Category: Family and Relation Problem
  • विवाह बाधा का तीव्र उपाय

    ::::::: ;विवाह बाधा निवारक तंत्र और ज्योतिषीय उपाय :::::::

    ================================

    .ज्योतिषीय उपाय

    ==========

     [१] पीला पुखराज ४ रत्ती और ओपल ४ रत्ती एक ही त्रिधातु मुद्रिका में बनवाकर ,प्राण प्रतिष्ठा ,अभिषेक करवाकर कन्या को धारण करवाए ,,,,,,,

    ,[२]विवाह योग्य कन्या को गुरूवार का व्रत करना शीघ्र वर प्राप्ति में सहायक होता है ,,,,,,,

    ,[३]वृहस्पतिवार के दिन कन्या पीले रेशमी कपडे में केले की जड़े ,एक ही हल्दी की टुकड़े के तीन हिस्से करके उन्हें कपडे में ताबीज की तरह बनाकर धुप दीप देकर बाई भुजा पर धारण करे और गुरूवार का व्रत रखकर केले के वृक्ष की पूजा करे ,इस दिन अन्न और नमक का त्याग करे ,,,,,

    ,[४]प्रतिदिन वृहस्पति के तांत्रिक या वैदिक मंत्र की कम से कम एक माला करे .

    ..तांत्रिक उपाय ,,,,,,

    =============

    [१] शुद्ध दो मुखी रुद्राक्ष विधि विधान सहित कन्या की बाई भुजा पर बाधे ,,,,,,,,,

    [२]किसी सिद्ध व्यक्ति से ताम्बे या चांदी का [सामर्थ्य अनुसार ]प्राण प्रतिष्ठित कात्यायनी यन्त्र प्राप्त करे और नित्य प्रति कात्यायनी यन्त्र की पूजा करे और यन्त्र कए साथ लिखे या बताए गए मंत्र का प्रतिदिन १०८ बार जप करे ,,,,,,,,,,

    ,[३] कन्या अपने कमाए पैसो से ,या माता -पिता-भाई द्वारा कन्या कए व्यक्तिगत खर्च कए लिए मिले पैसो से पाच कार्यसिद्धि रुद्राक्ष प्राप्त करे ,,फिर पाच सूखे नारियल [साबुत गिरी गोला ]खरीदकर ले आये ,,मंगलवार को प्रातः उठकर एक नारियल लेकर उसमे किसी नुकीली चीज से एक सुराख कर दे ,,एक कटोरी में १०० ग्राम गेहू या चावल का आटा ,एक चम्मच शुद्ध घी ,दो चम्मच चीनी मिलाकर नारियल में सुराख से भर दे ,,अब गोला स्वयं ले जाकर जहा जमीन के अंदर से चीटिया आदि निकलती है वहां एक छोटा सा गड्ढा खोदकर पहले एक कार्यसिद्धि रुद्राक्ष का दाना रखे और फिर उसपर वह गिरी गोला रखकर दबा दे ,अगल-बगल मिटटी लगा दे किन्तु सुराख नारियल का बंद न हो ,,वापस लौट आये ,,इस प्रकार निरंतर पाच मंगलवार करे ,,,इस प्रयोग में कोई प्रतिबन्ध नहीं है ,यहातक की रजस्वला होने पर भी प्रयोग पूर्ण करना चाहिए ,,केवल दो सावधानिया रखनी है ,,पहला की रात की नीद से उठने से लेकर गिरी गोला रखकर आने तक बोलना नहीं है अर्थात पूर्ण मौन रहना है ,,,दूसरी सावधानी रखनी है की प्रयोग कए लिए आते जाते समय पीछे मुड़कर देखना मना है ,कोई बात करे या आवाज दे तब भी जबाब न दे क्रिया की अवधी में यह ध्यान में रहे की हे प्रभु में यह समस्त प्रयोग उत्तम सुयोग्य वर प्राप्ति के लिए कर रही हू ,मेरी मनोकामना पूर्ण हो |

            …उपरोक्त ज्योतिषीय और तांत्रिक प्रयोग यदि कन्या द्वारा किये और करवाए जाए तो उसका विवाह तीन माह में होने की पूर्ण उम्मीद होती है ,चाहे बाधाए कैसी भी हो इनमे प्रत्येक बाधाओं कए शमन की क्षमता है और विवाहयोग [समय ]उत्पन्न करने की क्षमता है …………………………………………………….हर-हर महादेव

    READ MORE: विवाह बाधा का तीव्र उपाय
  • विवाह में बाधक ग्रह योग

    विवाह-बाधा और ज्योतिष योग        

    =================

    ……विवाह वह समय है ,जब दो अपरिचित युगल दाम्पत्य सूत्र में बंधकर एक नए जीवन का प्रारंभ करते है ,,ज्योतिष में योग ,दशा और गोचरीय ग्रह स्थिति के आधार पर विवाह समय का निर्धारण होता है ,परन्तु कभी-कभी विवाह के योग ,दशा और अनुकूल गोचरीय परिभ्रमण के द्वारा विवाह काल का निश्चय करने पर भी विवाह नहीं होता क्योकि जातक की कुंडली में विवाह में बाधक या विलम्ब कारक योग होते है |विवाह के लिए पंचम ,सप्तम ,द्वितीय और द्वादश भावों का विचार किया जाता है ,द्वितीय भाव सप्तम से अष्टम होने के कारण विवाह के आरम्भ व् अंत का ज्ञान कराता है ,साथ ही कुटुंब कभी भाव होता है ,द्वादश भाव शैया सुख के लिए विचारणीय होता है |स्त्रियों के संदर्भ में सौभाग्य ज्ञान अष्टम से देखा जाता है अतः यह भी विचारणीय है |शुक्र को पुरुष के लिए और स्त्री के लिए गुरु को विवाह का कारक माना जाता है |प्रश्न मार्ग में स्त्रियों के विवाह का कारक ग्रह शनि होता है |सप्तमेश की स्थिति भी महत्वपूर्ण होती है ,,,विवाह के लिए निम्न योग और ग्रह बाधक होते है

    .[१] सूर्य लग्नस्थ हो और शनि स्वगृही सप्तमस्थ हो तो विवाह में बाधा आती है .

    .[२] सूर्य और शनि की युति लग्न में हो तो विवाह में विलम्ब होता है

    .[३] चन्द्रमा सप्तम भाव में और शनि लग्न में हो अथवा शनि और चन्द्रमा की युति सप्तम भाव में हो तो विवाह में विलम्ब होता है

    .[४]६ भाव में शनि ही ८ भाव में सूर्य हो और अष्टमेश निर्बल -पापाक्रांत हो तो विवाह में विलम्ब होता है

    [५]यदि सूर्य सप्तम भाव में हो और शनि की उस पर दृष्टी हो तो विवाह में विलम्ब संभव है

    .[६]यदि सूर्य ,शनि के साथ सप्तमेश शुक्र हो तो विवाह में देरी होती है

    .[७]शुक्र-चन्द्रमा की सप्तम में स्थिति भी चिंतनीय होती है ,,यदि मंगल-शनि उनसे सप्तम में हो तो निश्चित रूप से विवाह में विलम्ब होता है

    .[८]यदि शुक्र शत्रु राशिगत होकर सप्तमस्थ हो तो विवाह में अनेक अवरोध आते है और विलम्ब होता है

    .[९]सूर्य और चन्द्रमा बलि होकर सप्तमेश शुक्र के साथ हो और इनपर गुरु की दृष्टि न हो तो विवाह नहीं होता है ,गुरु की दृष्टि होने पर एक बार विवाह हो जाता है परन्तु कटुता जीवन भर रहती है

    [१०] यदि लग्नेश और चन्द्रमा किसी पाप ग्रह के साथ सप्तम भाव में हो तथा सप्तमेश द्वादश भाव में हो विवाह में विलम्ब होता है |यदि शुक्र और चन्द्रमा से मंगल और शनि सप्तमस्थ हो तो विवाह में विलम्ब की सम्भावना होती है |

    .[११] सप्तम भाव यदि शनि और मंगल के पापकर्तरी योग में हो तो विवाह में विलम्ब हो सकता है

    .[१२] शनि और गुरु की युति लग्न या सप्तम भाव में हो विवाह में विलम्ब हो सकता है |………………………………..हर-हर महादेव

    READ MORE: विवाह में बाधक ग्रह योग
  • पति -पत्नी -परिवार पर तंत्र क्रिया

    पति -पत्नी -परिवार पर तंत्र क्रिया

    किसी ने आपके पति या पत्नी पर कुछ किया तो नहीं

    =============================

                 कुछ लोगों को अपने बच्चे और दुसरे की बीबी अधिक अच्छी लगती है या किसी को अपने बच्चे और दुसरे का पति ज्यादा सक्षम नजर आता है |तुलना और तर्क करके देखिये आपके आसपास भी यह देखने को मिल सकता है |पुरुष दुसरे की पत्नी को प्रशंसा और प्यार की दृष्टि से देखता मिलेगा तो पत्नी बार -बार किसी अन्य से अपने पति की या हो सकता है आपके घर में आपकी तुलना करती मिलेगी |यह हर घर की कहानी है ,हालांकि इसके अपवाद भी होते हैं किन्तु यह सामान्यतया ऐसा देखा ही जाता है |यहाँ तक तो सब सामान्य रहता है क्योकि यह मनुष्य का स्वभाव है |बहुत कम मिलेंगे जो खुद में या खुद से संतुष्ट रहें |समस्या तब उत्पन्न हो जाती है जब कोई अपनों से पूरी तरह या अधिक असंतुष्ट हो जाता है या अपने स्वभाव की कमियों से मजबूर हो जाता है |कोई किसी दुसरे की तरफ आकर्षित इतना हो जाता है की उसे पाने के लिए कोई भी प्रयास करने लगता है |कोई अपनी समस्या से तंग आकर किसी और को खुद से जोड़ने का प्रयास करता है |कोई अपनी तरक्की का हथियार किसी को बनाने का प्रयास करता है या कोई अपनी अतृप्त वासनाओं की पूर्ती का माध्यम किसी को बनाने का प्रयत्न करता है |

                        कुछ लोगों का स्वभाव भी होता है की उन्हें अपने से अधक दुसरे में रूचि होती है या कुछ लोगों का स्वभाव होता है की वह यहाँ वहां मुंह मारते घूमते रहते हैं |इन्हें जल्दी संतुष्टि नहीं मिलती अथवा इन्हें वास्तविक लगाव किसी से न होकर केवल स्वार्थ की भूख होती है |यह अपने मतलब के लिए तंत्र अभिचारों का सहारा ले सकते हैं जिससे यह इच्छित को पा सकें |कुछ लोग अपनों से असंतुष्ट होकर कभी -कभी दूसरी तरफ देखने लगते हैं तो कुछ लोग दूसरों से अधिक पाने की इच्छा में अपने के अलावा किसी दुसरे से भी जुड़ जाते हैं |कुछ लोग भावनात्मक मूर्ख भी होते हैं जो दुसरे द्वारा भावना उभारकर स्वार्थ सिद्धि का माध्यम बन जाते हैं |कुछ लोग दुसरे से इतना आकर्षित हो जाते हैं की उन्हें अपनों में कमियाँ ही कमियाँ नजर आने लगती हैं |यह स्थिति अधिक दिन रहने पर उनके अन्दर एक गहरा खालीपन उत्पन्न हो जाता है जो उन्हें कहीं भी संतुष्ट नहीं रहने देता और वह यहाँ वहां अथवा उसे पाने का प्रयत्न करते हैं जिसके प्रति आकर्षित हों अथवा जो उन्हें अपनों से अधिक सक्षम लगे |ऐसे लोग भी तंत्र अभिचारों का सहारा लेते हैं उस लक्ष्य को अथवा अपने लक्ष्यों को पाने के लिए |

                           कुछ लोग अपने आसपास के किसी को अथवा अपने सहकर्मी को अथवा अपने रिश्तेदार को अथवा अपने पडोसी को अथवा अपने क्लासमेट को देखकर उसमे इतने इंटरेस्टेड हो जाते हैं की उसे पाने का हर संभव प्रयत्न करते हैं ,यहाँ तक की यहाँ वहां तांत्रिकों के यहाँ दौड़ते रहते हैं |कोई -कोई तो किसी -किसी का कहीं निश्चित रिश्ता तक तुडवाने का प्रयत्न करता है तो कोई किन्ही पत्नी पत्नी के रिश्ते को तोडना चाहता है |कुछ लोग अपने बॉस ,उच्चाधिकारी अथवा उच्च स्तर के महिला /पुरुष को अपनी उन्नति का माध्यम बनाने के प्रयास में उन्हें वशीभूत करने का प्रयत्न करते हैं और तंत्र का सहारा लेते हैं |इससे होता यह है की व्यक्ति उनकी ओर आकर्षित होता है और अपने बीबी अथवा पति से उसका लगाव कम होने लगता है |अधिक प्रभाव होने पर व्यक्ति उस अभिचार करने वाले के बारे में पहले सोचता है और पति या पत्नी के बारे में बाद में |

                     उपरोक्त स्थितियों में ली गयी तांत्रिक प्रणालियों की क्षमता करने वाले पर निर्भर करती हैं की व्यक्ति कितना प्रभावित होता है ,किन्तु यह बिलकुल सत्य है की इनका अच्छा जानकार या अच्छी क्षमता रखने वाला साधक यह क्रियाये करवा सकता है |सभी क्रियाओं का ,यहाँ तक की टोटकों का भी कुछ प्रभाव तो हो ही जाता है ,जबकि मान्त्रिक अनुष्ठानों का प्रभाव अधिक होता है |परिणाम यह होता है की व्यक्ति दुसरे के तरफ आकर्षित हो अपनों से विमुख होने लगता है |वह खर्च भी दुसरे के लिए करता है और अपने बीबी ,बच्चों अथवा घर के दायित्व से मुंह मोड़ने लगता है |उसे अपनी पत्नी अच्छी नहीं लगती ,उसे उसमे कोई आकर्षण नजर नहीं आता |वह पत्नी और प्रेमिका की तुलना करता है और पत्नी को किसी लायक नहीं पाता ,भले पत्नी अधिक सुन्दर ,सक्षम और बुद्धिमान हो ,क्योकि व्यक्ति की बुद्धि पर तो अभिचार का पर्दा पड़ा होता है और वह आसक्ति में इतना डूबा होता है की उसे सही गलत का भान नहीं रहता |वह तर्क भी करता है तो खुद को ही सही मानता है |यदि अभिचार ग्रस्त स्त्री है तो उसे अपने पति में कमियां ही कमियां नजर आने लगती हैं ,वह पति से असंतुष्ट हो जाती है |दूसरा व्यक्ति उसे अधिक आकर्षक ,सक्षम और सुन्दर लगता है |वह उसकी ओर झुकती और अपनों से दूर होने लगती है |कुछ दिन में दूरियां बहुत बढ़ जाती हैं जो कभी कभी अलगाव का भी कारण बन सकती हैं अगर स्त्री सक्षम हुई तो ,अन्यथा कलह तो रोज आम हो जाती हैं |

                  एक समस्या इससे भी अधिक गंभीर देखि जाती है सामान्य जीवन में |लोग दुसरे की उन्नति से अधिक दुखी होते हैं बजाय अपने दुखों के |उन्हें दुसरे की ख़ुशी देखि नहीं जाती भले खुद उनके यहाँ कोई कमी न हो |कुछ लोग अपनी कमियां और कमजोरियां कम करने ,अपनी समस्या दूर करने की बजाय दुसरे को नीचे लाने का प्रयत्न भी करते देखे जाते हैं |यह सोचते हैं की भले हम नहीं उन्नति कर पा रहे किन्तु अगला भी नहीं करना चाहिए |वह कैसे अमसे आगे चला जाएगा |इस हेतु भी कुछ लोग अभिचार का सहारा लेकर दुःख-कष्ट -बीमारी का आक्रमण दूसरों पर करवा देते हैं अथवा कर देते हैं |अक्सर तोनो-टोटकों का सहारा लेते हैं |तांत्रिकों से जाकर कहते हैं की अमुक हमें परेशां कर रहा अथवा हमारे ऊपर टोन -टोटके कर रहा ,हमें भी कुछ ऐसा दे दीजिये या कर दीजिये की उसकी उन्नति रुक जाए या उसका नुक्सान हो |सामान्य तांत्रिक यह नहीं देख पाता की व्यक्ति गलत बोल रहा है या सही ,वह कुछ क्रियाएं कर देता है या बता देता है बिना सोचे की इसका गलत उपयोग हो सकता है |इससे घर में पति-पत्नी और बच्चों पर कष्ट -रोग आ जाते हैं या नकारात्मक प्रभाव उत्पन्न हो सकता है या वायव्य बाधाएं प्रभावित कर सकती हैं |घर में अशांति और दुःख उत्पन्न हो जाता है |

                         कुछ लोग अपनी बीमारी का भी उतारा करके दुसरे को दे देते हैं |आप माने या न माने किन्तु यह होता है और उतारा जिसको दिया जाता है उसे वह बीमारी हो जाती है |कभी कभी उतारा करके सड़क-चौराहे पर रख दिया जाता है और उसको लांघने वाला उस सम्बंधित कष्ट की चपेट में आ जाता है |कभी कभी तो किसी स्त्री को बच्चे न होने पर उसका उतारा किसी अन्य स्त्री पर कर दिया जाता है |कभी किसी का दाम्पत्य जीवन सुखी न होने पर या किन्ही पत्नी -पति पर कोइ क्रिया होने पर उसका उतारा करके किसी अन्य को भी दे दिया जाता है |उपरोक्त सभी क्रियाये आप पर या आपके पति-पत्नी या बच्चों पर हो सकती हैं |अगर आपके कुलदेवता शशक्त नहीं हैं तो यह क्रियाएं आपको अधिक प्रभावित करती हैं |

                     उपरोक्त समस्याएं अगर पहले से उत्पन्न हो चुकी हैं तब तो उन्हें समाप्त होने में समय लगता है और कभी कभी सक्षम तांत्रिक की मदद लेनी होती है किन्तु इनसे बचने का उपाय पहले से किया जा सकता है |यदि पति अथवा पत्नी अथवा बच्चों को किसी अच्छे साधक द्वारा उच्च और उग्र शक्तियों के यन्त्र बनाकर और उन्हें अच्छे से अभिमंत्रित करके धारण कराया जाए तो इस तरह होने वाली तांत्रिक क्रियाओं से बचाव हो जाता है |यदि समस्या उत्पन्न हो चुकी है और कोई अभिचार किया जा चूका है तो वह धीरे-धीरे कम हो जाता है और पुनः कोई क्रिया प्रभावित नहीं करती |यद्यपि इन कवचों की शक्ति साधक की शक्ति और अभिमंत्रित मन्त्रों की संख्या पर निर्भर करती हैं और गंभीर और विशेष लक्षित तांत्रिक क्रियाओं को रोक ही लें आवश्यक नहीं होता किन्तु सामान्य तांत्रिक क्रियाओं को यह रोक लेती हैं और व्यक्ति को इनसे प्रभावित होने से बचा लेती हैं अथवा धीरे -धीरे पहले की क्रियाओं के प्रभाव को समाप्त कर देती हैं |विशेष व्यक्ति को लक्ष्य कर की गयी गंभीर क्रियाओं की समाप्ति हेतु अच्छे तांत्रिक की मदद लेनी चाहिए |यदि पहले से सुरक्षा रहे तो ऐसी स्थिति बहुत कम ही आती है ,क्योकि ऐसी क्रियाओं के लिए खुद व्यक्ति को क्रियाएं करनी होती हैं |

                      जिन व्यक्तियों के घर परिवार में उपरोक्त समस्या नजर आये वे यह न मानें की यह अपने आप हो रहा है या विचार नहीं मिल रहे या यह व्यक्ति का स्वभाव होता है |अचानक अगर कोई परिवर्तन दिखे अथवा लगे की कोई किसी से जुड़ रहा है अथवा अपनों से विमुख हो रहा है तो इस पर जरुर ध्यान दें |यह अभिचार या वशीकरण-आकर्षण का प्रभाव हो सकता है |कोई आपका अहित चाहकर कोई क्रिया कर अथवा करवा सकता है |आप भले आधुनिकता और अपनी वैज्ञानिक समझ का लोहा मानते हुए इन्हें न मानें पर यह होता है और इनमे भी उसी वैज्ञानिक ऊर्जा की तकनिकी का उपयोग होता है जो रासायनिक और भौतिक क्रियाओं में होता है |यह सारा खेल ऊर्जा प्रक्षेपण और ऊर्जा ग्रहण का है |जिस पर पर जैसी ऊर्जा फेंकी जाती है उस पर वैसा प्रभाव होता है |तेज़ाब या आग या पानी फेंकने पर वह दीखता है पर तरंगों का प्रभाव दिखता नहीं ,होता अवश्य है |जैसे निश्चित ध्वनि आवृत्ति की तरंगे व्यक्ति को मौत भी दे सकती हैं ,जैसे विशेष सूर्य तरंगे व्यक्ति पर विशेष प्रभाव डालती हैं जैसे सौर तरंगें इलेक्ट्रानिक उपकरणों को प्रभावित कर देती हैं और दिखती नहीं उसी तरह यह तरंगे भी प्रभाव डाल देती हैं और दिखती नहीं |

     उपाय

    ———            अगर लगे की कोई समस्या है तब तो अवश्य ध्यान दीजिये ,नहीं दिखे तब भी पहले से सुरक्षा करके रखे |कब कौन क्या सोचे ,क्या करे कोई भरोसा नहीं |हर व्यक्ति खुद के स्वार्थ और दुसरे के सुख से चिंतित है |कोई आपके बारे में नहीं सोचता सब अपना स्वार्थ सिद्ध करना चाहते हैं |सुरक्षा कवच धारण करें और अपने प्रिय को धारण कराकर रखें ,कब कौन क्या क्रिया उसपर कर दे |इसके लिए भले खुद को आधुनिक समझते हों और आपको लगता हो की कवच पहनने से लोग आपको पिछड़ा न समझ लें ,भले इसे छिपाकर धारण करें और कराएं |क्योकि आने वाले कष्ट इस सोच से बड़े हो सकते हैं |इस हेतु काली ,बगलामुखी ,भैरव ,नृसिंह आदि शक्तियों के यन्त्र के साथ अभिचार रोकने और नष्ट करने वाली तांत्रिक वस्तुओं का उपयोग किया जाता है जो इस तरह के अभिचार के प्रभाव को क्रमशः कम करते हैं और कोई नया अभिचार होने से रोकते हैं |अगर समस्या उत्पन्न हो चुकी हो और कवच धारण आपका प्रियजन नहीं करता तो उसके तकिये आदि में इसे रखें अथवा उसे यह कहकर धारण कराएं की यह उसकी उन्नति और सुख के लिए है ,लोग आकर्षित और प्रभावित होंगे |इस तरह कहकर उसे धारण कराये |

            गंभीर समस्या उत्पन्न हो चुकी है तो अच्छे तांत्रिक की मदद लें तथा प्रति तांत्रिक क्रिया करें |अन्य उपाय उसके बताये अनुसार करें |तंत्र के नाम से ना घबराएं क्योंकि शिव परिवार और दुर्गा आदि की पूजा भी तंत्र ही है |इनके बल पर सभी क्रियाएं हटाई जा सकती हैं |बेहतर तांत्रिक न मिले तो आप हमसे सम्पर्क कर सकते हैं |अधिक उपाय इसलिए नहीं लिखे जा रहे क्योंकि इसमें विशेषज्ञता की जरूरत होती है |कहाँ कितनी शक्ति की जरूरत है ,किस तरह की शक्ति की जरूरत है ,कौन शक्ति प्रभावित कर रही ,किस तरह की किस उद्देश्य से क्रिया की गयी है जब तक यह न जाना जाए उपाय ठीक से काम नहीं करेंगे |गलत उपाय किसी को छेड़ कर छोड़ देने जैसे हो जायेंगे जिससे वह तब और अधिक घातक हो जायेंगे |…………………………………………………हर-हर महादेव

    READ MORE: पति -पत्नी -परिवार पर तंत्र क्रिया
  • दिव्य गुटिका /डिब्बी पर आकर्षण प्रयोग

    [किसी को आकर्षित /अनुकूल करने हेतु ]
    ————————————————-
    कभी -कभी कोई अपना रूठ जाता है ,दूर हो जाता है अथवा दूर चला जाता है |अपने व्यवहार ,बात या मनाने का प्रभाव नहीं पड़ता या ऐसी जगह चला जाता है जहाँ उसका पता नहीं चलता या वह नहीं चाहता की वह आपसे संपर्क रखे ,पर आपको उसकी जरुरत है ,आपको उससे लगाव है तो उसे अनुकूल करने अथवा अपनी ओर आकर्षित करने के लिए आकर्षण प्रयोग की आवश्यकता होती है |आकर्षण प्रयोग वहां किया जाता है जहाँ सीधे किसी व्यक्ति से संपर्क न हो |उसे कुछ खिलाया -पिलाया न जा सके |उससे बात चीत संभव न हो |वह मिलना न चाहता हो या उसे कोई सीधा संपर्क न हो |आकर्षण की क्रिया से लक्षित व्यक्ति में बेचैनी होती है ,उसे खिचाव महसूस होता है ,प्रयोग की गंभीरता पर स्वप्न आते हैं |
    सामग्री
    ——— तेल का दीपक ,चीनी या बताशा या सफ़ेद मिठाई ,मंत्र सिद्ध चैतन्य दिव्य गुटिका ,स्फटिक माला ,लाल रंग की धोती ,लाल कपड़ा ,लाल रंग का आसन ,सिन्दूर ,लौंग जोड़ा ,धुप -अगरबत्ती |
    दिन- समय -दिशा और जप संख्या
    —————————————–नवरात्र अथवा शनिवार की रात्री का समय ,पश्चम दिशा ,११ माला प्रतिदिन ११ दिन तक नवरात्र अथवा शनिवार से शुरू करके |
    मंत्र
    ——- ॐ नमो वैतालाय आदि पुरुषाय अमुकं आकर्षणं कुरु कुरु स्वाहा |
    विधि
    ——- किसी भी शनिवार की रात्री में स्नान कर लाल रंग के आसन पर लाल धोती पहन कर पश्चिमाभिमुख बैठें |सामने लकड़ी के चौकी या बाजोट पर लाल वस्त्र बिछाकर रोली या कुमकुम से अष्टदल कमल बनाएं |उस पर मंत्र सिद्ध चैतन्य दिव्य गुटिका रखें |गुटिका के पीछे भगवान शिव का चित्र रखें |अब गुटिका की यथासंभव पूजा करें |जल ,अक्षत ,पुष्प आदि बाहर चढ़ाएं और सिन्दूर अन्दर  |धुप दीप करें |चीनी ,बताशा और जोड़ा लौंग चढ़ाएं |इसके बाद स्फटिक माला से जिस व्यक्ति का आकर्षण करना हो उसका नाम अमुक की जगह मंत्र में जोड़कर मंत्र जप करें |प्रतिदिन ११ माला के अनुसार कम से कम ११ दिन तक क्रिया करें |
    उम्मीद रखें की व्यक्ति की सूचना मिलेगी या वह आकर्षित होगा |यदि वह किसी गंभीर तंत्र क्रिया के असर में नहीं है अथवा मजबूर नहीं है अथवा जीवित है तो वह जरूर आकर्षित हो आएगा या सूचना देगा |जो रूठकर दूर हुआ है उसका क्रोध शांत होगा और जप करता से लगाव उत्पन्न होगा वापस मिलने का प्रयत्न करेगा |यदि संभव हो तो उससे मुलाक़ात करनी चाहिए |मुलाक़ात पर दिव्य गुटिका पर चढ़ाई हुई बताशा ,लौंग ,चीनी आदि उसे खिलाने पर वाशिकारक प्रभाव उत्पन्न होता है |
    प्रयोग समाप्ति के बाद भी दिव्य गुटिका को पूजा स्थान अथवा सुरक्षित स्थान पर रख दें तथा प्रतिदिन धुप दीप करते रहें |लाभ होता रहेगा |यह अनेक समस्याओं में कारगर है |
    प्रयोग शुरू करने से पूर्व ११ दिन तक ११ माला रोज के हिसाब से ऊपर दिए मंत्र का जप कर इसे पहले सिद्ध कर लें और इसमें अमुक ही रहने दे |सिद्ध करने के बाद प्रयोग में फिर ११ दिन क्रिया करें और तब अमुक में व्यक्ति का नाम जोड़ दें |जब प्रयोग करें तो दिव्य गुटिका के साथ व्यक्ति का चित्र भी रखें ताकि मन उसपर एकाग्र हो सके |दिव्य गुटिका में प्रबल आकर्षण और वशीकरण प्रभाव पहले से होता है जो साधक की एकाग्रता और इस साधना से और बढ़कर लक्षित व्यक्ति को प्रभावित करता है |…………………………………………………..हर-हर महादेव्

    READ MORE: दिव्य गुटिका /डिब्बी पर आकर्षण प्रयोग
  • कुलदेवता /देवी रुष्ट तो नहीं हैं ?

    कुलदेवता /देवी रुष्ट तो नहीं हैं ?

    कहीं आपके कुलदेवता /कुलदेवी नाराज या निर्लिप्त तो नहीं ?
    =============================
                  हिन्दू पारिवारिक आराध्य व्यवस्था में कुल देवता/कुलदेवी का स्थान सदैव से रहा है ,,प्रत्येक हिन्दू परिवार किसी न किसी ऋषि के वंशज हैं जिनसे उनके गोत्र का पता चलता है ,बाद में कर्मानुसार इनका विभाजन वर्णों में हो गया विभिन्न कर्म करने के लिए ,जो बाद में उनकी विशिष्टता बन गया और जाती कहा जाने लगा ,,पूर्व के हमारे  कुलों अर्थात पूर्वजों के खानदान के वरिष्ठों ने अपने लिए उपयुक्त कुल देवता अथवा कुलदेवी का चुनाव कर उन्हें पूजित करना शुरू किया था ,ताकि एक आध्यात्मिक और पारलौकिक शक्ति कुलों की रक्षा करती रहे जिससे उनकी नकारात्मक शक्तियों/उर्जाओं और वायव्य बाधाओं से रक्षा होती रहे तथा वे निर्विघ्न अपने कर्म पथ पर अग्रसर रह उन्नति करते रहे |
               समय क्रम में परिवारों के एक दुसरे स्थानों पर स्थानांतरित होने ,धर्म परिवर्तन करने ,आक्रान्ताओं के भय से विस्थापित होने ,जानकार व्यक्ति के असमय मृत होने ,संस्कारों के क्षय होने ,विजातीयता पनपने ,इनके पीछे के कारण को न समझ पाने आदि के कारण बहुत से परिवार अपने कुल देवता /देवी को भूल गए अथवा उन्हें मालूम ही नहीं रहा की उनके कुल देवता /देवी  कौन हैं या किस प्रकार उनकी पूजा की जाती है ,इनमे पीढ़ियों से शहरों में रहने वाले परिवार अधिक हैं ,कुछ स्वयंभू  आधुनिक मानने वाले और हर बात में वैज्ञानिकता खोजने वालों ने भी अपने ज्ञान के गर्व में अथवा अपनी वर्त्तमान अच्छी स्थिति के गर्व में इन्हें छोड़ दिया या इनपर ध्यान नहीं दिया |
              कुल देवता /देवी की पूजा छोड़ने के बाद कुछ वर्षों तक तो कोई ख़ास अंतर नहीं समझ में आता ,किन्तु उसके बाद जब सुरक्षा चक्र हटता है तो परिवार में दुर्घटनाओं ,नकारात्मक ऊर्जा ,वायव्य बाधाओं का बेरोक-टोक प्रवेश शुरू हो जाता है ,उन्नति रुकने लगती है ,पीढ़िया अपेक्षित उन्नति नहीं कर पाती ,संस्कारों का क्षय ,नैतिक पतन ,कलह, उपद्रव ,अशांति शुरू हो जाती हैं ,व्यक्ति कारण खोजने का प्रयास करता है कारण जल्दी नहीं पता चलता क्योकि व्यक्ति की ग्रह स्थितियों से इनका बहुत मतलब नहीं होता है ,अतः ज्योतिष आदि से इन्हें पकड़ना मुश्किल होता है ,भाग्य कुछ कहता है और व्यक्ति के साथ कुछ और घटता है ,
               कुल देवता या देवी हमारे वह सुरक्षा आवरण हैं जो किसी भी बाहरी बाधा ,नकारात्मक ऊर्जा के परिवार में अथवा व्यक्ति पर प्रवेश से पहले सर्वप्रथम उससे संघर्ष करते हैं और उसे रोकते हैं ,यह पारिवारिक संस्कारों और नैतिक आचरण के प्रति भी समय समय पर सचेत करते रहते हैं ,यही किसी भी ईष्ट को दी जाने वाली पूजा को ईष्ट तक पहुचाते हैं ,,यदि इन्हें पूजा नहीं मिल रही होती है तो यह नाराज भी हो सकते हैं और निर्लिप्त भी हो सकते हैं ,,ऐसे में आप किसी भी ईष्ट की आराधना करे वह उस ईष्ट तक नहीं पहुँचता ,क्योकि सेतु कार्य करना बंद कर देता है ,,बाहरी बाधाये ,अभिचार आदि ,नकारात्मक ऊर्जा बिना बाधा व्यक्ति तक पहुचने लगती है ,,कभी कभी व्यक्ति या परिवारों द्वारा दी जा रही ईष्ट की पूजा कोई अन्य बाहरी वायव्य शक्ति लेने लगती है ,अर्थात पूजा न ईष्ट तक जाती है न उसका लाभ मिलता है ,,ऐसा कुलदेवता की निर्लिप्तता अथवा उनके कम शशक्त होने से होता है ,,
         कुलदेवता या देवी सम्बंधित व्यक्ति के पारिवारिक संस्कारों के प्रति संवेदनशील होते हैं और पूजा पद्धति ,उलटफेर ,विधर्मीय क्रियाओं अथवा पूजाओं से रुष्ट हो सकते हैं ,सामान्यतया इनकी पूजा वर्ष में एक बार अथवा दो बार निश्चित समय पर होती है ,यह परिवार के अनुसार भिन्न समय होता है और भिन्न विशिष्ट पद्धति होती है ,,शादी-विवाह-संतानोत्पत्ति आदि होने पर इन्हें विशिष्ट पूजाएँ भी दी जाती हैं ,,,यदि यह सब बंद हो जाए तो या तो यह नाराज होते हैं या कोई मतलब न रख मूकदर्शक हो जाते हैं और परिवार बिना किसी सुरक्षा आवरण के पारलौकिक शक्तियों के लिए खुल जाता है ,परिवार में विभिन्न तरह की परेशानियां शुरू हो जाती हैं ,,अतः प्रत्येक व्यक्ति और परिवार को अपने कुल देवता या देवी को जानना चाहिए तथा यथायोग्य उन्हें पूजा प्रदान करनी चाहिए, जिससे परिवार की सुरक्षा -उन्नति होती रहे |………………….हर-हर महादेव  
    READ MORE: कुलदेवता /देवी रुष्ट तो नहीं हैं ?
  • भूत बाधा /अभिचार नाशक कवच [स्त्रियों के लिए ]

    भूत बाधा /अभिचार नाशक कवच [स्त्रियों के लिए ]

    भूत बाधा /अभिचार नाशक कवच [केवल स्त्रियों के लिए ]
    ===========================
            म  सामान्य रूप से भूत-प्रेत ,आत्माएं ,वायव्य बाधाएं ,तांत्रिक टोटके और अभिचार स्त्रियों को अधिक और शीघ्र प्रभावित करते हैं |इसका कारण स्त्रियों की शारीरिक और मानसिक बनावट भी होती है और स्त्रियों के प्रति कामुक पुरुष आत्माओं का आकर्षण भी होता है |स्त्रियों का खून अक्सर पतला होता है और भूत- प्रेत पतले खून वालों को शीघ्र प्रभावित करते हैं ,पतले खून वाले और ठंडी प्रकृति वाले पुरुष भी इसी कारण शीघ्र इनकी चपेट में आ जाते हैं |स्त्रियाँ कोमल भावनाओं और ह्रदय वाली होती हैं ,मानसिक बल और कठोरता कम होने से आत्माओं को कम प्रतिरोध मिलता है और वह शीघ्र प्रभावी हो जाते हैं |अक्सर दुर्घटनाओं अथवा आकस्मिक रूप में मरे ही भूत-प्रेत बनते हैं और असंतुष्ट होते हैं ,अपनी तृप्ति के लिए इन्हें स्त्रियाँ आसन शिकार मिलती हैं और उनसे यह अपनी इच्छा पूर्ती करते हैं |
                 कभी -कभी असावधानीवश ,दुर्घटनावश ,अपवित्र स्थिति में अथवा अन्य किसी कारणवश अक्सर किसी अविवाहित अथवा कुँवारी कन्या ,लड़की या किसी भी महिला पर यकायक भूत /जिन्न /प्रेत /आसेब इत्यादि का साया हो जाता है जो की उस स्त्री का जीवन नरक सामान बना देता है |ऐसी परिस्थितियों में यदि उसे अभिमत्रित ” भूत बाधा नाशक कवच ” गले में धारण करा दिया जाए तो चमत्कारिक रूप से लाभ दिखाई देने लग जाते हैं |यह कवच महाविद्या काली की शक्ति से संपन्न होता है और नकारात्मक ऊर्जा का तीब्र प्रतिरोधक होता है ,चाहे वह कोई भी नकारात्मक या वायव्य ऊर्जा या शक्ति हो |इससे स्त्री सुरक्षित रहती है और कहीं भी उसे इन बाधाओं का भय नहीं होता |बच्चे के जन्म काल और बाद में भी स्त्री को इन आत्माओं से सर्वाधिक भय होता है ,|इस काल में भगवती का यह यन्त्र कवच उनकी पूर्ण सुरक्षा करता है |अगर पहले से किसी बाधा से प्रभावित कोई स्त्री इन्हें धारण करती है तो क्रमशः शरीर की शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा वृद्धि के साथ उस शक्ति का प्रभाव कम हो जाता है और अंततः वह छोड़ देती है |कवच की शक्ति से किसी तांत्रिक द्वारा किये गए अभिचार से भी बचाव होता है और अगर पहले से कोई अभिचार है तो उसका प्रभाव क्रमशः नष्ट होता है |अतः स्त्रियों को सुरक्षा हेतु भगवती का कवच धारण करना चाहिए |……………………………………………………………..हर-हर महादेव
    READ MORE: भूत बाधा /अभिचार नाशक कवच [स्त्रियों के लिए ]
  • बगलामुखी यन्त्र / प्रभाव

    बगलामुखी यन्त्र / प्रभाव

    बगलामुखी यन्त्र से रोके/हटाये भूतप्रेत ,वायव्य बाधा ,नकारात्मक ऊर्जा
    ==============================================
                   भगवती बगलामुखी एक अद्वितुय शक्तिशाली महाविद्या अर्थात ब्रह्माण्ड की उच्चतर शक्ति हैं जिन्हें ब्रह्मास्त्र विद्या भी कहा जाता है |इनकी आराधना विष्णु जी द्वारा भी की गयी थी एक विशिष्ट उद्देश्य की पूर्ती हेतु |यह परम तेजोमय शक्ति है जिनकी शक्ति का मूल सूत्र ,प्राण सूत्र है |प्राण सूत्र प्रत्येक प्राणी में सुप्त अवस्था में होता है जो इनकी साधना से चैतन्य होता है ,इसकी चैतन्यता से समस्त षट्कर्म भी सिद्ध हो सकते है ,,बगलामुखी को सिद्ध विद्या भी कहा जाता है ,मूलतः यह स्तम्भन की देवी है पर समस्त षट्कर्म इनके द्वारा सिद्ध होते है और अंततः यह मोक्ष प्रदान करने में सक्षम है 
                       बगलामुखी यन्त्र माता बगलामुखी का निवास माना जाता है जिसमे वह अपने अंग विद्याओ ,शक्तियों ,देवों के साथ निवास करती है ,अतः यन्त्र के साथ इन सबका जुड़ाव और सानिध्य प्राप्त होता है ,,यन्त्र के अनेक उपयोग है ,यह धातु अथवा भोजपत्र पर बना हो सकता है ,पूजन में धातु के यन्त्र का ही अधिकतर उपयोग होता है ,पर सिद्ध व्यक्ति से प्राप्त भोजपत्र पर निर्मित यन्त्र बेहद प्रभावकारी होता है ,,धारण हेतु भोजपत्र के यन्त्र को धातु के खोल में बंदकर उपयोग करते है ,,जब व्यक्ति स्वयं साधना करने में सक्षम  हो तो यन्त्र धारण मात्र से उसे समस्त लाभ प्राप्त हो सकते है ,..
                 बगलामुखी की कृपा से व्यक्ति की सार्वभौम उन्नति होती है ,शत्रु पराजित होते है ,सर्वत्र विजय मिलती है ,मुकदमो में विजय मिलती है ,अधिकारी वर्ग की अनुकूलता प्राप्त होती है ,विरोधी की वाणी ,गति का स्तम्भन होता है ,शत्रु की बुद्धि भ्रस्त हो जाती है ,उसका विनाश होने लगता है ,,ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है ,व्यक्ति के आभामंडल में परिवर्तन होने से लोग आकर्षित होते है ,प्रभावशालिता बढ़ जाती है ,वायव्य बाधाओं से सुरक्षा होती है ,तांत्रिक क्रियाओं के प्रभाव समाप्त हो जाते है ,सम्मान प्राप्त होता है ,वादविवाद में सफलता मिलती है ,प्रतियोगिता आदि में सफलता बढ़ जाती है ,भूतप्रेतवायव्य बाधा की शक्ति क्षीण होती है क्योकि इसमें से निकलने वाली सकारात्मक तरंगे उनके नकारात्मक ऊर्जा का ह्रास करते हैं और उन्हें कष्ट होता है ,मांगलिक और उग्र देवी होने से नकारात्मक शक्तियां इनसे दूर भागती हैं ,यह समस्त प्रभाव यन्त्र धारण से भी प्राप्त होते है और साधना से भी ,साधना से व्यक्ति में स्वयं यह शक्ति उत्पन्न होती है ,यन्त्र धारण से यन्त्र के कारण यह उत्पन्न होता है ,यन्त्र में साधक का मानसिक बल ,उसकी शक्ति से अवतरित और प्रतिष्ठित भगवती की पारलौकिक शक्ति होती है जो वह सम्पूर्ण प्रभाव प्रदान करती है जो साधना में प्राप्त होती है ,अतः आज के समय में यह साधना अथवा यन्त्र धारण बेहद उपयोगी है |     ताबीज आदि में एक बृहद उर्जा विज्ञानं काम करता है ,जो ब्रह्मांडीय उर्जा संरचना ,क्रिया ,तरंगों ,उनसे निर्मित भौतिक इकाइयों की उर्जा संरचना का विज्ञानं है ,,,इस उर्जा संरचना को ही तंत्र कहा जाता है |इसकी तकनीक प्रकृति की स्वाभाविक तकनीक है ,,,यही तकनीक तंत्र ,योग ,सिद्धि ,साधना में प्रयुक्त की जाती है ,-ताबीज में प्राणी के शारीर और प्रकृति की उर्जा संरचना ही कार्य करती है ,,इनका मुख्या आधार मानसिक शक्ति का केंद्रीकरण और भावना होता है ,,,,प्रकृति में उपस्थित वनस्पतियों और जन्तुओ में एक उर्जा परिपथ कार्य करता है ,मृत्यु के बाद भी इनमे तरंगे कार्य करती है ,,,,इनमे विभिन्न तरंगे स्वीकार की जाती है और निष्कासित की जाती है |जब किसी वास्तु या पदार्थ पर मानसिक शक्ति और भावना को केंद्रीकृत करके विशिष्ट क्रिया की जाती है तो उस पदार्थ से तरंगों का उत्सर्जन होने लगता है ,,,,जिस भावना से उनका प्रयोग जिसके लिए किया जाता है ,वह इच्छित स्थान पर वैसा कार्य करने लगता है,,ताबीज बनाने वाला जब अपने ईष्ट में सचमुच डूबता है तो वह अपने ईष्ट के अनुसार भाव को प्राप्त होता है ,,भाव गहन है तो मानसिक शक्ति एकाग्र होती है ,जिससे वह शक्तिशाली होती है ,यह शक्तिशाली हुई तो उसके उर्जा परिपथ का आंतरिक तंत्र शक्तिशाली होता है और शक्तिशाली तरंगे उत्सर्जित करता है |ऐसा व्यक्ति यदि किसी विशेष समय,ऋतूमॉस में विशेष तरीके से ,विशेष पदार्थो को लेकर अपनी मानसिक शक्ति और मन्त्र से उसे सिद्ध करता है तो वह ताबीज धारक व्यक्ति को उस  भाव की तरंगों से लिप्त कर देता है |यह समस्त क्रिया शारीर के उर्जा चक्र को प्रभावित करती है और तदनुसार व्यक्ति को उनका प्रभाव दिखाई देता है ,साथ ही इनका प्रभाव आस पास के वातावरण पर भी पड़ता है क्योकि तरंगों का उत्सर्जन आसपास भी प्रभावित करता है ………..…………….हरहर महादेव 
    READ MORE: बगलामुखी यन्त्र / प्रभाव
  • दाम्पत्य जीवन और वशीकरण

    दाम्पत्य जीवन और वशीकरण
    ====================
    दाम्पत्य जीवन में तंत्र के षटकर्मों में से वशीकरण का प्रयोग ही हमेशा से
    सबसे आधिक होता रहा है |कारण मनुष्य की स्वाभाविक प्रवृत्ति है |मनुष्य की
    प्रवृत्ति और सामाजिक /पारिवारिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ही प्राचीन
    ऋषियों -मुनियों ने षट्कर्म की अवधारणा विकसित की थी |इनमे से दाम्पत्य में वशीकरण
    का प्रयोग अधिक हुआ |स्त्री या पुरुष का मन अक्सर भटकता है और वह कभी भी कहीं भी
    किसी और से जुड़ सकता है |ऐसे में दाम्पत्य जीवन पर संकट उत्पन्न हो जाता है और
    वहां बिखराव की स्थिति उत्पन्न होने लगती है |पारिवारिक सदस्यों की स्थिति भी विषम
    होने लगती है |बहुत कम ऐसे होते हैं जो एक निष्ठ जीवन जीते हैं जबकि अधिकतर को
    मौका मिले तो मन भटक सकता है |सामाजिक वर्जनाएं कम होने और आधुनिकता के विकास के
    साथ आधुनिक समय में यह अधिक होने लगा है की कोई किसी और से जुड़ जा रहा है ,जबकि
    पहले यह सब अधिकतर चोरी छिपे था |इस स्थिति के नियंत्रण के लिए ही सामाजिक वशीकरण
    को विकसित किया गया था ,यद्यपि वशीकरण तो देवी -देवताओं और लोकेत्तर शक्तियों का
    भी होता है |
    हमसे अथवा अन्य तांत्रिको से संपर्क करने वाली अधिकतर महिलाओं की समस्या
    कहीं न कहीं उनके दाम्पत्य जीवन से जुडी होती है किसी न किसी रूप से |किसी का पति
    किसी और के प्रति आकृष्ट होता है अथवा किसी और से जुड़ा होता है तो किसी के पति पर
    किसी अपने ही द्वारा अथवा किसी और द्वारा कोई तांत्रिक क्रिया की गयी होती है |कोई
    अपने किसी सहकर्मी से तो कोई अपने किसी अधीनस्थ कर्मचारी से जुड़ा होता है |कोई
    बिगडैल होता है तो कोई दुर्व्यसनी या नशेडी |कोई किसी की भावना को नहीं समझता तो
    कोई अपने परिवार वालों को कष्ट देता है |कोई ठीक से कमाता धमाता नहीं तो कोई घर का
    पैसा उडाता है |कभी कभी यह स्थितियां कुछ पुरुषों के सामने भी उनकी पत्नियों को
    लेकर उत्पन्न होती हैं |कभी कभी कुछ पुरुष अथवा महिलायें अपने पत्नी या पति के
    होते हुए भी किसी विवाहित या अविवाहित से सुख की लालसा में खुद संपर्क बना लेते
    हैं तो कभी कभी कोई उन्हें अपनी ओर आकृष्ट कर लेता है |इन सभी मामलों में वशीकरण
    की भूमिका है और इन सभी मामलों में वशीकरण कर व्यक्ति को सुधारा जा सकता है |

    जब दाम्पत्य टूटने लगे ,अपना कोई दूर जाने लगे ,किसी और से जुड़ने लगे
    ,पारिवारिक स्थिति बिगड़ने लगे ,लोगों के भविष्य असुरक्षित होने लगें ,कोई रास्ते
    से भटकने लगे ,कोई नैतिक रूप से पतित होने लगे तो वशीकरण एक ऐसा माध्यम है जिससे
    उस व्यक्ति को सुधारा जा सकता है |पुनः अपनी ओर आकृष्ट किया जा सकता है |किसी और
    से संपर्क हटा पुनः खुद से जोड़ा जा सकता है |पारिवारिक और दाम्पत्य जीवन को बचाने
    के लिए यह किया जाना पूरी तरह उचित भी है और उपयुक्त भी |इस माध्यम से बिगड़े को
    सुधारा जा सकता है ,किसी को अपनी ओर आकृष्ट कर उसे वशीभूत कर अपनी बात मनवाई जा
    सकती है जिससे उसका स्वभाव परिवर्तन भी किया जा सकता है और दुर्गुण ,दुर्व्यसन
    छुडाया जा सकता है |उसे उसकी जिम्मेदारियों का अहसास कराया जा सकता है |उसे किसी
    के चंगुल से छुड़ा अपनी ओर मोड़ा जा सकता है |उसे वापस अपनी ओर कर परिवार और दाम्पत्य
    को बचाया जा सकता है |……………………………………….हर हर महादेव 
    READ MORE: दाम्पत्य जीवन और वशीकरण
  • नवग्रह दुष्प्रभाव नाशक कवच /ताबीज

    नवग्रह शांति
    कवच /ताबीज

    =============
    व्यक्ति का
    जीवन ग्रहों से प्रभावित होता है |इनकी रश्मियों की प्रकृति और मात्रा जन्म समय
    व्यक्ति के भाग्य का निर्धारण करती है जबकि इनकी प्रतिदिन की चाल उसी जन्मकालिक
    प्रभावों के अनुसार प्रतिदिन के क्रियाकलाप निश्चित करती है |इनके प्रभावानुसार
    व्यक्ति का शरीर और उसके अवयव बने होते हैं और तदनुरूप व्यक्ति की सोच ,क्षमता
    ,कर्म होते हैं |सुख -दुःख इनकी स्थिति के अनुसार ही मिलते हैं और इसे ही भाग्य
    कहा जाता है |सभी के लिए सभी ग्रहों के प्रभाव समान नहीं होते तथा जैसा ,जिसका
    प्रभाव जिसके लिए हो उसी अनुसार उसका भाग्य ,कर्म और सुख -दुःख के साथ ही शारीरिक
    स्थिति हो जाता है |
    सभी के लिए
    सभी ग्रह शुभ नहीं होते और सभी के लिए सभी अशुभ नहीं होते |इनके संतुलन पर ही
    व्यक्ति के जीवन की दशा ,दिशा नियत होती है |कुछ के लिए शुभ ग्रह ही कष्टकारक हो
    जाते हैं तो कुछ के लिए क्रूर और पापी ग्रह भी सुखकारक हो जाते हैं |अक्सर सबके
    लिए कोई न कोई ग्रह कष्ट का कारण बनता है अपनी स्थिति और चाल के अनुसार |ऐसे में
    उसकी शान्ति कराई जाती है ,उपाय किये जात हैं |चूंकि नैसर्गिक कुंडली की स्थिति
    बदली नहीं जा सकती ,अतः कोई भी उपाय ग्रह प्रभाव को पूरी तरह नहीं बदल पाता |उसके
    दुष्प्रभाव को कम -अधिक किया जा सकता है |इस स्थिति में शुभ और सुख कारक ग्रहों के
    प्रभाव को और बढ़ा देने से ,कष्टकारक ग्रह के प्रभाव में कमी आ जाती है |
    हमारे
    विश्लेषण के अनुसार अक्सर उपाय करते समय एक ही प्रकार का उपाय उपाय किया जाता है
    ,चाहे वह ज्योतिष के रत्न आदि हों ,या कर्मकांड के वैदिक हवन -पूजा -पाठ आदि या
    तंत्र के मंत्रादी का जप और टोने -टोटके |विशेषज्ञता ,विशिष्टता और पूर्ण पद्धति
    के अनुसार किये गए उपाय प्रभावी होते हैं इसमें संदेह नहीं किन्तु अक्सर पूर्ण
    उपाय श्रमसाध्य और काफी खर्च कराने वाले साबित होते हैं उपर से इनमे सीधे प्रभावित
    व्यक्ति की संलिप्तता कम ही होती है जिससे उसे पूर्ण अंश कम ही मिल पाता है |यदि
    व्यक्ति एक से अधिक ग्रहों की प्रतिकूलता का सामना कर रहा हो तब तो उसके लिए उपाय
    करना और खर्च उठाना या सभी के मूल रत्न आदि धारण करना कठिन हो जाता है |कुछ
    स्थितियों में एक ही पूजा -शान्ति का खर्च इतना होता है की व्यक्ति वही नहीं करवा
    पाता |
    इन स्थितियों
    का विश्लेषण करते हुए हमने पाया है की यदि तीनों उपायों के यानी वैदिक ज्योतिषीय
    ,कर्मकाण्डीय और तंत्रोक्त पद्धतियों के कुछ अंशों को एक साथ समायोजित किया जाय तो
    ग्रहों की शुभता को बढ़ाया जा सकता है ,अनिष्ट कारक ग्रहों के दुष्प्रभाव को कम
    किया जा सकता है ,साथ ही उन्हें अनुकूल और प्रसन्न भी रखा जा सकता है |इसके लिए
    हमने नवग्रह यन्त्र ,नवग्रहों के वैदिक वनस्पतियों के साथ नवग्रहों से सम्बन्धित
    और उन्हें प्रभावित करने वाले तांत्रिक जड़ी बूटियों को एक साथ सम्मिलित कर
    नवग्रहों के मंत्र से प्राण प्रतिष्ठा करके ,जप -अभिमन्त्रण और हवन किया |इसके साथ
    कुछ अन्य वस्तुओं का संयोग किया जो की व्यक्ति की क्षमता का विकास कर सकें तथा
    उसकी नकारात्मकता को हटा सकें जो की पृथ्वी की शक्तियों के कारण उत्पन्न हो रही
    हों |यह वस्तुएं हमारे महाविद्या साधना में अभिमंत्रित की हुई थी जिससे यह
    महाविद्याओं की शक्ति से श्क्तिकृत हो चुकी थी |इन्हें कवच में सम्मिलित करने पर
    यह कवच /ताबीज अद्भुत प्रभाव देने वाले साबित हुए |खुद पर और परिचितों पर प्रयोग
    करने के बाद इन्हें हमने बहुतों को प्रदान किया जिसके बहुत अच्छे परिणाम मिले |

    यह कवच
    नवग्रहों में से किसी के भी दुष्प्रभाव या कई के सम्मिलित दुष्प्रभाव को कम करने
    के साथ ही शुभद ग्रहों के प्रभाव को बढ़ा देता है जिससे उनकी पूर्ण शुभता मिलती है
    |इस कारण अनिष्ट कारक ग्रह का प्रभाव और कम हो जाता है |इसके साथ ही यदि कोई
    नकारात्मक प्रभाव व्यक्ति पर हो तो वह भी दूर हो जाता है तथा व्यक्ति को भगवती की
    भी सुरक्षा मिलती है |इस कवच में नवग्रहों के भोजपत्र निर्मित यन्त्र ,उनकी
    ज्योतिषीय वनस्पतियाँ जैसे पीपल ,शमी ,अपामार्ग आदि ,उनसे सम्बन्धित तांत्रिक जड़ी
    बूटियों जैसे भारंगी ,अम्लवेत ,नागदौन के जड़ आदि को प्राण प्रतिष्ठित कर उन्हें
    तंत्रोक्त नवग्रहीय मन्त्रों से अभिमंत्रित किया गया होता है और तब इनमे अन्य
    वस्तुओं जो की भगवती की ऊर्जा को समाहित करती हों को सम्मिलित किया जाता है ताकि
    नवग्रहों पर भी प्रभाव पूर्ण हो और भगवती की भी शक्ति अलग से मिले
    |

    इस कवच /ताबीज का एक लाभ तो यह होता है की यह व्यक्ति के शरीर के सीधे संपर्क में होता है अर्थात सभी उर्जाओं ,शक्तियों ,वस्तुओं को व्यक्ति के शरीर के साथ जोड़ दिया जाता है जिससे उसे पूर्ण लाभ शीघ्र प्राप्त होता है ,इसके साथ इसकी ऊर्जा निश्चित रूप से प्राप्त होती है |दूसरा लाभ यह होता है की व्यक्ति को बार बार अलग अलग ग्रहों आदि के उपाय की बहुत जरूरत नहीं रहती और वह बड़े अनुष्ठानों पूजा -पाठ ,कर्मकांड से भी बचता है तथा खुद कुछ करने की जरूरत भी नहीं होती |तीसरा लाभ इससे यह होता है की इससे टोने -टोटके ,अभिचार ,किये कराये ,नजर दोष आदि से भी सुरक्षा हो जाती है |इस प्रकार यह एक साथ अनेकों उद्देश्य पूर्ण करता है |यह हमारे वर्षों के अनुभव की खोज है जिसके परिणाम बहुत अच्छे मिले हैं |……………………………………………………………..हर हर महादेव 
    READ MORE: नवग्रह दुष्प्रभाव नाशक कवच /ताबीज
  • मांगलिक कार्य में विघ्न क्यों आ रहे ?

    विवाह योग पर भी विवाह नहीं हो रहा

    ==================
    मांगलिक कार्य में बाधा
    ——————–
    विवाह हिन्दुओं के सोलह संस्कारों में से एक महत्वपूर्ण संस्कार है और यह लगभग सभी धर्म सम्प्रदायों में विभिन्न रूपों में मान्यताप्राप्त है |इस संस्कार द्वारा देव अनुमति से संतानोत्पत्ति की अनुमति प्रदान की जाती है और इसके बाद दो लोग एक साथ जीवन के सुख दुःख बांटने को साथ आते हैं |विवाह हर युवक युवती का सपना होता है जो विवाह का अर्थ समझ आने के बाद से ही उनके मष्तिष्क में काल्पनिक रूप से घूमता रहता है |भारत जैसे हिन्दू संस्कार के देश में युवक युवती तो कम चिंतित होते हैं विवाह को लेकर लेकिन माता पिता की चिंता उनके युवा होते ही विभन्न रूपों में उनके दिमाग में आने लगती है |युवती को लेकर अधिक ,तो युवा को लेकर कुछ कम माता पिता चिंतित होते हैं |पहले के समय में अधिकतर वैवाहिक निर्णय परिवार के बुजुर्ग और बड़े लिया करते थे अतः कुछ कम चिंताएं थी किन्तु आज युवा अधिक स्वतंत्र हो खुद के निर्णय को अधिक प्राथमिकता दे रहे अतः समस्या बढ़ी है |उच्च शिक्षा ,वैवाहिक आयु में तुलनात्मक वृद्धि ,स्वावलंबन की सोच भी विवाह में देरी का कारण बन रहे |कुछ लोगों के साथ अलग ही समस्या आती है की विवाह ही नहीं होता टा विवाह में अनावश्यक देरी होती है और समय निकलता जाता है जबकि प्रत्यक्ष तौर पर कहीं कोई कमी नजर नहीं आती |
    ज्योतिष के अनुसार विवाह की कुछ निश्चित समयावधियां हर व्यक्ति के जीवन में कुछ बार आती हैं और अक्सर उन्ही समयों में विवाह सम्पन्न होता है |कभी कभी बहुत प्रबल विवाह योग होता है और उस समय ही विवाह होता है |कुछ मामलों में विवाह योग के साथ कुछ बाधाएं भी जुडी होती हैं ,जिनके लिए विवाह बाधा निवारण के उपायों की परिकल्पना की गयी है और ऐसे समय बाधा निवारण के उपाय कराये जाते हैं तब विवाह हो पाता है |कुछ मामले इनसे भी गंभीर होते हैं जहाँ हर ज्योतिषीय उपाय असफल होने लगता है ,अथवा प्रबल विवाह योग कुंडली में होने पर भी विवाह नहीं हो पाता ,अथवा अनेक विवाह योग निकल जाते हैं पर विवाह नहीं हो पाता |ज्योतिषीय उपाय ग्रहीय स्थितियों को संतुलित कर सकते हैं किन्तु यदि समस्या ग्रहीय न होकर अलग हो तो यह उपाय काम नहीं करते और विवाह बाधा बनी रहती है |कोई भी उपाय भाग्य से अधिक नहीं दिला सकता किन्तु कभी कभी कुछ स्थितियां ऐसी भी उत्पन्न होती हैं की भाग्य का भी पूरा नहीं मिल पाता चाहे कितने भी ज्योतिषीय उपाय करें |इसका कारण समस्या ऐसी बाधाओं से उत्पन्न होना है जो ग्रहीय नहीं नहीं हो किन्तु भाग्यावारोध उत्पन्न करें |
    इस तरह की ही अधिकतर बाधाएं इस प्रकार समस्या उत्पन्न करते हैं की विवाह नहीं हो पाता ,घर परिवार में मांगलिक कार्य नहीं होता ,किसी भी उन्नति के कार्य में बाधा आती है ,शुभ कार्य में अवरोध उत्पन्न होता है ,यहाँ तक की सोच -व्यवहार तक बदलने लगता है ,अनावश्यक कलह ,विवाद ,मतभिन्नता ,स्वविचार की प्राथमिकता उत्पन्न होती है |आपस में दूरी बनती है ,अलग रहने की भावना उत्पन्न होती है और कभी कभी समाज -संस्कार से अलग रहन सहन विकसित हो जाता है |जो बाधाएं ज्योतिषीय बाधाओं से अलग होती हैं उनके पृथ्वी की सतह से जुडी नकारात्मकता होती हैं जो जब प्रभावित करती हैं तो ग्रहीय भाग्य में अवरोध उत्पन्न होता ही है अनेक अलग समस्याएं भी उत्पन्न होती हैं |कुंडली जन्म पूर्व की वास्तु समस्या ,पित्र समस्या ,देव दोष आदि तो व्यक्त करता है किन्तु जन्म बाद के परिवर्तन कुंडली व्यक्त नहीं करता अतः यदि कोई व्यक्ति या परिवार बाद में किसी बाधा से पीड़ित हुआ हो अथवा पूर्व की ही कोई बाधा बढ़ी हो तो कुंडली उसकी स्थिति व्यक्त नहीं करता और इसलिए ज्योतिषीय उपाय अक्सर इस समस्या को पूर्ण रूपें हल नहीं कर पाते |
    सामान्यतया लडकियाँ परन्तु कभी कभी लड़के भी किसी ऐसी बाधा से पीड़ित हो जाते हैं जबकि कोई आत्मिक शक्ति उनके पीछे पड़ जाए और उनके हर प्रकार के मांगलिक कार्य में रुकावट बन उन्हें अपनी इच्छापूर्ति का माध्यम बनाए |यह शक्ति राह चलते लग सकती हैं ,आसक्त हो लग सकती है या इसी द्वारा भेजे जाने पर लग सकती है |यह व्यक्ति या पीड़ित के सोच और व्यवहार तक को बदल सकती है जिससे उसकी रूचि बदल जाए अथवा वह सही समय सही निर्णय न ले पाए |कभी कभी कोई शक्ति किसी परिवार को ही परेशान करने लगती है जिससे परिवार के मांगलिक कार्यों में विघ्न आते हैं ,विलम्ब होते हैं ,स्थितियां बिगडती जाती हैं ,आर्थिक स्थिति खराब हो जाती है ,लोग दुसरे ही उलझनों में उलझे रह जाते हैं और विवाह योग होने पर भी कन्या अथवा पुत्र का विवाह नहीं कर पाते या स्थिति ऐसी होती है की विवाह की नहीं सोच पाते |प्रत्यक्ष तो कोई ग्रहीय बाधा नहीं किन्तु पारिवारिक स्थिति बिगड़ गयी और विवाह नहीं हो पा रहा |
    आज के भाग दौड़ के युग में बहुत अधिक स्थान परिवर्तन हो रहे और लोग यहाँ वहां नए पुराने मकानों में रह रहे |हर मकान वास्तु अनुसार बना हो जरुरी नहीं ,हर जमीं का शोधन कर उस पर माकन बना हो जरुरी नहीं |ऐसे में जिसका भाग्य बहुत प्रबल होगा अथवा जिसके घर में कम नकारात्मक ऊर्जा होगी उसका विवाह वहां रहते हो जाएगा ,उन्नति होगी और मांगलिक कार्य होंगे और अन्य के रुक जायेंगे ,चाहे कितने भी संस्कारी हों अथवा पूजा पाठ करें ,सात्विकता से रहे ,बाधाएं अपना असर दिखाएंगी ही |वास्तु दोष की नकारात्मकता ,उस जमींन में दबी कोई शक्ति अपना प्रभाव देगी ही |यदि कुलदेवता कमजोर हुए ,सुरक्षा ठीक से नहीं कर रहे ,पित्र दोष आदि है अथवा पित्र रुष्ट हैं तो स्थिति और बिगड़ जायेगी क्योकि नकारात्मक प्रभावों का प्रतिशत बढ़ जाएगा |एक बार स्थिति बिगड़ी तो फिर सम्भालनी मुश्किल हो जायेगी क्योकि संसाधन कम होते चले जायेंगे |
    एक समस्या आज और देखने में आ रही की कुछ लोग अनावश्यक किसी के प्रति बैर भाव रखते हैं अथवा किसी का अहित चाहते हैं और ऐसे में वह खुद सामने न आकर टोने टोटकों का सहारा ले लोगों को परेशान करते हैं |हर टोने टोटके की एक निश्चित ऊर्जा या शक्ति होती है जो कुछ प्रभाव तो देती ही है |कभी कभी लोग अपनी समस्या का उतारा करके भी किसी अन्य को दे देते हैं जिससे उसके यहाँ एक बाधा आ जाती है जो हर कार्य में बाधा उत्पन्न करती है |कभी कभी किन्ही दो लोगों के बीच अथवा प्रेमी प्रेमिका के बीच कोई विद्वेषण अथवा उच्चाटन करा देता है और उनके सम्बन्ध बिगड़ जाते हैं |मानसिक स्थिति ठीक न होने से यह लोग बहुत दिन विवाह से दूर रहना चाहते हैं |कभी कभी वशीकरण आदि के भी दुष्प्रभाव आते हैं की व्यक्ति किसी और से विवाह करना चाहता है और परिवार अथवा अवचेअतन किसी और तरफ खींचते हैं ,व्यक्ति अंतर्द्वंद में उलझ जाता है |
    ज्योतिष में विवाह योग है किन्तु कोई बाधा भी उसके साथ है अथवा कुंडली में मांगलिक योग है या कालसर्प योग है और उपाय किये जा रहे ,साथ में कोई बाहरी बाधा भी है तो भी विवाह की सम्भावना कम हो जाती है क्योकि चाहे कितने भी उपाय किये जाएँ ज्योतिषीय योगों को पूरी तरह नहीं बदला जा सकता ,बस उनके प्रभाव में कुछ कमी जरुर आ जाती है |ऐसे में कुछ ज्योतिषीय योगों की बाधा और कुछ बाहरी बाधा मिलकर संतुलन बिगाड़ देते हैं |यदि ज्योतिष के उपाय सटीक न हुए अथवा समस्या कहीं और और उपाय कहीं और तो भी काम नहीं बनता |यदि माता -पिता या परिवार का समग्र भाग्य विपरीत हो तो भी बाधा उत्पन्न होगी क्योकि वह अपना पूरा प्रयास नहीं कर पाते हैं अथवा सही समय आगे नहीं बढ़ पाते |ऐसे समय मात्र प्रबल भाग्य ही विवाह करा पाता है और तब कहा जाता है की अमुक का भाग्य इतना प्रबल था की कोई इंतजाम न होने पर भी विवाह उत्तम सम्पन्न हो गया |
    जब विवाह में देरी हो अथवा विवाह योग होने पर भी विवाह न हो पाए तो सबसे पहले तो किसी विद्वान् ज्योतिषी से संपर्क करना चाहिए और विस्तृत विश्लेषण करा उपाय गंभीरता से करने चाहिए |यदि तब भी विवाह बाधा बनी रहे और विवाह में विलम्ब हो तो किसी अच्छे तंत्र जानकार से संपर्क कर विभिन्न बाधाओं को समझने का प्रयत्न करना चाहिए जो मांगलिक कार्य में विघ्न उत्पन्न कर रही हो अथवा कन्या या व्यक्ति को पीड़ित कर रही हों ,इन्हें हटाने का प्रयत्न करना चाहिए |इनके साथ ही घर के वास्तु पर ध्यान देना चाहिए और पितरों को संतुष्टि का प्रयत्न करना चाहिए तथा कुलदेवता /देवी की पूजा करनी चाहिए |यदि कभी कोई मान्यता किसी अन्य विषय की कहीं मानी गयी हो तो उसे पहले पूरा कर देना चाहिए क्योकि कभी कभी कोई शक्ति अपनी मान्यता पूर्ण न करने से रुष्ट हो अन्य कार्यों में भी विघ्न उत्पन्न करती है |ज्योतिषीय और तंत्रिकीय बाधा निवारक प्रयोग ,विशिष्ट विवाहोपयोगी समग्र प्रयोग ,विघ्न -बाधा हटाने के टोटके ,तांत्रिक उपाय ,वैदिक और शास्त्रोक्त उपाय हम अपने इस श्रृंखला के आगामी लेखों में प्रकाशित कर रहे हैं जिससे हमारे blog और फेसबुक पेजों के पाठक लाभान्वित हो सकें |…………………………………………..हर -हर महादेव 
    READ MORE: मांगलिक कार्य में विघ्न क्यों आ रहे ?