Category: Spiritual Products
  • चमत्कारी- दिव्य गुटिका /डिब्बी

    चमत्कारी- दिव्य गुटिका /डिब्बी

    चमत्कारी- दिव्य गुटिका /डिब्बी
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    रविपुष्य योग में निर्मित ,प्राण प्रतिष्ठित ,अभिमंत्रित दिव्य गुटिका
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                   सामान्यरूप से हर किसी की चाह होती है की लोग उनकी और आकर्षित हों ,देखकर खींचे चले आयें ,जो मिले प्रभावित हो ,जहाँ जाए किसी काम से वहां सफलता मिले ,कहीं किसी समस्या-परेशानी का सामना न करना पड़े |हर इंसान के अन्दर यह कामना होती है की उसका व्यक्तित्व ऐसा आकर्षक हो की लोग चुम्बक की तरह खिचे चले आये ,उसका व्यतित्व सम्मोहक हो |हर व्यक्ति पर उसका प्रभाव पड़े ,कार्य-व्यवसाय के क्षेत्र के लोग अनुकूल हों ,सफलता मिले ,उन्नति हो |यह असंभव नहीं है |यह संभव है तंत्र के माध्यम से |इस हेतु थोड़े से नियम और सावधानी के साथ यदि हमारे द्वारा निर्मित दिव्य गुटिका /डिब्बी का प्रयोग किया जाए |यह गुटिका तंत्र की उन दिव्य चमत्कारी वस्तुओं से परिपूर्ण हैं जो किसी के भी जीवन में चमत्कार कर सकती है |इसकी क्षमता की कोई सीमा नहीं है |इससे वह सबकुछ पाया जा सकता है जो एक सामान्य व्यक्ति की इच्छा होती है ,यद्यपि इसके अनेक अलौकिक प्रयोग भी है ,जो असंभव कार्य भी कर सकते हैं पर उनसके लिए इसपर विशिष्ट क्रियाएं करनी होती हैं |कोई क्रिया न भी की जाए और सामान्य पूजा के साथ पवित्रता राखी जाए तो उपरोक्त लाभ मिलते ही हैं |
                 दिव्य गुटिका या चमत्कारी डिब्बी विशिष्ट वस्तुओं -वनस्पतियों -पदार्थों का एक अद्भुत संग्रह है अर्थात एक डिब्बी में २१ अलौकिक शक्तियां रखने वाली वस्तुएं इकठ्ठा की गयी है |हर वस्तु उसके लिए उपयुक्त विशिष्ट मुहूर्त में तांत्रिक पद्धतियों से निकाली -प्राण प्रतिष्ठित और अभिमंत्रित की गयी होती है ,इसके बाद फिर इसे सम्मिलित रूप से विशिष्ट मुहूर्त में अभिमंत्रित किया जाता है जिससे इसकी अलौकिकता और बढ़ जाती है | इस चमत्कारिक दिव्य गुटिका के मुख्य अवयव रवि पुष्य योग में निष्काषित अथवा अभिमंत्रित -प्राण प्रतिष्ठित हत्थाजोड़ी और सियार्सिंगी होते है ,जिनके साथ श्वेतार्क ,नागदौन ,महायेगेश्वरी ,एरंड ,अमरबेल ,हरसिंगार ,हाथी दांत ,गोरोचन ,पिली कौड़ी ,गोमती चक्र आदि विभिन्न २१ अद्भुत ,विशिष्ट और चमत्कारिक वनस्पतियाँ और वस्तुएं होती हैं ,जो मिलकर ऐसा अद्भुत प्रभाव उत्पन्न करते हैं की यह चमत्कारिक प्रभाव युक्त हो जाती है |[क्षमा के साथ सम्पूर्ण वस्तुओं का नाम नहीं दे सकते क्योकि यह हमारा व्यक्तिगत शोध है ]|
                     यह सभी वस्तुएं विशिष्ट उच्च स्तर के साधक द्वारा विशिष्ट मुहूर्त में प्राण-प्रतिष्ठित और अभिमंत्रित होती हैं ,जबकि उपयोग किये गए सामान भी विशिष्ट मुहूर्त में ही विशिष्ट तांत्रिक पद्धति से निष्कासित और प्राप्त किये हुए होते हैं |उपरोक्त वस्तुओं की उपयुक्त और विशिष्ट मुहूर्त में विशिष्ट तांत्रिक साधक द्वारा की गयी तांत्रिक क्रिया के बल पर यह गुटिका अति शक्तिशाली वशिकारक-आकर्षक -सुरक्षाप्रदायक ,धन-संमृद्धि प्रदायक हो जाती है |इससे निकलने वाली तरंगे साथ रखने वाले धारक के साथ साथ ही आसपास के लोगों को भी प्रभावित करती है, जिससे धारक को उपरोक्त लाभ मिलने लगते हैं |इस गुटिका की एक विशेषता है की यह आपके घर की या आपकी नकारात्मक ऊर्जा को सामने ला देती है |यदि आप किसी नकारात्मक प्रभाव से ग्रस्त हैं तो वह कुछ दिक्कतें उत्पन्न कर सकती हैं ,क्योकि उन्हें यह महसूस होता है की उन्हें निकाला या हटाया जा रहा है ,इसलिए शुरू के कुछ समय वह उत्पात मचा सकते हैं जिससे आप यह सोचें की यह सब इस गुटिका के कारण हो रहा है |यदि कुछ समय धैर्य से निकल गया तो सारी परिस्थितियां नियंत्रण में आ जाती हैं |
                      इसमें उपयोग की गयी हत्थाजोड़ी में माता चामुंडा का वास माना जाता है |इस जड़ी का सर्वाधिक प्रभाव इसकी सम्मोहंनशीलता है | साधक [व्यक्ति] इसे लेकर कही भी जाये उसका विरोध नहीं होगा |सम्बंधित मनुष्य उसके अनुकूल आचरण और व्यवहार करेगा |इस जड़ी के इसी गुण [सम्मोहनशीलता ]के कारण ही बहुत से लोग इसका प्रयोग प्रेम सम्बन्धी मामलों में भी करते हैं ,,|पति-पत्नी के मामलों में यह अत्यंत उपयोगी भी है और सदुपयोग भी |सम्मोहन और वशीकरण [आकर्षण ]के अतिरिक्त इसका प्रयोग धन वृद्धि ,सुरक्षा ,सौभाग्य वृद्धि ,व्यापार बाधा हटाने आदि में भी किया जाता है और बेहद प्रभावी भी है | इसकी सम्पूर्ण विधि पूर्वक प्राण-प्रतिष्ठा इसे अमूल्य बना देती है |धारक या साधक यात्रा ,विवाद ,प्रतियोगिता ,साक्षात्कार ,द्युतक्रीडा ,और युद्धादी में यह साधक की रक्षा करके उसे विजय प्रदान करती है |भूत-प्रेत आदि वायव्य बाधाओं का उसे कोई भय नहीं रहता ,धन-संपत्ति देने में भी यह बहुत चमत्कारी सिद्ध होती है |इस पर विभिन्न प्रकार के वशीकरण-आकर्षण-सम्मोहन के प्रयोग किये जाते हैं ,विदेश यात्रा की रुकावटें दूर करने की क्रियाएं होती हैं ,घर की सुरक्षा की क्रियाएं होती हैं ,धन-संपत्ति-आकस्मिक लाभ सम्बन्धी क्रियाएं होती हैं ,व्यापार वृद्धि प्रयोग होते हैं ,मुकदमे में विजय ,विरोधियों की पराजय की क्रियाएं होती है ,,इसे जेब में रखा जाये तो सम्मान-सम्मोहंशीलता-प्रभाव बढ़ता है ,सामने के व्यक्ति का वाकस्तम्भन होता है ,आकस्मिक आय के स्रोत बनते हैं
                        दूसरी वस्तु सियार्सिंगी शत्रु पराभव ,सामाजिक सम्मान ,शरीर रक्षा ,श्री समृद्धि ,आकर्षण ,वशीकरण ,सम्मोहन ,धन-सम्पदा ,सुख शान्ति के लिए उपयोग की जा सकती है |किसी शुभ तांत्रिक मुहूर्त में प्राण प्रतिष्ठित और अभिमंत्रित सियारसिंगी वाद-विवाद ,युद्ध ,संकट ,आपदा ,से बचानेवाला भी सिद्ध होता है |यह रक्षा कार्यों में अद्भुत सफलतादायक कहा जाता है |इसे धारण करनेवाला व्यक्ति दुर्घटना ,विवाद ,युद्ध अथवा किसी अन्य संकट में पड़ने पर तुरंत ही आप्दामुक्त हो जाता है |इस पर धन-समृद्धि ,वशीकरण ,सम्मोहन ,सुरक्षा से सम्बंधित विभिन्न क्रियाएं भी होती हैं ,जैसी आवश्यकता हो |केवल मंत्र और पद्धति ही बदलती है सियारसिंगी वही रहता है |इसे रखने वाला व्यक्ति जहाँ भी जाता है वहां का वातावरण उसके अनुकूल हो जाता है | इसी प्रकार इस गुटिका में शामिल २१ वस्तुओं में से हर वस्तु का अपना एक अलग और विशिष्ट बहुआयामी प्रभाव है |इनके बारे में लिखने पर कई पोस्ट कम हो जायेंगे |वैसे भी यह हमारे गोपनीय खोज हैं अतः सभी वस्तुओं और उनके प्रभावों के बारे में बता पाना भी संभव नहीं |
                     प्रतिदिन प्रातः काल स्नानादि के बाद ,अपने ईष्ट पूजा के साथ ही इस गुटिका /डिब्बी को भी भगवती स्वरुप मानकर पूजा कर दिया जाता है |धुप-दीप के साथ ,इसके साथ ही इस पर सिन्दूर और लौंग भी चढ़ाया जाता है |फिर इसे बंद करके इसे जेब में रख के कार्य व्यवसाय पर भी जाया जा सकता है और पूजा स्थान पर भी रहने दिया जा सकता है |यदि कार्य व्यवसाय पर साथ ले जाते हैं तो लाभ तो अधिक होता है पर थोड़ी पवित्रता का ध्यान रखना होता है ,अपवित्र हाथों से इसे न छुआ जाए और अशुद्ध और अपवित्र अथवा सूतक वाले स्थानों पर इसे न ले जाएँ |शाम को घर आने पर इसे वापस पूजा स्थान पर रख दें |इस पर यदि “ॐ नमश्चंडिकाये नमः ” मंत्र का जप रोज १०८ बार किया जाए तो इसका पूर्ण प्रभाव मिलता है |
                          इस गुटिका/डिब्बी के उपयोग से धन वृद्धि ,सम्मोहन ,वशीकरण ,वायव्य बाधाओं से सुरक्षा ,शत्रुओं से सुरक्षा ,अभिचार कर्म से सुरक्षा ,संपत्ति संवर्धन ,यात्रा में सुरक्षा ,विवाद-प्रतियोगिता में सफ़लता ,साक्षात्कार में सफ़लता ,द्युतक्रीडा -शेयर -सट्टा -लाटरी -कमोडिटी के कार्यों में सफलता ,शत्रु से अथवा मुकदमे में विजय ,अधिकारी का अनुकूलन -वशीकरण ,गृह दोष-वास्तु दोष का शमन ,गृह कलह का शमन ,ग्रह बाधा-अशुभत की समाप्ति ,प्रियजनों का अनुकूलन-वशीकरण किया जा सकता है |इसके अतिरिक्त भी यह गुटिका के अनेकानेक और विशिष्ट उपयोग हैं ,जिनके लिए विविध प्रकार की क्रियाएं की जा सकती है ,इसकी क्षमता की कोई सीमा नहीं है ,उद्देश्य के अनुसार भिन्न क्रियाएं विभिन्न मनोकामनाएं पूर्ण कर सकती हैं |यह गुटिका हमारे वर्षों के tantra क्षेत्र में शोध का परिणाम है और इसके परिणाम अनुभूत हैं |………………….हर-हर महादेव 
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  • मृतसंजीवनी यन्त्र /कवच :: मृत्यु जब निश्चित लगे

    मृत संजीवनी यन्त्र ::मृत्यु जब समीप हो
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    मृत संजीवनी मंत्र साधना में मृत संजीवनी यन्त्र का प्रयोग किया जाता है और प्रतिदिन इसकी पूजा विधिवत की जाती है |इसके बाद मंत्र जप होता है |मृत संजीवनी मंत्र के साधक इसे स्वतंत्र रूप से भी मृत्यु के समीप पहुँच रहे व्यक्ति के लिए बनाते हैं और अभिमंत्रित कर धारण कराते हैं |कैंसर ,ह्रदय रोग ,एड्स ,गंभीर दुर्घटना ,ह्रदय की खराबी ,किडनी की खराबी ,मश्तिश्काघात आदि जैसी बीमारियों अथवा जब भी मृत्यु की संभावना बन रही हो इसका प्रयोग किया जाता है |आज के समय में मृत संजीवनी विद्या से भी मृत को जीवित करने की क्षमता रखने वाला साधक मिलना बेहद मुश्किल है ,यद्यपि असंभव कुछ भी नहीं और अपवाद हमेशा उपलब्ध होता है पर जिनके पास यह क्षमता हो वह आज के समय में सामाजिक रूप से सक्रीय होगा ,कहना मुश्किल है |अतः मृत्यु समीप वाले पर ही इसका प्रयोग अधिक उपयुक्त है और ऐसे व्यक्ति को धारण कराने से दो तरह की क्रिया होती है |एक तो उसकी प्राण शक्ति बढ़ जाती है गायत्री के प्रभाव से ,दुसरे आसन्न मृत्यु को टाला जा सकता है महामृत्युंजय भगवान् शिव के प्रभाव से |अतः जब भी किसी की मृत्यु की आशंका समीप हो उसे मृत संजीवनी यन्त्र कम से कम २१००० मन्त्रों से अभिमंत्रित करके धारण कराना चाहिए |
    आध्यात्म विज्ञान के अनुसार संजीवनी मंत्र के जाप से व्यक्ति में बहुत अधिक मात्रा में ऊर्जा पैदा होती है जिसे हर व्यक्ति सहन नहीं कर सकता। नतीजतन आदमी कुछ सौ जाप करने में ही पागल हो जाता है या तो उसकी मृत्यु हो जाती है। इसे गुरू के सान्निध्य में सीखा जाता है और धीरे-धीरे अभ्यास के साथ बढ़ाया जाता है। इसके साथ कुछ विशेष प्राणायाम और अन्य यौगिक क्रियाएं भी सिखनी होती है ताकि मंत्र से पैदा हुई असीम ऊर्जा को संभाला जा सके। इसीलिए इन सभी चीजों से बचने के लिए इस मंत्र की साधना किसी अनुभवी गुरू के दिशा- निर्देश में ही करनी चाहिए।
    इस यन्त्र का प्रयोग केवल विशिष्ट परिस्थितियों में ही किया जा सकता है जबकि मृत्यु से बचने का कोई अन्य विकल्प न सूझे |यह बेहद तीव्र उपाय है और बेहद पवित्र भी |इसके साथ सावधानियां भी रखनी होती हैं |संजीवनी यन्त्र का निर्माण या तो इसके साधक से हो या कम से कम जिसे कोई उग्र महाविद्या सिद्ध हो उसके द्वारा हो |न तो सामान्य साधक इसे उर्जीकृत कर पायेगा और ही पर्याप्त तंत्रोक्त पद्धति का पालन ही कर पायेगा |…………………………………………..हर-हर महादेव 

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  • सभी तरह के उपाय असफल हों तब प्रयोग करें दिव्य गुटिका /डिब्बी

    जब सब उपाय करके थक जाएँ तब आजमायें दिव्य डिब्बी /गुटिका
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                       समस्या कोई भी हो ,ग्रह बाधा हो ,भाग्यावरोध हो ,वास्तु दोष हो ,स्थान दोष हो ,किये कराये की समस्या हो ,भूत प्रेत की समस्या हो ,नकारात्मक ऊर्जा या शक्ति की समस्या
    हो ,कुलदेवता देवी का पता हो ,कुलदेवता /देवी रुष्ट /क्रोधित हों ,पित्र असंतुष्ट हों ,पित्र शान्ति
    के अनेक उपाय करने /करवाने पर भी कोई अंतर समझ रहा हो ,कालसर्प अथवा मांगलिक दोष आदि ज्योतिषीय दोषों के सभी उपाय करने पर भी कोई विशेष अंतर समझ रह हो और दोषों से सम्बन्धित कष्ट सामने रहे हों |अकाल मृत्यु प्राप्त आत्माओं की समस्या हो ,पारिवारिक समस्या
    हो ,पारिवारिक विघटन हो ,पत्नी पत्नी अथवा परिवार
    के लोगों के बीच लगातार
    कलह ,अनबन का माहौल रहता हो ,आर्थिक
    समस्या हो ,आय व्यय असंतुलन हो ,किसी बाधा के कारण उन्नति
    नहीं हो रही हो ,कार्यों में रुकावट रही हो ,बीमार हों पर रोग का पता चल रहा हो ,गंभीर असाध्य रोग से पीड़ित हों ,बार बार दुर्घटनाओं ,हानि आदि से परेशान हो ,अशांति
    तनाव चिंता हो ,भविष्य असुरक्षित लग रहा हो ,हीन भावना से ग्रस्त हों ,पूजा पाठ असफल हो रहे हों ,उपाय पर उपाय करने पर भी परिणाम
    मिल रहे हों ,उपायों से विश्वास उठ गया हो ,उपाय पर उपाय करके इतना व्यतिक्रम उत्पन्न कर लिया हो की ज्योतिषी की भविष्यवाणी सही उतर रही हो ,नकारात्मक शक्तियों का ऐसा प्रभाव हो की जो भाग्य कुंडली बता रही हो वह मिल रहा हो ,सब तरफ से निराश हो कष्ट दुःख को ही अपनी नियति मान लिए हों जबकि कुंडली में ऐसा हो ,तब ………..जबकि आप बिलकुल
    हताश हो जाएँ तब आजमायें चमत्कारी दिव्य गुटिका /डिब्बी |
                      यह कोई विशेष या एक प्रयोग
    नहीं अपितु अनेकानेक प्रयोगों का आधार है |यहाँ सबकुछ आपको ही करना होगा |किसी पंडित ,ज्योतिषी ,तांत्रिक ,कर्मकांडी की जरूरत है आपको उनकी सहायता से कुछ करना /करवाना है |सबकुछ खुद ही करना होगा और आधार होगा दिव्य डिब्बी ,जिसपर आपको अपनी समस्या के अनुसार प्रयोग /उपाय /पूजा करना होगा |एक समस्या हल हुई आप दुसरे के लिए इसी पर प्रयोग शुरू करेंगे |आधार एक ही रहेगा प्रयोग बदलते रहेंगे उपरोक्त कोई भी समस्या हो |सबकुछ आप करेंगे और परिणाम आपको दिखेगा
    /मिलेगा |इसका प्रयोग तब करेंगे जब और कोई भी उपाय कर रहे हों और सबसे निराश हों |यह एक ऊर्जा पुंज है जिसे आपको दिशा देनी है अपनी समस्या की ओर |दिव्य डिब्बी में चामुंडा /काली /दुर्गा /लक्ष्मी /गणेश आदि तांत्रिक शक्तियों की स्थापना की गयी होती है और यह शुद्ध तांत्रिक दुर्लभ वस्तुओं का संग्रह
    है |इसके निर्माण का उद्देश्य सभी तरह की समस्याओं से मुक्ति पाना ,दैवीय शक्ति को घर में और खुद में प्राप्त करना ,बिन किसी का सहारा लिए अपनी समस्या दैवीय कृपा से हल करना है |यह उन सभी समान्य लोगों के लिए है जो भिन्न भिन्न समस्याओं से पीड़ित हैं तथा जिनको किसी दुसरे द्वारा
    किये उपायों
    से लाभ नहीं मिल पा रहा |यह हमारा व्यक्तिगत शोध है जो ३५ वर्ष के तंत्र जीवन के अनुभव पर हमने निर्मित किया है |इसमें हमने ऐसे दुर्लभ तांत्रिक वस्तुओं और वनस्पतियों ,जड़ी बूटियों को एक साथ सम्मिलित किया है जो लगभग उपरोक्त सभी समस्याएं हल कर सकें और ऐसी ऊर्जा उत्पन्न करें की हर बाधा से मुक्त हो व्यक्ति को उसके भाग्य का पूरा मिल सके |
                        इस चमत्कारी डिब्बी
    में जो वस्तुएं, जड़ी बूटियां ,पदार्थ हमने सम्मिलित की हैं वह विभिन्न महाशक्तियों का प्रतिनिधित्व करती हैं तथा जिनके विशेषता के बारे में तंत्र शास्त्र ,ज्योतिष शास्त्र हजारों
    वर्षों से कहता आया है ,मान्यता देता आया है ,जिनका प्रयोग हजारों
    वर्षों से विभिन्न लाभों के लिए ,भिन्न समस्याओं निदान के लिए करता आया है |इन वस्तुओं में दक्षिणावर्ती शंख ,गोमती चक्र ,पीली कौड़ी ,स्फटिक ,हत्था जोड़ी ,सियारसिंगी ,रुद्राक्ष ,अपराजिता मूल ,नागदौन
    मूल ,श्वेतार्क मूल ,गुडमार
    मूल ,हरसिंगार मूल ,औदुम्बर मूल ,महायोगेश्वरी मूल ,निर्गुन्डी मूल ,श्वेत गूंजा ,अमरबेल
    मूल ,एरंड मूल के साथ सात अन्य विशिष्ट वस्तुएं होती हैं |सभी के नाम हम नहीं लिख पा रहे क्योंकि इससे हमारी व्यक्तिगत खोज और गोपनीय अनुसंधान के सार्वजनिक होने पर हमें आर्थिक नुकसान
    भी होगा और हमारा विशेषाधिकार भी प्रभावित होगा |इसका लोग व्यावसायिक उपयोग कर सकते हैं अथवा इसका दुरुपयोग कर सकते हैं ,चुकी यह सभी षट्कर्म मारण ,मोहन ,उच्चाटन ,वशीकरण ,आकर्षण ,शांति कर्म के उद्देश्य पूर्ण करता है | शुरू में हमने इस दिव्य गुटिका
    /डिब्बी में २१ वस्तुओं का संग्रह
    रखा था जिनमे अब अन्य वस्तुएं मिलाकर
    २५ कर दिया गया है |इनसे इसकी उपयोगिता और शक्ति और भी अधिक बढ़ गयी है |यहाँ हम इस डिब्बी की समग्र विशिष्टता लिख रहे ,वस्तुओं की अलग से विशिष्टता जानने के लिए हमारा पूर्व का लेख कैसे चमत्कारी है दिव्य गुटिका /डिब्बी देखें |इस लेख में हम इसका कोई प्रयोग
    भी नहीं दे पा रहे चूंकि लेख बहुत लंबा हो जाएगा |इसके कहाँ कहाँ ,कैसे प्रयोग हो सकते हैं यह जानने के लिए हमारा पूर्व का लेख कहाँ ,कैसे ,कब प्रयोग कर सकते हैं दिव्य गुटिका /डिब्बी देखें |
                         इस गुटिका/डिब्बी
    के उपयोग से धन वृद्धि ,सम्मोहन ,वशीकरण ,वायव्य बाधाओं से सुरक्षा ,शत्रुओं से सुरक्षा ,अभिचार कर्म से सुरक्षा ,संपत्ति संवर्धन ,यात्रा में सुरक्षा ,विवादप्रतियोगिता में सफ़लता ,साक्षात्कार में सफ़लता ,द्युतक्रीडा –शेयर –सट्टा –लाटरी –कमोडिटी के कार्यों में सफलता ,आकस्मिक आय स्रोतों में वृद्धि ,सेल्स मार्केटिंग के कार्यों में सफलता ,घर मकान दूकान के बंधन /तंत्र क्रिया की रोकथाम ,शत्रु से अथवा मुकदमे में विजय ,अधिकारी का अनुकूलन –वशीकरण ,गृह दोषवास्तु दोष का शमन ,जमीन के नीचे की नकारात्मक ऊर्जा शमन ,मकान दूकान व्यावसायिक प्रतिष्ठान की नकारात्मक ऊर्जा या शक्ति का शमन ,गृह कलह का शमन ,ग्रह बाधाअशुभत की समाप्ति ,प्रियजनों का अनुकूलनवशीकरण ,कुलदेवता /देवी की संतुष्टि /प्रसन्नता ,पित्र दोष की शान्ति ,अकाल मृत आत्मा के कष्ट से बचाव ,तांत्रिक अभिचार
    से बचाव ,किये कराये से बचाव ,कालसर्प मांगलिक दोष आदि ग्रह दोषों के दुष्प्रभाव से बचाव ,उन्नति अथवा भाग्य में रही बाधा का शमन किया जा सकता है |किन्ही कारणों
    से पूजा पाठ के परिणाम मिल रहे हों ,घर परिवार में किसी अदृश्य शक्ति का वास हो जो दिक्कत बाधाएं खड़ा कर रहा हो तो उनका भी शमन होता है |नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव से घर परिवार में बीमारियाँ ,दुर्घटनाएं ,अकाल मौतें हो रही हों तो उनकी भी रोकथाम होती है |इसके अतिरिक्त भी यह गुटिका के अनेकानेक और विशिष्ट उपयोग हैं ,जिनके लिए विविध प्रकार की क्रियाएं की जा सकती है ,इसकी क्षमता की कोई सीमा नहीं है ,उद्देश्य के अनुसार भिन्न क्रियाएं विभिन्न मनोकामनाएं पूर्ण कर सकती हैं |यह नैसर्गिक रूप से सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों पर प्रतिक्रया करती है ,चूंकि यह दैवीय शक्ति से सम्पन्न होती है |इससे नकारात्मक उर्जाओं को कष्ट होता है |बहुत तीव्र शक्ति की किसी नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव होने पर इस पर विशेष क्रिया और प्रयोग
    करने हो जाते हैं अन्यथा
    यह सामान्य नकारात्मक प्रभाव
    अपने आप हटाने लगती है |
                  दिव्य गुटिका /डिब्बी पर हम दर्जनों लेख लिख चुके हैं और इस पर किये जाने वाले लगभग २५ तरह के प्रयोग भी हम प्रकाशित कर चुके हैं अपने ब्लागों पर |अलग अलग समस्याओं के लिए अलग अलग प्रयोग ,पद्धति और मंत्र हमने लिखे हैं जिन्हें करके विभिन्न समस्याओं में लाभान्वित हुआ जा सकता है |इतना अवश्य है जो दूसरों
    के सहारे सुखी होना चाहते हों ,जो दूसरों की सहायता से अपना कष्ट हटाना चाहते हों ,जो खुद कुछ करना चाहें ,जो खुद में ईश्वरीय शक्ति की चाहत रखते हों ,जो स्थायी समाधान
    के इच्छुक
    हों उनके लिए यह डिब्बी
    नहीं है ,क्योंकि इस पर पूजा पाठ प्रयोग अनुष्ठान खुद ही करने होंगे |जो लाभ मिलेंगे खुद को मिलेंगे और जो होगा स्थायी होगा |इतनी आपकी क्षमता उतना आप पा सकते हैं |यह तांत्रिक डिब्बी
    है जिसमे स्थापित शक्तियाँ बहुत तीव्र और उच्च स्तर की हैं किन्तु इनके प्रयोग
    सामान्य जन के अनुकूल रखे गए हैं ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें |
               तो यदि आप सचमुच परेशान हैं और हर तरह के उपाय से ,पूजा पाठ से ,अनुष्ठान शान्ति आदि से निराश हो चुके हैं तो एक बार इस दिव्य डिब्बी का उपयोग अवश्य करें |एक बार आपका खर्च तो जरुर होगा चूंकि यह एक मूल्यवान संग्रह है और इसमें संगृहीत वस्तुएं दुर्लभ
    मूल्यवान तो होती ही हैं साथ ही इसके निर्माण पर भी बहुत श्रम ,समय ,मूल्य आता है ,,किन्तु यह आपको बार बार विभिन्न समस्याओं /उपायों पर होने वाले खर्च से भी बचाएगा ,आपको लाभ भी खुद को देगा और साथ ही आपकी शक्ति बढाते हुए आपको ही सक्षम बना देगा जिससे आपमें ईश्वरीय ऊर्जा सके |………………………………………………….हर हर महादेव

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  • जीवन के सभी समस्याओं में उपयोगी है दिव्य गुटिका /डिब्बी

    जीवन की सभी समस्याओं का निदान है दिव्य डिब्बी
    /गुटिका में
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          वर्षों वर्ष लोगों की समस्याएं देखते हुए ,उनका पारंपरिक ज्योतिषीय और तांत्रिक निदान बताते हुए हमेशा से हमारे दिमाग में एक बात उभरती रही की ऐसा कुछ हो जो लोगों की सभी समस्याओं का निदान कर सके |भिन्न भिन्न समस्याओं के लिए लोगों को अलग अलग देवी देवता पूजने पड़ें ,अलग अलग उपचार और उपाय समय समय पर करने पड़ें ,किसी समया के लिए बार बार तांत्रिक ,पंडित को खोजना पड़े |कुछ ऐसा हो जो प्रबल शक्तिशाली हो जो तीब्र शक्ति उत्पन्न करे और जो कहीं भी कभी भी ले आया ले जाया जा सके |जो साथ में भी रखा जा सके और जिसे मन्दिर में भी स्थापित किया जा सके |कुछ ऐसा मिले जिससे उत्पन्न ऊर्जा महाशक्तियों का प्रतिनिधित्व करे |जो जीवन की ग्रहों से उत्पन्न समस्याओं से लेकर भूत प्रेत अभिचार तक की मानवीय समस्याओं तक का निदान करने में सक्षम हो |इस हेतु हम लगातार कई वर्षों तक खोज करते रहे और तंत्र की दुर्लभ
    वस्तुओं के एकल और सामूहिक प्रयोग करते रहे ,उनके परिणाम देखते रहे |कई वर्ष के खोज पर हमने विभिन्न तांत्रिक विशिष्ट वस्तुओं ,दुर्लभ तांत्रिक वनस्पतियों ,जड़ी बूटियों को क्रमशः समय समय पर उनके लिए निर्दिष्ट विशिष्ट समय नक्षत्र मुहूर्त में निष्कासित ,प्राण प्रतिष्ठित किया |इसके बाद इन्हें एक साथ मिलाकर एक डिब्बी में एकत्रकर महाविद्या काली के मन्त्रों से अभिमंत्रित किया |निर्मित डिब्बी/गुटिका को हमने चमत्कारी दिव्य गुटिका /डिब्बी नाम दिया ,क्योंकि इससे उत्पन्न ऊर्जा दिव्य ,शक्तिशाली ,चमत्कार करने वाली और जीवन में प्रत्येक क्षेत्र को प्रभावित करने वाली हुई |
              हमारे पास आने वाले अधिकतर लोगों की समस्याएं घर परिवार
    व्यक्ति को प्रभावित कर रही विभिन्न प्रकार की नकारात्मक शक्तियों से सम्बन्धित होती हैं ,जिनमे ग्रहों से उत्पन्न नकारात्मक प्रभाव
    ,वायव्य अथवा भूत प्रेत के प्रभाव ,स्थान दोष ,जमीन मकान के नीचे दबे नकारात्मक शक्ति के प्रभाव ,ब्रहम सती जिन्न खबीस आदि उत्पन्न पीड़ा ,कुलदेवता /देवी की रुष्टता अथवा अनुपस्थिति से उत्पन्न नकारात्मक प्रभाव
    ,ईष्ट अथवा किसी देवता की रुष्टता आदि के होते हैं |अतः सबसे अधिक प्रयास हमारा रहा की हमारी डिब्बी की अवयवों
    में वह वस्तु अधिक हो जो इन नकारात्मक शक्तियों के प्रभाव को कम कर सके ,इनकी पीड़ा कम कर सके ,देवी देवता की रुष्टता कम कर उन्हें संतुष्टि दे तथा ऐसे ऊर्जा उत्पन्न करे जिससे नकारात्मक शक्तिया ,उर्जाये घर परिवार
    व्यक्ति से दूर हों |हमसे सम्पर्क करने वाले लोगों में दुसरे सबसे अधिक लोगों की संख्या
    पारिवारिक विवाद ,कलह ,दाम्पत्य बाधा ,संतति बाधा ,संतति दोष आदि की रही है |इनके बाद आर्थिक समस्याओं को लेकर लोग अधिक मिलते हैं |इन सभी मूल समस्याओं को लेकर एक साथ संतुलित करने के प्रयास में हमने यह डिब्बी निर्मित की है जिसके हर क्षेत्र में उत्तम परिणाम प्राप्त हुए हैं |यह डिब्बी प्राण प्रतिष्ठित होती है और इसमें देवी शक्ति को स्थापित किया गया होता है जिससे इसी पूजा रोज हर हाल में चाहिए होती है किसी प्राण प्रतिष्ठित मूर्ती की तरह |इसके बाद अगर कोई विशेष उद्देश्य नहीं है तो मात्र सामान्य पूजा से यह जीवन के हर क्षेत्र में क्रिया करता और लाभ देता है |विशेष उद्देश्य होने पर उस उद्देश्य के अनुसार मंत्र और पद्धति के साथ पूजन करने से वह उद्देश्य विशेष रूप से पूर्ण होता है ,साथ ही अन्य क्षेत्र के लाभ तो मिलते ही हैं |उदेश्य विशेष के अनेक विषयों
    पर प्रयोग
    और पद्धति
    हमने अपने blog पर पोस्ट किये हैं जिससे इन्हें कहीं खोजना हो धारक को |
        इस चमत्कारी डिब्बी
    में जो वस्तुएं, जड़ी बूटियां ,पदार्थ हमने सम्मिलित की हैं वह विभिन्न महाशक्तियों का प्रतिनिधित्व करती हैं तथा जिनके विशेषता के बारे में तंत्र शास्त्र ,ज्योतिष शास्त्र हजारों
    वर्षों से कहता आया है ,मान्यता देता आया है ,जिनका प्रयोग हजारों
    वर्षों से विभिन्न लाभों के लिए ,भिन्न समस्याओं निदान के लिए करता आया है |इन वस्तुओं में दक्षिणावर्ती शंख ,गोमती चक्र ,पीली कौड़ी ,स्फटिक ,हत्था जोड़ी ,सियारसिंगी ,रुद्राक्ष ,अपराजिता मूल ,नागदौन
    मूल ,श्वेतार्क मूल ,गुडमार
    मूल ,हरसिंगार मूल ,औदुम्बर मूल ,महायोगेश्वरी मूल ,निर्गुन्डी मूल ,श्वेत गूंजा ,अमरबेल
    मूल ,एरंड मूल के साथ सात अन्य विशिष्ट वस्तुएं होती हैं |सभी के नाम हम नहीं लिख पा रहे क्योंकि इससे हमारी व्यक्तिगत खोज और गोपनीय अनुसंधान के सार्वजनिक होने पर हमें आर्थिक नुकसान
    भी होगा और हमारा विशेषाधिकार भी प्रभावित होगा |इसका लोग व्यावसायिक उपयोग कर सकते हैं अथवा इसका दुरुपयोग कर सकते हैं ,चुकी यह सभी षट्कर्म मारण ,मोहन ,उच्चाटन ,वशीकरण ,आकर्षण ,शांति कर्म के उद्देश्य पूर्ण करता है | शुरू में हमने इस दिव्य गुटिका
    /डिब्बी में २१ वस्तुओं का संग्रह
    रखा था जिनमे अब अन्य वस्तुएं मिलाकर
    २५ कर दिया गया है |इनसे इसकी उपयोगिता और शक्ति और भी अधिक बढ़ गयी है |यहाँ हम इस डिब्बी की समग्र विशिष्टता लिख रहे ,वस्तुओं की अलग से विशिष्टता जानने के लिए हमारा पूर्व का लेख कैसे चमत्कारी है दिव्य गुटिका /डिब्बी देखें |इस लेख में हम इसका कोई प्रयोग
    भी नहीं दे पा रहे चूंकि लेख बहुत लंबा हो जाएगा |इसके कहाँ कहाँ ,कैसे प्रयोग हो सकते हैं यह जानने के लिए हमारा पूर्व का लेख कहाँ ,कैसे ,कब प्रयोग कर सकते हैं दिव्य गुटिका /डिब्बी देखें |
              इस डिब्बी पर हमने विभिन्न समस्याओं पर लगभग २५ साधना और प्रयोग अपने डिब्बी
    /गुटिका धारकों के लिए लिखे हैं ,जो हमारे blog पर प्रकाशित हैं ताकि डिब्बी /धारक को कहीं भटकना पड़े और उन्हें जब ,जैसी समस्या आये वह अपने घर में राखी डिब्बी पर ही समस्या से सम्बन्धित प्रयोग कर अपनी समस्या से मुक्त हो सकें |हमने इस पर जीवन बदलने और संघर्ष
    के दिन समाप्त करने के लिए प्रयोग प्रकाशित किया है |,महालक्ष्मी की कृपा प्राप्ति के लिए होली का अलग और दीपावली का अलग प्रयोग प्रकाशित किया है |पति वशीकरण ,सर्वजन वशीकरण ,पत्नी प्रेमिका वशीकरण
    ,सर्व जन आकर्षण
    ,त्रैलोक्य मोहन ,विशिष्ट व्यक्ति आकर्षण ,शेयर सट्टा– लाटरी कमोडिटी सफलता ,नकारात्मक ऊर्जा /शक्ति हटाने ,भूत प्रेत अभिचार हटाने जैसे विषयों पर अनेक प्रयोग हमने पोस्ट किये हैं |यह गुटिका
    जीवन के हर क्षेत्र की समस्या से मुक्ति
    दिलाने में सक्षम है |इससे अनेक और कठिन उद्देश्य पूर्ण किये जा सकते हैं बस प्रक्रिया और पद्धति बदल कर जबकि गुटिका या डिब्बी वही रहती है |यह गुटिका या डिब्बी लोगों के लगभग सभी वह कार्य पूर्ण करती है जिसके लिए अलग अलग पूजा जप तप करना पड़ता है या ताबीज कवच जड़ी आदि धारण करना पड़ता है |इसमें सम्मिलित सभी महत्वपूर्ण मूल और वनस्पतियाँ तंत्र के सबसे महत्वपूर्ण और वर्ष के एक दिन ही उपलब्ध
    योग रविपुष्य योग में ही निकाली ,प्राण प्रतिष्ठित और अभिमंत्रित होती हैं |अन्य वस्तुएं भी रविपुष्य योग में ही विशेष तांत्रिक पद्धति से प्राण प्रतिष्ठित और अभिमंत्रित होती हैं जिससे इनके गुण कई गुना बढ़ जाते हैं |इसलिए यह गुटिका जहाँ भी रखी जाती है इसकी प्रतिक्रिया शुरू हो जाती है वहां की नकारात्मक उर्जाओं पर |केवल सामान्य पूजा मात्र भी इसका उत्तम लाभ दिलाती है जबकि यदि ठीक से पूजा और मंत्र जप किया जाए तो लक्षित
    उद्देश्य की पूर्ती संभव हो जाती है |
           इस गुटिका/डिब्बी
    के उपयोग से धन वृद्धि ,सम्मोहन ,वशीकरण ,वायव्य बाधाओं से सुरक्षा ,शत्रुओं से सुरक्षा ,अभिचार कर्म से सुरक्षा ,संपत्ति संवर्धन ,यात्रा में सुरक्षा ,विवादप्रतियोगिता में सफ़लता ,साक्षात्कार में सफ़लता ,द्युतक्रीडा –शेयर –सट्टा –लाटरी –कमोडिटी के कार्यों में सफलता ,आकस्मिक आय स्रोतों में वृद्धि ,सेल्स मार्केटिंग के कार्यों में सफलता ,घर मकान दूकान के बंधन /तंत्र क्रिया की रोकथाम ,शत्रु से अथवा मुकदमे में विजय ,अधिकारी का अनुकूलन –वशीकरण ,गृह दोषवास्तु दोष का शमन ,जमीन के नीचे की नकारात्मक ऊर्जा शमन ,मकान दूकान व्यावसायिक प्रतिष्ठान की नकारात्मक ऊर्जा या शक्ति का शमन ,गृह कलह का शमन ,ग्रह बाधाअशुभत की समाप्ति ,प्रियजनों का अनुकूलनवशीकरण किया जा सकता है |इसके अतिरिक्त भी यह गुटिका के अनेकानेक और विशिष्ट उपयोग हैं ,जिनके लिए विविध प्रकार की क्रियाएं की जा सकती है ,इसकी क्षमता की कोई सीमा नहीं है ,उद्देश्य के अनुसार भिन्न क्रियाएं विभिन्न मनोकामनाएं पूर्ण कर सकती हैं |यह नैसर्गिक रूप से सभी प्रकार
    की नकारात्मक शक्तियों पर प्रतिक्रया करती है ,चूंकि यह दैवीय शक्ति से सम्पन्न होती है |इससे नकारात्मक उर्जाओं को कष्ट होता है |बहुत तीव्र शक्ति की किसी नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव होने पर इस पर विशेष क्रिया और प्रयोग
    करने हो जाते हैं अन्यथा
    यह सामान्य नकारात्मक प्रभाव
    अपने आप हटाने लगती है |यह भाग्यावरोध दूर कर ,ग्रहों
    के दुष्प्रभाव रोककर व्यक्ति के भाग्य अनुसार परिणाम दिलाने
    में सहायक होती है |
         इस डिब्बी में सम्मिलित वस्तुएं दुकानों में बहुत मूल्यवान नहीं अगर मिल जाएँ तो ,किन्तु
    दुर्लभ होने से शुद्ध ,सही मिलती नहीं जिससे यह बहुमूल्य हो जाती हैं |इसके बाद इनका इनके लिए वर्ष में निश्चित विशेष मुहूर्त में तंत्रोक्त विधि से निष्कासन और प्राण प्रतिष्ठा इसे अमूल्य
    बना देती है ,क्योंकि अगर दुकानों में कोई वस्तु मिल भी जाती है तो वह तांत्रिक प्रयोग
    के लिए कोई महत्त्व नहीं रखती जब तक की उसका निश्चित मुहूर्त में ,निश्चित तंत्रोक्त विधि से निष्कासन और प्राण प्रतिष्ठा हो |प्राण प्रतिष्ठा के बाद इन्हें सम्मिलित रूप में देवी काली के मंत्र से २१ दिनों तक अभिमन्त्रण इसे ऐसा बना देती है जिसको कोई मूल्य नहीं दिया जा सकता |यह सब क्रियाएं विशेष तांत्रिक दक्षता के साथ श्रम और समय की मांग करती हैं जिसके लिए पूर वर्ष प्रयास करना होता है की किस मुहूर्त में कौन सी वस्तु को निकालना है अथवा लाना है ,उसकी क्या पद्धति है |कौन वनस्पति वस्तु कहाँ उपलब्ध
    है खोज कर रखना होता है |इसके बाद निश्चित दिन लेकर तांत्रिक विधि से विशेष समय में प्राण प्रतिष्ठा
    करके सुरक्ष्तित करते हुए जाना होता है
    |प्राण प्रतिष्ठा के बाद वस्तुओं की नियमित
    पूजा सुनिश्चित करनी होती है |इन्हें फिर आवश्यकतानुसार सम्मिलित रूप में अभिमंत्रित किया जाता है |इस प्रकार
    यह बहुत श्रम और दक्षता
    के बाद तैयार होती है |जब इसे घर दूकान अथवा प्रतिष्ठान में स्थापित कर पूजन शुरू होता है तो यह त्वरित
    रूप से सबसे पहले नकारात्मक ऊर्जाओं को प्रभावित करती है |इसके बाद क्रमशः अन्य सभी क्षेत्रों में इसके प्रभाव शुरू होते हैं तथा जीवन के हर क्षेत्र में यह व्यक्ति के भाग्य में नियत परिणाम
    दिलाने में सहायक होती है |………………………………………………………..हर हर महादेव

    READ MORE: जीवन के सभी समस्याओं में उपयोगी है दिव्य गुटिका /डिब्बी
  • महाकाली महाविजय ताबीज [ कवच ]

    महाकाली महाविजय कवच /ताबीज
    ======================
               भगवती महाकाली दस महाविद्याओ में से एक प्रमुख महाविद्या शक्ति और काली कुल की अधिष्ठात्री है ,जिन्हें सृष्टि की मूल शक्ति कहा जाता है और इन्ही से समस्त महाविद्याओं की उत्पत्ति हुई है |समस्त महाविद्यायें ,समस्त शक्तियां इन्ही का विस्तार और स्वरुप हैं |यह वह मूल विद्या हैं जो इस ब्रह्माण्ड में सबकुछ दे सकने में समर्थ हैं |केवल यही वह महाविद्या हैं हैं जिनको शांत करने के लिए शिव को भी पैरों के नीचे आना पड़ता है |यही वह शक्ति हैं जिनके निकलने पर शिव भी शव हो जाते हैं |इनके बिना किसी शक्ति की उत्पत्ति ही संभव नहीं |जब सारे रास्ते बंद हो जाएँ तब यह एकमात्र शक्ति हैं जो सारे रास्ते खोल सकती हैं |जहाँ सभी महाविद्याओं का किसी कार्य विशेष में प्रभाव कम पड़ता है तब उनके साथ काली को ही संयुक्त करना पड़ता है |इन्ही से सृष्टि उत्पन्न होती है और इन्ही में विलीन हो जाती है |सभी महाविद्याओं का कार्यक्षेत्र सृष्टि उत्पत्ति से पालन और विभिन्न समस्याओं का निवारण तक है किन्तु भगवती काली ही वह हैं जो पुनः उत्पन्न कर सकती हैं ,कर्मानुसार स्थान दे सकती हैं यहाँ तक की केवल यही इस भवसागर से मुक्त भी कर सकती हैं अर्थात केवल यही मोक्ष दे सकती हैं |यही मूलाधार की अधिष्ठात्री हैं जिसके बिना न जीवन उत्पन्न हो सकता है न सृष्टि हो सकती है |इन्ही सब कारणों से तांत्रिक समुदाय में मूल उपास्या यही होती हैं और चाहे वैदिक ग्रन्थ हो ,शास्त्र हों ,तांत्रिक हों ,बौद्ध हों ,जैन हो अथवा कोई भी साधना हो ,पद्धति हो ,शास्त्र हों काली हर जगह उपस्थित होती हैं ,स्वरुप और नाम अलग हो सकता है |
             यह पौराणिक ग्रन्थ मार्कंडेय पुराण के सप्तशती में दुर्गा के स्वरूपों में भी हैं जिन्हें वैष्णव , वैदिक और तांत्रिक सभी मानते हैं ,यह ब्रह्म पुराण के दस महाविद्या में भी हैं जो तंत्र का मूल ग्रन्थ में से एक है ,यह सभी आगमों में भी उपस्थित हैं तो इनके बिना निगम भी अधूरे हैं |इनकी उपस्थिति वेदों में भी है तो ज्योतिष में भी है और तंत्र में तो आवश्यक रूप से हैं ही |अन्य महाविद्यायें अथवा दुर्गा के अन्य स्वरुप एक दुसरे के मूल ग्रंथों में कम मिलते हैं पर काली हर जगह अनिवार्य रूप से होती हैं |इसी से इनके प्रभाव को समझा जा सकता है |इने बिना कुंडलिनी जाग्रत नहीं हो सकती क्योकि कुंडलिनी इन्ही के अधीन और इन्ही के क्षेत्र में होती है |इनकी सक्रियता के बिना न कुंडलिनी सक्रीय हो सकती है न तो जीव ही कार्यरत रह सकता है और न ही वह कोई सृष्टि अर्थात संतान ही उत्पन्न कर सकता है |यही श्यामा रूप में पूजित होती हैं ,यही कामाख्या रूप में पूजित होती हैं ,यही दुर्गा रूप में पूजित होती हैं और यही श्री विद्या रूप में भी पूजित होती हैं |यह श्री विद्या के साथ संयुक्त होने पर श्यामा सुंदरी हो जाती हैं ,और रूद्र के साथ जुडकर रुद्रकाली हो जाती हैं |
               महाकाली यन्त्र माता काली का निवास माना जाता है जिसमे वह अपने अंग विद्याओ ,शक्तियों ,देवों के साथ निवास करती है ,अतः यन्त्र के साथ इन सबका जुड़ाव और सानिध्य प्राप्त होता है ,|त्रिकोण इन्ही का यंत्र है जिसके बिना किसी महाविद्या का यन्त्र नहीं बनता अर्थात यह सभी में आवश्यक रूप से उपस्थित होती हैं | कोई भी त्रिकोण स्वतंत्र रूप से इन्ही को व्यक्त करता है जबकि यही त्रिकोण आपस में संयुक्त होकर अन्य महाविद्याओं को प्रकट करने लगता है |काली यन्त्र के अनेक उपयोग है ,यह धातु अथवा भोजपत्र पर बना हो सकता है ,पूजन में धातु के यन्त्र का ही अधिकतर उपयोग होता है ,पर सिद्ध व्यक्ति से प्राप्त भोजपत्र पर निर्मित यन्त्र बेहद प्रभावकारी होता है ,,धारण हेतु भोजपत्र के यन्त्र को धातु के खोल में बंदकर उपयोग करते है ,,जब व्यक्ति स्वयं साधना करने में सक्षम न हो तो यन्त्र धारण मात्र से उसे समस्त लाभ प्राप्त हो सकते है ,..
              भगवती काली की कृपा से व्यक्ति की सार्वभौम उन्नति होती है ,शत्रु पराजित होते है ,सर्वत्र विजय मिलती है ,मुकदमो में विजय मिलती है ,अधिकारी वर्ग की अनुकूलता प्राप्त होती है ,शत्रु का विनाश होने लगता है ,,ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है ,व्यक्ति के आभामंडल में परिवर्तन होने से लोग आकर्षित होते है ,प्रभावशालिता बढ़ जाती है ,वायव्य बाधाओं से सुरक्षा होती है ,तांत्रिक क्रियाओं के प्रभाव समाप्त हो जाते है ,सम्मान प्राप्त होता है ,वाद-विवाद में सफलता मिलती है ,प्रतियोगिता आदि में सफलता बढ़ जाती है |किसी भी अभिचार का प्रभाव कम हो जाता है |छोटे मोटे टोटके -नजर प्रभावित नहीं कर पाती |आकर्षण -वशीकरण का प्रभाव बढ़ता है |किसी भी साधना -उपासना में होने वाली त्रुटी का दुष्प्रभाव रुकता है |वायव्य आत्माओं और बाधाओं का शरीर पर प्रभाव कम हो जाता है अथवा समाप्त हो जाता है ,,यह समस्त प्रभाव यन्त्र धारण से भी प्राप्त होते है और साधना से भी ,साधना से व्यक्ति में स्वयं यह शक्ति उत्पन्न होती है ,यन्त्र धारण से यन्त्र के कारण यह उत्पन्न होता है ,अतः आज के समय में यह साधना अथवा यन्त्र धारण बेहद उपयोगी है |
               … जो लोग शत्रु-विरोधी से परेशान है ,अधिकारी वर्ग से परेशान है ,वायवीय बाधाओं से परेशान हो ,नवग्रह पीड़ा से पीड़ित हो ,,जिनके कार्य क्षेत्र में खतरे की संभावना हो ,दुर्घटना की संभावना अधिक हो |स्थायित्व का अभाव हो ,बार बार स्थानान्तरण से परेशान हों ,थक से कार्य न कर पाते हों ,ऊर्जा -उत्साह -शक्ति की कमी हो ,जिन्हें बहुत लोगों को नियंत्रित करना हो उनके लिए यह बहुत उपयोगी है |जो लोग बार-बार रोगादि से परेशान हो ,असाध्य और लंबी बीमारी से पीड़ित हो अथवा बीमारी हो किन्तु स्पष्ट कारण न पता हो |कोई अंग ठीक से कार्य न करता हो |स्वास्थ्य कमजोर हो |नपुंसकता हो अथवा स्त्रियों में स्त्री जन्य समस्या हो ,डिम्भ बन्ने में समस्या हो ,कमर -जाँघों -हड्डियों की समस्या हो ,मोटापे से परेशान हों ,आलस्य हो ,कहीं मन न लगता हो ,चिंता ,तनाव ,डिप्रेसन हो ,पूर्णिमा -अमावस्या को डिप्रेसन अथवा मन का विचलन होता हो उन्हें काली यन्त्र धारण करना चाहिए |
               जिन्हें हमेशा बुरा होने की आशंका बनी रहती हो ,खुद अथवा परिवार के अनिष्ट की सम्भावना लगती हो ,अकेले में भय लगता हो अथवा बुरे स्वप्न आते हों ,कभी महसूस हो की कमरे में अथवा साथ में उनके अलावा भी कोई और है किन्तु कोई नजर न आये |कभी लगे कोई छू रहा है अथवा पीड़ित कर रहा है ,कभी कोई आभासी व्यक्ति दिखे अथवा आत्मा परेशान करे |कभी अर्ध स्वप्न में कोई छाती पर बैठ जाए ,लगे कोई गला दबा रहा है |किसी के साथ कोई शारीरिक सम्बन्ध बनाये किन्तु वह दिखाई न दे अथवा स्वप्न या निद्रा में ऐसा हो |बार -बार स्वप्न में कोई स्त्री -पुरुष दिखे जिससे दिक्कत महसूस हो |आय के स्रोतों में उतार-चढ़ाव से परेशान हो ,ऐसा लगता हो की किसी ने कोई अभिचार किया हो सकता है या लगे की कोई अपना या बाहरी अनिष्ट चाहता है तो ऐसे व्यक्तियों को भगवती काली की साधना -आराधना-पूजा करनी चाहिए साथ ही सिद्ध साधक से बनवाकर काली यंत्र चांदी के ताबीज में धारण करना चाहिए |यदि साधना उपासना न कर सकें तो भी कवच अवश्य पहनना चाहिए |
                यन्त्र निर्माण काली साधक द्वारा ही हो सकता है और इसकी शक्ति साधक की शक्ति पर निर्भर करती है |यन्त्र निर्माण के बाद इसकी तंत्रोक्त प्राण प्रतिष्ठा आवश्यक होती है क्योंकि काली तंत्र की शक्ति हैं |इसके बाद इसका अभिमन्त्रण काली के मूल मंत्र से होता है |अभिमन्त्रण बाद हवन आवश्यक होता है |हवन के बाद इसी हवन के धुएं में चांदी के कवच में यन्त्र को भरकर धूपित भी किया जाता है| यहाँ साधक विशेष की जानकारी के अनुसार कवच में काली की ऊर्जा से सम्बन्धित वस्तुएं भी भरी जाती हैं -जैसे हम विशिष्ट जड़ी -बूटियाँ जो हमारे काली अनुष्ठान के समय अभिमंत्रित होती हैं इनमे यन्त्र के साथ रखते हैं ,हवन भष्म इसमें रखते हैं आदि |यह यन्त्र यदि पूर्ण अभिमंत्रित है तो बेहद शक्तिशाली हो जाता है |इसका परीक्षण उच्च स्तर का साधक कर सकता है अथवा जिन्हें भूत -प्रेत जैसी कोई समस्या हो उसके हाथ में रखते ही इसका प्रभाव मालूम होने लगता है | 
    यन्त्र /कवच धारण से लाभ
    ———————————.
    १. महाकाली की कृपा से व्यक्ति की सार्वभौम उन्नति होती है |स्थायी सम्पत्ति में विशेष वृद्धि होती है और स्थावर सम्पत्ति विषयक मामलों में विशेष सफलता मिलती है |.
    २. शत्रु पराजित होते है ,शत्रु की बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है ,उसका स्वयं विनाश होने लगता है |
    ३. ,मुकदमो में विजय मिलती है ,वाद विवाद में सफलता मिलती है |सर्वत्र विजय का मार्ग प्रशस्त होता है |
    ४. कर्मचारी वर्ग की अनुकूलता प्राप्त होती है ,व्यक्तित्व का प्रभाव बढ़ता है |सम्मान प्राप्त होता है ,| आभामंडल की नकारात्मकता समाप्त होती हैं |शरीर का तेज बढ़ता है |
    ५. मानसिक चिंता ,विचलन ,डिप्रेसन से बचाव होता है और राहत मिलती है |,पूर्णिमा -अमावस्या के मानसिक विचलन में कमी आती है |
    ६.किसी अभिचार /तंत्र क्रिया द्वारा अथवा किसी आत्मा आदि द्वारा शरीर को कष्ट मिलने से बचाव होता है |
    ७. पारिवारिक सुख ,दाम्पत्य सुख बढ़ जाता है |पौरुष अथवा काम क्षमता में वृद्धि होती है ,दाम्पत्य जीवन की संतुष्टि बढ़ जाती है |
    ८. नौकरी ,व्यवसाय ,कार्य में स्थायित्व प्राप्त होता है | व्यक्ति के आभामंडल में परिवर्तन होने से लोग आकर्षित होते है ,प्रभावशालिता बढ़ जाती है |
    ९.,वायव्य बाधाओं से सुरक्षा होती है ,पहले से कोई प्रभाव हो तो क्रमशः धीरे धीरे समाप्त हो जाती है |,
    १०. तांत्रिक क्रियाओं के प्रभाव समाप्त हो जाते है ,भविष्य की किसी संभावित क्रिया से सुरक्षा मिलती है |किये -कराये -टोने -टोटके की शक्ति क्रमशः क्षीण होते हुए समाप्त होती है |
    ११. ,परीक्षा ,प्रतियोगिता आदि में सफलता बढ़ जाती है |हीन भावना में कमी आती है ,खुद पर विश्वास बढ़ता है |एकाग्रता बढती है तथा उत्साह ,ऊर्जा में वृद्धि होती है |
    १२. भूत-प्रेत-वायव्य बाधा की शक्ति क्षीण होती है ,क्योकि इसमें से निकलने वाली सकारात्मक तरंगे उनके नकारात्मक ऊर्जा का ह्रास करते हैं और उन्हें कष्ट होता है |,
    १३. उग्र देवी होने से नकारात्मक शक्तियां इनसे दूर भागती हैं और धारक के पास आने से कतराती हैं |किसी वायव्य बाधा का प्रभाव शरीर पर कम हो जाता है |
    १४. मांगलिक ,पारिवारिक कार्यों में आ रही रुकावट दूर होती है |ग्रह बाधाओं का प्रभाव कम होता है |शनि -राहू -केतु के दुष्प्रभाव की शक्ति क्षीण होती है |
    १५. नपुंसकता ,स्त्रियोचित समस्या ,काम उत्साह में कमी ,कार्यक्षमता में कमी दूर होती है |यदि बंधन आदि के कारण संतानहीनता है तो बंधन समाप्त होता है |
    १६. शरीर में सकारात्मक ऊर्जा प्रवाह बढने से आत्मबल और कार्यशीलता में वृद्धि होती है |कोशिका क्षय की दर कम होती है |
    १७. आलस्य ,प्रमाद का ह्रास होता है |व्यक्ति की सोच में परिवतन आता है ,उत्साह में वृद्धि होती है |नया जोश उत्पन्न होता है |
    १८. किसी भी व्यक्ति के सामने जाने पर सामने वाला प्रभावित हो बात मानता है और उसका विरोध क्षीण होता है |,पारिवारिक कलह ,विवाद कम हो जाता है तथा लोगों पर आकर्षक शक्तियुक्त प्रभाव पड़ता है |
    १९. घर -परिवार में स्थित नकारात्मक ऊर्जा की शक्ति क्षीण होती है जिससे उसका प्रभाव कम होने लगता है |पारिवारिक सौमनस्य में वृद्धि होती है |
    २०. जाँघों -कमर के दर्द ,नसों अथवा हड्डियों की समस्या ,लकवा अथवा किसी अंग की कम क्रियाशीलता में सुधार होता है |मोटापे की समस्या ,प्रमाद -आलस्य -उत्साह में कमी -साहस की कमी में राहत मिलती है |
    २१. स्थान दोष ,मकान दोष ,पित्र दोष ,वास्तु दोष का प्रभाव व्यक्ति पर से कम हो जाता है क्योकि अतिरिक्त ऊर्जा का संचार होने लगता है उसमे |
    यह समस्त प्रभाव यन्त्र धारण से भी प्राप्त होते है और साधना से भी |,यन्त्र में उसे बनाने वाले साधक का मानसिक बल ,उसकी शक्ति से अवतरित और प्रतिष्ठित भगवती की पारलौकिक शक्ति होती है जो वह सम्पूर्ण प्रभाव प्रदान करती है जो साधना में प्राप्त होती है |,अतः आज के समय में काली की साधना अथवा यन्त्र धारण बेहद उपयोगी है किन्तु धारणीय यन्त्र का यदि उपयुक्त लाभ प्राप्त करना हो तो ,कम से कम २१ हजार मूल मन्त्रों से अभिमन्त्रण और उपयुक्त मुहूर्त में विधिवत तांत्रिक विधि से प्राण प्रतिष्ठा होना आवश्यक है, अन्यथा मात्र रेखाएं खींचने से कुछ नहीं होने वाला ,जबतक की उन रेखाओं में भगवती को प्रतिष्ठित न किया जाए और उपयुक्त शक्ति न प्रदान की जाए |२१ हजार मन्त्रों से अभिमन्त्रण में खर्च अधिक आता है अतः सामर्थ्य अनुसार 1100 अथवा 11000 मन्त्रों से अभिमंत्रित भी इन्हें कराया जा सकता है ,बस ऊर्जा कुछ कम हो जायेगी इन ताबीज /कवच की |……………………………………………………..हर-हर महादेव

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  • कठिन से कठिन कामनाएं पूर्ण करती है दिव्य डिब्बी /गुटिका

    असंभव को सम्भव बनाती है चमत्कारी दिव्य गुटिका
    /डिब्बी 
    =================================
              
    आज के समय में शेयर ,लाटरी ,कमोडिटी ,सट्टा ,कमीशन के कार्य आकस्मिक आय के स्रोत के रूप में विकसित हो चुके हैं |लोग इनके द्वारा आकस्मिक और अधिक आय प्राप्त कर धन प्राप्ति की कामना से इनमे इन्वेस्ट करते रहते हैं अथवा इनका उपयोग करते हैं |किन्तु
    केवल कुछ प्रतिशत ही इसमें सफल हो पाते हैं अन्य के लिए यह स्वप्न
    देखते हुए मृग मरीचिका साबित होता है |कुछ तो इनमे अपनी जमा पूँजी तक गँवा बैठते हैं और कंगाल हो जाते हैं अथवा कर्ज में डूब जाते हैं |कुछ लोग रियल एस्टेट आदि विजनेस
    में इन्वेस्ट करके भी फंस जाते हैं |अधिकतर
    ऐसे लोगों को लगता है की उन्हें आकस्मिक आय होगी ,ज्योतिषी भी उन्हें
    बताता है की उन्हें आकस्मिक आय के योग हैं किन्तु
    फिर भी वह सफल नहीं होते हैं अथवा जितना मिलना चाहिए नहीं मिल पाता है |इसका कारण होता है भाग्य के बाधा कारक कारण ,भाग्य को रोकने वाली विभन्न प्रकार की शक्तियाँ जिनका ग्रहों
    से कोई सम्बन्ध नहीं होता किन्तु वह ग्रह प्रभाव को रोकते और प्रभावित करते हैं |दूसरा कारण होता है की इन कार्यों में लगे लोगों द्वारा समय पर सही निर्णय
    ले पाना ,अथवा उनके व्यक्तित्व की कमियां जिससे वह लोगों को प्रभावित नहीं कर पाते या समय पर उचित ,उपयुक्त कार्य ,निर्णय
    नहीं कर पाते और लाभ नहीं उठा पाते |इनमे भी कुछ हद तक नकारात्मक उर्जाओं का प्रभाव
    होता है |
            
    सामान्यरूप से हर किसी की चाह होती है की लोग उनकी और आकर्षित हों ,देखकर खींचे चले आयें ,जो मिले प्रभावित हो ,जहाँ जाए किसी काम से वहां सफलता मिले ,कहीं किसी समस्यापरेशानी का सामना करना पड़े |हर इंसान के अन्दर यह कामना होती है की उसका व्यक्तित्व ऐसा आकर्षक हो की लोग चुम्बक की तरह खिचे चले आये ,उसका व्यतित्व सम्मोहक हो |हर व्यक्ति पर उसका प्रभाव पड़े ,कार्यव्यवसाय के क्षेत्र के लोग अनुकूल हों ,सफलता मिले ,उन्नति हो |आकस्मिक आय के स्रोत मिलें जिससे अतिरिक्त आय हो और उनका जीवन स्तर उठ सके |यह असंभव नहीं है |यह संभव है तंत्र के माध्यम से |इस हेतु थोड़े से नियम और सावधानी के साथ यदि हमारे द्वारा निर्मित दिव्य गुटिका /डिब्बी का प्रयोग किया जाए |यह गुटिका तंत्र की उन दिव्य चमत्कारी वस्तुओं से परिपूर्ण हैं जो किसी के भी जीवन में चमत्कार कर सकती है |इसकी क्षमता की कोई सीमा नहीं है |इससे वह सबकुछ पाया जा सकता है जो एक सामान्य व्यक्ति की इच्छा होती है ,यद्यपि इसके अनेक अलौकिक प्रयोग भी है ,जो असंभव कार्य भी कर सकते हैं पर उसके लिए इसपर विशिष्ट क्रियाएं करनी होती हैं |कोई क्रिया  भी की जाए और सामान्य पूजा के साथ पवित्रता रखी जाए तो उपरोक्त लाभ मिलते ही हैं |तंत्र जिन वस्तुओं ,पदार्थों को इन सभी कार्यों में उपयोगी
    मानता है उन्हें हमने उनके निश्चित मुहूर्त ,समय ,दिन के अनुसार निष्कासित ,प्राण प्रतिष्ठित ,अभिमंत्रित किया है जिससे तंत्र द्वारा
    बताये गए लाभ प्राप्त किये जा सकें |यह हमारे वर्षों के तंत्र शोध पर आधारित
    है जिसके बहुत ही अच्छे परिणाम मिले हैं |
            
    इस चमत्कारिक दिव्य गुटिका
    के मुख्य अवयव हत्थाजोड़ी और सियार्सिंगी होते है ,जिनके साथ श्वेतार्क ,नागदौन ,महायेगेश्वरी ,एरंड ,अमरबेल ,अपराजिता ,हरसिंगार ,रुद्राक्ष ,गुडमार
    ,दक्षिणावर्ती शंख ,पीली कौड़ी ,गोमती चक्र ,स्फटिक ,आदि विभिन्न २३ अन्य अद्भुत ,विशिष्ट और चमत्कारिक वनस्पतियाँ और वस्तुएं होती हैं ,जो विभिन्न धनात्मक और सकारात्मक शक्तियों जैसे –चामुंडा ,काली ,शिव ,दुर्गा ,गणेश ,लक्ष्मी ,शनि ,वृहस्पति ,विष्णु आदि का प्रतिनिधित्व करते हैं और मिलकर ऐसा अद्भुत
    प्रभाव उत्पन्न करते हैं की यह चमत्कारिक प्रभाव युक्त हो जाती है |यह सभी वस्तुएं विशिष्ट उच्च स्तर के साधक द्वारा विशिष्ट मुहूर्त में प्राणप्रतिष्ठित और अभिमंत्रित होती हैं ,जबकि उपयोग किये गए सामान भी विशिष्ट मुहूर्त में ही विशिष्ट तांत्रिक पद्धति से निष्कासित और प्राप्त किये हुए होते हैं |उपरोक्त वस्तुओं की उपयुक्त और विशिष्ट मुहूर्त में विशिष्ट तांत्रिक साधक द्वारा की गयी तांत्रिक क्रिया के बल पर यह गुटिका अति शक्तिशाली वशिकारकआकर्षक –सुरक्षाप्रदायक ,धनसंमृद्धि प्रदायक हो जाती है |इससे निकलने वाली तरंगे साथ रखने वाले धारक के साथ साथ ही आसपास के लोगों को भी प्रभावित करती हैजिससे धारक को उपरोक्त लाभ मिलने लगते हैं |
            
    इस डिब्बी
    के उद्देश्य विशेष के साथ ,प्रयोग भी विशिष्ट हो जाते हैं |लक्ष्मी प्राप्ति हेतु इस पर लक्ष्मी या कमला के मंत्र जप किये जा सकते है |यह शेयर ,सट्टा ,लाटरी ,कमोडिटी ,मार्केटिंग ,सेल्स से जुड़े लोगों को स्वाभाविक लाभ देती है क्योकि इसमें आकस्मिक आय प्रदान
    करने में सहयोगी tantra वस्तुएं है जो आकर्षण शक्ति बढ़ाने के साथ आय बढाती हैं |नकारात्मक ऊर्जा हटाने के लिए इसपर काली ,चामुंडा ,दुर्गा के मंत्र विशिष्ट प्रभाव उत्पन्न करते हैं |यह अभिचार हटाने और उसका प्रभाव कम करने का काम करती है |भूतप्रेत ,वायव्य
    बाधाओं को इससे कष्ट होता है और काली ,दुर्गा
    के मंत्र से उनकी शक्ति कम होती है |गणपति मंत्र करने से सुख समृद्धि प्राप्त होती है |आकर्षण ,वशीकरण मंत्र का जप करने से आकर्षण प्रभाव उत्पन्न होता है |ग्रहण में मंत्र इस पर जपने से इसका प्रभाव और मंत्र का प्रभाव
    दोनों बढ़ते हैं |किसी भी मंत्र की सिद्धि इसके माध्यम से आसान हो जाती है |इस डिब्बी पर किये जा सकने वाले लगभग २५ तरह के विशिष्ट प्रयोग
    हमने अपने blog पर प्रकाशित किये हैं ताकि डिब्बी धारक को कहीं से प्रयोग खोजना पड़े और जब वह चाहें अपने अलग अलग उद्देश्य के अनुसार
    अलग अलग प्रयोग कर सकें |इन प्रयोगों में पत्नी अथवा पति वशीकरण
    प्रयोग ,आकर्षण प्रयोग
    ,होली और दीपावली पर किये जाने वाले महालक्ष्मी प्रयोग ,भूत प्रेत अभिचार नकारात्मक ऊर्जा हटाने के प्रयोग
    ,चामुंडा प्रयोग ,सर्वजन वशीकरण
    प्रयोग आदि मुख्य हैं |
            
    विशेष प्रयोग
    भी हों मात्र सामान्य पूजन होता रहे और नमश्चडिकाये नमः का भी जप थोडा सा होता रहे तो सभी क्षेत्रों में लाभ प्रदान करती है |यदि कुलदेवता /देवी रुष्ट हैं अथवा उन्हें
    पूजा नहीं मिल रही या वह भूल गए हैं तो नवरात्र में इस गुटिका में एक सिक्के को कुलदेवता मानकर और एक सामान्य सुपारी
    अथवा चाँदी की सुपारी पर मौली लपेटकर कुलदेवी मानकर इसमें स्थापित करके रोज सामान्य पूजा होने लगे तो कुलदेवी /देवता की समस्या
    समाप्त हो जाती है |जिन परिवारों में अथवा घरों में किसी भी कारण वश किसी बाहरी शक्ति का प्रवेश हो गया हो और वह कुलदेवता /देवी की अथवा घर की पूजा ले रहा हो जिससे ईष्ट तक पूजाएँ पहुँच रही हों अथवा सभी प्रकार
    के पूजा पाठ व्यर्थ जा रहे हों तो इस डिब्बी /गुटिका पर दुर्गा अथवा काली के मन्त्रों का जप क्रमशः उस बाहरी नकारात्मक शक्ति के प्रभाव को क्षीण करता है और कुछ समय बाद कुलदेवता /देवी को पूजा मिलने लगती है |सभी पूजा पाठ ,उपाय काम करने लगते हैं |किसी ने कहीं से कोई अभिचार किया हो अथवा किसी शक्ति को किसी पर भेजा हो तब इस डिब्बी
    पर दुर्गा
    अथवा काली का नियमित जप करते हुए इसमें चढ़ाए जाने वाले सिन्दूर का तिलक करने से अभिचार
    समाप्त होता है और भेजी गयी शक्ति की ऊर्जा क्षीण होती है |समय क्रम में डिब्बी की शक्ति बढने और परिवार
    से ऊर्जा अधिक जुड़ने पर बाहरी शक्ति का प्रभाव ख़त्म होने लगता है |इसमें चढ़ाये जाने वाले सिन्दूर का तिलक वशीकरण का कार्य करता है और लोग आकर्षित होते हैं |लोगों पर वाशिकारक प्रभाव पड़ता है जिससे वहां भी काम बनते हैं जहाँ उम्मीद
    हो |
            
    इस प्रकार
    यह गुटिका
    /डिब्बी अनेक लाभ देने के साथ घर और व्यक्ति पर से नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती है जिससे उसके भाग्य का निर्धारित लाभ मिलता है |विभिन्न नकारात्मक उर्जायं और शक्तियाँ व्यक्ति को समयानुसार उपयुक्त और उचित कार्य करने में बाधा डालती हैं ,परिवार में बीमारी
    ,असंतोष ,लड़ाई झगडे उत्पन्न कर व्यक्ति की उन्नति
    रोकती हैं ,अनावश्यक रोग बीमारी
    आलस्य उत्पन्न कर व्यक्ति को आगे बढने नहीं देती ,व्यक्ति में व्यसन ,दोष आदि उत्पन्न कर उसको  भ्रष्ट कर लक्ष्य से भटका देती हैं |कभी कभी कुछ विरोधी भी नकारात्मक शक्तियों ,उर्जाओं का प्रयोग कर समस्या
    उत्पन्न कर देते हैं |इन सबसे व्यक्ति अपने ही भाग्य का फल नहीं प्राप्त कर पाता है |यह गुटिका
    /डिब्बी इन सभी समस्याओं का समाधान
    करती है और नकारात्मक प्रभावों को हटाती ,है |व्यक्ति की औरा ,प्रभाव
    में परिवर्तन ला उसका व्यक्तित्व आकर्षक बनाती है जिससे उसके लाभ बढ़ जाते हैं |आकस्मिक आय के स्रोत जो मिलने होते हैं वह मिलते हैं ,कोई बाधा उसके भाग्य प्राप्ति में रुकावट नहीं बन पाती |इस प्रकार यह शेयर ,सट्टा ,लाटरी ,कमोडिटी ,दलाली ,रियल एस्टेट ,सेल्स ,मार्केटिंग वालों के लिए बेहद उपयोगी बनती है |यह उनके लिए भी बहुत उपयोगी है जिन्हें लगता है की उनके दूकान ,व्यवसाय को बाँध दिया गया है अथवा किसी तंत्र का प्रयोग किया गया है अथवा कुदृष्टि है |जो लोग नकारात्मक शक्तियों के प्रभाव से उन्नति
    नहीं कर पा रहे ,घर परिवार में किसी बाधा का प्रकोप है जिससे उनकी उन्नति रुक गयी है उनके लिए यह बहुत अच्छा कार्य करती है |,…………………………………………………….हरहर महादेव

    READ MORE: कठिन से कठिन कामनाएं पूर्ण करती है दिव्य डिब्बी /गुटिका
  • मोहिनी वटी से मोहन तंत्र क्रिया

    मोहिनी वटी से मोहन क्रिया 
    ================
    तांत्रिक षट्कर्म में एक कर्म मोहन भी है जिसका अर्थ होता है किसी को मोहित कर लेना |यह आकर्षण और वशीकरण से थोडा भिन्न होता है |आकर्षण में व्यक्ति आकर्षित होता है और वशीकरण में सबकुछ जानते -समझते हुए भी व्यक्ति के प्रभाव में आया हुआ होता है |मोहन में व्यक्ति किसी पर केवल आकर्षित या वशीकृत ही नहीं होता वह उस पर मुग्ध अर्थात मोहित हो जाता है जिससे मोहित करने वाले के हर कार्य में उसे विशेषता नजर आती है ,उसका रूप ,गंध ,स्पर्श ,चिंतन सबकुछ उसे मुग्ध किये रहता है |वह उससे दूर नहीं होना चाहता फलतः उसके द्वारा आदेशित न होने पर भी वह मोहन करने वाले के अनुकूल ही सारे कार्य करता है |उसके सुख -दुःख और भावनाओं तक के प्रति वह संवेदनशील होता है |अधिकतर इस विद्या का प्रयोग महिलायें ही पुरुषों पर करती हैं किन्तु कुछ पुरुष भी महिलाओं पर ऐसे प्रयोग करते या करवाते हैं |
    इस पद्धति या तांत्रिक षट्कर्म में विभिन्न प्रकार के प्रयोग किये जाते हैं |इनमे मन्त्रों की भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है |इन मन्त्रों में शाबर मंत्र भी हो सकते हैं और तंत्रोक्त मंत्र भी प्रयोग किये जा सकते हैं |मंत्र के अनुसार ही पद्धति प्रयोग की जाती है |प्रयोगानुसार भिन्न भिन्न वस्तुएं अभिमंत्रित की और खिलाई पिलाई जा सकती है |इन्ही वस्तुओं में से एक मोहिनी वटी भी होती है |मोहिनी वटी का निर्माण विभिन्न वस्तुओं को मिश्रित कर किया जाता है जिनमे आकर्षण -वशीकरण और मोहन के मिश्रित प्रभाव होते हैं |इस वटी का प्रभाव व्यक्ति के शरीर की रासायनिक क्रिया पर होता है जिससे उसकी रूचि ,हारमोन -फेरोमोंन के प्रति सम्वेदनशीलता  बदल जाती है |उसे प्रयोगकर्ता की गंध ,हारमोन -फेरोमोन के गंध इतने प्रिय लगने लगते हैं की वह उसके सानिध्य में अपनी सुध बुध खोने लगता है |इसका प्रभाव यह होता है की उसकी चेतना के साथ ही अवचेतन भी प्रभावित होने लगता है फलतः वह मोहनकर्ता से दूर नहीं रहना चाहता |
    मंत्र और प्रकृति के अनुसार ही पद्धति का चयन किया जाता है मोहिनी वटी को अभिमंत्रित करने में |यद्यपि यह स्वयम भी प्रभावित करने वाला होता है किन्तु इसे उपयुक्त मंत्र और पद्धति से निश्चित संख्या और अवधि तक अभिमंत्रित कर देने पर यह तीव्र प्रभाव देने वाला और अधिक दिनों तक प्रभाव रखने वाला हो जाता है |अभिमन्त्रण के बाद इसके खिलाये -पिलाए जाने पर इसका प्रभाव लगभग स्थायी हो जाता है |प्रभाव तभी समाप्त होता है जब प्रभावित व्यक्ति किसी उच्च शक्ति के सम्पर्क में आये या उस पर इससे अधिक प्रभाव की शक्ति का प्रयोग किया जाए या किसी तांत्रिक द्वारा इसका प्रभाव समाप्त किया जाए अथवा खिलाया पिलाया निकाला जाए |यही सूत्र सभी खिलाये -पिलाए अभिमंत्रित वस्तुओं का होता है |इसका प्रभाव तब अधिक होता है जब खिलाने वाला खुद इसे अभिमंत्रित करे ||खिलाने -पिलाने के कुछ निश्चित नियम और तरीके होते हैं जिसके अंतर्गत की यह खिलाया -पिलाया जाता है ,सीधे इसे नहीं खिलाया -पिलाया जा सकता |  |………………………………………………………..हर हर महादेव 

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  • सर्वसुखदायक ,सर्वकष्ट निवारक डिब्बी

    सर्वसौख्य
    प्रदायक ,सर्वदुष्प्रभाव नाशक डिब्बी

    ====================
    महामंगलकारी
    ,सर्वकष्ट निवारक डिब्बी
    ===================
    ज्योतिष में
    ,वैदिक पूजन में ,कर्मकांड में और विशेषकर तंत्र में वनस्पतियों और उनकी जड़ों का
    प्रयोग वैदिक काल से होता रहा है ,क्योंकि भिन्न वनस्पति भिन्न ग्रहों की रश्मियों
    /उर्जाओं ,भिन्न अलौकिक शक्तियों ,भिन्न पारलौकिक उर्जाओं को अवशोषित करती है
    ,उनके गुण रखती है ,उन्हें संगृहीत रखती हैं ,उनसे संतृप्त होती है |इसलिए इनका
    प्रयोग ग्रह शान्ति ,देवता प्रसन्नता ,दैवीय शक्ति /ऊर्जा प्राप्त करने ,नकारात्मक
    शक्तियों को हटाने ,अलग अलग शक्तियों को जोड़ने -प्राप्त करने ,शारीरिक ऊर्जा
    -आभामंडल को सुधारने और विकसित करने ,शारीरिक क्षमता प्राप्त करने में हमेशा से
    होता रहा है |इनके महत्त्व ,इनके विशेषताओं के कारण ही यह हमारे रूचि का केंद्र
    रहे हैं |तंत्र और ज्योतिष के वर्षों के शोध और अनुभव के बाद हमने कुछ विशेष जड़ी
    -बूटियों और वनस्पतियों को एकसाथ जोडकर अर्थात इकठ्ठा रखकर ,उनका पूजन -प्राण
    प्रतिष्ठा -अभिमन्त्रण कर प्रभाव का आकलन किया और पाया की यह वनस्पतियाँ और जड़ें
    अद्भुत चमत्कारी सिद्ध हुईं |इन्हें इनके लिए शास्त्रों में निर्दिष्ट मुहूर्त
    -नक्षत्र में आमंत्रित ,निष्काषित ,प्राण प्रतिष्ठित और अभिमंत्रित किया गया जिससे
    इनके मौलिक गुण और ग्रह अथवा शक्ति विशेष के लिए सक्रियता बनी रहे और प्रभावी रहें
    |इनको क्रमशः इनके लिए निर्दिष्ट नियमों के अंतर्गत एकत्र करते हुए पूरे वर्ष भर
    में इकठ्ठा कर ,साथ में रख पुनः महाविद्या के मन्त्रों से अभिमंत्रित किया गया
    |इसके बाद इनके प्रभाव का कलां करने पर पाया गया की यह सभी कष्टों ,बाधाओं
    ,नकारात्मक शक्तियों को हटाने में ,सभी ग्रहों को शांत करने में ,सब प्रकार से
    मंगल करने में ,सर्वसौख्य प्रदान करने में सक्षम है |
    इस डिब्बी के
    निर्माण की प्रक्रिया में रविवार को आकडे की लकड़ी और जड़ ,बेलपत्र का निचला मोटा
    भाग [पत्र मूल ],,,सोमवार को पलाश के फूल ,खिरनी की जड़ ,पलाश की लकड़ी ,,,मंगलवार
    को अनंत मूल की जड़ ,लाल चन्दन का टुकड़ा ,खैर की जड़ ,खैर की लकड़ी ,,,बुधवार को
    अपामार्ग का पत्ता ,जड़ और लकड़ी ,विधारा की जड़ ,सफ़ेद चन्दन की जड़ या लकड़ी ,दूब
    ,,,गुरूवार को पीपल की लकड़ी ,पिला चन्दन की जड़ या लकड़ी ,केले की जड़ ,असगंध की जड़
    ,कुश की लकड़ी ,,,शुक्रवार को -गूलर की जड़ गूलर की लकड़ी ,सरपंखा की जड़ ,सफ़ेद पलाश
    के फूल ,,,शनिवार को शमी की जड़ ,शमी की लकड़ी ,बिछुआ पौधे की जड़ ,को लाकर उसी दिन
    में विधिवत प्राण प्रतिष्ठित किया जाता है और उस ग्रह के मन्त्रों से प्रतिदिन
    अभिमंत्रित करके इकठ्ठा करते हुए एक डिब्बी में रखते जाया जाता है ,इसके बाद इनमे
    मृगशिरा नक्षत्र में निष्कासित महुआ की जड़ ,पुष्य नक्षत्र में निष्कासित नागरबेल
    की जड़ ,अनुराधा नक्षत्र में निष्कासित चमेली की जड़ ,भरणी नक्षत्र में निष्कासित
    शंखाहुली की जड़ ,हस्त नक्षत्र में निष्कासित चम्पा की जड़ ,मूल नक्षत्र में पुनः
    निष्कासित गूलर की जड़ ,माघ नक्षत्र में पुनः निष्कासित पीपल की जड़ ,चित्रा नक्षत्र
    में निष्कासित गुलाब की जड़ और आर्द्रा नक्षत्र में पुनः निष्कासित अर्क की जड़ को
    इकठ्ठा रखा दिया जाता है |
    उपरोक्त
    वनस्पति योग में रवि पुष्य योग में निष्काषित -प्राण प्रतिष्ठित महायोगेश्वरी की
    जड़ ,सफ़ेद आक की जड़ ,धतूरा की जड़ ,दूब की जड़ ,पीपल की जड़ ,आम की जड़ ,बरगद की जड़
    ,निर्गुन्डी की जड़ ,सहदेई की जड़ ,बेल का जड़ ,गूलर के पत्ते और जड़ ,नागदौन की जड़
    ,हरसिंगार की जड़ ,अपराजिता की जड़ ,हत्था जोड़ी [एक जड़ ],लघु नारियल को भी प्राण
    प्रतिष्ठित कर रखा जाता है ,फिर गुरु पुष्य योग आने पर इसमें उस दिन निष्कासित तथा
    प्राण -प्रतिष्ठित -अभिमंत्रित  कुष की जड़
    ,केले की जड़ ,पीला चन्दन का जड़ या लकड़ी को भी प्राण प्रतिष्ठित -अभिमंत्रित कर
    इनके साथ मिला दिया जाता है |इस प्रकार इस योग की निर्माण प्रक्रिया पूर्ण होती है
    |फिर सभी वनस्पतियों और जड़ों से युक्त इस डिब्बी पर बगला ,काली या श्री विद्या के
    मन्त्रों से २१ दिन अभिमन्त्रण कर हवन करके इसे उसमे ढूपित किया जाता है |इस
    प्रकार सभी वानस्पतिक जड़ और पत्रादि युक्त यह योग अद्भुत ,चमत्कारी प्रभाव देने
    वाला हो जाता है |इन्हें एकसाथ संयुक्त इकठ्ठा करके इसमें पीला पारायुक्त सिन्दूर
    डाल दिया जाता है और ऐसी व्यवस्था रखनी होती है की इसमें जल न जाए ताकि यह वनस्पतियाँ
    और जड़ें खराब न हों |
    उपरोक्त
    वनस्पतियों का योग सभी ग्रहों का वैदिक रूप से भी और तंत्रोक्त रूप से भी
    प्रतिनिधित्व करता है |देवताओं -देवियों में गणपति ,विष्णु ,शिव ,हनुमान
    ,दत्तात्रेय ,काली ,चामुंडा ,लक्ष्मी ,दुर्गा ,सरस्वती का भी प्रतिनिधित्व करता है
    |इनके अतिरिक्त अनेक स्थानीय शक्तियों ,यक्षिणीयों का भी प्रतिनिधित्व करता है |इस
    पर सभी प्रकार के पूजा और मंत्र जप किये जा सकते हैं |इसकी सामान्य पूजा भी किसी
    भी अन्य पूजा से अधिक लाभप्रद होती है |यह व्यक्ति के साथ ही सम्पूर्ण परिवार को
    सुखी रखता है |सबके ग्रह पीड़ा ,ग्रह दोष शांत होते हैं |घर की नकारात्मक ऊर्जा का
    क्षय होता है ,नकारात्मक शक्तियां ,भूत -प्रेत घर से पलायन कर जाते हैं |आर्थिक
    समृद्धि के मार्ग प्रशस्त होते हैं और आय के नए स्रोत उत्पन्न होते हैं |देवताओं
    की कृपा प्राप्त होती है |प्रतिदिन पूजन में सभी सामग्रियां बाहर ही अर्पित होती
    हैं मात्र पीला पारायुक्त सिन्दूर ही अन्दर डिब्बी में डाला जाता है |यह सिन्दूर
    चमत्कारी हो जाता है और इसका तिलक विजयदायी और सम्मोहक होता है |इस डिब्बी पर
    चामुंडा ,दुर्गा ,काली ,विष्णु ,हनुमान आदि के मंत्र तीव्र प्रभाव दिखाते हैं |इस
    डिब्बी के प्रभाव से जीवन के सभी पक्षों में उन्नति होती है |
    यह योग हमारे
    वर्षों के खोज का परिणाम है जिसमे पूरे वर्ष सतत दृष्टि वनस्पतियों की खोज और
    नक्षत्रों क योग पर रखनी होती है ||सम्पूर्ण प्रक्रिया पूर्ण होने पर यह डिब्बी
    इतनी प्रभावकारी हो जाती है की जहाँ भी इसे रखा जाता है वहां से सभी प्रकार की
    नकारात्मक ऊर्जा ,नकारात्मक शक्ति ,भूत -प्रेत ,टोने -टोटके -अभिचार का प्रभाव
    समाप्त होने लगता है |यदि किसी बुरी शक्ति या ऊर्जा को वचन बद्ध या मंत्र बद्ध
    करके भेजा गया तो वह ही मजबूरी में वहां टिक पाती है अन्यथा सभी बुरी शक्तियाँ
    वहां से पलायन कर जाती है |इससे वास्तु दोष का शमन होता है ,ग्रह शांत होते हैं
    ,दैवीय प्रसन्नता होती है ,पित्र दोष का प्रभाव कम होने लगता है ,काल सर्प दोष
    ,मांगलिक दोष जैसे बुरे ग्रह योग का प्रभाव कम होने लगता है |व्यक्ति के आभामंडल
    की नकारात्मकता कम होने लगती है |मांगलिक कार्यों में आ रही बाधाएं समाप्त होती
    हैं |पूजा करने वाले में आकर्षण शक्ति का विकास होता है जबकि पूरे घर -परिवार में
    सभी को अपने आप लाभ होता है तथा घर -परिवार में सुख -शांति -समृद्धि का विकास होने
    लगता है ,सबकी उन्नति होने लगती है |

    हमारे यहं
    निर्मित होने वाली चमत्कारी दिव्य गुटिका से यह डिब्बी इस मामले में अलग है की
    ,इसका मूल प्रभाव शान्ति कारक है और यह सभी ग्रहों ,वातावरणीय ,अभिचारात्मक
    प्रभावों को शांत कर उन्हें दूर करती है, जबकि दिव्य गुटिका तीव्र प्रतिक्रया करती
    है तथा व्यक्ति में परिवर्तन लाती है |दिव्य गुटिका में वानस्पतिक जड़ी बूटियों के
    साथ जंतु उत्पाद भी होते हैं जबकि यह डिब्बी शुद्ध वनस्पतियों और जड़ों पर आधारित
    है |इसमें नवग्रहों की बाधा और बुरे योग ,भाग्य अवरोध ,वास्तु दोष ,पित्र दोष को
    ध्यान में रखते हुए जड़ी -बूटियाँ सम्मिलित की गयी हैं जिससे व्यक्ति के साथ समस्त
    घर और परिवार को समस्या से मुक्ति मिले |चमत्कारी दिव्य गुटिका का निर्माण
    नकारात्मक शक्तियों को हटाने और व्यावसायिक अथवा व्यक्तिगत उन्नति को दृष्टिगत
    रखते हुए किया गया है जबकि इस डिब्बी का निर्माण पारिवारिक समृद्धि /सुख ,ग्रह
    बाधा के साह ही समस्त विघ्नों के नाश को दृष्टिगत रखते हुए किया गया है |इससे सभी
    प्रकार से सुख मिले ,इसलिए ही इसका नाम हमने सर्वसौख्य प्रदायक डिब्बी रखा है |सभी
    प्रकार का मंगल हो इसलिए इसका नाम हमने महामंगल दायक डिब्बी रखा है |सभी प्रकार के
    कष्ट और दुष्प्रभावों का नाश हो इसलिए इसे हम सर्व दुष्प्रभाव नाशक ,सर्व कष्ट
    निवारक डिब्बी से भी संबोधित कर रहे |यह हमारा व्यक्तिगत शोध है ,जिसपर अनेक पोस्ट
    हमारे पेजों ,ब्लागों पर आते रहेंगे |किसी अन्य द्वारा इसे अपने नाम से प्रकाशित
    करना उसके द्वारा पाठकों को धोखा देना होगा
    |

    इस डिब्बी और
    योग के पूजन मात्र से घर में चोरी की सम्भावना कम हो जाती है ,किसी द्वारा पैसे
    हडपे जाने की संभावना कम होती है ,रात्रि में बुरे सपने नहीं आते ,दुष्ट व्यक्ति
    से भय कम हो जाता है और शत्रु भी मित्र बनने लगते हैं ,बुरा व्यक्ति भी प्यार करने
    लगता है ,उच्च लोग वशीभूत होते हैं ,स्त्री -पुरुष वश में होते है ,भूत -प्रेत
    बाधा दूर होती है ,दूसरों द्वारा धन प्राप्ति की संभावना बढती है ,विवाद -मुकदमे
    -परीक्षा -प्रतियोगिता में विजय मिलती है ,व्यक्ति की समय के साथ अतीन्द्रिय शक्ति
    का विकास होने लगता है और अचानक निकली बातें सच होने लगती हैं ,शारीरिक कष्ट में
    कमी आती है |सूर्य की अशुभता शांत होती है और पित्र शांत होते हैं ,व्यक्ति का तेज
    बढने लगता है ,बल -पौरुष की वृद्धि होती है |चन्द्रमा के दुष्प्रभाव शांत होते हैं
    और शरीर की कान्ति बढती है |मंगल के दोष -मांगलिक आदि प्रभाव से हो रही परेशानी कम
    होने लगती है ,मांगलिक कार्यों -विवाह आदि में आ रही अडचनें दूर होती हैं |बुध की
    अशुभता का प्रभाव कम होता है और उससे उत्पन्न समस्याओं का क्षरण होता है |वृहस्पति
    शांत होता है ,पित्र और विष्णु प्रसन्न होते हैं |शुक्र के दुस्प्राभावों में कमी
    आती है और शनि जनित समस्या में कमी आने लगती है |कालसर्प दोष के प्रभाव कम होने
    लगते हैं ,गंभीर और लम्बी बीमारियों से राहत की संभावना बढ़ जाती है |आकस्मिक
    दुर्घटनाओं ,अकाल मृत्यु की संभावना कम हो जाती है और इनसे होने वाली परेशानी में
    कमी आ जाती है |व्यक्ति का व्यक्तित्व आकर्षक होता है ,आस -पास सम्पर्क में आने
    वाले लोग प्रभावित और वशीभूत होते हैं |वाणी की ओज बढ़ जाती है |तुतलाहट ,घबराहट
    ,हीन भावना ,चिंता ,शारीरिक -मानसिक अवरोध में कमी आने लगती है |सुख समृद्धि
    क्रमशः बढती जाती है |आय के नए स्रोत बनते हैं ,सही समय सही निर्णय क्षमता का
    विकास होता है | यह हमारा व्यक्तिगत शोध है जिसे हमने अपने blog -tantricsolution.blogspot.com पर सर्वप्रथम प्रकाशित किया है |………………………………………………………हर हर महादेव 

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  • गोमती चक्र [Gomati Chakra] और लक्ष्मी स्थायित्व

    गोमती चक्र लक्ष्मी प्राप्ति में सहायक है 

    ===========================
    गोमती चक्र से भलीभाँति परिचित हैं। गोमती चक्र समुद्र प्रदत्त चामत्कारिक तंत्रोक्त वस्तु है गोमती चक्र के प्रयोग अन्य तंत्रोक्त साधनाओं एंव प्रयोगों की भाँति कठिन अथवा दुष्कर नहीं हैं।गोमतीचक्र के प्रयोग बड़े ही सरल, किन्तु प्रभावकारी प्रयोग होते है। यह लक्ष्मी जी की प्रिय वस्तुओं में से एक है और इसीलिए लक्ष्मी के आकर्षण और स्थायित्व के लिए प्रयोग किया जाता है। कई लोग इसे दुर्लभ और दुर्लभतम बताते हैं जबकि आज ये देभर में सुलभ है अन्य तंत्रोक्त
    वस्तुओं के समान महंगा होकर ये काफी सस्ता है और बेहद असरदार भी।गोमती चक्र के लक्ष्मी सम्बंधित कुछ प्रयोग निम्न प्रकार हैं –
     आर्थिक बाधा नाश और स्थायी लक्ष्मी हेतु
    गोमती चक्र प्रयोग
    ——————————————————————-
    1. यदि आपको अचानक आर्थिक हानि होती हो, तो किसी भी मास के प्रथम सोमवार को २१ अभिमन्त्रित गोमती चक्रों को पीले अथवा लाल रेशमी वस्त्र में बांधकर धन रखने के स्थान पर रखकर हल्दी से तिलक करें फिर मां लक्ष्मी का स्मरण करते हुए उस पोटली को लेकर सारे घर में घूमते हुए घर के बाहर आकर किसी निकट के मन्दिर में रख दें
    2 . यदि आपके परिवार में खर्च अधिक होता है, भले ही वह किसी महत्त्वपूर्ण कार्य के लिए ही क्यों हो, तो शुक्रवार को २१ अभिमन्त्रित गोमती चक्र लेकर पीले या लाल वस्त्र पर स्थान देकर धूपदीप से पूजा करें अगले दिन उनमें से चार गोमती चक्र उठाकर घर के चारों कोनों में एकएक गाड़ दें ११ चक्रों को लाल वस्त्र में बांधकर धन रखने के स्थान पर रख दें और शेष किसी मन्दिर में अपनी समस्या निवेदन के साथ प्रभु को अर्पित कर दें ।लाभ होगा |
    3. यदि आप कितनी भी मेहनत क्यों करें, परन्तु आर्थिक समृद्धि आपसे दूर रहती हो और आप आर्थिक स्थिति से संतुष्ट होते हों, तो शुक्ल पक्ष के प्रथम गुरुवार को २१ अभिमंत्रित गोमती चक्र लेकर घर के पूजा स्थल में मां लक्ष्मी श्री विष्णु की तस्वीर के समक्ष पीले रेशमी वस्त्र पर स्थान दें फिर रोली से तिलक कर प्रभु से अपने निवास में स्थायी वास करने का निवेदन तथा समृद्धि के लिए प्रार्थना करके हल्दी की माला से
    नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र की तीन माला जप करें इस प्रकार सवा महीने जप करने के बाद अन्तिम दिन किसी वृद्ध तथा वर्ष से कम आयु की एक बच्ची को भोजन करवाकर दक्षिणा देकर विदा करें
    धन प्राप्ति , स्थायित्व एवं समृद्धि हेतु गोमती चक्र प्रयोग
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    1.धन लाभ के लिए 11 गोमती चक्र अपने पूजा स्थान में रखें। उनके सामने श्रीं श्रियै नम: का जप करें। इससे आप जो भी कार्य या व्यवसाय करते हैं उसमें बरकत होगी और आमदनी बढऩे लगेगी।
    2 . आठ गोमतीचक्र, आठ कौड़ी एंव आठ लाल गुंजा साथ लेकर उनका पुजन करें। उन्हें दक्षिणावर्ती शंख में थोड़े से चावल डालकर स्थापित कर दें।रात्रि में ही उन्हें लाल कपडे में बाँधकर धर अथवा व्यवसाय स्थल की तिजौरी में स्थापित कर दें। यह प्रयोग आपकी आय में वृद्धि के लिए है।
    3 . 11 गोमती चक्र, 11 काली हल्दी, एक सुपारी और एक सिक्का पीले वस्त्र में लपेट कर तिजोरी में रखें तो वर्ष भर तिजोरी भरी रहेगी।

    4 . सात गोमती चक्रों को यदि चांदी अथवा किसी अन्य धातु की डिब्बी में सिंदूर तथा चावल डालकर रखें तो ये शीघ्र शुभ फल देते हैं।………………………………………………………हर-हर महादेव 
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