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  • प्राचीन मंदिरों और गुफाओं में मिले ‘अदृश्य देवता ?

    प्राचीन मंदिरों और गुफाओं में मिले ‘अदृश्य देवता ?

            “क्या होगा अगर मैं आपसे कहूँ कि जिसे आप अब तक सिर्फ ‘आस्था’ कहते थे, वो असल में एक ‘एडवांस्ड साइंस’ है? फरवरी और मार्च २०२६ की इन हेडलाइंस को देखिए— IIT दिल्ली का दावा कि वैदिक मंत्रों में ‘क्वांटम प्रूफ’ मिला है। राजस्थान की गुफाओं में LiDAR तकनीक से देवताओं के ‘चुंबकीय क्षेत्र’ (Magnetic Fields) का पता चला है।

            कल्पना कीजिए माधव की— एक ऐसा खोजी जो तंत्र और विज्ञान के बीच की धुंधली लकीर को पार करना चाहता है। माधव राजस्थान की उन प्राचीन गुफाओं में कदम रखता है जहाँ सदियों से ‘कर्ण पिशाचिनी’ जैसी सत्ताओं के होने की बातें कही जाती हैं। उसके हाथ में कोई माला नहीं, बल्कि एक मॉडर्न LiDAR स्कैनर और EMF डिटेक्टर है।

           अचानक, उसकी मशीनें चीखने लगती हैं। शून्य तापमान वाली उन गुफाओं में ऊर्जा का एक ऐसा स्रोत मिलता है जो भौतिक विज्ञान के नियमों को चुनौती दे रहा है। क्या माधव ने उन ‘छिपे हुए देवताओं’ या ‘अदृश्य ऊर्जाओं’ को ढूंढ लिया है जिन्हें हमारे पूर्वज जानते थे? आज के इस वीडियो में हम सिर्फ कहानियाँ नहीं सुनाएंगे, हम उन ७ वैज्ञानिक प्रमाणों की बात करेंगे जो साबित करते हैं कि इस ब्रह्मांड में ‘छिपे हुए देवताओं’ का अस्तित्व महज एक कल्पना नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक सच्चाई है। तैयार हो जाइए, क्योंकि आज ‘रुद्र शक्ति’ और ‘क्वांटम फिजिक्स’ का मिलन होने वाला है।”

              “१५ फरवरी २०२६। IIT दिल्ली से एक ऐसी खबर आई जिसने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों को चौंका दिया। रिसर्च का विषय था— ‘Vedic Mantras and Quantum Consciousness’।

    वैज्ञानिकों ने पाया कि जब विशिष्ट फ्रीक्वेंसी पर वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया जाता है, तो वे वातावरण में मौजूद ‘सब-एटॉमिक पार्टिकल्स’ (Sub-atomic particles) को प्रभावित करते हैं। न्यूज़ १८ की रिपोर्ट के अनुसार, वेदों में छिपे देवताओं को अब ‘क्वांटम फील्ड्स’ के रूप में देखा जा रहा है।

           शास्त्र कहते हैं कि देवता ‘नाद’ में निवास करते हैं। विज्ञान अब इसे ‘Vibrational Frequency’ कह रहा है। जब माधव ने अपनी लैब में मंत्रों की तरंगों का विश्लेषण किया, तो उसने पाया कि ये तरंगें सामान्य ध्वनि तरंगें नहीं थीं। ये ‘स्केलर वेव्स’ (Scalar Waves) की तरह काम कर रही थीं— ऐसी ऊर्जा जो समय और स्थान की सीमाओं को लांघ सकती है। क्या कर्ण पिशाचिनी जैसी सत्ताएं इन्हीं सूक्ष्म तरंगों के माध्यम से ‘माधव’ के मस्तिष्क से संपर्क करती हैं?”

          “टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) की २८ फरवरी २०२६ की रिपोर्ट ने एक नया खुलासा किया। राजस्थान की कुछ प्राचीन गुफाओं में, जहाँ माना जाता था कि प्राचीन सिद्ध पुरुष देवताओं से संवाद करते थे, वहां LiDAR (Light Detection and Ranging) तकनीक का इस्तेमाल किया गया। LiDAR तकनीक लेजर रोशनी का उपयोग करके ज़मीन के नीचे और दीवारों के पीछे के त्रि-आयामी (3D) नक्शे बनाती है। सर्वे में वहां कुछ ऐसे ‘चुंबकीय कक्ष’ (Magnetic Chambers) मिले जो मानव निर्मित नहीं लगते। इन कक्षों में EMF (Electromagnetic Field) की रीडिंग सामान्य से ४००% अधिक थी।

           दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, प्राचीन मंदिरों के गर्भगृह में भी इसी तरह का EMF पैटर्न पाया गया है। वैज्ञानिक इसे ‘God Spot’ कह रहे हैं। माधव के लिए यह सिर्फ एक गुफा नहीं थी; यह एक ‘बायो-इलेक्ट्रिकल पोर्टल’ था। क्या देवता असल में इन विशिष्ट ऊर्जा केंद्रों में निवास करने वाली ‘इंटेलिजेंट एनर्जी’ हैं?”

          “१० मार्च २०२६ को सद्गुरु ने ‘स्केलर वेव्स और हिडन देव’ पर एक महत्वपूर्ण चर्चा की। उन्होंने बताया कि आधुनिक विज्ञान जिस ‘हिग्स बोसॉन’ (Higgs Boson) या ‘गॉड पार्टिकल’ को ढूंढ रहा है, वह असल में वही शक्ति है जिसे हम शिव या देव कहते हैं। स्केलर वेव्स ऐसी तरंगें हैं जो कभी खत्म नहीं होतीं। विज्ञान मानता है कि ये तरंगें पूरे ब्रह्मांड की सूचनाओं को एक क्षण में यहाँ से वहां ले जा सकती हैं। शास्त्रों में ‘आकाश तत्व’ का वर्णन ठीक ऐसा ही है। माधव ने जब कर्ण पिशाचिनी की साधना के वैज्ञानिक पहलुओं को देखा, तो उसे समझ आया कि मंत्र असल में उस ‘अदृश्य क्लाउड’ (Invisible Cloud) से डेटा डाउनलोड करने का तरीका हैं। ये ‘छिपे हुए देवता’ असल में इस ब्रह्मांड के ऑपरेटिंग सिस्टम के कोड्स हैं।”

         “१२ मार्च २०२६। आचार्य प्रशांत ने क्वांटम फिजिक्स और हिंदू देवताओं के बीच के संबंधों पर एक गहरा विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने तर्क दिया कि ‘ऑब्जर्वर इफेक्ट’ (Observer Effect) के अनुसार, हमारी चेतना ही वास्तविकता का निर्माण करती है। अगर करोड़ों लोग हजारों सालों से एक ही ‘देवता’ की ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, तो क्वांटम स्तर पर वह ऊर्जा एक ठोस आकार लेने लगती है। जिसे माधव एक ‘पिशाचिनी’ या ‘देवी’ समझ रहा है, वह असल में सामूहिक चेतना (Collective Consciousness) का एक संघनित रूप (Condensed form) हो सकता है। विज्ञान कहता है कि ऊर्जा न तो पैदा की जा सकती है और न ही नष्ट— तो क्या हमारे पूर्वजों द्वारा जागृत की गई वो दिव्य ऊर्जाएं आज भी हमारे आस-पास मौजूद हैं?”ध्यान दीजिये और खुद देखिये हमने अपने इसी चैनल पर कई साल से ऐसे कई video प्रकाशित कर रखे हैं जिनमे हमने बार बार कहा है की आप खुद देवता बन सकते हैं ,आप खुद देवता बना सकते हैं ,आखिर देवताओं का आपको दर्शन कैसे होता है |यह सब लगातार प्रमाणित हो रहा है |

          “१८ मार्च २०२६ की एक कमर्शियल रिपोर्ट बताती है कि ‘रुद्र शक्ति डिवाइसेस’ की बिक्री में ३४०% का उछाल आया है। ये वो उपकरण हैं जो घरों में ‘नेगेटिव आयन’ और ‘विशिष्ट ईएमएफ फ्रीक्वेंसी’ पैदा करने का दावा करते हैं, जो प्राचीन मंदिरों के वातावरण की नकल करते हैं।

      यह इस बात का प्रमाण है कि अब लोग केवल श्रद्धा पर नहीं, बल्कि ‘अनुभव’ और ‘प्रमाण’ पर विश्वास कर रहे हैं। माधव ने भी अपनी रिसर्च में पाया कि जब वातावरण में एक निश्चित ऊर्जा संतुलन (Energy Balance) होता है, तभी ‘अदृश्य सत्ताओं’ से संपर्क संभव हो पाता है। यह अंधविश्वास नहीं, बल्कि ‘एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग’ (Environmental Engineering) है।”

         “तो क्या है छिपे हुए देवताओं का अंतिम सच?

    माधव की राजस्थान की गुफाओं से शुरू हुई यात्रा उसे एक ही नतीजे पर ले गई— कि विज्ञान और शास्त्र अलग-अलग नहीं हैं। IIT की स्टडी, LiDAR के नतीजे और EMF की रीडिंग एक ही ओर इशारा कर रहे हैं: हम एक ऐसी ऊर्जा के समंदर में डूबे हुए हैं जिसे हम देख नहीं सकते, पर महसूस कर सकते हैं। ‘छिपे हुए देवता’ कोई आसमान में बैठे व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि वे इसी ब्रह्मांड के सूक्ष्म आयामों (Dimensions) में रहने वाली उच्च चेतनाएं हैं। कर्ण पिशाचिनी हो या महादेव— ये सब उस ‘परम विज्ञान’ के हिस्से हैं जिसे हम अब समझना शुरू कर रहे हैं।

           अगली बार जब आप किसी प्राचीन मंदिर में जाएं या कोई मंत्र सुनें, तो याद रखिएगा— आप सिर्फ प्रार्थना नहीं कर रहे, आप ब्रह्मांड के सबसे उन्नत ‘क्वांटम नेटवर्क’ से जुड़ रहे हैं।

       आपको क्या लगता है? क्या विज्ञान जल्द ही इन देवताओं को हमारे सामने साक्षात खड़ा कर देगा? अपनी राय कमेंट्स में जरूर लिखें और अगर आप माधव की इस रहस्यमयी खोज के अगले भाग को देखना चाहते हैं, तो चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलें। सत्यम शिवम सुंदरम।”….हर हर महादेव

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  • प्रत्यंगिरा कवच/ताबीज

    प्रत्यंगिरा कवच/ताबीज

               भगवती महाकाली का एक स्वरुप प्रत्यंगिरा का है |यह नाम इनका इसलिए पड़ा क्योंकि इनके इस स्वरुप की आराधना ऋषि अंगिरस और प्रत्यांगिरस नामक दो ऋषियों ने की थी और इनके नाम पर ही इनका नाम प्रत्यंगिरा पड़ा |इनके बारे में कहा जाता है की कोई महाविद्या या महाशक्ति की साधना किये बिना प्रत्यंगिरा देवी की साधना नहीं करनी चाहिए |भगवती आद्यशक्ति पार्वती के अंग के कौशिकी के निकलने पर भगवती पार्वती का स्वरुप काला पड़ गया और तब वह काली कहलाई |भगवती के शरीर से जो देवी कौशिकी निकली थी उनकी उपासना अंगिरस और प्रत्यांगिरस ऋषियों ने की और तब वह प्रत्यंगिरा कहलाई |इन्हें ही भद्रकाली भी कहा जाता है |प्रत्यंगिरा विद्या की सबसे बड़ी विशेषता यह है की यदि इसके साधक पर किसी भी शत्रु द्वारा भयंकरतम अभिचार प्रयोग किया गया हो तो यह विद्या उसे नष्ट कर डालती है |विपरीत प्रत्यंगिरा के रूप में यह विद्या शत्रु द्वारा संपादित अभिचार कर्म को दोगुने वेग से प्रयोगकर्ता पर ही वापिस लौटा देती है और वह यदि न सम्भाल पाया तो खुद नष्ट हो जाता है |भगवती प्रत्यंगिरा अपने साधक को समस्त सौभाग्य प्रदान करती है |तुष्टि और पुष्टि प्रदान करती है |भयंकर तूफानों में ,राजद्वार में ,अरिष्ट ग्रहों के अशांत होने पर ,महाविपत्तियों के उपस्थित होने पर ,किसी भी प्रकार के महाभय के उपस्थित होने पर ,दुर्भिक्ष में ,घने जंगलों में ,शत्रु से घिरे होने पर वह अपने साधक की सभी प्रकार से रक्षा करते हुए उसे अभय प्रदान करती है |सबसे बड़ी विशेषता यह की इनके साधक के शत्रु स्वयमेव नष्ट हो जाते हैं |

               प्रत्यंगिरा यन्त्र माता प्रत्यंगिरा का निवास माना जाता है जिसमे वह अपने अंग विद्याओ ,शक्तियों ,देवों के साथ निवास करती है ,अतः यन्त्र के साथ इन सबका जुड़ाव और सानिध्य प्राप्त होता है ,|प्रत्यंगिरा यन्त्र के अनेक उपयोग है ,यह धातु अथवा भोजपत्र पर बना हो सकता है ,पूजन में धातु के यन्त्र का ही अधिकतर उपयोग होता है ,पर सिद्ध व्यक्ति से प्राप्त भोजपत्र पर निर्मित यन्त्र बेहद प्रभावकारी होता है ,,धारण हेतु भोजपत्र के यन्त्र को धातु के खोल में बंदकर उपयोग करते है ,,जब व्यक्ति स्वयं साधना करने में सक्षम न हो तो यन्त्र धारण मात्र से उसे समस्त लाभ प्राप्त हो सकते है ,..

              भगवती प्रत्यंगिरा की यदि कृपा हो जाय तो व्यक्ति की सार्वभौम उन्नति होती है ,शत्रु पराजित होते है ,सर्वत्र विजय मिलती है ,मुकदमो में विजय मिलती है ,अधिकारी वर्ग की अनुकूलता प्राप्त होती है ,शत्रु का विनाश होने लगता है ,व्यक्ति के आभामंडल में परिवर्तन होने से लोग आकर्षित होते है ,प्रभावशालिता बढ़ जाती है ,वायव्य बाधाओं से सुरक्षा होती है ,तांत्रिक क्रियाओं के प्रभाव समाप्त हो जाते है ,वाद-विवाद में सफलता मिलती है ,प्रतियोगिता आदि में सफलता बढ़ जाती है |किसी भी अभिचार का प्रभाव कम हो जाता है |टोने -टोटके -नजर दोष प्रभावित नहीं कर पाती |वायव्य आत्माओं और बाधाओं का शरीर पर प्रभाव कम हो जाता है अथवा समाप्त हो जाता है ,,यह समस्त प्रभाव यन्त्र धारण से भी प्राप्त होते है |जो लोग शत्रु-विरोधी से परेशान है ,अधिकारी वर्ग से परेशान है ,वायवीय बाधाओं से परेशान हो ,नवग्रह पीड़ा से पीड़ित हो ,,जिनके कार्य क्षेत्र में खतरे की संभावना हो ,दुर्घटना की संभावना अधिक हो |स्थायित्व का अभाव हो ,बार बार स्थानान्तरण से परेशान हों ,जिन्हें बहुत लोगों को नियंत्रित करना हो उनके लिए यह बहुत उपयोगी है |जो लोग बार-बार रोगादि से परेशान हो ,असाध्य और लंबी बीमारी से पीड़ित हो अथवा बीमारी हो किन्तु स्पष्ट कारण न पता हो ,पूर्णिमा -अमावस्या को डिप्रेसन अथवा मन का विचलन होता हो उन्हें प्रत्यंगिरा यन्त्र धारण करना चाहिए |

               जिन्हें हमेशा बुरा होने की आशंका बनी रहती हो ,खुद अथवा परिवार के अनिष्ट की सम्भावना लगती हो ,अकेले में भय लगता हो अथवा बुरे स्वप्न आते हों ,कभी महसूस हो की कमरे में अथवा साथ में उनके अलावा भी कोई और है किन्तु कोई नजर न आये |कभी लगे कोई छू रहा है अथवा पीड़ित कर रहा है ,कभी कोई आभासी व्यक्ति दिखे अथवा आत्मा परेशान करे |कभी अर्ध स्वप्न में कोई छाती पर बैठ जाए ,लगे कोई गला दबा रहा है |किसी के साथ कोई शारीरिक सम्बन्ध बनाये किन्तु वह दिखाई न दे अथवा स्वप्न या निद्रा में ऐसा हो |बार -बार स्वप्न में कोई स्त्री -पुरुष दिखे जिससे दिक्कत महसूस हो |आय के स्रोतों में उतार-चढ़ाव से परेशान हो ,ऐसा लगता हो की किसी ने कोई अभिचार किया हो सकता है या लगे की कोई अपना या बाहरी अनिष्ट चाहता है तो ऐसे व्यक्तियों को भगवती प्रत्यंगिरा की साधना -आराधना-पूजा करनी चाहिए साथ ही सिद्ध साधक से बनवाकर काली यंत्र चांदी के ताबीज में धारण करना चाहिए |यदि साधना उपासना न कर सकें तो भी कवच अवश्य पहनना चाहिए |

                यन्त्र निर्माण प्रत्यंगिरा साधक द्वारा ही हो सकता है और इसकी शक्ति साधक की शक्ति पर निर्भर करती है |यन्त्र निर्माण के बाद इसकी तंत्रोक्त प्राण प्रतिष्ठा आवश्यक होती है क्योंकि प्रत्यंगिरा तंत्र की शक्ति हैं |इसके बाद इसका अभिमन्त्रण प्रत्यंगिरा के मूल मंत्र से होता है |अभिमन्त्रण बाद हवन आवश्यक होता है |हवन के बाद इसी हवन के धुएं में चांदी के कवच में यन्त्र को भरकर धूपित भी किया जाता है| यहाँ साधक विशेष की जानकारी के अनुसार कवच में भगवती काली की ऊर्जा से सम्बन्धित वस्तुएं भी भरी जाती हैं चूंकि यह काली की ही स्वरुप हैं -जैसे हम विशिष्ट जड़ी -बूटियाँ जो हमारे काली अनुष्ठान के समय अभिमंत्रित होती हैं इनमे यन्त्र के साथ रखते हैं ,हवन भष्म इसमें रखते हैं आदि |यह यन्त्र यदि पूर्ण अभिमंत्रित है तो बेहद शक्तिशाली हो जाता है |इसका परीक्षण उच्च स्तर का साधक कर सकता है अथवा जिन्हें भूत -प्रेत जैसी कोई समस्या हो उसके हाथ में रखते ही इसका प्रभाव मालूम होने लगता है | यन्त्र /कवच का निर्माण मात्र प्रत्यंगिरा का सिद्ध साधक ही कर सकता है यन्त्र निर्माण में तंत्रोक्त पद्धति का ही प्रयोग होता है ,सामान्य कर्मकांडी अथवा साधक इसे नहीं बना सकता ,न ही किसी अन्य महाविद्या अथवा देवी -देवता का साधक इसे निर्मित कर सकता है |

    इनका मन्त्र इस प्रकार है –

    यन्त्र /कवच धारण से लाभ

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    १. भगवती प्रत्यंगिरा की कृपा से व्यक्ति की सार्वभौम उन्नति होती है |शत्रु पराजित होते है ,शत्रु की बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है ,उसका स्वयं विनाश होने लगता है |शत्रु क्रमशः नष्ट होते जाते हैं |

    ३. ,मुकदमो में विजय मिलती है ,वाद विवाद में सफलता मिलती है |सर्वत्र विजय का मार्ग प्रशस्त होता है |

    ४.कार्य क्षेत्र में कर्मचारी वर्ग की अनुकूलता प्राप्त होती है ,व्यक्तित्व का प्रभाव बढ़ता है |सम्मान प्राप्त होता है ,| आभामंडल की नकारात्मकता समाप्त होती हैं |शरीर का तेज बढ़ता है |

    ५. मानसिक चिंता ,विचलन ,डिप्रेसन से बचाव होता है और राहत मिलती है |,पूर्णिमा -अमावस्या के मानसिक विचलन में कमी आती है |

    ६.किसी अभिचार /तंत्र क्रिया द्वारा अथवा किसी आत्मा आदि द्वारा शरीर को कष्ट मिलने से बचाव होता है |यदि साथ में मंत्र जप भी इनका करें तो किया कराया ,टोना टोटका ,तांत्रिक अभिचार ,मारण ,मोहन ,उच्चाटन ,वशीकरण ,कृत्या ,मूठ आदि कोई भी क्रिया उसी व्यक्ति को दुगने वेग से वापस होकर मारती है जिसने इन्हें किया होता है |

    ७. पारिवारिक सुख ,दाम्पत्य सुख बढ़ जाता है | नौकरी ,व्यवसाय ,कार्य में स्थायित्व प्राप्त होता है | व्यक्ति के आभामंडल में परिवर्तन होने से लोग आकर्षित होते है ,प्रभावशालिता बढ़ जाती है |

    ८. कोई भी तांत्रिक क्रिया ,अभिचार ,टोना -टोटका ,कृत्या ,मूठ अथवा कितना भी भयंकर किया कराया हो सब नष्ट हो जाता है धीरे धीरे यदि पहले से हुआ है ,और यदि भविष्य में होता है तो उससे सुरक्षा कवच प्रदान करता है |

    ९.,वायव्य बाधाओं से सुरक्षा होती है ,पहले से कोई प्रभाव हो तो क्रमशः धीरे धीरे समाप्त हो जाती है |,तांत्रिक क्रियाओं के प्रभाव समाप्त हो जाते है ,भविष्य की किसी संभावित क्रिया से सुरक्षा मिलती है |किये -कराये -टोने -टोटके की शक्ति क्रमशः क्षीण होते हुए समाप्त होती है |

    १०. कोई भी संकट हो ,विपत्ति हो ,आपदा हो ,भय हो हर क्षेत्र में सुरक्षा प्राप्त होती है ,विजय का मार्ग प्रशस्त होता है |शत्रु कितना भी प्रबल हो विजय साधक और धारक की ही होती है |

    ११. ,परीक्षा ,प्रतियोगिता आदि में सफलता बढ़ जाती है |हीन भावना में कमी आती है ,खुद पर विश्वास बढ़ता है |एकाग्रता बढती है तथा उत्साह ,ऊर्जा में वृद्धि होती है |

    १२. भूत-प्रेत-वायव्य बाधा की शक्ति क्षीण होती है ,क्योकि इसमें से निकलने वाली सकारात्मक तरंगे उनके नकारात्मक ऊर्जा का ह्रास करते हैं और उन्हें कष्ट होता है |,उग्र देवी होने से नकारात्मक शक्तियां इनसे दूर भागती हैं और धारक के पास आने से कतराती हैं |किसी वायव्य बाधा का प्रभाव शरीर पर कम हो जाता है |

    १४. मांगलिक ,पारिवारिक कार्यों में आ रही रुकावट दूर होती है |ग्रह बाधाओं का प्रभाव कम होता है |शनि -राहू -केतु के दुष्प्रभाव की शक्ति क्षीण होती है |

    १५. यदि बंधन आदि के कारण संतानहीनता है तो बंधन समाप्त होता है |

    १८. किसी भी व्यक्ति के सामने जाने पर सामने वाला प्रभावित हो बात मानता है और उसका विरोध क्षीण होता है |,पारिवारिक कलह ,विवाद कम हो जाता है तथा लोगों पर आकर्षक शक्तियुक्त प्रभाव पड़ता है |

    १९. घर -परिवार में स्थित नकारात्मक ऊर्जा की शक्ति क्षीण होती है जिससे उसका प्रभाव कम होने लगता है |पारिवारिक सौमनस्य में वृद्धि होती है |

    २१. स्थान दोष ,मकान दोष ,पित्र दोष ,वास्तु दोष का प्रभाव व्यक्ति पर से कम हो जाता है क्योकि अतिरिक्त ऊर्जा का संचार होने लगता है उसमे |

                    यह समस्त प्रभाव यन्त्र धारण से प्राप्त होते है |,यन्त्र में उसे बनाने वाले साधक का मानसिक बल ,उसकी शक्ति से अवतरित और प्रतिष्ठित भगवती की पारलौकिक शक्ति होती है जो वह सम्पूर्ण प्रभाव प्रदान करती है , धारणीय यन्त्र का यदि उपयुक्त लाभ प्राप्त करना हो तो ,कम से कम २१ हजार मूल मन्त्रों से अभिमन्त्रण और उपयुक्त मुहूर्त में विधिवत तांत्रिक विधि से प्राण प्रतिष्ठा होना आवश्यक है, अन्यथा मात्र रेखाएं खींचने से कुछ नहीं होने वाला ,जबतक की उन रेखाओं में भगवती को प्रतिष्ठित न किया जाए और उपयुक्त शक्ति न प्रदान की जाए |………..हर-हर महादेव

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  • शनि कष्ट रक्षा कवच

    शनि कष्ट रक्षा कवच

    ::::शनि दोष निवारक कवच ::::

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               इस दुनिया में प्रत्येक पांच में से एक व्यक्ति शनि के दुष्प्रभावों अथवा कुप्रभावों से अत्यधिक परेशान है |शनि की पनौती ,ढईया ,अथवा साढ़ेसाती अक्सर सुनाई देते रहते हैं |इनके अतिरिक्त अक्सर महादशा ,अन्तर्दशा अथवा प्रत्यन्तरदशा अलग से परेशान करती रहती है |यही कारण है की शनि को कुंडली में सबसे कष्टकारक ग्रह माना जाता है ,यद्यपि यह कभी शुभ भी होता है किन्तु अधिकतर कष्ट ही पाते हैं |इसके दुष्प्रभावों का प्रभाव इसके मित्रों राहू- केतु को और भी खतरनाक बना देता है जिन्हें इससे बल मिल जाता है |अर्थात एक शनि अनेक कष्टों का कारण बन जाता है |इसके दुष्प्रभाव के कारण सभी कार्यों में बाधा ,शत्रुओं से परेशानी ,मुकदमो -विवादों में पराजय ,आर्थिक एवं शारीरिक कष्ट ,मानसिक क्लेश ,हड्डियों जोड़ों की समस्या ,पुत्रों- संतानों से कष्ट ,कलह ,आर्थिक तंगी ,कर्ज ,वायव्य बाधा ,बंधू -मित्र -नौकर -कर्मचारी -मजदूर वर्ग से समस्या उत्पन्न होती है |यह व्यक्ति को कंगाल और असहाय बना देता है ,व्यक्ति चाहकर भी कुछ नहीं कर पाता |

             शनि की शान्ति के हजारों उपाय वैदिक और तांत्रिक ग्रंथों में मिलते हैं |कुछ बड़े और अत्यंत कठिन हैं तो कुछ सामान्य के लिए दुरूह |शनि का तांत्रिक उपाय वास्तव में चमत्कारिक लाभ पहुचाता है अगर वास्तव में व्यक्ति जानकार है और उसे इससे सम्बंधित यंत्रों ,वनस्पतियों ,मन्त्रों ,की अच्छी जानकारी हो |विभिन्न वनस्पतियों ,यंत्रों ,मन्त्रों ,और तांत्रिक विधियों के संयोग से ऐसे प्रभावी कवच निर्मित किये जा सकते हैं जो उग्र शनि को शांत और अशुभ को शुभ कर दें | ऐसे में यदि शनि शान्ति के अचूक उपाय के रूप में तंत्रोक्त विधि से निर्मित “शनी दोष निवारक कवच “को अपने गले में धारण किया जाए तो चमत्कारिक लाभ देखने में आता है |शनी की ढईया ,साढ़ेसाती ,पनौती ,दशा-अन्तर्दशा एवं जन्मकुंडली में शनी के दुष्प्रभाव के नाश हेतु और जीवन में सफलताओं ,भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए कवच लाभदायक होता है ,क्योकि शनी को यदि शांत और प्रसन्न रखा जाए तो महा अशुभकारक ग्रह भी शुभद हो सकता है |

    इतना तो अवश्य होता है की इसके दुष्प्रभावों में कमी आते ही अन्य ग्रह जो अशुभता में इससे बल पा रहे उनके प्रभाव में परिवर्तन हो जाता है |शुभ ग्रहों के प्रभाव बढ़ जाते हैं और परिवर्तन दिखने लगता है |इस कवच को स्त्री अथवा पुरुष कोई भी धारण कर मनोवांछित लाभ प्राप्त कर सकता है |इस कवच में अनेक शनि की उर्जा से सम्बंधित वनस्पतियों ,शनि को प्रभावित करने वाली वनस्पतियों ,तांत्रिक जड़ी बूटियों ,पदार्थों के साथ विशेष योग में निर्मित,शनि के तंत्रोक्त मंत्र से अभिमंत्रित शनि यन्त्र का विशेष संयोग होता है जो शनी को शांत कर देता है ,उसके प्रभावों की दिशा बदल देता है |उसके अशुभ प्रकार की प्रकृति लाभदायक में बदलती है |फलतः व्यक्ति की स्थिति में परिवर्तन आ जाता है |यह बड़े बड़े अनुष्ठान और बड़े खर्चों से भी बचाता है |जो लोग शनि की महादशा ,अन्तर्दशा ,गोचर ,साढ़ेसाती ,ढईया से परेशान हैं या जिनकी जन्म कुंडली में शनि नीच का है ,खराब प्रभाव देने वाला है ,अशुभ भावों का स्वामी है ,जो शनि का मंत्र जप नहीं कर सकते ,जो बड़े पूजा पाठ का खर्च नहीं उठा सकते तो उन्हें यह शनि कवच अत्यंत लाभ देता है और उनके पास आजीवन शनि के दुष्प्रभाव को कम करने का एक अस्त्र उपलब्ध होता है |……………………………………………………………………..हर-हर महादेव

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  • श्यामा मातंगी महावशीकरण मंत्र /कवच

    श्यामा मातंगी महावशीकरण मंत्र /कवच

    श्यामा मातंगी यन्त्र /कवच और महावशीकरण मन्त्र

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    सभी के लिए उपयोगी

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                  मातंगी महाविद्या ,दस महाविद्या में से एक प्रमुख महाविद्या ,,वैदिक सरस्वती का तांत्रिक रूप हैं और श्री कुल के अंतर्गत पूजित हैं |यह सरस्वती ही हैं और वाणी ,संगीत ,ज्ञान ,विज्ञान ,सम्मोहन ,वशीकरण ,मोहन की अधिष्ठात्री हैं |त्रिपुरा ,काली और मातंगी का स्वरुप लगभग एक सा है |यद्यपि अन्य महाविद्याओं से भी वशीकरण ,मोहन ,आकर्षण के कर्म होते हैं और संभव हैं किन्तु इस क्षेत्र का आधिपत्य मातंगी [सरस्वती] को प्राप्त हैं |यह जितनी समग्रता ,पूर्णता ,निश्चितता से इस कार्य को कर सकती हैं कोई अन्य नहीं क्योकि सभी अन्य की अवधारणा अन्य विशिष्ट गुणों के साथ हुई है |उन्हें वशीकरण ,मोहन के कर्म हेतु अपने मूल गुण के साथ अलग कार्य करना होगा जबकि मातंगी वशीकरण ,मोहन की देवी ही हैं अतः यह आसानी से यह कार्य कर देती हैं |मातंगी के तीन विशिष्ट स्वरुप हैं श्यामा मातंगी ,राज मातंगी और वश्य मातंगी |श्यामा मातंगी स्वरुप मातंगी का उग्र स्वरुप है और वशीकरण ,मोहन, आकर्षण को तीब्रता से करता है |इनका मात्र अति विशिष्ट है ,जिसमे माया [देवी] ,सरस्वती [मातंगी ],लक्ष्मी ,त्रिपुरसुन्दरी[श्री विद्या]और काली के बीज मन्त्रों का विशिष्ट संयोग है जिससे मातंगी की मुख्यता के साथ इन सभी शक्तियों की शक्ति भी सम्मिलित होती है जिससे यह विद्या सब कुछ देने के साथ वशीकरण ,आकर्षण में निश्चित सफलता देती है |

            मातंगी ,या श्यामा मातंगी का मंत्र ,मातंगी साधक ही प्रदान कर सकता है ,अन्य किसी महाविद्या का साधक इनके मंत्र को प्रदान करने का अधिकारी नहीं है |स्वयं मंत्र लेकर जपने से महाविद्याओं के मंत्र सिद्ध नहीं होते ,अतः जब भी मंत्र लिया जाए मातंगी साधक से ही लिया जाए ,यद्यापि मातंगी साधक खोजे नहीं मिलते जबकि अन्य महाविद्या के साधक मिल जाते हैं |हम अपने इस अलौकिक शक्तिया चैनल पर अनेक देवी देवताओं ,शक्तियों के कवच -ताबीज -यन्त्र के बारे में जानकारी प्रकाशित कर रहे हैं की कौन सा यन्त्र किस उद्देश्य के लिए प्रभावी होता है ,वह कैसे कार्य करता है जिससे हमारे अलौकिक शक्तिया चैनल के दर्शक लाभान्वित हो सकें |

               इनके मंत्र और यंत्र का उपयोग अधिकतर प्रवचनकर्ता ,धर्म गुरु ,tantra गुरु ,लेखक ,गायक ,संगीतकार ,कलाकार ,बौद्धिक लोग करते हैं जिन्हें समाज-भीड़-लोगों के समूह का नेतृत्व अथवा सामन करना होता है ,ज्ञान विज्ञानं की जानकारी चाहिए होती है |मातंगि के शक्ति से इनमे सम्मोहन -वशीकरण की शक्ति होती है |मातंगी का यन्त्र इसमें अतिरिक्त ऊर्जा का कार्य करता है जिसे मातंगी साधक निर्मित करता है भोजपत्र पर |मातंगी का यन्त्र बाजार में धातु का मिल जाता है किन्तु श्यामा मातंगी का मिलना मुश्किल होता है |धातु के यन्त्र की प्रभावित भी संदिग्ध होती है जबकि मातंगी साधक द्वारा निर्मित श्यामा मातंगी के यन्त्र में साधक की शक्ति ,मुहूर्त की शक्ति ,भोजपत्र की पवित्रता ,अष्टगंध की विशिष्टता ,मंत्र की शक्ति ,प्राण प्रतिष्ठा की शक्ति सम्मिलित होती है जिससे यह यन्त्र निश्चित प्रभावकारी हो जाता है |धारण करने पर इससे उत्पन्न विशिष्ट तरंगे व्यक्ति और वातावरण को प्रभावित करती हैं जिससे खुद व्यक्ति में भी परिवर्तन आता है और आसपास के लोग भी प्रभावित होते हैं |इसके वाशिकारक प्रभाव में संपर्क में आने वाले लोग बांध जाते हैं |यद्यपि यन्त्र किसी विशिष्ट व्यक्ति के लिए भी बनाया जा सकता है किन्तु व्यक्ति केन्द्रित न रखा जाए तो यह सब पर प्रभाव डालता है |

    श्यामा मातंगी का मंत्र इस प्रकार होता है – ऐं ह्रीं श्रीं ऐं क्लीं सौ: ऐं ॐ नमो भगवती श्री मातंगीश्वरी सर्वजन मनोहारी सर्वमुखरंजिनी क्लीं ह्रीं श्रीं सर्वराज वशंकरी सर्वस्त्रीपुरुष वशंकरी सर्वदुष्टमृग वशंकरी सर्वसत्व वशंकरी सर्वलोक वशंकरी त्रैलोक्यं में वशमानय स्वाहा |

                   श्यामा मातंगी का मंत्र और यन्त्र प्रकृति की सभी शक्तियों में सर्वाधिक शक्तिशाली वाशिकारक और मोहक प्रभाव रखता है क्योकि यह इसी की शक्ति हैं ही |यद्यपि इनका यन्त्र काफी महंगा पड़ जाता है ,जबकि अन्य वशीकरण के यन्त्र बाजार में बहुत सस्ते मिल जाते हैं ,यह अलग है की अन्य भले असफल हो जाए इनका यन्त्र प्रभाव जरुर देता है |उदाहरण के लिए ,श्यामा मातंगी का मंत्र केवल इनका साधक ही जप सकता है और वाही अभिमंत्रित कर सकता है यन्त्र को जबकि अगर वह दिन में १० घंटे लगातार जप करे तो भी तीन हजार मंत्र से अधिक जप नहीं कर सकता ,कारण मंत्र बड़ा और क्लिष्ट होता है |ऐसे में यन्त्र को २१ हजार अभिमंत्रित करने के लिए कम से कम ७ दिन चाहिए ,पूजा प्राण प्रतिष्ठा और बाद में हवन के लिए दो दिन अतिरिक्त चाहिए अर्थात ९ दिन लगेंगे एक यन्त्र बनाने में, यदि वास्तविक प्रभाव लानी है ,क्योकि बहुत कम अभिमन्त्रण अपेक्षित परिणाम नहीं देगा |इस तरह सबके लिए तो नहीं किन्तु जरूरतमंद के लिए यह यन्त्र लाभदायक होता है |

    श्यामा मातंगी यन्त्र का प्रभाव और उपयोग

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    १. यन्त्र धारण करने से वशीकरण की शक्ति बढती है |व्यक्तित्व का प्रभाव बढ़ता है |

    २. अधिकारी वर्ग को अपने कर्मचारियों पर नियंत्रण और उन्हें वशीभूत रखने में आसानी होती है |

    ३.कर्मचारी को अपने अधिकारियों को अनुकूल रखने में मदद मिलती है |

    ४.पति को पत्नी की और पत्नी को पति की अनुकूलता अपने आप प्राप्त होती है और धारण करने वाले का पति या पत्नी वशीभूत होता है |

    ५.सेल्स ,मार्केटिंग ,पब्लिक रिलेसन का कार्य करने वालों को लोगों का अपेक्षित सहयोग मिलता है |

    ६.व्यवसायी को ग्राहकों की अनुकूलता मिलती है और अपरोक्त उन्नति में सहायत मिलती है |

    ७.रुष्ट परिवार वालों को इससे अनुकूल करने में मदद मिलती है |

    ८.वाद-विवाद ,मुकदमे ,बहस ,समूह वार्तालाप ,आपसी बातचीत में सामने वाले की अनुकूलता प्राप्त होती है |

    ९. चूंकि यह महाविद्या यन्त्र है और काली की शक्ति से संयुक्त है अतः नकारात्मक ऊर्जा दूर करता है |

    १०. किसी पर पहले से कोई वशीकरण की क्रिया है तो यन्त्र भरे हुए चांदी कवच को सुबह शाम कुछ दिन एक गिलास जल में डुबोकर वह जल व्यक्ति को पिलाने से वशीकरण का प्रभाव उतरता है |

    ११.किसी भी तरह के इंटरव्यू में परीक्षक पर सकारात्मक प्रभाव देता है |

    १२. व्यक्ति विशेष के लिए बनाया गया यन्त्र धारण और मंत्र जप निश्चित रूप से सम्बंधित व्यक्ति को वशीभूत करता है |

    १३.दाम्पत्य कलह ,पारिवारिक कलह ,मनमुटाव ,विरोध में लोगों को प्रभावित करता है और व्यक्ति के अनुकूल करता है |

    १४.सामाजिक संपर्क रखने वालों को लोगों की अनुकूलता प्राप्त होती है |

    १५.ज्ञान-विज्ञानं-अन्वेषण-परीक्षा-प्रतियोगिता ,प्रवचन ,भाषण से समबन्धित लोगों को सफल होने में मदद करता है |

                   इस प्रकार ऐसा कोई क्षेत्र लगभग नहीं जहाँ इस यन्त्र से लाभ न मिलता हो क्योकि लोगों की अनुकूलता की जरुरत सबको होती है और लोग या व्यक्ति प्रभावित हो अनुकूल हों ,वशीभूत हों तो व्यक्ति को लाभ अवश्य होता है |अतः श्यामा मातंगी साधक द्वारा बनाया गया श्यामा मातंगी यन्त्र ,अन्य किसी यन्त्र से अधिक लाभकारी होता है |श्यामा मातंगी यन्त्र धारण से सर्वजन आकर्षण और वशीकरण होता जिससे सभी मिलने और संपर्क में आने वालों पर प्रभाव पड़ता है |किसी एक ही व्यक्ति को आकर्षित वशीभूत करने के लिए उस व्यक्ति के नाम से विशेष तौर पर इसे अभिमंत्रित करना होता है तब यह केवल उस व्यक्ति पर ही प्रभाव डालता है |इसके धारण से एक बड़ा लाभ यह है की व्यक्ति को खुद कुछ नहीं करना होता और जो भी प्रभाव होता है वह ताबीज के धारण से होता है |इससे व्यक्ति के स्वभाव ,चाल ढाल ,बातचीत के ढंग में और उसके आभामंडल अर्थात औरा में परिवर्तन आने से वह लोगों को आकर्षित और अनुकूल करने लगता है |………………………………………………………………..हर-हर महादेव

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  • भोजपत्र यन्त्र विशेष क्यों ?

    भोजपत्र यन्त्र विशेष क्यों ?

    क्यों अधिक प्रभावी होता है भोजपत्र निर्मित यन्त्र धारण करना ?

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             विभिन्न धर्मो ,समुदायों में यन्त्र रचना और धारण प्राचीन काल से चला आ रहा है ,यन्त्र विभिन्न आकृतियों अथवा अंको के एक विशिष्ट संयोजन होते है ,जिनसे एक विशिष्ट उर्जा विकिरित होती है अथवा जिनमे एक विशिष्ट उर्जा संग्रहीत होती है ,जो धारक को विशिष्ट रूप से प्रभावित करती है ,यंत्रो को देवी देवताओ का निवास भी माना जाता है ,यह आंकिक भी होते है अथवा न समझ में आने वाली आकृतियों के भी ,फिर भी इनके विशिष्ट अर्थ होते है ,यंत्रो की पूजा भी की जाती है और धारण भी किया जाता है ,अथवा अन्य रूप से भी उपयोग किया जाता है ,

                 यंत्रो का निर्माण वुभिन्न सामग्रियों ,वस्तुओ पर होता है ,कागज़,भोजपत्र ,धातु ,पत्थर ,कपडे आदि पर भी ,,हिन्दू परम्परा के अनुसार भोजपत्र को परम पवित्र माना जाता है ,अन्य माध्यमो की अपेक्षा भोजपत्र पर निर्मित यन्त्र को प्रमुखता दी जाती है क्योकि इसके साथ कई विशिष्टताये जुड़ जाती है ,जो अन्य माध्यमो में कुछ कम पायी जाती है ,

                 भोजपत्र स्वयं एक सकारात्मक उर्जा आकर्षित करने वाला माध्यम होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर करता है ,इस पर यन्त्र निर्माण में प्रयुक्त होने वाले अष्टगंध अथवा पंचगंध  की अपनी अलग विशेषता होती है  ,इनमे गोरोचन आदि प्रयुक्त होने वाले पदार्थ नकारात्मक शक्तियों को दूर कर सकारात्मकता को आकर्षित करते है ,यन्त्र निर्माण के समय साधक की विशिष्टता ,उसकी एकाग्रता ,आत्मबल ,उसके हाथो से निकलने वाली तरंगे ,उसकी अपनी सिद्धिया /शक्तिया यन्त्र को अलग बल प्रदान करती है ,निर्माणोंपरांत यन्त्र की प्राण प्रतिष्ठा और उस पर सम्बंधित इष्ट का जप इसे बहुत विशेष बना देता है,यन्त्र निर्माण हेतु निर्दिष्ट और चयनित मुहूर्तो का अपना अलग प्रभाव होता है  ,इसे विशिष्ट साधक ही बना और प्राण प्रतिष्ठित कर सकता है ,जिसके पास सम्बंधित विषय की क्षमता हो ,,इस प्रकार बना यन्त्र धारक पर  शीघ्र और सकारात्मक प्रभाव डालता है ,यन्त्र से उत्सर्जित होने वाली तरंगे व्यक्ति और आसपास के वातावरण को प्रभावित करती है जिससे परिवर्तन होते है और व्यक्ति लाभान्वित होता है|उपरोक्त कोई भी लाभ धातु के यंत्रों में जो की फैक्टरियों में बनते हैं ,उनसे नहीं मिलते |यही कारण है की अक्सर साधक ,तंत्र जानकार ,इन विद्याओं की समझ रखने वाले भोजपत्र पर बने यंत्रों को ही प्राथमिकता देते हैं जिनसे बनाने वाले साधक की शक्ति भी सीधे जुडी होती है |धातु के यन्त्र पूजन हेतु और भोजपत्र के यन्त्र धारण हेतु तंत्र जानकार उपयोग करते हैं | ……………………………………………………………………हर-हर महादेव 

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  • ताबीज भाग्य बदल सकता है

    ताबीज भाग्य बदल सकता है

    :::::::::::::एक ताबीज आपकी किस्मत पलट सकता है::::::::::::::

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             यन्त्र -मंत्र ,कवच ,ताबीज ,विभिन्न आकृतियाँ ,धार्मिक चिन्ह ,लाकेट ,प्रतीक विश्व के  हर धर्म में किसी न किसी रूप में मान्य हैं और बहुतायत में इनका प्रयोग होता है |इनकी शक्ति से मनुष्य हमेशा से लाभान्वित होता रहा है |भारतीय परंपरा में इनके विलक्ष्ण प्रयोग और लाभ मिलते रहे हैं |यह व्यक्ति के हर समस्या का समाधान करने में सक्षम हैं और इनपर भारतीय मनीषियों ने बहुत शोध किये हैं |व्यक्ति अधिकतम कैसे सुखी हो सकता है ,कैसे उसके कष्ट कम किये जा सकते हैं जिससे वह अधिक से अधिक सुखी रहते हुए अपना लक्ष्य प्राप्त कर सके |इन्ही आधारों में दैवीय यन्त्र और कवच -ताबीज भी हैं |विभिन्न आकृतियों और निश्चित आकारों में निश्चित ऊर्जा होती है और विभिन्न शब्दों में भिन्न शक्तियाँ |इनके प्रयोग से विशिष्ट ऊर्जा उत्पन्न कर उसका प्रयोग विभिन्न लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए करना ही इनका मूल उद्देश्य होता है |इनसे भौतिक ही नहीं आध्यात्मिक लक्ष्य भी प्राप्त किये जाते हैं |यह व्यक्ति को उसके भाग्य प्राप्ति में आ रही रुकावटों को हटाते हैं और नयी उरा प्रदान करते हैं |उच्च स्तर का साधक यदि इन्हें निर्मित कर दे तो वह भाग्य में भी हस्तक्षेप कर देता है |न साधकों -सिद्धों की शक्तियों की कोई सीमा रही है न इन कवच -ताबीजों की | 

                ताबीज आदि के निर्माण में एक वृहद् ऊर्जा वज्ञान काम करता है ,जिसे प्रकृति का विज्ञानं कहा जाता है |यह मूल ब्रह्मांडीय विज्ञान है जिसे हमारे ऋषि मुनि जानते थे और मानव की भलाई के लिए इसे उपयोगी बनाया |एक विशिष्ट क्रिया ,विशिष्ट पद्धति और विशिष्ट समय में विशिष्ट वस्तुओं के संयोग से विशिष्ट व्यक्ति द्वारा निर्मित ताबीज और यंत्र में एक विशिष्ट शक्ति का समावेश हो जाता है ,जो किसी भी सामान्य व्यक्ति को चमत्कारिक रूप से प्रभावित करती है जिससे उसके कर्म ,स्वभाव ,सोच ,व्यवहार ,ग्रहों के प्रति संवेदनशीलता ,प्रारब्ध ,शारीरिक रासायनिक क्रिया सब कुछ प्रभावित होने लगता है ,जिससे उसके आगामी भविष्य पर प्रभाव पड़ता है |

                   ताबीज  में प्राणी के शरीर और प्रकृति की उर्जा संरचना ही कार्य करती है ,,इनका मुख्य आधार मानसिक शक्ति का केंद्रीकरण और भावना के साथ विशिष्ट वस्तुओं-पदार्थों-समय का तालमेल होता है| ,,,,प्रकृति में उपस्थित वनस्पतियों और जन्तुओ में एक उर्जा परिपथ कार्य करता है ,मृत्यु के बाद भी इनमे तरंगे कार्य करती है और निकलती रहती हैं ,,,,इनमे विभिन्न तरंगे स्वीकार की जाती है और निष्कासित की जाती है |जब किसी वस्तु या पदार्थ पर मानसिक शक्ति और भावना को केंद्रीकृत करके विशिष्ट क्रिया की जाती है तो उस पदार्थ से तरंगों का उत्सर्जन होने लगता है ,,,,जिस भावना से उनका प्रयोग जिसके लिए किया जाता है ,वह इच्छित स्थान पर वैसा कार्य करने लगता है ,|

    उदहारण के लिए ,,,किसी व्यक्ति को व्यापार वृद्धि के लिए कुछ बनाना है ,तो इसके लिए इससे सम्बंधित वस्तुएं अथवा यन्त्र विशिष्ट समय में विशिष्ट तरीके से निकालकार अथवा निर्मित करके जब कोई उच्च स्तर का साधक अपने मानसिक शक्ति के द्वारा उच्च शक्तियों के आह्वान के साथ जब प्राण प्रतिष्ठा और अभिमन्त्रण करता है तो वस्तुगत उर्जा -यंत्रागत उर्जा के साथ साधक की मानसिक और आध्यात्मिक ऊर्जा का ऐसा अद्भुत संयोग बनता है की निर्मित ताबीज से तीब्र तरंगें निकालने लगती हैं ,इन्हें जब सम्बंधित धारक को धारण कराया जाता है तो यह ताबीज उसके व्यापारिक चक्र [लक्ष्मी या संमृद्धि के लिए उत्तरदाई ] को स्पंदित करने लगता है ,दैवीय प्रकृति की शक्ति आकर्षित हो धारक से जुड़ने लगती है और उसकी सहायता करने लगती है ,अनावश्यक विघ्न बाधाएं हटाने लगती है ,साथ ही मन और मष्तिष्क  भी प्रभावित होने लगता है ,जिससे उसके निर्णय लेने की क्षमता ,शारीरिक कार्यप्रणाली ,दैनिक क्रिया कलाप बदल जाते है ,उसके प्रभा मंडल पर एक विशेष प्रभाव पड़ता है ,जिससे उसकी आकर्षण शक्ति बढ़ जाती है ,बात-चीत का ढंग बदल जाता है ,सोचने की दिशा परिवर्तित हो जाती है ,कर्म बदलते हैं ,,प्रकृति और वातावरण में एक सकारात्मक बदलाव आता है और व्यक्ति को लाभ होने लगता है,, |

    यह एक उदाहरण है ,ऐसा ही हर प्रकार के व्यक्ति के लिए हो सकता है उसकी जरुरत और कार्य के अनुसार ,|यहाँ यह अवश्य ध्यान देने योग्य होता है की यह सब तभी संभव होता है जब वास्तव में साधक उच्च स्तर का हो ,उसके द्वारा निर्मित ताबीज खुद उसके हाथ द्वारा निर्मित हो ,सही समय और सही वस्तुओं से समस्त निर्माण हो ,|ऐसा न होने पर अपेक्षित लाभ नहीं हो पाता| ताबीज और यन्त्र तो बाजार में भी मिलते है और आजकल तो इनकी फैक्टरियां सी लगी हैं ,जो प्रचार के बल पर बेचीं जा रही हैं ,कितना लाभ किसको होता है यह तो धारक ही जानता है |

           ताबीज बनाने वाले साधक की शक्ति बहुत मायने इसलिए रखती है की  जब वह अपने ईष्ट में सचमुच डूबता है तो वह अपने ईष्ट के अनुसार भाव को प्राप्त होता है ,,भाव गहन है तो मानसिक शक्ति एकाग्र होती है ,जिससे वह शक्तिशाली होती है ,यह शक्तिशाली हुई तो उसके उर्जा परिपथ का आंतरिक तंत्र शक्तिशाली होता है और शक्तिशाली तरंगे उत्सर्जित करता है |ऐसा व्यक्ति यदि किसी विशेष समय,ऋतू-मॉस में विशेष तरीके से ,विशेष पदार्थो को लेकर अपनी मानसिक शक्ति और मन्त्र से उसे सिद्ध करता है तो वह ताबीज धारक व्यक्ति को अच्छे-बुरे भाव की तरंगों से लिप्त कर देता है |यह समस्त क्रिया शारीर के उर्जा चक्र को प्रभावित करती है और तदनुसार व्यक्ति को उनका प्रभाव दिखाई देता है| यह ताबीजें इतनी शक्तिशाली होती हैं की व्यक्ति का प्रारब्ध तक प्रभावित होने लगता है |अचानक आश्चर्यजनक परिवर्तन होने लगते हैं |

                आपने अनेक कहानियाँ सुनी होंगी की अमुक चीज अमुक साधू ने दिया और ऐसा हो गया |अथवा यह सुना होगा की अमुक तांत्रिक ने अमुक छीजें कुछ बुदबुदाकर फेंकी व्यक्ति को लाभ हो हया |यह बहुत छोटे उदाहरण हैं |जिस तरह साधना से ईश्वरीय ऊर्जा आती है उसी तरह यह मानसिक एकाग्रता से वस्तु और यन्त्र में स्थापित भी होती है |तभी तो मूर्तियाँ और यन्त्र प्रभावी होते हैं |यही यन्त्र ताबीजों में भरे जाते हैं और प्रभाव देते हैं |यह किसी  यन्त्र विशेष का प्रचार नहीं अपितु वैज्ञानिक विश्लेष्ण का प्रयास है और हमने इसे बहुत सत्य पाया है |यही कारण है की हम अपने सभी अनुष्ठानों में भोजपत्र पर यंत्र अवश्य बनाते हैं और साधना समाप्ति पर उन्हें धारण करते भी हैं और कराते भी हैं |यह धारण मात्र से साधना जैसा प्रभाव देते हैं |यह जानकारी हमारे पेज के पाठकों के लिए |

               आजकल एक चलन फैशन सा हो गया है की ज्योतिषियों -साधकों -तांत्रिकों द्वारा लिखे जा रहे लेखों -पोस्टो पर भद्दे और मूर्खतापूर्ण टिपण्णी आते हैं |कभी कहा जाता है की इनमे इतनी शक्ति है तो अपना भाग्य क्यों नहीं बदल लेते ,कभी कहा जाता है की ज्योतिषी अपना भाग्य क्यों नहीं सुधार लेता |क्यों यह लोग फेसबुक ,इंटरनेट पर लिखते फिर रहे हैं |किसी ताबीज ,यन्त्र ,कवच ,डिब्बी ,गुटिका आदि के लेख को प्रचार से जोड़ा आता है ,भले उसमे वैज्ञानिक सूत्र हों |ऐसे लोगों को हम जबाब देना चाहेंगे कि एक सामान्य व्यक्ति ,सामान्य साधक ,सामान्य ज्योतिषी को उसके भाग्य से अधिक नहीं मिल सकता जबकि सामान्य जीवन में इतनी नकारात्मक उर्जाओं और शक्तियों का प्रभाव होता है की किसी को उसके भाग्यानुसार भी नहीं मिलता |लेख लिखने वाले को उसके भाग्यानुसार मिलता है किन्तु यह उसका कर्म है की वह लोगों को बताता है ,समझाता है |यदि वह यह न करे तो लोगों का भला ही न हो |यदि वह मात्र खुद के लिए सोचे तो करोड़ों इन विद्याओं के लाभ से वंचित रह जायेंगे |अक्सर ज्योतिषी के कथन गलत होते हैं और भाग्य अनुसार परिणाम नहीं आते|ज्योतिषी सही होता है किन्तु नकारात्मक उर्जाओं के प्रभाव से भाग्यावारोध होने से लोगों को उनके भाग्य के अनुरूप नहीं मिलता |यह कवच ,ताबीज ,यन्त्र ,डिब्बी ,गुटिका इसी नकारात्मक उर्जाओं ,शक्तियों को हटाते हैं और सकारात्मक उर्जाओं को बढ़ा देते हैं जिससे भाग्य का पूरा मिलने लगता है और बड़ा परिवर्तन महसूस होता है |………………………………………………………हर-हर महादेव

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  • चमत्कारी डिब्बी /गुटिका

    चमत्कारी डिब्बी /गुटिका

    चमत्कारी- दिव्य गुटिका /डिब्बी  

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    स्वयं अपनी समस्या दूर करने का एक अलौकिक अस्त्र

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                 आज के समय में हर घर -परिवार में किसी न किसी रूप में नकारात्मक शक्तियों /उर्जाओं का प्रभाव है जिसके कारण जो समस्याएं होती हैं वह तो होती ही हैं किन्तु जो भाग्य में होता है वह भी नहीं मिलता |भाग्य का प्रभाव भी नकारात्मक उर्जाओं द्वारा रोक दिया जाता है |बुरे प्रभाव बढ़ जाते हैं जबकि अच्छे परिणाम कम मिलते हैं |नकारात्मक ऊर्जा की प्रकृति कुलदेवता दोष की हो सकती है,पित्र दोष की हो सकती है ,किसी द्वारा किया गया टोना -टोटका -तांत्रिक अभिचार हो सकता है ,जमीन में दबी कोई वस्तु या हड्डी या कंकाल या राख आदि हो सकती है ,कहीं बाहर से आई कोई आत्मा या प्रेत हो सकता है |मकान में वास्तु दोष हो सकता है या राहू -केतु -शनी के दुष्प्रभाव हो सकते हैं |इनका निवारण जानने -उपाय करने के लिए लोग यहाँ वहां भटकते रहते हैं और प्रयास करने पर भी अपेक्षित परिणाम नहीं पाते |हम इन समस्याओं के निवारण का प्रयास तंत्र के माध्यम से अपनी जानकारी के अनुसार करने का प्रयत्न कर रहे हैं |हमने कुछ दुर्लभ वस्तुओं को संगृहीत कर इनकी काट निकाली है |इन वस्तुओं में विभिन्न दैवीय शक्तियाँ ,भिन्न भिन्न उर्जायें होती हैं जो तंत्र में हजारों वर्ष से उपयोग की जाती रही हैं |इन्हें इस प्रकार संयोजित किया गया है की यह एक साथ मिलकर ऐसा प्रभाव उत्पन्न करें की किसी की व्यक्तिगत समस्या से लेकर परिवार की सामूहिक समस्या तक का निवारण हो सके |

               उपरोक्त समस्याओं के अतिरिक्त सामान्यरूप से हर किसी की चाह होती है की लोग उनकी और आकर्षित हों ,देखकर खींचे चले आयें ,जो मिले प्रभावित हो ,जहाँ जाए किसी काम से वहां सफलता मिले ,कहीं किसी समस्या-परेशानी का सामना न करना पड़े |हर इंसान के अन्दर यह कामना होती है की उसका व्यक्तित्व ऐसा आकर्षक हो की लोग चुम्बक की तरह खिचे चले आये ,उसका व्यतित्व सम्मोहक हो |हर व्यक्ति पर उसका प्रभाव पड़े ,कार्य-व्यवसाय के क्षेत्र के लोग अनुकूल हों ,सफलता मिले ,उन्नति हो |यह असंभव नहीं है |यह संभव है तंत्र के माध्यम से |इस हेतु थोड़े से नियम और सावधानी के साथ यदि हमारे द्वारा निर्मित दिव्य गुटिका /डिब्बी का प्रयोग किया जाए |यह गुटिका तंत्र की उन दिव्य चमत्कारी वस्तुओं से परिपूर्ण हैं जो किसी के भी जीवन में चमत्कार कर सकती है |इसकी क्षमता की कोई सीमा नहीं है |इससे वह सबकुछ पाया जा सकता है जो एक सामान्य व्यक्ति की इच्छा होती है ,यद्यपि इसके अनेक अलौकिक प्रयोग भी है ,जो असंभव कार्य भी कर सकते हैं पर उनसके लिए इसपर विशिष्ट क्रियाएं करनी होती हैं |कोई क्रिया न भी की जाए और सामान्य पूजा के साथ पवित्रता राखी जाए तो उपरोक्त लाभ मिलते ही हैं |

                  दिव्य गुटिका या चमत्कारी डिब्बी विशिष्ट वस्तुओं -वनस्पतियों -पदार्थों का एक अद्भुत संग्रह है अर्थात एक डिब्बी में २५ अलौकिक शक्तियां रखने वाली वस्तुएं इकठ्ठा की गयी है |हर वस्तु उसके लिए उपयुक्त विशिष्ट मुहूर्त में तांत्रिक पद्धतियों से निकाली -प्राण प्रतिष्ठित और अभिमंत्रित की गयी होती है ,इसके बाद फिर इसे सम्मिलित रूप से विशिष्ट मुहूर्त में अभिमंत्रित किया जाता है जिससे इसकी अलौकिकता और बढ़ जाती है | इस चमत्कारिक दिव्य गुटिका के मुख्य अवयव रवि पुष्य योग में निष्काषित अथवा अभिमंत्रित -प्राण प्रतिष्ठित हत्थाजोड़ी और सियार्सिंगी होते है ,जिनके साथ श्वेतार्क मूल ,नागदौन मूल ,महायोगेश्वरी मूल ,एरंड मूल ,अमरबेल मूल ,हरसिंगार मूल ,सफ़ेद गुंजा ,अपराजिता मूल ,गोरोचन ,रुद्राक्ष ,पिली कौड़ी ,औदुम्बर मूल ,दक्षिणावर्ती शंख ,गोमती चक्र आदि विभिन्न २५ अद्भुत ,विशिष्ट और चमत्कारिक वनस्पतियाँ और वस्तुएं होती हैं ,जो मिलकर ऐसा अद्भुत प्रभाव उत्पन्न करते हैं की यह चमत्कारिक प्रभाव युक्त हो जाती है |[क्षमा के साथ सम्पूर्ण वस्तुओं का नाम नहीं दे सकते क्योकि यह हमारा व्यक्तिगत शोध है ]|

                यह सभी वस्तुएं विशिष्ट उच्च स्तर के साधक द्वारा विशिष्ट मुहूर्त में प्राण-प्रतिष्ठित और अभिमंत्रित होती हैं ,जबकि उपयोग किये गए सामान भी विशिष्ट मुहूर्त में ही विशिष्ट तांत्रिक पद्धति से निष्कासित और प्राप्त किये हुए होते हैं |उपरोक्त वस्तुओं की उपयुक्त और विशिष्ट मुहूर्त में विशिष्ट तांत्रिक साधक द्वारा की गयी तांत्रिक क्रिया के बल पर यह गुटिका अति शक्तिशाली वशिकारक-आकर्षक -सुरक्षाप्रदायक ,धन-संमृद्धि प्रदायक हो जाती है साथ ही इसमें काली [चामुंडा ]की प्रतिष्ठा होने से यह नकारात्मक ऊर्जा और नकारात्मक शक्तियों पर तीव्र प्रतिक्रिया करती है |इससे निकलने वाली तरंगे साथ रखने वाले धारक के साथ साथ ही आसपास के लोगों को भी प्रभावित करती है, जिससे धारक को उपरोक्त लाभ मिलने लगते हैं |इस गुटिका की एक विशेषता है की यह आपके घर की या आपकी नकारात्मक ऊर्जा को सामने ला देती है |यदि आप किसी नकारात्मक प्रभाव से ग्रस्त हैं तो वह कुछ दिक्कतें उत्पन्न कर सकती हैं ,क्योकि उन्हें यह महसूस होता है की उन्हें निकाला या हटाया जा रहा है ,इसलिए शुरू के कुछ समय वह उत्पात मचा सकते हैं जिससे आप यह सोचें की यह सब इस गुटिका के कारण हो रहा है |यदि कुछ समय धैर्य से निकल गया तो सारी परिस्थितियां नियंत्रण में आ जाती हैं |

            इसमें उपयोग की गयी हत्थाजोड़ी में माता चामुंडा का वास माना जाता है |इस जड़ी का सर्वाधिक प्रभाव इसकी सम्मोहंनशीलता है | साधक [व्यक्ति] इसे लेकर कही भी जाये उसका विरोध नहीं होगा |सम्बंधित मनुष्य उसके अनुकूल आचरण और व्यवहार करेगा |इस जड़ी के इसी गुण [सम्मोहनशीलता ]के कारण ही बहुत से लोग इसका प्रयोग प्रेम सम्बन्धी मामलों में भी करते हैं ,,|पति-पत्नी के मामलों में यह अत्यंत उपयोगी भी है और सदुपयोग भी |सम्मोहन और वशीकरण [आकर्षण ]के अतिरिक्त इसका प्रयोग धन वृद्धि ,सुरक्षा ,सौभाग्य वृद्धि ,व्यापार बाधा हटाने आदि में भी किया जाता है और बेहद प्रभावी भी है | इसकी सम्पूर्ण विधि पूर्वक प्राण-प्रतिष्ठा इसे अमूल्य बना देती है |धारक या साधक यात्रा ,विवाद ,प्रतियोगिता ,साक्षात्कार ,द्युतक्रीडा ,और युद्धादी में यह साधक की रक्षा करके उसे विजय प्रदान करती है |भूत-प्रेत आदि वायव्य बाधाओं का उसे कोई भय नहीं रहता ,धन-संपत्ति देने में भी यह बहुत चमत्कारी सिद्ध होती है |इस पर विभिन्न प्रकार के वशीकरण-आकर्षण-सम्मोहन के प्रयोग किये जाते हैं ,विदेश यात्रा की रुकावटें दूर करने की क्रियाएं होती हैं ,घर की सुरक्षा की क्रियाएं होती हैं ,धन-संपत्ति-आकस्मिक लाभ सम्बन्धी क्रियाएं होती हैं ,व्यापार वृद्धि प्रयोग होते हैं ,मुकदमे में विजय ,विरोधियों की पराजय की क्रियाएं होती है ,,इसे जेब में रखा जाये तो सम्मान-सम्मोहंशीलता-प्रभाव बढ़ता है ,सामने के व्यक्ति का वाकस्तम्भन होता है ,आकस्मिक आय के स्रोत बनते हैं

                   दूसरी वस्तु सियार्सिंगी शत्रु पराभव ,सामाजिक सम्मान ,शरीर रक्षा ,श्री समृद्धि ,आकर्षण ,वशीकरण ,सम्मोहन ,धन-सम्पदा ,सुख शान्ति के लिए उपयोग की जा सकती है |किसी शुभ तांत्रिक मुहूर्त में प्राण प्रतिष्ठित और अभिमंत्रित सियारसिंगी वाद-विवाद ,युद्ध ,संकट ,आपदा ,से बचानेवाला भी सिद्ध होता है |यह रक्षा कार्यों में अद्भुत सफलतादायक कहा जाता है |इसे धारण करनेवाला व्यक्ति दुर्घटना ,विवाद ,युद्ध अथवा किसी अन्य संकट में पड़ने पर तुरंत ही आप्दामुक्त हो जाता है |इस पर धन-समृद्धि ,वशीकरण ,सम्मोहन ,सुरक्षा से सम्बंधित विभिन्न क्रियाएं भी होती हैं ,जैसी आवश्यकता हो |केवल मंत्र और पद्धति ही बदलती है सियारसिंगी वही रहता है |इसे रखने वाला व्यक्ति जहाँ भी जाता है वहां का वातावरण उसके अनुकूल हो जाता है | इसी प्रकार इस गुटिका में शामिल २५ वस्तुओं में से हर वस्तु का अपना एक अलग और विशिष्ट बहुआयामी प्रभाव है |इनके बारे में लिखने पर कई पोस्ट कम हो जायेंगे |वैसे भी यह हमारे गोपनीय खोज हैं अतः सभी वस्तुओं और उनके प्रभावों के बारे में बता पाना भी संभव नहीं |

                  प्रतिदिन प्रातः काल स्नानादि के बाद ,अपने ईष्ट पूजा के साथ ही इस गुटिका /डिब्बी को भी भगवती स्वरुप मानकर पूजा कर दिया जाता है |धुप-दीप के साथ ,इसके साथ ही इस पर सिन्दूर और लौंग भी चढ़ाया जाता है |फिर इसे बंद करके इसे जेब में रख के कार्य व्यवसाय पर भी जाया जा सकता है और पूजा स्थान पर भी रहने दिया जा सकता है |यदि कार्य व्यवसाय पर साथ ले जाते हैं तो लाभ तो अधिक होता है पर थोड़ी पवित्रता का ध्यान रखना होता है ,अपवित्र हाथों से इसे न छुआ जाए और अशुद्ध और अपवित्र अथवा सूतक वाले स्थानों पर इसे न ले जाएँ |शाम को घर आने पर इसे वापस पूजा स्थान पर रख दें |इस पर यदि “ॐ नमश्चंडिकाये नमः ” मंत्र का जप रोज १०८ बार किया जाए तो इसका पूर्ण प्रभाव मिलता है |

                 इस गुटिका/डिब्बी के उपयोग से धन वृद्धि ,सम्मोहन, वशीकरण ,वायव्य बाधाओं से सुरक्षा ,शत्रुओं से सुरक्षा ,अभिचार कर्म से सुरक्षा ,संपत्ति संवर्धन ,यात्रा में सुरक्षा ,विवाद-प्रतियोगिता में सफ़लता ,साक्षात्कार में सफ़लता ,द्युतक्रीडा -शेयर -सट्टा -लाटरी -कमोडिटी के कार्यों में सफलता ,शत्रु से अथवा मुकदमे में विजय ,अधिकारी का अनुकूलन -वशीकरण ,गृह दोष-वास्तु दोष का शमन ,गृह कलह का शमन ,ग्रह बाधा-अशुभत की समाप्ति ,प्रियजनों का अनुकूलन-वशीकरण ,व्यावसायिक -व्यापारिक बाधा अथवा बंधन निवारण ,व्यापार वृद्धि ,पित्र दोष -कुलदेवता /देवी दोष की शान्ति ,मकान -जमीन के नीचे के दोषों का शमन ,टोने -टोटके -तांत्रिक अभिचार ,किये -कराये का शमन ,घर में भूत -प्रेत का शमन किया जा सकता है |इसके अतिरिक्त भी यह गुटिका के अनेकानेक और विशिष्ट उपयोग हैं ,जिनके लिए विविध प्रकार की क्रियाएं की जा सकती है ,इसकी क्षमता की कोई सीमा नहीं है ,उद्देश्य के अनुसार भिन्न क्रियाएं विभिन्न मनोकामनाएं पूर्ण कर सकती हैं |यह गुटिका हमारे वर्षों के tantra क्षेत्र में शोध का परिणाम है और इसके परिणाम अनुभूत हैं |यह सामान्य पूजा पर अपना प्रभाव दिखाती ही है किन्तु कोई विशिष्ट उद्देश्य होने पर अलग पूजा विधान भी हमने कई उद्देश्यों के लिए बनाकर अपने ब्लॉग पर प्रकाशित कर रखे हैं ताकि डिब्बी के धारक अपने उद्देश्य अनुसार पूजन और साधना कर अपना लक्ष्य प्राप्त कर सकें |

    विशेष – यह चमत्कारी डिब्बी /गुटिका अनेक समस्याएं समाप्त कर सकती है ,नकारात्मक प्रभाव हटा आपके भाग्य का अधिकतम दिला सकती है किन्तु यह स्वयं आपका भाग्य नहीं बदल सकती |हम कोई झूठा आश्वासन नहीं देना चाहते की यह आपको राजा बना देगी |आपके भाग्य में जो है उसका अधिकतम दिला सकती है किन्तु भाग्य तो केवल आपके प्रयास ही बदल सकते हैं |यह आपकी सहायक हो सकती है किन्तु श्रम और कर्म आपके होंगे |हमने बहुत शोध ,श्रम और संतुलन के साथ इसका निर्माण लोगों की भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ती और उनके मार्ग में आ रही बाधाओं को हटाने के लिए किया है और इसके बहुत अच्छे परिणाम मिलें हैं |………………………………………………………………हर-हर महादेव 

    READ MORE: चमत्कारी डिब्बी /गुटिका
  • कैसे चमत्कारी है दिव्य गुटिका [डिब्बी]

                                        हमने अपने ३० वर्षों के तंत्र जीवन के अनुभव के आधार पर और विभिन्न प्रकार की समस्याओं से ग्रस्त लोगों के कष्टों को दृष्टिगत रखते हुए एक दिव्य गुटिका का निर्माण किया है ,जो लगभग अधिकतर सामान्य समस्याओं का निवारण करता है |इसका नाम हमने चमत्कारी दिव्य गुटिका रखा है क्योकि यह अनेक समस्याओं ,अनेक कार्यों में काम करता है |इससे अनेक और कठिन उद्देश्य पूर्ण किये जा सकते हैं बस प्रक्रिया और पद्धति बदल कर जबकि गुटिका या डिब्बी वही रहती है |यह गुटिका या डिब्बी लोगों के लगभग सभी वह कार्य पूर्ण करती है जिसके लिए अलग -अलग पूजा -जप -तप करना पड़ता है या -ताबीज -कवच -जड़ी आदि धारण करना पड़ता है |इसमें वैसे तो २१ वस्तुएं हम सम्मिलित करके एक दिव्य प्रभाव उत्पन्न करते हैं किन्तु सभी का नाम नहीं बता सकते ,क्योकि यह हमारा व्यक्तिगत और गोपनीय अनुसंधान है जिसे हम सार्वजनिक नहीं कर सकते ,क्योकि इसका लोग व्यावसायिक उपयोग कर सकते हैं अथवा इसका दुरुपयोग कर सकते हैं ,चुकी यह सभी षट्कर्म मारण ,मोहन ,उच्चाटन ,वशीकरण ,आकर्षण ,शांति कर्म के उद्देश्य पूर्ण करता है |
                                  हमारे द्वारा निर्मित दिव्य गुटिका या डिब्बी कैसे चमत्कार करती है इसको आप इसमें सम्मिलित कुछ वस्तुओं के विशेषता से समझ सकते हैं |जो वस्तुएं पहचानी जा सकती हैं उनकी विशेषता हम बता रहे हैं जो हमारी गोपनीय वस्तुएं हैं उन्हें पहचाना नहीं जा सकता और उनकी विशेषता भी हम नहीं लिख रहे ,क्योकि इनमे कुछ प्रतिबंधित और दुर्लभ वस्तुएं भी हैं |जिन वस्तुओं की विशेषता लिख रहे उन्ही मात्र से अंदाजा हो जाएगा की यह वास्तव में चमत्कारी है ,इनमे अगर हम अन्य वस्तुओं की विशेषता को भी सम्मिलित कर दें जो गोपनीय हैं तो यह महा चमत्कारी हो जाती है |कुछ वस्तुओं की विशेषता निम्न है —
    हत्था -जोड़ी
    —————
    इसमें उपयोग की गयी हत्थाजोड़ी में माता चामुंडा का वास माना जाता है |इस जड़ी का सर्वाधिक प्रभाव इसकी सम्मोहंनशीलता है | साधक [व्यक्ति] इसे लेकर कही भी जाये उसका विरोध नहीं होगा |सम्बंधित मनुष्य उसके अनुकूल आचरण और व्यवहार करेगा |इस जड़ी के इसी गुण [सम्मोहनशीलता ]के कारण ही बहुत से लोग इसका प्रयोग प्रेम सम्बन्धी मामलों में भी करते हैं ,,|पति-पत्नी के मामलों में यह अत्यंत उपयोगी भी है और सदुपयोग भी |सम्मोहन और वशीकरण [आकर्षण ]के अतिरिक्त इसका प्रयोग धन वृद्धि ,सुरक्षा ,सौभाग्य वृद्धि ,व्यापार बाधा हटाने आदि में भी किया जाता है और बेहद प्रभावी भी है | इसकी सम्पूर्ण विधि पूर्वक प्राण-प्रतिष्ठा इसे अमूल्य बना देती है |धारक या साधक यात्रा ,विवाद ,प्रतियोगिता ,साक्षात्कार ,द्युतक्रीडा ,और युद्धादी में यह साधक की रक्षा करके उसे विजय प्रदान करती है |भूत-प्रेत आदि वायव्य बाधाओं का उसे कोई भय नहीं रहता ,धन-संपत्ति देने में भी यह बहुत चमत्कारी सिद्ध होती है |इस पर विभिन्न प्रकार के वशीकरण-आकर्षण-सम्मोहन के प्रयोग किये जाते हैं ,विदेश यात्रा की रुकावटें दूर करने की क्रियाएं होती हैं ,घर की सुरक्षा की क्रियाएं होती हैं ,धन-संपत्ति-आकस्मिक लाभ सम्बन्धी क्रियाएं होती हैं ,व्यापार वृद्धि प्रयोग होते हैं ,मुकदमे में विजय ,विरोधियों की पराजय की क्रियाएं होती है ,,इसे जेब में रखा जाये तो सम्मान-सम्मोहंशीलता-प्रभाव बढ़ता है ,सामने के व्यक्ति का वाकस्तम्भन होता है ,आकस्मिक आय के स्रोत बनते हैं 
    सियारसिंगी
    ————–
    दूसरी वस्तु सियार्सिंगी शत्रु पराभव ,सामाजिक सम्मान ,शरीर रक्षा ,श्री समृद्धि ,आकर्षण ,वशीकरण ,सम्मोहन ,धन-सम्पदा ,सुख शान्ति के लिए उपयोग की जा सकती है |किसी शुभ तांत्रिक मुहूर्त में प्राण प्रतिष्ठित और अभिमंत्रित सियारसिंगी वाद-विवाद ,युद्ध ,संकट ,आपदा ,से बचानेवाला भी सिद्ध होता है |यह रक्षा कार्यों में अद्भुत सफलतादायक कहा जाता है |इसे धारण करनेवाला व्यक्ति दुर्घटना ,विवाद ,युद्ध अथवा किसी अन्य संकट में पड़ने पर तुरंत ही आप्दामुक्त हो जाता है |इस पर धन-समृद्धि ,वशीकरण ,सम्मोहन ,सुरक्षा से सम्बंधित विभिन्न क्रियाएं भी होती हैं ,जैसी आवश्यकता हो |केवल मंत्र और पद्धति ही बदलती है सियारसिंगी वही रहता है |इसे रखने वाला व्यक्ति जहाँ भी जाता है वहां का वातावरण उसके अनुकूल हो जाता है |
    श्वेतार्क मूल
    ————— श्वेतार्क मूल धन -समृद्धि प्रदायक ,भूत -प्रेत -शाकिनी -डाकिनी ,अभिचार -तंत्र क्रिया ,अल-बला ,नजर दूर करने वाला ,वशिकारक ,राजकीय कृपा ,मान-सम्मान प्रदायक ,रोग-शोक -शत्रु नाशक ,उन्नति और सफलता देने वाला ,विरोधियों को परास्त करने वाला ,इच्छा पूर्ती करने वाला ,
    औदुम्बर मूल
    —————– औदुम्बर की मूल धन -समृद्धि कारक ,उत्तम संतान सुख देने वाला ,यश -सम्मान देने वाला ,सुख -शान्ति -पारिवारिक सौहार्द्र देने वाला ,
    पीली कौड़ी
    ————-  पीली कौड़ी को देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है और धन -समृद्धि के लिए अथवा धन वृद्धि के लिए इसे अधिक कारगर माना जाता है |इससे धन -संपत्ति -समृद्धि शान्ति की वृद्धि होती है |आया वृद्धि और धन संचय के अवसर बढ़ते हैं |धन संचय में आ रही रुकावटें दूर होती हैं |
    गोमती चक्र
    ————– आर्थिक बाधा नाश और स्थायी लक्ष्मी प्राप्त होती है ,स्वास्थय सुरक्षा होती है और स्वास्थ्य -आरोग्य प्राप्त होता है ,शत्रु नाश होता है ,,डूबा -फंसा धन मिलने की संभावना बनती है ,नजर दोष -अभिचार से रक्षा होती है ,विवाद -मुकदमे में विजय प्राप्त होती है ,बुद्धि एकाग्रता में मदद करता है ,भूत -प्रेत -टोन -टोटके का दुष्प्रभाव टोकता है ,भाग्योदय करता है ,नौकरी -कार्य -व्यवसाय में सफलता दिलाता है ,गृह क्लेश का नाश करता है ,संतान बाधा समाप्त करता है , व्यापार -व्यवसाय में वृद्धि होती है |
    श्वेत गूंजा
    ———— श्वेत गुंजा धनदायक होता है |इससे आकस्मिक आय के स्रोत खुलते हैं |लक्ष्मी प्राप्ति होती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है |अभिचार से रक्षा होती है |
    दक्षिणावर्ती शंख
    ——————- दक्षिणावर्ती शंख जहाँ भी रहता है दरिद्रता वहां से पलौँ कर जाती है अर्थात निर्धनता -गरीबी निवारण के लिए यह सर्वश्रेष्ठ वस्तु है |इसके पूजा से धनलाभ ,संपत्ति प्राप्ति होती है |इससे अन्न भण्डार बढ़ता है ,समृद्धि बढती है ,शान्ति परिवार में बढती है ,विद्या -बुद्धि का विकास होता है |दुर्भाग्य ,अभिशाप ,अभिचार ,जादू -टोना ,नजर दोष और दुर्ग्रह प्रभाव समाप्त हो जाते हैं |
    महायोगेश्वरी मूल
    ———————- महायोगेश्वरी की जड़ मंगल पीड़ा को शांत करती है ,बुद्धि का विकास करती है ,नजर दोष -अभिचार दोष को रोकती है ,देवी शक्ति युक्त होने से यह शक्तियाँ व्यक्ति की रक्षा करती है ,धारक को सर्वत्र मान -सम्मान प्राप्त होता है |प्रतियोगिता ,युद्ध ,विवाद ,प्रतिस्पर्धा आदि में विजय प्राप्त होती है |भूत -प्रेत की बाधा समाप्त होती है |धनाभाव -दरिद्रता दूर होता है और सुख -समृद्धि में वृद्धि होती है |अकाल मृत्यु भय से सुरक्षा होती है |वशीकरण प्रभाव बढ़ता है |
    निर्गुन्डी मूल
    ————— निर्गुन्डी मूल लगातार आय उपलब्ध कराने में सहयोगी होती है |आकस्मिक धन प्राप्ति में सहायक होती है ,और इसके होने से लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं |यह नकारात्मक ऊर्जा भी दूर करती है और सुख -समृद्धि भी बढाती है |
    अमरबेल मूल
    —————- अमरबेल वाशिकारक प्रभाव रखने वाली वनस्पति है जो वशीकरण की शक्ति उत्पन्न करती है |आर्थिक समस्या से मुक्ति दिलाती है |व्यापारिक समस्या का निदान में सहायक होती है |यह जहाँ होती है वहां टोटकों का प्रभाव नहीं होता |यह गर्भपात रोकने में भी सहायक होती है किन्तु विधि भिन्न होती है |इसमें ऐसी शक्ति होती है की इच्छित लड़के या लड़की से विवाह भी करा सकती है इतनी प्रबल वशीकरण प्रभाव रखती है |लोकहित में इसकी विधि नहीं दी जा सकती |
    हरसिंगार मूल
    —————– हरसिंगार एक बेहद तीव्र प्रभावकारी वनस्पति है जो धन -समृद्धि -शान्ति -सुरक्षा सब देता है |आकस्मिक आय के स्रोत बनाने और बढाने से यह बेहद कारगर है इसलिए शेयर -सट्टा -लाटरी -जुए -कमोडिटी वालों के लिए लाभदायक अधिक होती है |यह सभी के लिए समृद्धिदायक होती है |पति -पत्नी और परिवार के मनमुटाव कम करती है ,भूत -प्रेतों का उपद्रव शांत करती है |शत्रुओं पर विजय दिलाती है |
    रुद्राक्ष
    ——– रुद्राक्ष का प्रभाव जगजाहिर है ,इसपर अलग से बहुत कुछ लिखने की जरुरत नहीं ,पर यह शुभता बढाता है ,धनात्मक और सकारात्मक ऊर्जा की वृद्धि करता है ,शान्ति लाता है ,अशुभ ग्रहादी प्रभाव को समाप्त करता है |शिव जी की कृपा प्राप्त होती है |भूत -प्रेत -पिशाच -डाकिनी -उपरी हवा -टोन -टोटके -तंत्र मन्त्र के प्रभाव को समाप्त करता है |तेज और ओज में वृद्धि होती है |
    मात्र इन १३ वस्तुओं से अंदाजा लगाया जा सकता है की यह गुटिका क्यों और कैसे चमत्कारी है जबकि इसमें अतिरिक्त ८ वस्तुएं और हैं जो बेहद दुर्लाभ और महत्वपूर्ण हैं ,उनकी अपनी विशेषता और गुण है |इसके अतिरिक्त सभी महत्वपूर्ण मूल और वनस्पतियाँ तंत्र के सबसे महत्वपूर्ण और वर्ष के एक दिन ही उपलब्ध योग रविपुष्य योग में ही निकाली ,प्राण प्रतिष्ठित और अभिमंत्रित होती हैं |अन्य वस्तुएं भी रविपुष्य योग में ही विशेष तांत्रिक पद्धति से प्राण प्रतिष्ठित और अभिमंत्रित होती हैं जिससे इनके गुण कई गुना बढ़ जाते हैं |इसलिए यह गुटिका जहाँ भी राखी जाती है इसकी प्रतिक्रिया शुरू हो जाती है वहां की नकारात्मक उर्जाओं पर |केवल सामान्य पूजा मात्र भी इसका उत्तम लाभ दिलाती है जबकि यदि ठीक से पूजा और मंत्र जप किया जाए तो लक्षित उद्देश्य की पूर्ती संभव हो जाती है |
    इस गुटिका/डिब्बी के उपयोग से धन वृद्धि ,सम्मोहन ,वशीकरण ,वायव्य बाधाओं से सुरक्षा ,शत्रुओं से सुरक्षा ,अभिचार कर्म से सुरक्षा ,संपत्ति संवर्धन ,यात्रा में सुरक्षा ,विवाद-प्रतियोगिता में सफ़लता ,साक्षात्कार में सफ़लता ,द्युतक्रीडा -शेयर -सट्टा -लाटरी -कमोडिटी के कार्यों में सफलता ,आकस्मिक आय स्रोतों में वृद्धि ,सेल्स -मार्केटिंग के कार्यों में सफलता ,घर -मकान -दूकान के बंधन /तंत्र क्रिया की रोकथाम ,शत्रु से अथवा मुकदमे में विजय ,अधिकारी का अनुकूलन -वशीकरण ,गृह दोष-वास्तु दोष का शमन ,जमीन के नीचे की नकारात्मक ऊर्जा शमन ,मकान -दूकान -व्यावसायिक प्रतिष्ठान की नकारात्मक ऊर्जा या शक्ति का शमन ,गृह कलह का शमन ,ग्रह बाधा-अशुभत की समाप्ति ,प्रियजनों का अनुकूलन-वशीकरण किया जा सकता है |इसके अतिरिक्त भी यह गुटिका के अनेकानेक और विशिष्ट उपयोग हैं ,जिनके लिए विविध प्रकार की क्रियाएं की जा सकती है ,इसकी क्षमता की कोई सीमा नहीं है ,उद्देश्य के अनुसार भिन्न क्रियाएं विभिन्न मनोकामनाएं पूर्ण कर सकती हैं |यह गुटिका हमारे वर्षों के tantra क्षेत्र में शोध का परिणाम है और इसके परिणाम अनुभूत हैं |………………………………………………………हर-हर महादेव

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  • कहाँ /कैसे /कब प्रयोग कर सकते हैं दिव्य गुटिका /डिब्बी ?

    दिव्य गुटिका /चमत्कारी डिब्बी के विशिष्ट प्रयोग
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    दिव्य गुटिका एक चमत्कारी शक्ति युक्त डिब्बी है जिसके अनेकानेक प्रयोग है और इसके लगभग दर्जन भर विशिष्ट प्रयोगों को हम अपने पेजों और वेबसाईट पर दे चुके हैं |यहाँ कुछ सामान्य विभिन्न प्रयोग दे रहे जिसके इसकी शक्ति और प्रयोग की विभिन्नता की जानकारी तथा अंदाजा हो जाए हमारे पाठकों को |यह छोटे प्रयोग विभिन्न कामना पूर्ण करते हैं जबकि गुटिका एक ही रहती है |
    || ॐ ग्लौं गणपतये नमः || इस मन्त्र को कुछ दिन लगातार करने के बाद अथवा दुर्गा ,चामुंडा ,काली के किसी भी मन्त्र को कुछ दिन करने के बाद दिव्य गुटिका पर चढ़ाई जाने वाली सिन्दूर ,अक्षत ,लौंग और इलायची में अद्भुत शक्तियाँ आ जाती हैं |यद्यपि दिव्य गुटिका स्वयं सिद्ध -प्राण प्रतिष्ठित और अभिमंत्रित होती है किन्तु इन मन्त्रों को इसलिए जपते हैं की दिव्य गुटिका की ऊर्जा का सम्बन्ध आपसे हो जाए और वस्तुएं आपकी ऊर्जा के अनुसार इच्छा पूर्ण करें |
    १. दिव्य गुटिका पर मन्त्र जप करके चढ़ाए गए सिन्दूर को जो भी स्त्री लगाएगी तो उसका पति सदैव उसके वश में रहेगा ,भटकेगा नहीं |
    २. चढ़ाई हुई लौंग को जो भी विवाहित स्त्री एक -दो की संख्या में अपने पति को खिलाती रहेगी तो उसका पति ,सदैव उसके वश में रहेगा |
    ३. चढ़ाई गई इलायची में से एक -दो इलायची जो भी विवाहित पुरुष अपनी पत्नी को खिलाता रहेगा तो उसकी पत्नी सदैव उसके वश में रहेगी |
    ४. चढ़ाए गए चावल को अलग कर डिब्बी में भरकर पूजा स्थान अथवा भण्डार गृह में रखने से भण्डार भरा रहेगा और घर में सुख -शान्ति रहेगी |
    ५. अभिमंत्रित दिव्य गुटिका को अन्न भण्डार ,कोष ,गल्ला ,तिजोरी ,आदि धन -संपदा रखने के स्थानों पर रखा जाए तो धन -धान्य की वृद्धि होने लगती है |इस्क्का पूजन वहां रोज अवश्य होना चाहिए यह ध्यान रखना चाहिए |
    ६. प्रतिदिन प्रातःकाल स्नान आदि करके इसका दर्शन ,अभिवादन ,पूजन आदि करने से साधक को यश -सम्मान ,विविध प्रकार के सुख आदि प्राप्त होते हैं |
    ७. प्रतिदिन पूजन अर्चन से नवग्रहों के दोष दूर होते हैं |
    ८. इस दिव्य गुटिका पर चढ़ाए हुए सिन्दूर का तिलक करने से वशीकरण और आकर्षण प्रभाव उत्पन्न होता है ,लोग वशीभूत और आकर्षित होते हैं |व्यक्ति का व्यक्तित्व सम्मोहक होता है |भूत-प्रेत पीड़ा ,वायव्य दोष समाप्त होते हैं |नजर दोष समाप्त होता है |दैनिक कार्यों की सफलता बढ़ जाती है |
    ९. दिव्य गुटिका जहाँ भी रहती है दरिद्रता वहां से पलायन कर जाती है |निर्धनता -गरीबी का निवारण होता है ,आकस्मिक आय स्रोत बनते हैं |अन्न ,धन ,वस्त्र ,ज्ञान और शान्ति प्राप्त होती है |
    १०. दिव्य गुटिका के प्रभाव से जादू -टोना ,अभिचार ,तांत्रिक क्रिया ,नजर ,अभिशाप ,दुर्भाग्य ,और दुर्ग्रह प्रभाव समाप्त होते हैं |मानसिक कष्ट ,शोक -संताप का निवारण होता है |शत्रु और विरोधी परास्त होते हैं |
    ११. दिव्य गुटिका के प्रतिदिन पूजन से शासन की कृपा ,राजकीय अधिकारी की अनुकूलता ,सम्मान ,उन्नति ,कार्यों में सफलता ,दूसरों से स्नेह -मान ,प्राप्त होता है |
    १२. शेयर -सट्टा -लाटरी -कमोडिटी में हानि न हो और लाभ हो उसके लिए दिव्य गुटिका गल्ले अथवा आफिस अथवा पूजा स्थान पर स्थापित कर कम से कम एक माला काली मन्त्र का और एक माला लक्ष्मी मन्त्र का प्रतिदिन करें |
    १३.गृह दोष ,वास्तु दोष ,स्थान दोष ,जमीन के अन्दर की समस्या लगती हो तो दिव्य गुटिका पर काली ,भैरव ,दुर्गा ,चामुंडा के मंत्र जप करें |इन समस्याओं से राहत मिलेगी |
    १४. पित्र दोष ,कुलदेवता /देवी का दोष ,ब्रह्म दोष ,प्रेत दोष आदि की संभावना पर प्रतिदिन एक माला काली अथवा दुर्गा का और एक माला शिव के मंत्र का करें |इन सभी समस्याओं से राहत मिलेगी |
    १५. उद्देश्य के अनुसार दिव्य गुटिका पर किये गए शाबर मन्त्रों का जप त्वरित प्रभाव देता है |वशीकरण ,शान्ति ,सुरक्षा ,आकर्षण ,विजय ,सफलता ,सिद्धि आदि के निमित्त किये गए मन्त्रों का अपेक्षित परिणाम प्राप्त होता है |किसी भी मंत्र का इस पर ग्रहण ,होली ,दीपावली ,अमावश्य को किया गया मन्त्र जप बेहद प्रभावकारी होता है |
    १६. प्रति दिन सामान्य पूजा से ही घर में सुख शान्ति रहती है किन्तु यदि घर में अधिक अशांति हो और घर के सभी सदस्यों में सदैव मतभेद बना रहता हो तो इसकी नियमित पूजा के साथ २१ दिनों में १० माला संख्या रोज रखते हुए निम्न मंत्र का २१ हजार जप करें –
    ॐ मदने मदने देवी मामालियमसंगे देह देह श्री स्वाहा |
    इससे घर में सुख -शान्ति आती है और मतभेद दूर हो जाते हैं |
    १७. किसी लड़के या लड़की की आयु बढती जा रही  हो लेकिन उसका विवाह नहीं हो पा रहा हो तो लड़का या लड़की दिव्य गुटिका पर निम्न प्रयोग खुद करे |प्रतिदिन दिव्य गुटिका की धुप -दीप ,फल-प्रसाद के साथ पूजन कर २१ दिनों में निम्न मंत्र की ५१ हजार जप करे –
    ॐ क्लीं मम् …………..कार्य सिद्धि ,करि करि जनरंजिनी स्वाहा |
    जहाँ खाली स्थान है मंत्र में वहां लड़का या लड़की अपना नाम जोड़ ले |इस प्रयोग से उसका उत्तम विवाह संभव होता है |
    १८. यदि किसी को भूत -प्रेत बाधा अथवा वायव्य बाधा अथवा नजर दोष या अभिचार आदि की पीड़ा है तो रविवार या मंगलवार कोधुप दीप -पूजन करके दिव्य गुटिका पर ११ माला दुर्गा या काली मंत्र का जप करें तथा गुटिका में चढ़ाई हुई लोंगों में से दो लौंग निकालकर हाथ में ले पुनः ११ बार मन्त्र पढ़कर फूंक मारें ,फिर किसी लाल कपडे में बांधकर या ताबीज की भाँती सिलकर पीड़ित को बाजू में बाँध दें |उसकी पीड़ा से राहत मिल जायेगी |अन्य पहले के लौंग अलग कर लें जो अभिमंत्रित हो चुके हैं उन्हें केवल हथेली पर ११ मन्त्र से अभिमंत्रित कर किसी को धारण कराया जा सकता है |[[ ज्ञातव्य है की गुटिका पर पूजन में रोज दो लौंग चढ़ाए जाते हैं जो शक्तिकृत हो जाते हैं ,इन्हें अभिमंत्रित कर उपरोक्त प्रकार अलग रखा जा सकता है ]]|
    १९. वैसे तो दिव्य गुटिका स्वयं ही धन दायक है किन्तु अधिक धन की चाह हो अथवा आर्थिक स्थिति विषम हो चुकी हो और तत्काल राहत की आवश्यकता हो तो गुटिका पर सिक्का अर्पित कर निम्न मंत्र की कम से कम ५ माला रोज करें |शीघ्र ही परिवर्तन दृष्टिगोचर होगा —
    मन्त्र — ॐ चामुंडायै धनं देहि |
    २०. शत्रु परेशान कर रहे हो और कोई राहत मिलने की उम्मीद न दिखे तो दिव्य गुटिका पर काली अथवा चामुंडा के मंत्र जप करें और शत्रु से रक्षा और उनके पराजय की कामना करें |शीघ्र राहत मिलेगी |
    २१. यदि किसी को अनुकूल कर अपना कार्य करवाना हो ,अथवा कोई अधिकारी -कर्मचारी परेशान कर रहा हो अथवा कोई बुरा सोचने वाला हो अथवा कोई अपना आपसे दूर जा रहा हो ,गलत कर रहा हो या गलत सांगत में हो पर आपकी बात न समझता हो या आपकी उपेक्षा करता हो तो उसके लिए वशीकरण का प्रयोग करें दिव्य गुटिका पर — प्रतिदिन दिव्य गुटिका की पूजा करके धुप जलाकर निम्न मन्त्र की एक माला करें — ॐ चामुंडा देवी ……………….. में वश्यं कुरु कुरु स्वाहा |
    रिक्त स्थान में उस व्यक्ति का नाम जोड़ दें |जप साधना के दिनों में संयम -शुद्धताऔर ब्रह्मचारी का पालन करें |कुछ दिनों में लक्षित व्यक्ति अनुकूल हो जाएगा |
    २२. यदि कोई विशेष कामना हो और वह पूर्ण होने में विलम्ब हो रहा हो अथवा उसके पूर्ण होने की उम्मीद न हो तो इस प्रयोग को किया जा सकता है |प्रतिदिन दिव्य गुटिका की पूजा कर धुप-दीप जलाकर दुर्गा जी के नवार्ण मंत्र का जप करें कम से कम ५ माला और अपनी कामना पूर्ण करने की उनसे प्रार्थना करें |उम्मीद करें की आपकी कामना शीघ्र पूर्ण होगी |
    २३. धन -समृद्धि शान्ति की कामना हो तो दिव्य गुटिका पर कमला अर्थात लक्ष्मी के मंत्र बेहद प्रभावकारी हैं क्योकि इसके अधिकतर अवयव धन -समृद्धि कारक हैं |इस हेतु निम्न मन्त्र अधिक लाभकारी है और इसकी कम से कम एक माला रोज की जानी चाहिए |
    ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः ||
    २४. यदि किसी को लगता हो की उनके ऊपर अथवा उनके दूकान ,व्यवसाय ,घर-परिवार पर किसी तरह की नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव है ,किसी ने कुछ किया -कराया किया हुआ है या अभिचार किया है ,या व्यवसाय -दूकान बाँध दिया है ,या उन्नति रोक दी है ,या अपने आप किसी वायव्य आत्मा परेशान कर रही है ,किसी बच्चे -स्त्री को कोई पीड़ा पहुंचा रहा हो ,घर-परिवार में अनावश्यक बीमारी -दुर्घटना -कष्ट का वातावरण बन रहा हो तो वह दिव्य गुटिका पर दुर्गा जी के नवार्ण मन्त्र का अथवा काली जी के मंत्र का जप करे उसकी समस्या का निदान हो जाएगा |………………………………………………………………हर-हर महादेव

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  • तंत्र रक्षा और बिगड़े को सुधारने हेतु कवच

    बिगड़े को सुधारने अथवा तांत्रिक क्रिया से बचाव का चमत्कारी कवच
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          अक्सर सुनने में आता है की संतान अथवा बच्चा बिगड़ गया है या बिगड़ रहा है |बात नहीं मानता ,गलत आदतों का शिकार हो गया है या गलत संगत में पड़ गया है ,गलत या अनुचित कार्य ही उसे पसंद आते हैं |परिवार -खानदान-माँ बाप की प्रतिष्ठा को ठेस पंहुचा रहा है ,अपना भविष्य बिगाड़ रहा है | दुर्जनों के बहकावे में आ जा रहा है ,माँ-बाप या परिवार के विरोधियों के भड़काने में आकर अपने ही लोगों को अपना दुश्मन समझ रहा है ,अपने लोगों की अवहेलना कर रहा है ,अनुचित कार्यों -प्यार-मुहब्बत में रूचि ले रहा है जिसके परिणामों की उसे समझ नहीं रही ,सम्मान की चिंता नहीं है ,भविष्य की चिंता नहीं है ,|यह आज के समय में बहुत अधिक दिख रहा है ,जिसके अनेक कारण है ,नैतिकता का पतन,संस्कार हीनता ,नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव ,कुलदेवता/देवी दोष आदि अनेकानेक कारण हैं इनके और अक्सर रोकथाम के उपाय या समझाना व्यर्थ जाता है |कभी कभी ऐसा भी होता है की हमारे किसी प्रिय यथा पति-पत्नी-संतान आदि पर कोई अन्य व्यक्ति तांत्रिक अभिचार यथा वशीकरण आदि करके अपने अनुकूल कर लेता है और हमारा प्रिय व्यक्ति हमसे विमुख हो उससे जुड़ने और उसकी बात मानने लगता है |


    इन समस्याओं का समाधान तंत्र में है और इन्हें सुधारा जा सकता है |परम पूज्य गुरुदेव द्वारा अपने लम्बे तंत्र अनुभव के आधार पर इस हेतु एक विशिष्ट कवच निर्मित किया जाता है ,जिसकी अपनी विशिष्ट पद्धति है |यह कवच विशिष्ट अनुष्ठान द्वारा निर्मित किया जाता है और विशिष्ट यन्त्र से परिपूर्ण होता है ,जिसके साथ विभिन्न प्रकार के ११ अन्य घटक होते हैं |यह कवच संतान अथवा प्रियजन को आपके अनुकूल या वशीभूत नहीं करता है ,न ही किसी प्रकार से मष्तिष्क पर बोझ डालकर उसे परिवर्तित करता है ,,अपितु इसकी कार्यप्रणाली पूर्णतः प्रकृति की ऊर्जा संरचना के अनुरूप कार्य करती है और धारक के स्वचेतना में परिवर्तन कर देता है ,आतंरिक और शारीरिक ऊर्जा में सकारात्मकता के संचार से व्यक्ति के सोचने-समझने की दृष्टि में परिवर्तन हो जाता है और वह अपना हित -अहित ,अच्छा-बुरा ,भूत-भविष्य-वर्त्तमान के प्रति सजग और सतर्क हो जाता है |अंतरात्मा ,नैतिकता कवच की अलौकिक ऊर्जा से जाग उठती है |नकारात्मक ऊर्जा ,किये-कराये ,तांत्रिक अभिचार आदि का प्रभाव रूक जाता है और व्यक्ति अपने खुद के मष्तिष्क और सोच के अनुरूप अपने हित के लिए कार्य करने लगता है |शरीर और आसपास सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने से संस्कार-परिवार-माता-पिता-पति-पत्नी-धर्म-समाज-इज्जत के प्रति संवेदनशील हो जाता है और उन्नति के साथ भविष्य की और सोचने लगता है |महाविद्या से सम्बंधित कवच होने से एक अलौकिक अदृशीय ऊर्जा उसे प्रेरित करती है फलतः उसके आचार-व्यवहार-सोच-कर्म में परिवर्तन होने लगता है और वह सुधरकर उन्नति की और अग्रसर हो जाता है |…………………………………………………………..हर-हर महादेव 

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