाओं की शरण यह अधिक लेती हैं |कभी -कभी किसी -किसी को
    कोई बाधा अनायास प्रभावित कर देती है तो उसके लिए उसे खुद पूरी तरह समाप्त करने की
    बजाय लोग दुसरे पर स्थानांतरित कर देते हैं ,यह भी कई मामलों में देखा जाता है
    |ऐसा अक्सर महिलाओं अथवा नवविवाहिताओं के साथ होता है |बच्चा न होने पर बच्चे वाले
    पर क्रिया कर दी जाती है |किसी की जलन वश कोक्ष बाँध दी जाती है की बच्चा न हो
    |किसी दाम्पत्य जीवन बिगाड़ने का प्रयास जलन में होता है |भूत
    प्रेत ,अला -बला तो दिया जाना आम बात है |अधिकतर
    मामलों में व्यक्ति इन्ही सबसे प्रभावित होता है |
    जब
    व्यक्ति पर अभिचार किया जाता है चाहे कैसे भी किया जाए ,तो यह एक नकारात्मक ऊर्जा
    का प्रक्षेपण होता है ,जिसका लक्ष्य और उद्देश्य निश्चित करके क्रिया की जाती है
    |क्रिया के बाद सम्बंधित ऊर्जा व्यक्ति अथवा परिवार को प्रभावित करने लगती है
    |बहुत अच्छी ग्रह स्थितियों और सकारात्मक ऊर्जा की अधिकता अगर व्यक्ति में हो तो
    वह अप्रभावित रहता है किन्तु घर परिवार प्रभावित होने लगता है जिससे व्यक्ति पर भी
    अपरोक्ष प्रभाव आता है |अगर घर के देवता बहुत शक्ति शाली हैं और व्यक्ति कमजोर है
    तो व्यक्ति प्रभावित हो सकता है |दोनों के शक्तिशाली होने पर अभिचार अप्रभावी भी
    हो सकता है |यहाँ महत्व शक्ति संतुलन का होता है |अगर बहुत तीब्र शक्ति से अभिचार
    किया जाए तो अच्छे अच्छे भी प्रभावित हो जाते हैं |हमने कुछ शतचंडी तक करवाने वाले
    प्रकांड साधकों और कर्मकांडियों को भी अचानक इनसे प्रभावित होते देखा है |कारण की
    इस ऊर्जा प्रक्षेपण की कार्यप्रणाली बिलकुल भिन्न और अलग होती है जो लक्ष्य को
    प्रभावित कर ही देती है अगर भेजने वाले में शक्ति हो |कभी कभी तो लोगों के पूजा
    घरों तक में इनके प्रभाव से खुद आग तक लग जाता पाया है |ऐसी शक्तियों की काट केवल
    tantra से ही संभव हो पाता है ,कहावत है लोहा ही
    लोहे को काटता है यहाँ बिलकुल सही बैठती है |कितु ऐसा बहुत कम और विशेष दुश्मनी
    वाली स्थिति में ही होता है |सामान्य रूप से तो टोटके और छोटे लक्ष्य या एक
    निश्चित लक्ष्य वाले अभिचार ही किये जाते हैं |
    अभिचार
    की सबसे बड़ी दिक्कत इसका जल्दी पकड़ में न आना है |लोग समझ नहीं पाते की हो क्या
    रहा है ,क्यों उन्नति ,सफलता नहीं मिल रही ,क्यों रोग का कारण नहीं मिल रहा ,क्यों
    हर जगह असफलता मिल रही है ,क्यों इतना समस्या उत्पन्न हो रही है ,|डाक्टर कारण
    नहीं पकड़ पा रहा ,ज्योतिषी कुछ बताते हैं और हो कुछ और रहा है |क्यों घर में अभाव
    पसर गया है ,बचत गायब है ,कर्ज की स्थिति आ रही है ,अच्छा कमाने पर भी क्यों पूरा
    नहीं पड़ रहा |क्यों घर की खुशियाँ गायब और मनहूसियत उत्पन्न हो गई है |क्यों इतना
    कलह ,मतभेद ,विवाद हो रहा |क्यों किसी भी काम में अडचन आ रही है |क्यों कोई मांगलिक
    कार्य नहीं हो पा रहा |क्यों बच्चे बिगड़ते जा रहे आदि आदि अनेक चिंताओं से घर वाले
    परेशान होते हैं पर हर प्रयास उनका असफल होता है |ऐसे मामलों में केवल और केवल
    अच्छा तांत्रिक ही सफल होता है और कारण पकड़ पाता है ,और कोई इसे नहीं पकड़ सकता
    |वाही उपयुक्त उपाय बता सकता है |यद्यपि छोटी टोन
    टोटकों का प्रभाव कुछ समय में खुद कम होने लगता है किन्तु बड़े और विशेष
    लक्ष्य के लिए विशेष उद्देश्य से भेजे गए अभिचारों का प्रभाव उस उद्देश्य के रहते
    नहीं भी समाप्त हो सकता |किसी को कुछ खिला दिया गया है तो जब तक उसे निकाला नहीं
    जाएगा तब तक वह प्रभाव देता रहेगा |खिलाने पिलाने वाली वस्तुओं की खासियत होती है
    की यह भिजन के साथ नहीं पचती ,अपितु सालों साल आँतों में जगह बना पड़ी रहती हैं और
    व्यक्ति को प्रभावित करती रहती हैं |
    अभिचार के कई
    प्रकार होते हैं |खुद किताबी या सुनी बातों पर किये जाने वाले टोटके |तांत्रिकों
    द्वारा बताये टोटके |किसी विशेष क्रिया के द्वारा खिला पिला कर किये जाने वाले
    टोटके |तांत्रिकों द्वारा करवाए गए प्रयोग |किसी व्यक्ति विशेष के लिए भेजी गई कोई
    शक्ति |दुश्मनी में करवाई गई प्राणघातक क्रिया आदि आदि |इनमे सामान्य टोटकों का
    प्रभाव तो टोटके तांत्रिक से जानकार समाप्त किया जा सकता है |पर खिला दिया जाने
    वाला वस्तु तांत्रिक ही निकाल पायेगा |अगर कोई शक्ति भेजी गई है तो उसे हटाना सबसे
    दुरूह कार्य होता है |वह वचन बद्ध होती है और खुद नहीं हट सकती ,,या तो उसे भेजने
    वाला तांत्रिक ही बुला सकता है या बहुत अधिक शक्तिशाली तांत्रिक ही वापस कर सकता
    है अथवा समाप्त कर सकता है |सामान्य तांत्रिक के तो यह छक्के छुड़ा देते हैं और कभी
    कभी उनके भी जान के लाले पड़ जाते हैं |

    जब कभी
    लगे की अभिचार हुआ है ,अथवा जब ज्योतिषी ,पंडित ,डाक्टर से समस्या समझ न आये तो
    सबसे बेहतर तरीका है किसी अच्छे तांत्रिक से संपर्क करना |क्योकि वाही किसी भी
    तांत्रिक अभिचार को समाप्त कर सकता है या समाप्त करने का विशेष उपाय बता सकता है
    ,अन्य सभी उपाय प्रभाव कम कर सकते हैं समाप्त नहीं कर सकते |अगर छोटे टोन
    टोटके हुए हैं तो इनके प्रभाव को सामान्य टोटकों
    उपायों द्रारा कम किया जा सकता है |बड़े टोन -टोटकों और शक्तिशाली अभिचारो को
    दुर्गा ,काली ,भैरव ,हनुमान ,बगला आदि उग्र शक्तियों की साधना पूजा से कम प्रभावी
    किया जा सकता है |दुर्गा आदि के विशेष अनुष्ठान इनको निष्प्रभावी कर सकते हैं
    |बगला ,काली ,भैरव ,प्रत्यंगिरा आदि के विशेष अनुष्ठान अथवा साधना इनके प्रभाव को
    समाप्त कर सकते हैं अथवा वापस कर सकते हैं किन्तु इनके लिए विशिष्ट गुरु अथवा साधक
    का मार्गदर्शन आवश्यक होता है |दुर्गा कवच ,काली सहस्त्रनाम ,काली -बगला -सुदर्शन
    -भैरव कवच इनके प्रभाव को रोकता है |यह ध्यान देने योग्य होता है की अभिचार तामसिक
    क्रियाएं हैं इन्हें तामसिक क्रियाओं से ही समाप्त किया जा सकता है |तामसिक
    क्रियाओं को उग्र शक्तिया ही रोक या हटा सकती हैं ,सात्विक शक्तियां सकारात्मक
    ऊर्जा तो बढ़ा सकती हैं किन्तु तामसिक क्रियाओं को हटाना इनसे मुश्किल होता है
    |गंगा जल अथवा गो मूत्र का कवच से अभिमंत्रित कर छिडकाव राहत देता है |हवन करना
    राहत देता है |प्रभावित व्यक्ति अगर उग्र शक्ति यथा काली ,भैरव ,बगला के कवच धारण
    करे तो उसका बचाव हो जाता है |अतः अगर ऐसा कुछ लगे तो अच्छे तांत्रिक से सलाह लेना
    चाहिए और उपाय करना चाहिए |……[व्यक्तिगत विचार
    ]…………………………………………………………….हर
    हर महादेव  
    READ MORE: क्या हैं तांत्रिक अभिचार ? ,कैसे बचें इनसे ?
  • ऊतम सफलता के लिए दैनिक प्रयोग

    व्यावसायिक सफ़लता और बाधा निवारण हेतु प्रयोग

    ===================================

                           यदि आप दैनिक कार्यों में ,रोजाना के व्यावसायिक कार्यों में अधिकतम सफलता पाना चाहते है ,कम से कम विघ्नबाधाओं का सामना करना चाहते है ,तो निम्न प्रयोग करे ,आपके भाग्य तो नहीं बदल जायेगे ,किंतू जो मिलना है वह पूरा मिल पायेगा ऐसा विश्वास रखे ,यदि कुछ बुरा होना है तो कम से कम होगा ,किसी प्रकार की विघ्न -बाधा है तो वह दूर होगी ,किसी प्रकार का बंधन या आभिचारिक क्रिया है तो वह रुकेगी |
                आप बुधवार या गणेश चतुर्थी  को सूर्योदय पूर्व उठे और स्नानकर अपने ईष्ट की पूजा करे ,फिर गणेश जी  की आराधना करे ,,अब एक सिन्दूरी  कागज़ कम से कम १*१ फुट का ले ,उसपर स्केल की सहायता से १०८ खाने बना ले ,अब प्रत्येक खाने में ऊपर से नीचे की और १ से १०८ तक संख्याये लिखे ,,ध्यान दे सांख्ययो का क्रम न टूटे ,अर्थात किसी लाइन में यदि संख्या १२ पर समाप्त हो रही है तो उसी के नीचे १३ अंक की संख्या शुरू होकर उलटे क्रम से पुनः १ के नीचे आएगी ,फिर वहा २४ आएगा ,अब उसके नीचे २५ से आगे लिखा जाएगा ,,यदि १ लाइन में १२ खाने हो तो ९ लाइनों में १०८ खाने हो जायेगे ,,जब खाने बन जाए तो प्रत्येक खाने में लाल स्याही से ” ॐ गं गणपतये नमः ” लिखे ,,,अब इस कागज़ को ईश्वर मानकर विधिवत पूजन कर ले ,,धुप आरती कर के कागज़ की तह करके रख ले ,इसे आपको सदैव अपनी जेब में रखनी है ,,जिस दिन इसका निर्माण करे उस दिन सुबह तब तक अन्न ग्रहण न करें जब तक यह बना और पूजा न कर लें   ,,अब दैनिक रूप से घर से बाहर जाते समय सुबह इस कागज़ को खोलकर सामने रख लिया करे,,इसके पहले खाने पर तर्जनी उंगली रखे फिर उसे सभी खानों पर घुमाते हुए १०८ वे खाने पर ले आये ,यहाँ आप अपनी आखे बंद कर अपने ईष्ट और गणेश  जी को याद करे ,और कहे हे प्रभु मेरा आज का दिन शुभ हो ,सफल हो ,में सभी अनावश्यक विवादो आदि से बचा रहू ,,इस प्रकार अपनी कामनाये व्यक्त करे,फिर अपनी तर्जनी को माथे लगा ले ,,फिर उस कागज़ को तह कर जेब में रख ले और भगवान का नाम लेकर प्रस्थान करे ,,विशवास रखे आपका दिन पहले की अपेक्षा शुभ होगा ,,,कागज पर एक बार बनाया हुआ [लिखा हुआ ]यह आपको महीनो तक काम देगा ,,किसी प्रकार कागज़ फट या खराब हो जाने पर बहते जल में विसर्जित कर ,पुनः बुधवार या गणेश चतुर्थी को इसे पहले की तरह बना सकते हैं |
                 यदि आप व्यवसायी हैं अथवा उच्च पदस्थ हैं और आपके नीचे बहुत से कर्मचारी हैं ,अथवा सेल्स -मार्केटिंग आदि से जुड़े हैं तो इस प्रयोग के साथ भोजपत्र पर निर्मित व्यापार वृद्धि यंत्र अथवा महालक्ष्मी सर्वतो भद्र यंत्र अथवा श्री यंत्र अपने रतिश्थान में लगाएं तथा प्रतिदिन धुप दीप से उसकी पूजा करते रहें |खुद बगलामुखी यंत्र धारण करें जिससे आप जो कहें उसका प्रभाव ग्राहक या सम्बंधित व्यक्ति पर पड़े ,आपका प्रभाव बढे ,सुरक्षा के साथ बुरी नज़रों आदि से बचाव हो और आपका कार्य निर्विघ्न रहे |यदि आपको लगता है की किसी प्रकार का अभिचार या बंधन दूकान /प्रतिष्ठान या घर पर किया गया है या किया जा रहा है तो वहां भी बगलामुखी यन्त्र लगाएं और बगला या काली या दुर्गा सहस्त्रनाम /कवच का पाठ करके जल अभिमंत्रित कर प्रतिष्ठान में छिडकें ,बाधाएं समाप्त होंगी |………………………………………………………..हरहर महादेव
     
    विशेष :- किसी प्रकार के पारिवारिक ,सामाजिक ,व्यावसायिक ,रोजगार सम्बन्धी अथवा नकारात्मक ऊर्जा ,बाधा -दोष -भूत -प्रेत की समस्या पर परामर्श अथवा समाधान हेतु संपर्क करें -mob. 8299886532 ,, समय सायंकाल 5 से 7 बजे के बीच ,भारतीय समयानुसार . 
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